राज और उसकी भाभी के बीच की यह कहानी एक ऐसी ज्वाला है जो धीरे-धीरे भड़कती है और फिर पूरे घर को अपनी चपेट में ले लेती है।
राज 25 साल का युवक था, कद-काठी में मज़बूत, कंधे चौड़े और शरीर पर हल्की मांसलता। उसके चेहरे पर हमेशा एक चंचल मुस्कान रहती थी। उसकी भाभी, अनन्या, २८ साल की थी, गोरी चमड़ी, घने काले बाल और भरपूर स्तन जो कपड़ों में भी आकर्षक लगते थे।
अनन्या की शादी को तीन साल हो चुके थे, लेकिन पति की नपुंसकता की वजह से वह आज तक कुंवारी थी।
घर में अकेलेपन की वजह से राज और अनन्या अक्सर बातें करते। एक शाम अनन्या ने राज से कहा, “भाई, तुम्हारे भाई कभी मुझे छूते भी नहीं। मुझे लगता है मैं कभी मर्द का स्पर्श नहीं जान पाऊंगी।” राज ने उसकी आँखों में देखा और धीरे से उसका हाथ थामा।
“भाभी, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें वो सब सिखा सकता हूँ जो तुम्हें चाहिए।”
अनन्या की साँसें तेज़ हो गईं। उसने राज के सीने पर हाथ रखा और फुसफुसाई, “मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे पहले चूमो।” राज ने अनन्या के होंठों पर अपने होंठ रखे और धीरे-धीरे जीभ से उसके मुँह को खोला। दोनों की जीभें एक-दूसरे से उलझ गईं। राज ने अनन्या की कमर को कसकर पकड़ा और उसे अपनी ओर खींचा।
कुछ देर बाद राज ने अनन्या की टी-शर्ट ऊपर उठाई और उसके स्तनों को ब्रा के ऊपर से सहलाया। अनन्या की निप्पल सख्त हो चुके थे। राज ने ब्रा का हुक खोला और स्तनों को मुक्त कर दिया।
वह झुककर एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा। अनन्या के मुँह से निकला, “आह… राज… और जोर से चूसो।” राज ने दूसरा स्तन भी हाथ में लिया और दोनों निप्पलों को बारी-बारी से चूसा।
अनन्या ने राज की शर्ट के बटन खोले और उसके सीने को चूमने लगी। राज ने अनन्या की पैंट का बटन खोला और उसे नीचे उतारा। अनन्या की जांघों के बीच एक हल्की नमी दिख रही थी।
राज ने उसकी जांघों को अलग किया और उसके पैंटी को एक तरफ खिसकाकर उसकी चूत को उंगलियों से छुआ। अनन्या की चूत गीली हो चुकी थी। राज ने एक उंगली अंदर डाली और धीरे-धीरे घुमाने लगा। अनन्या का शरीर काँपने लगा।
राज ने अनन्या को बिस्तर पर लिटाया और खुद भी उसके ऊपर आ गया। उसने अपनी पैंट उतारी और उसका लंड बाहर निकाला। अनन्या ने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा। वह चौंक गई, लेकिन साथ ही उत्सुक भी। राज ने अनन्या की जांघों को फैलाया और अपने लंड को उसकी चूत के पास ले आया। उसने धीरे से लंड का सिरा चूत के होठों पर रगड़ा। अनन्या ने आँखें बंद कर लीं और कहा, “राज, मुझे अपना बना लो।”
राज ने धीरे-धीरे लंड को चूत में घुसाना शुरू किया। अनन्या की चूत बहुत तंग थी। राज ने थोड़ा जोर लगाया और लंड का आधा हिस्सा अंदर चला गया। अनन्या के मुँह से दर्द भरी चीख निकली, “आह… धीरे…” राज ने रुककर अनन्या के स्तनों को चूसा और फिर धीरे-धीरे लंड को और अंदर धकेला। कुछ देर बाद पूरा लंड चूत में समा गया।
राज ने धीरे-धीरे चुदाई शुरू की। अनन्या का दर्द धीरे-धीरे मज़े में बदल गया। वह राज की पीठ को खरोंचने लगी और चिल्लाने लगी, “और जोर से… और गहराई से…” राज ने रफ्तार बढ़ाई और अनन्या की चूत को जोर-जोर से ठोकने लगा।
अनन्या के स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। राज ने एक हाथ से अनन्या की गर्दन को पकड़ा और दूसरे हाथ से उसके स्तन को दबाया।
कुछ देर बाद राज ने अनन्या को पेट के बल लिटाया और उसके गुदे के पास लंड ले आया। अनन्या ने पूछा, “क्या तुम मेरे गांड में भी डालोगे?” राज ने कहा, “हाँ भाभी, मैं तुम्हें दोनों जगह से चोदूँगा।
उसने थूक से गुदे को गीला किया और लंड को धीरे-धीरे गुदे में घुसाने लगा। अनन्या का शरीर काँप रहा था, लेकिन वह राज को रोक नहीं रही थी।
लंड का सिरा गुदे में घुसा और राज ने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। अनन्या के मुँह से दर्द और मज़े की मिली-जुली आवाज़ निकली। राज ने गुदे की चुदाई शुरू की। अनन्या का शरीर राज के हर धक्के के साथ आगे बढ़ रहा था। राज ने अनन्या की कमर को पकड़कर जोर-जोर से चोदा।
राज ने अनन्या को फिर से पीठ के बल लिटाया और उसकी चूत में लंड डाला। अब वह दोनों छेदों को बारी-बारी से चोद रहा था।
अनन्या का शरीर पसीने से तर हो चुका था। राज ने अनन्या के स्तनों को चूसा और फिर उसके मुँह में लंड डाल दिया। अनन्या ने लंड को चूसा और उसका स्वाद लिया।
राज ने अनन्या को घुटनों के बल बिठाया और उसके मुँह में लंड डाला। अनन्या ने लंड को गले तक लिया और चूसने लगी। राज के मुँह से निकला, “भाभी, तुम बहुत अच्छा चूसती हो।
अनन्या ने लंड को और जोर से चूसा। राज ने अनन्या के बालों को पकड़कर उसके मुँह में लंड को आगे-पीछे करने लगा।
राज ने अनन्या को बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत में लंड डालकर जोर-जोर से चोदने लगा। अनन्या के मुँह से लगातार चीखें निकल रही थीं। राज ने अनन्या की जांघों को कंधों पर रखा और गहराई से चोदने लगा।
अनन्या का शरीर काँपने लगा और उसने चीखते हुए कहा, “राज, मैं झड़ने वाली हूँ।” राज ने रफ्तार और बढ़ाई और अनन्या का शरीर झटके खाने लगा।
अनन्या के शरीर से गर्म पानी की तरह तरल निकला और राज के लंड पर फैल गया। राज ने भी अपनी रफ्तार बढ़ाई और कुछ देर बाद अनन्या की चूत में झड़ गया। गर्म वीर्य अनन्या की चूत में भर गया। राज ने लंड को बाहर निकाला और अनन्या के स्तनों पर वीर्य छोड़ा।
रात के दूसरे पहर में अनन्या फिर से राज के पास आई। वह नंगी थी और राज को जगाने लगी। राज की आँखें खुलीं और उसने अनन्या को देखा। अनन्या ने राज के लंड को हाथ में लिया और सहलाने लगी। लंड फिर से खड़ा हो गया।
अनन्या ने लंड को मुँह में लिया और चूसने लगी। राज ने अनन्या की जांघों को अलग किया और उसकी चूत को चाटने लगा। अनन्या के मुँह से moans निकल रहे थे।
दोनों थककर बिस्तर पर लेट गए। अनन्या ने राज को गले लगाया और कहा, “राज, तुमने मुझे पूरा कर दिया।
अब मैं कभी अकेली महसूस नहीं करूंगी।” राज ने अनन्या के बालों को सहलाया और कहा, “भाभी, यह हमारी शुरुआत है।”