मैं 22 साल का लड़का हूँ और मेरी चचेरी बहन रिया 19 साल की है। वो हमारे घर में रहने आई हुई थी क्योंकि उसकी पढ़ाई के लिए शहर आना जरूरी था। रिया बहुत ही सुंदर थी – गोरी चमड़ी, बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और गोल-गोल नितंब। उसके आने के बाद से ही मेरा मन उसे लेकर अजीब सा हो गया था।
पहले कुछ दिन तो सब नॉर्मल चला। हम दोनों साथ पढ़ते, खाते और बातें करते। लेकिन धीरे-धीरे रिया मेरे साथ ज्यादा खुलने लगी। वो अक्सर मेरे कमरे में आकर बैठती और मेरे साथ मजाक करती। एक दिन जब वो नहाकर आई तो उसने सिर्फ एक पतली सी नाइट ड्रेस पहनी हुई थी। उसके स्तन साफ दिख रहे थे और निप्पल हल्के से उभरे हुए थे।
उस रात मैं सो नहीं पाया। रिया की नंगी तस्वीर मेरे दिमाग में घूम रही थी। अगले दिन जब मम्मी-पापा ऑफिस गए तो घर में सिर्फ हम दोनों थे। रिया किचन में नाश्ता बना रही थी। मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसके कंधे पर हाथ रखा।
“भाई, क्या बात है?” उसने मुड़कर पूछा।
“तुम बहुत सुंदर हो रिया,” मैंने धीरे से कहा।
उसके चेहरे पर हल्की लाली छा गई। मैंने उसके कमर पर हाथ फेरा और उसे अपनी तरफ खींच लिया। हमारे होंठ एक-दूसरे से टकराए और हमने गहरा किस किया। रिया पहले तो हिचकिचाई लेकिन फिर मेरे गले में हाथ डालकर किस करने लगी।
मैंने उसकी नाइट ड्रेस ऊपर उठाई और उसके स्तनों को हाथों में लिया। वो नरम और गर्म थे। मैंने उसके निप्पल को उंगलियों से दबाया और रिया की सांस तेज हो गई।
“भाई… ये गलत है,” उसने फुसफुसाया लेकिन साथ ही मेरे बालों में हाथ फेर रही थी।
“कोई नहीं देख रहा,” मैंने कहा और उसके स्तन को मुंह में लेकर चूसने लगा। रिया की सिसकारियां निकलने लगीं।
मैंने उसे किचन की मेज पर लिटा दिया और उसकी ड्रेस पूरी तरह उतार दी। रिया पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी हुई थी। उसकी कुंवारी चूत छोटी सी थी और उसके ऊपर हल्के बाल थे। मैंने उसके पैर फैलाए और उसकी चूत को चाटने लगा।
रिया का शरीर कांपने लगा। “आह… भाई… क्या कर रहे हो…” उसकी आवाज में दर्द और pleasure दोनों थे। मैंने उसकी चूत के होठों को चूसा और उसकी कसावट को महसूस किया।
फिर मैंने अपना लंड निकाला जो पूरी तरह खड़ा हो चुका था। रिया ने उसे देखा और डर गई। “भाई, ये बहुत बड़ा है… ये कैसे…”
“शांत रहो,” मैंने कहा और उसके चूत के मुंह पर अपना लंड रखा। धीरे-धीरे दबाव डालने लगा। रिया चीखने लगी, “दर्द हो रहा है… भाई रुक जाओ!”
लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। मैंने जोर से धक्का मारा और मेरा लंड उसकी कुंवारी चूत में घुस गया। रिया की चीख निकली और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। उसकी हymen टूट गई थी और खून निकल रहा था।
“आह… भाई… बहुत दर्द…” रिया रो रही थी।
“थोड़ी देर में दर्द कम हो जाएगा,” मैंने कहा और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रिया की चूत बहुत तंग थी। हर धक्के के साथ वो और भी जकड़ रही थी।
धीरे-धीरे रिया का दर्द कम होने लगा और वो भी हिलने लगी। “भाई… और जोर से…” उसने कहा। मैंने रफ्तार बढ़ा दी और जोर-जोर से चोदने लगा। रिया की सिसकारियां अब moans में बदल गई थीं।
“हां… भाई… और गहरा…” वो कह रही थी।
मैंने उसे उल्टा कर दिया और पीछे से चोदने लगा। उसके गोल नितंब मेरे हाथों में थे। मैंने उन्हें थपथपाया और रिया की चूत से चिकनाहट की आवाजें आ रही थीं।
“मैं झड़ने वाली हूँ भाई,” रिया ने कहा।
“मैं भी,” मैंने जवाब दिया और अंतिम जोरदार धक्के मारे। मेरा लंड रिया की चूत में फड़फड़ा रहा था और मैंने अंदर ही झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया।
रिया भी झड़ गई। उसका शरीर कांप रहा था और वो जोर-जोर से सांस ले रही थी।
उस दिन के बाद से हम रोज सेक्स करने लगे। सुबह जब मम्मी-पापा ऑफिस जाते तो हम दोनों नंगे होकर एक-दूसरे के साथ खेलते। रिया अब पूरी तरह से मेरी बन चुकी थी।
एक दिन रिया ने कहा, “भाई, आज मेरी गांड मारो।” मैं हैरान हुआ लेकिन खुश भी।
“तुम तैयार हो?” मैंने पूछा।
“हां,” उसने जवाब दिया और चारों हाथ-पैरों के बल बैठ गई।
मैंने उसकी गांड के छेद पर लुब्रिकेंट लगाया और अपना लंड धीरे से घुसाने लगा। रिया दर्द से चीख रही थी लेकिन साथ ही कह रही थी, “और गहरा…”
मैंने जोर से धक्का मारा और मेरा पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया। रिया का शरीर कांप रहा था। मैंने धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई और उसकी गांड मारने लगा।
“आह… भाई… गांड फट रही है…” रिया चीख रही थी।
“लेकिन अच्छा लग रहा है ना?” मैंने पूछा।
“बहुत अच्छा… और जोर से मारो,” वो कह रही थी।
मैंने रिया की गांड जोर-जोर से मारी और अंत में उसकी गांड में ही झड़ गया।
रोज हम नई-नई पोजीशन आजमाते। कभी किचन में, कभी बाथरूम में, कभी मेरे कमरे में। रिया अब बिल्कुल शर्म नहीं करती थी। वो खुद ही नंगी होकर मेरे पास आती और मेरा लंड मुंह में लेकर चूसती।
“भाई, तुम्हारा लंड बहुत स्वादिष्ट है,” वो कहती और जोर-जोर से चूसती।
मैं भी उसके स्तनों को चूसता, उसकी चूत चाटता और उसे अलग-अलग तरीकों से चोदता।
एक दिन रिया ने कहा, “भाई, आज मुझे बांधकर चोदो।”
मैंने उसके हाथ-पैर बांध दिए और उसे अंधेरे कमरे में लिटा दिया। फिर मैंने उसकी पूरी बॉडी को चूमा, चाटा और अंत में जोर-जोर से चोदा। रिया चीख रही थी और मजे से झड़ रही थी।
हमारा ये रिश्ता महीनों तक चला। रिया की पढ़ाई पूरी होने तक हम रोज सेक्स करते रहे। वो मेरी पूरी तरह से आदी हो गई थी।
“भाई, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती,” रिया अक्सर कहती।
“मैं भी,” मैं जवाब देता और उसे गले लगा लेता।
रिया की कुंवारी चूत अब मेरी बन चुकी थी। मैंने उसे तोड़ा था और अब वो मेरी थी – पूरी तरह से, बिना किसी शर्त के।
हमारे सेक्स सेशन्स और भी तीव्र होते गए। रिया अब मल्टीपल ऑर्गेज्म लेने लगी थी। एक बार तो वो लगातार तीन बार झड़ गई थी।
“भाई… रुक जाओ… मैं और नहीं ले सकती,” वो सिसक रही थी लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था।
“एक बार और,” मैं कहता और उसे फिर से चोदने लगता।
रिया की चूत अब मेरे लंड की आदी हो गई थी। वो खुद ही मेरे पास आती और मेरा लंड अपनी चूत में डाल लेती।
“भाई, चोदो मुझे,” वो फुसफुसाती।
मैं उसे हर जगह चोदता – सोफे पर, फर्श पर, बालकनी पर, यहां तक कि छत पर भी। रिया अब किसी भी जगह सेक्स करने को तैयार रहती।
एक दिन रिया ने पूछा, “भाई, क्या तुम मुझे प्रेग्नेंट करोगे?”
“हां,” मैंने जवाब दिया, “तुम मेरी हो, तुम्हारे बच्चे भी मेरे होंगे।”
रिया मुस्कुराई और बोली, “तो फिर आज से कंडोम मत लगाना।”
उस रात से हम बिना कंडोम सेक्स करने लगे। रिया की चूत में मेरा वीर्य भरता रहता और वो खुशी से झड़ती रहती।
हमारा ये गुप्त रिश्ता अब और भी गहरा हो गया था। रिया मेरी पत्नी की तरह हो गई थी।
“भाई, शादी कर लो मुझसे,” वो एक दिन कहने लगी।
“हां, जरूर,” मैंने वादा किया।
रिया की आंखों में खुशी के आंसू थे।
हमारा प्यार और सेक्स दोनों ही दिन-ब-दिन बढ़ते गए। रिया अब पूरी तरह से मेरी बन चुकी थी – उसका शरीर, उसकी आत्मा, सब कुछ।
“भाई… मैं तुम्हारी हूं… हमेशा के लिए,” वो हर बार सेक्स के बाद कहती।
“और मैं तुम्हारा,” मैं जवाब देता।
रिया की कुंवारी चूत अब मेरी थी – हमेशा के लिए।