जीजा का लंड और साली की चूत

(Jija Ka Lund Aur Sali ki Chut)

मेरा नाम पूजा है। आज मैं 23 साल की हूं और शादीशुदा हूं। मेरी फिगर 36-32-38 है और हाइट 5’4″। मैं तीन साल से शादीशुदा हूं लेकिन अभी बच्चे की प्लानिंग नहीं की है क्योंकि मेरे पति के कुछ कारण हैं।

लेकिन आज मैं अपनी जिंदगी का एक ऐसा राज खोलने जा रही हूं जो मैंने सिर्फ अपनी करीबी दोस्तों को ही बताया है। ये घटना तब की है जब मैं 18 साल की थी और कॉलेज में पहली बार एंटर हुई थी।

वो एक ऐसा राज है जो मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल गया। मैं आज भी उसे याद करके गर्म हो जाती हूं। चलिए शुरू से बताती हूं।

मेरी बड़ी बहन का नाम रीता है। वो मुझसे 8 साल बड़ी थी यानी 26 साल की। लेकिन वो बहुत पतली थी और शादी के लिए लड़के ढूंढना मुश्किल हो रहा था। घर में कई रिश्ते आए लेकिन कोई पसंद नहीं आया।

मैं उल्टा बचपन से ही कर्वी थी। मेरी बॉडी आकर्षक थी। 34 साइज का ब्रा पहनती थी। मेरे स्तन सख्त और ऊंचे थे। और मेरी गांड इतनी उभरी हुई थी कि हर कोई नजरें हटा नहीं पाता था।

माता-पिता बहन की शादी को लेकर चिंतित रहते थे। मैं अपनी पढ़ाई में लगी रहती थी। कॉलेज में एंट्री होते ही दोस्तों ने मुझे सेक्स के बारे में बताया। मैंने चुपके से सेक्स स्टोरीज और वीडियोज देखना शुरू कर दिया।

बाथरूम में जाकर अपनी चूत में उंगली डालकर मुठ मारती। मुझे अपनी वर्जिनिटी खोने की तीव्र इच्छा हो गई लेकिन डर भी लगता था कि कहीं कोई परेशानी न हो जाए।

कॉलेज के लड़के और मोहल्ले वाले मुझसे दोस्ती करना चाहते थे लेकिन मैं उनसे दूर रहती। एक दिन कॉलेज से लौटते हुए घर पहुंची तो देखा घर में मेहमान आए हुए हैं। लग रहा था बहन के लिए रिश्ता लेकर आए हैं।

मैंने स्नैक्स और चाय सर्व की। वहां एक 30-35 साल का आदमी था जो दूल्हा बनने वाला था। लेकिन उसकी नजरें बहन पर नहीं बल्कि मुझ पर टिकी हुई थीं। वो बार-बार मेरी ओर देख रहा था। मेहमानों ने बातचीत की और चले गए।

दो दिन बाद उन्होंने बहन के लिए नहीं बल्कि मेरे लिए रिश्ता भेजा। पापा ने साफ मना कर दिया। कहा कि पूजा अभी छोटी है और वो आदमी दोगुना उम्र का है। लेकिन वो लोग बार-बार भेजते रहे। आखिरकार कुछ महीनों बाद बहन की शादी उसी से हो गई।

शादी के तीन महीने बाद मैं 18 साल की हो चुकी थी। मैं बहन के ससुराल गई। 15 दिनों के लिए रुकने का प्लान था। वहां बहन के पति यानी जीजा जी से मिली। उनका नाम राजेश था। वो बहुत खेलने-कूदने वाले इंसान थे।

बहन घर के कामों में व्यस्त रहती। तो जीजा जी और मैं बाइक पर घूमने जाते। वो मजाक में मुझे ‘आधी बीवी’ कहते। कहते ‘अगर तुम्हारे पापा मान जाते तो आज तुम मेरी बीवी होतीं।

बाइक पर जाते वक्त वो अचानक ब्रेक मार देते ताकि मेरे बड़े-बड़े स्तन उनकी पीठ से दब जाएं। घर पर जब अकेले होते तो मेरी बाहों को सहलाते या पैर रगड़ते। मुझे ये सब अच्छा लगता। मैं विरोध नहीं करती। धीरे-धीरे मुझे उनसे आकर्षण होने लगा।

फिर एक दिन उन्होंने मजाक में मेरे स्तनों को छू लिया। देखा कि मैं कुछ नहीं कह रही तो हौसला बढ़ा। वो और बोल्ड हो गए। मेरी जिंदगी में वो पल आया जो मैं कभी भूल नहीं सकती।

मेरे जाने से एक रात पहले। रात के करीब 10 बजे डिनर हो चुका था। बहन और जीजा जी अपने कमरे में थे। सासुजी सो चुकी थीं। मैं ऊपर छत पर चली गई। ताजी हवा लेने। अचानक जीजा जी आ गए। हम बातें करने लगे।

‘पूजा क्या बात है? अकेली क्यों?’ उन्होंने पूछा।

‘बस जीजा जी हवा ले रही हूं। कल चली जाऊंगी तो याद आएगा सबका।’ मैंने कहा।

‘हां खासकर मेरा तो बहुत याद आएगा। तुम्हारी ये मुस्कान और ये बॉडी।’ वो मुस्कुराए।

फिर अचानक उन्होंने मुझे पकड़ लिया और छत के बाथरूम में ले गए। दरवाजा बंद कर दिया।

‘जीजा जी ये क्या कर रहे हैं? छोड़िए मुझे।’ मैं घबरा गई।

‘पूजा मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। पहली बार तुम्हें देखा था जब रिश्ता आया था। तुम्हारी बहन की शादी हुई लेकिन मेरा दिल तो तुम्हारे लिए धड़कता है।’ उन्होंने कहा।

‘नहीं जीजा जी ये गलत है। अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा? बहन को दुख होगा। घर में हंगामा हो जाएगा।’ मैंने विरोध किया।

‘कोई नहीं जानेगा पूजा। ये हमारा राज रहेगा। बस आज की रात। मैं वादा करता हूं।’ उन्होंने मुझे गले लगा लिया।

मैं चुप हो गई। उनके होंठ मेरे नरम होंठों पर आ गए। वो मेरी जीभ को चूसने लगे। दांतों से काटा। मैं सब भूल गई। आनंद में डूब गई। उनके हाथ मेरी पीठ पर फिरे फिर गांड पर। मुझे कसकर दबाया।

मेरी चूत उनके लंड से दब गई। पैंट के ऊपर से महसूस हुआ। पहली बार किसी मर्द का लंड महसूस किया।

‘आह जीजा जी…’ मैं सिसकी।

उन्होंने मेरी टी-शर्ट ऊपर की। ब्रा भी हटा दी। मेरे सख्त स्तन बाहर आ गए। वो उन्हें मसलने लगे। निप्पल्स को जोर से चूसे। दर्द हुआ लेकिन मजा भी।

‘आह उह आह उम हाह आह जीजा… रुक जाओ… नहीं… ओओ बस!’ मैं कराहने लगी। मेरे स्तन लाल हो गए।

उनका हाथ मेरी लोअर में घुसा। चूत को सहलाया। फिर उंगली डाली। धीरे-धीरे चोदने लगे। मैं उछल पड़ी लेकिन उन्होंने पकड़ रखा। उंगली से चुदाई तेज हुई। मैं झड़ गई। उनके कंधे पर झुक गई।

‘अब तुम्हारी बारी है पूजा। मुझे भी मजा दो।’ उन्होंने फुसफुसाया।

मैं हिचकिचाई। लेकिन उन्होंने अपना बड़ा लंड मेरे हाथ में रख दिया। मैं डर गई। इतना बड़ा। शुक्र है अंदर नहीं डाला।

‘हाथ से सहलाओ।’ उन्होंने कहा।

मैं धीरे से सहलाने लगी। वो मुझे चूमते रहे। स्पीड बढ़ी।

‘घुटनों पर बैठो और जोर से सहलाओ।’ आदेश दिया।

गुलाबी सुपाड़ा बाहर आ-जा रहा था। एक नशे जैसी खुशबू आई। मेरा मुंह करीब ले गई। लंड को चूमा। फिर सुपाड़ा चूसा जैसे आइसक्रीम।

‘आह पूजा… हां…’ वो कराहे।

उन्होंने मेरा सिर पकड़ा मुंह में धक्का दिया गले तक गंदी आवाजें आईं लार टपकने लगी जोर-जोर से मुंह चोदा।

फिर झड़ गए गर्म वीर्य मुंह में छूटा मैंने ज्यादा से ज्यादा निगल लिया बाकी गालों पर।मुंह और चेहरा चिपचिपा हो गया।

उन्होंने लंड निकाला। कपड़े ठीक किए। मैं पानी से मुंह साफ किया कपड़े संवारे नीचे चली गई रात भर नींद नहीं आई वो मोटा लंबा लंड याद आता रहा।

सुबह नहाई तैयार हुई पापा लेने आए घर लौटी। लेकिन फोन पर रोज बातें। वो गंदी बातें करते। मैं गीली हो जाती। दोनों को पूरी चुदाई की चाहत लेकिन मौका नहीं। रोज मुठ मारती उसके लंड को याद करके।

ये तो बस शुरुआत थी। आगे की कहानी और गर्म है। adulthindistories.com पर अगले पार्ट में पढ़िए।