चौकीदार के लंड से चुद कर शांति मिली

(Chaukidar Ke Land Se Chud Kar Shanti Mili)

सभी पाठकों को मेरा नमस्कार

मेरा नाम रिया है। उम्र 29 साल। शादी को छह साल हो चुके हैं। मेरी एक छोटी-सी बेटी है, जिसे मैं अभी भी स्तनपान कराती हूँ।

रात को मैं कभी ब्रा नहीं पहनती। बस पतली-सी ब्लाउज और साड़ी में ही सोती हूँ। मेरे काले, बड़े-बड़े निप्पल ब्लाउज के कपड़े से साफ़ दिखते हैं।

कल रात साढ़े नौ बजे मेरे पति ने कहा, “चलो थोड़ी देर घूम आएँ।” बेटी को सुलाकर हम दोनों पार्क की तरफ़ निकल पड़े।

मैंने सिर्फ़ पतली ब्लाउज और साड़ी पहनी थी। मेरे स्तन इतने भरे हुए थे कि ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे निप्पल साफ़ नज़र आ रहे थे।

पार्क लगभग सूना था। दूर से चौकीदार उस्मान के कमरे से हल्की-हल्की आवाज़ें आ रही थीं।

मेरे पति ने मुझे इशारा किया। हम दोनों खिड़की के पास जाकर झाँकने लगे।

कमरे में उस्मान अपनी बीवी नरगिस को ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था। उस्मान काले रंग का, माँसल बदन वाला आदमी था।

उसका मोटा, काला, खतना किया हुआ लंड नरगिस की चूत में घुस-घुसकर बाहर आ रहा था। नरगिस की साँसें तेज़ थीं। चारों बेटे पास ही ज़मीन पर सो रहे थे।

मेरे पति ने मेरे स्तनों को हाथ से दबाना शुरू कर दिया। मैं भी गीली हो चुकी थी। कुछ देर बाद उस्मान झड़ गया और सो गया।

हम दोनों पार्क के एक सुनसान कोने में चले गए। मेरे पति ने अपने कपड़े उतार दिए। फिर मेरी साड़ी और ब्लाउज ज़ोर से खींचकर उतार दिए।

मैंने मना किया, पर उन्होंने सुना नहीं। मैं पूरी तरह नंगी हो गई। घास पर लेटकर उन्होंने मेरे दूध भरे स्तनों को चूसना शुरू कर दिया।

दूध उनकी जीभ पर फैल रहा था। फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

एक घंटे में उन्होंने मुझे चार बार चोदा। हर बार वे मेरे स्तनों से दूध पीते और फिर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाते। आखिर में हम दोनों थककर नंगी हालत में वहीं सो गए।

अचानक मुझे हल्का सा झटका लगा। आँखें खुलीं तो सामने उस्मान खड़ा था। उसने मेरे पति को नींद की दवा पिला दी थी। पति अब नहीं उठेंगे। उस्मान ने मेरे हाथ पकड़कर कहा, “चलो मेरे कमरे में।”

मैं नंगी ही उसके साथ चली गई। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मेरे दोनों स्तनों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा।

मेरा सारा दूध उसने पी लिया। जब दोनों स्तन खाली हो गए, तो उसने घुटनों के बल बैठकर कहा, “रिया, मुझे एक बार चोदने दो।”

मैंने मना किया। पर उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया। मेरे पैर फैलाए और अपना मोटा काला लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

मैं चीखी, “कंडोम लगा लो!” उसने कहा, “मैं गरीब हूँ, बाहर निकाल लूँगा।”

उसने मुझे गोद में उठाकर खड़े-खड़े चोदा। फिर बिस्तर पर लिटाकर पच्चीस मिनट तक लगातार धक्के मारे। उसकी बीवी नरगिस उठकर देखने लगी। फिर मोबाइल निकालकर मेरी नंगी तस्वीरें लेने लगी।

आखिर में उस्मान ने मेरी चूत के अंदर झड़कर अपना सारा माल भर दिया। मैं घबरा गई। “गर्भ ठहर जाएगा!

उसने कहा, “चुप रह, और चोदता हूँ।” दूसरी बार भी उसने मेरी चूत में ही झड़ दिया।

नरगिस हँसकर बोली, “ये तो हमारी नई रंडी बन गई।” उस्मान ने मेरी पैंटी अपने पास रख ली और मुझे बाहर भेज दिया।

मैं लड़खड़ाती हुई अपने पति के पास गई। उन्हें उठाकर घर ले आई। पूरे रास्ते मेरी चूत से उस्मान का गाढ़ा वीर्य टपकता रहा।

घर आकर मैं शीशे के सामने खड़ी हुई। मेरी जांघों पर सूखा वीर्य लगा था। मैंने सोचा—मैंने अपने पति के साथ बेवफाई की, वो भी बिना कंडोम के।

पर साथ ही मेरी चूत फिर से गीली होने लगी।

अगली रात क्या होगा? उस्मान फिर आएगा? वह मेरी चूत को अपना खिलौना बना लेगा? ये सोचकर मेरी साँसें तेज़ हो गईं।