अंकित एक साधारण इलेक्ट्रीशियन था, जो अपने दोस्त अजय के घर पर बिजली की समस्या ठीक करने गया था। अजय उस समय बाहर था, लेकिन उसकी पत्नी सुहाना घर पर मौजूद थी। सुहाना एक डॉक्टर थी, और अंकित ने उसे पहली बार देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं।
सुहाना घर के साधारण कपड़ों में थी, एक ढीली टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए, जो उसके कर्वी बॉडी को और भी आकर्षक बना रहे थे। उसके बाल खुले थे, और चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
अंकित ने तुरंत महसूस किया कि वह कितनी सुंदर और सेक्सी है। उसके बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और गोल कूल्हे अंकित को मदहोश कर रहे थे।
अंकित ने बिजली का फ्यूज चेक किया और जल्दी से ठीक कर दिया। काम करते हुए वह बार-बार सुहाना की ओर देख रहा था। सुहाना ने चाय दी और कहा, ‘भाई साहब, शुक्रिया। अजय तो बाहर है, वरना वह खुद करता।’
अंकित ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘कोई बात नहीं बहन जी। आपका घर तो मेरा भी घर है। वैसे, आप डॉक्टर हैं ना? बहुत अच्छा लगता है।’
सुहाना हंस पड़ी, ‘हां, हॉस्पिटल में काम करती हूं। आपका नाम क्या है?’
‘अंकित, अंकित सिंह। अजय का दोस्त हूं।’ अंकित ने अपना नाम बताया और मन ही मन सोचा कि काश यह दोस्ती और गहरी हो जाए।
काम खत्म करके अंकित घर लौटा, लेकिन उसका मन सुहाना पर अटका रहा। रात को बिस्तर पर लेटे हुए वह सुहाना के बारे में सोचने लगा। उसके स्तनों की कल्पना करते हुए उसका लंड खड़ा हो गया।
अंकित ने अपना लंड निकाला और धीरे-धीरे मुठ मारने लगा। ‘सुहाना… तेरी चूत कितनी टाइट होगी… मैं तुझे चोदूंगा…’ वह बुदबुदा रहा था। पहली बार झड़ने के बाद भी उसका मन शांत नहीं हुआ।
फिर से उसने मुठ मारी, इस बार और तेजी से, सुहाना की नंगी बॉडी की कल्पना करते हुए। आखिरकार थककर सो गया, लेकिन सपने में भी सुहाना घूम रही थी।
अगले दिन अंकित सुहाना के क्लिनिक पर पहुंचा। वह बहाना बना रहा था कि दवा लेने आया है, लेकिन असल में तो सुहाना से मिलना चाहता था। क्लिनिक में इंतजार करते हुए उसका दिल धड़क रहा था। जब सुहाना ने उसे बुलाया, तो अंकित अंदर गया।
‘क्या समस्या है?’ सुहाना ने पूछा, अपनी व्हाइट कोट में और भी प्रोफेशनल लग रही थी।
अंकित ने हकलाते हुए कहा, ‘वो… बस चेकअप करवाना था। सिरदर्द है थोड़ा।’
सुहाना ने उसका ब्लड प्रेशर चेक किया और दवा लिख दी। बातचीत में अंकित ने कहा, ‘कल घर पर मिले थे, याद है?’
‘हां, बिजली ठीक करने वाले। अंकित जी, है ना?’ सुहाना मुस्कुराई।
‘जी। वैसे, अगर कोई प्रॉब्लम हो तो नंबर दे दीजिए। कभी-कभी इमरजेंसी में मदद कर सकूं।’ अंकित ने साहस जुटाकर कहा।
सुहाना ने थोड़ा सोचा और अपना नंबर दे दिया। ‘ठीक है, लेकिन सिर्फ इमरजेंसी के लिए।’
अंकित खुश होकर क्लिनिक से लौटा। शाम को उसने वॉट्सऐप पर मैसेज किया, ‘हैलो डॉक्टर सुहाना, अंकित यहां। कल का शुक्रिया।’
सुहाना का जवाब आया, ‘हैलो। कोई बात नहीं।’
धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। अंकित ने कहा, ‘आपकी स्माइल बहुत अच्छी है।’
सुहाना ने रिप्लाई किया, ‘थैंक्स। लेकिन हम दोस्त हैं, बस इतना ही।’
अंकित ने हार नहीं मानी। रोज मैसेज करता, कभी जोक्स भेजता, कभी कम्प्लिमेंट। सुहाना शुरू में कूल थी, लेकिन धीरे-धीरे खुलने लगी। एक दिन अंकित ने कहा, ‘मिलते हैं क्या? कॉफी पर।’
सुहाना ने मना किया, ‘नहीं, अजय को पता चलेगा तो प्रॉब्लम।’
लेकिन अंकित ने मनाया, ‘बस दोस्ती के लिए। कोई गलत नहीं।’
आखिरकार सुहाना मान गई। वे एक कैफे में मिले। सुहाना साड़ी में थी, जो उसके बॉडी को हाइलाइट कर रही थी। बातें हुईं, हंसी-मजाक। अंकित ने कहा, ‘आप कितनी ब्यूटीफुल हैं। अजय लकी है।’
सुहाना शरमा गई, ‘चुप।’
फिर उन्होंने मूवी देखने का प्लान बनाया। थिएटर में अंधेरा था। मूवी शुरू होते ही सुहाना ने गलती से अंकित का हाथ पकड़ लिया, सोचकर कि अजय है। अंकित का दिल जोरों से धड़का।
‘ओह सॉरी!’ सुहाना ने हाथ छुड़ाया।
अंकित ने कहा, ‘कोई बात नहीं। मुझे अच्छा लगा।’
सुहाना चुप हो गई। मूवी खत्म होने के बाद वे बाहर आए। अंकित ने कहा, ‘सुहाना, मैं तुमसे प्यार करता हूं। यह दोस्ती से ज्यादा है।’
सुहाना ने कहा, ‘अंकित, यह गलत है। मैं शादीशुदा हूं।’
लेकिन अंकित ने जोर दिया, ‘एक बार मिलो होटल में। बस बात करेंगे।’
सुहाना ने हिचकिचाते हुए हां कह दी। अगले दिन वे एक लग्जरी होटल में मिले। रूम में घुसते ही अंकित ने दरवाजा बंद किया और सुहाना को गले लगा लिया।
‘सुहाना, मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं।’ अंकित ने कहा और उसके होंठों पर किस कर दिया।
सुहाना ने पहले तो धक्का दिया, लेकिन फिर जवाब दे दी। उनके किस गहरे हो गए, जीभें लड़ने लगीं। अंकित ने सुहाना की साड़ी खींचनी शुरू की। ब्लाउज खोला, तो उसके बड़े स्तन ब्रा में उभरे हुए थे।
‘वाह सुहाना, तेरे मम्मे कितने सॉफ्ट हैं।’ अंकित ने कहा और ब्रा उतार दी। गुलाबी निप्पल्स को देखकर उसका लंड सख्त हो गया।
अंकित ने सुहाना के एक स्तन को मुंह में लिया और चूसने लगा। ‘आह… अंकित… यह क्या कर रहे हो…’ सुहाना सिसकारी भर रही थी।
अंकित ने दूसरे स्तन को भी चूसा, निप्पल्स को दांतों से काटा। सुहाना की सांसें तेज हो गईं। फिर अंकित ने उसकी पेटीकोट उतारा, पैंटी भी खींच दी। सुहाना की चूत साफ शेव्ड थी, गीली हो रही थी।
‘तेरी चूत कितनी प्यारी है।’ अंकित ने कहा और उंगली डाली। सुहाना चीखी, ‘आह… धीरे…’
अंकित ने अपनी पैंट उतारी और लंड निकाला। 7 इंच का मोटा लंड सीधा खड़ा था। ‘चूस ले सुहाना।’
सुहाना ने शरमाते हुए कहा, ‘पहली बार है… मैंने कभी नहीं किया।’
‘कोई बात नहीं, सीख लो।’ अंकित ने कहा और उसके सिर को नीचे दबाया। सुहाना ने लंड मुंह में लिया, चूसने लगी। जीभ से चाटा, अंकित सिहर उठा। ‘हां… ऐसे ही… अच्छा लग रहा है।’
कुछ मिनट बाद अंकित ने सुहाना को बेड पर लिटाया और उसकी चूत पर मुंह लगा दिया। जीभ से चाटने लगा, क्लिटोरिस को चूसा। सुहाना तड़पने लगी, ‘ओह अंकित… बहुत अच्छा… चाटो और…’
सुहाना का रस बहने लगा। अंकित ने अपना लंड सुहाना की चूत पर रगड़ा। ‘डाल दूं?’
सुहाना ने कहा, ‘हां… लेकिन धीरे।’
अंकित ने लंड का सिरा डाला, लेकिन सुहाना की चूत टाइट थी। ‘आह… दर्द हो रहा है…’ सुहाना चीखी।
अंकित ने जोर लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। खून निकला, सुहाना रोने लगी। ‘बहुत दर्द… निकालो…’
लेकिन अंकित रुका नहीं। धीरे-धीरे पिस्टन मारने लगा। ‘अब ठीक लगेगा… सह ले।’
धीरे-धीरे सुहाना को मजा आने लगा। ‘हां… चोदो अंकित… तेज…’
अंकित ने स्पीड बढ़ाई, जोर-जोर से ठोकने लगा। बेड हिल रहा था। सुहाना के स्तन उछल रहे थे। ‘आह… आह… तेरी चूत कितनी टाइट है… मैं रोज चोदूंगा।’
सुहाना ने कहा, ‘हां… अब सिर्फ तू ही चोदेगा… अजय को नहीं दूंगी।’
15 मिनट तक वे तेज चुदाई करते रहे। अंकित ने सुहाना के अंदर ही झड़ दिया। ‘ले… मेरा रस…’
दोनों थककर लेट गए। सुहाना ने कहा, ‘प्यार करता है ना?’
‘बहुत।’ अंकित ने कहा और फिर से किस किया।
रात को वे नहाने गए। शावर के नीचे अंकित ने फिर सुहाना को दीवार से सटाया और लंड चूत में डाल दिया। पानी बह रहा था, चुदाई हो रही थी। ‘आह… यहां भी चोद रहे हो…’
‘हां… तेरी चूत हमेशा भरी रहेगी।’ अंकित ने कहा।
अगले दिन अंकित सोच रहा था कि सुहाना के घर जाकर उसकी गांड भी मारनी है…………………………………