सुबह के दस बजे थे। मैं अपने कमरे में लेटा हुआ मोबाइल स्क्रॉल कर रहा था। अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई।
मैंने दरवाजा खोला तो सामने खड़ी थीं मेरी पड़ोस वाली आंटी, रेखा। उनकी उम्र करीब पैंतीस साल थी। गोल-गोल चेहरा, बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे-मोटे होंठ और शरीर पर मांसल कद।
उन्होंने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जिसके नीचे उनका गहरा ब्लाउज साफ दिख रहा था।
“बेटा, घर पर कोई नहीं है। पानी का पाइप लीक हो रहा है, थोड़ी मदद कर दोगे?” उन्होंने मीठी आवाज में कहा।
मैंने हामी भर दी और उनके साथ चल पड़ा। उनका घर बिल्कुल खाली था। मैंने पाइप ठीक किया। जब मैं वापस जाने लगा तो आंटी ने मुझे रोका।
“रुको बेटा, थोड़ी देर बैठो। मैं चाय बनाती हूँ।” उन्होंने मुझे सोफे पर बैठाया और किचन में चली गईं।
कुछ देर बाद वे चाय लेकर आईं। जब वे झुकीं तो उनका ब्लाउज का गला खुल गया और उनके बड़े-बड़े स्तन साफ दिख गए। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। आंटी ने भी मेरी नजर पकड़ ली। वे मुस्कुराईं और मेरे पास बैठ गईं।
“बेटा, तुम्हारी उम्र कितनी है?” उन्होंने पूछा।
“उन्नीस,” मैंने जवाब दिया।
“अभी तो बहुत छोटे हो,” उन्होंने कहा और मेरे हाथ पर हाथ रख दिया। उनकी उंगलियाँ धीरे से मेरी जांघ पर घूमने लगीं।
मैं घबरा गया। आंटी ने मेरी तरफ देखा और बोलीं, “डरो मत। आज तुम्हारी आंटी तुम्हें कुछ नया सिखाएंगी।”
उन्होंने मेरे मुंह पर अपना मुंह रख दिया। उनके होंठ नरम और गर्म थे। मैंने भी उन्हें चूमना शुरू कर दिया।
उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस आई। हम दोनों गहरी चूमने लगे।
आंटी ने मेरी कमीज़ उतारी। उन्होंने मेरे सीने को चूमना शुरू कर दिया। फिर वे मेरे पैंट के पास पहुंचीं।
उन्होंने जिप खोली और मेरा लंड बाहर निकाल लिया। मेरा लंड सात इंच लंबा और मोटा था। आंटी ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगीं।
“वाह बेटा, कितना बड़ा है,” उन्होंने कहा। फिर उन्होंने अपना मुंह उसके पास ले जाकर लंड चाटना शुरू कर दिया।
उनकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। फिर उन्होंने पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया।
आंटी मुझे चूस रही थीं। उनका सिर ऊपर-नीचे हो रहा था। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू हटाया। उनका ब्लाउज खुला हुआ था।
मैंने उनके स्तन दबाए। वे बड़े और मुलायम थे। उनके निप्पल सख्त हो चुके थे।
आंटी ने मेरा लंड मुंह से निकाला और बोलीं, “अब बारी तुम्हारी है।” उन्होंने साड़ी ऊपर उठाई। उनके नीचे कोई पैंटी नहीं थी।
उनकी चूत साफ दिख रही थी। बाल कटे हुए थे। मैंने अपनी उंगली उनके चूत के अंदर डाली। आंटी की सांस तेज हो गई।
“और अंदर डालो,” उन्होंने कहा। मैंने दो उंगलियां अंदर डाल दीं। आंटी चीख पड़ीं। उनकी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने उंगलियां अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।
आंटी ने मुझे लेटा दिया। उन्होंने मेरे ऊपर बैठकर मेरा लंड अपनी चूत में डाल लिया। उनका वजन मेरे ऊपर आ गया।
उनका चूत गर्म और तंग था। आंटी ऊपर-नीचे होने लगीं। उनका स्तन मेरे मुंह के सामने लटक रहे थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा।
आंटी तेजी से चुद रही थीं। उनका शरीर पसीने से तर हो गया था। मैंने उनकी कमर पकड़कर ऊपर से धक्के मारे। आंटी चीख रही थीं, “आह… और जोर से…”
हम दोनों पलट गए। अब मैं ऊपर था। मैंने आंटी की टांगें फैलाईं और अपना लंड उनकी चूत में जोर-जोर से ठोकने लगा। आंटी का शरीर हिल रहा था। उनका स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे।
“मेरा दूध पियो,” आंटी ने कहा। मैंने उनके स्तन मुंह में लिए और जोर-जोर से चूसने लगा। आंटी का दूध निकल रहा था। मैंने सब पी लिया।
आंटी ने मुझे रोका। “अब मेरी गांड मारो,” उन्होंने कहा।
मैं हैरान रह गया। “आंटी, वो तो…”
“चुप,” उन्होंने कहा। उन्होंने करवट ली और अपनी गांड मेरी तरफ कर दी। उनकी गांड गोल और मोटी थी। मैंने उस पर थूक लगाया और अपनी उंगली अंदर डाली। आंटी दर्द से चीख पड़ीं।
“धीरे… पहली बार है,” उन्होंने कहा।
मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं। आंटी का शरीर कांप रहा था। फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड के पास रखा। धीरे-धीरे दबाव डाला। लंड का सिरा अंदर घुसा। आंटी जोर से चीखीं।
“आह… दर्द हो रहा है…” उन्होंने कहा।
मैंने और जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। आंटी का चेहरा लाल हो गया था। आंसू निकल रहे थे। मैंने रुककर उन्हें सहलाया।
“जारी रखो,” आंटी ने कहा।
मैंने पूरा लंड अंदर डाल दिया। आंटी की गांड फटने लगी थी। मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। आंटी का दर्द धीरे-धीरे कम हो रहा था।
“अब जोर से,” उन्होंने कहा।
मैंने तेजी से धक्के मारे। आंटी की गांड लाल हो गई थी। उनका शरीर पसीने से भीग चुका था। मैंने उनकी कमर पकड़ रखी थी।
“मैं झड़ने वाली हूँ,” आंटी ने कहा।
मैंने और तेजी से चोदा। आंटी का शरीर कांप उठा। उनकी चूत से पानी निकल रहा था। उन्होंने जोर से चीखकर चुदाई का मजा लिया।
मैं भी झड़ने वाला था। मैंने लंड उनकी गांड से निकाला और चूत में डाल दिया। दो-तीन जोर के धक्के मारे और अपना पूरा माल आंटी की चूत में छोड़ दिया। आंटी का शरीर हिल रहा था।
मैं थककर आंटी के ऊपर गिर पड़ा। हम दोनों सांस ले रहे थे। आंटी ने मुझे चूमा।
“बेटा, आज तुमने मेरी दोनों जगहों की कुंवारीपन तोड़ दी,” उन्होंने कहा।
मैं मुस्कुराया। आंटी ने मेरे लंड को फिर से सहलाना शुरू कर दिया।
“अभी खत्म नहीं हुआ,” उन्होंने कहा। “अभी और बहुत कुछ बाकी है।”
आंटी ने मुझे उठाया और बेडरूम में ले गईं। उन्होंने बिस्तर पर लेटकर अपनी टांगें फैला दीं। उनकी चूत अभी भी मेरे माल से भरी हुई थी।
“चाटो,” उन्होंने कहा।
मैंने अपना मुंह उनकी चूत के पास लगाया। मेरी जीभ उनकी चूत के अंदर घुस गई। आंटी का स्वाद और मेरा माल मिलकर स्वादिष्ट लग रहा था। आंटी मेरे बाल पकड़कर अपना चेहरा उनकी चूत में दबा रही थीं।
“और गहराई से,” उन्होंने कहा।
मैंने अपनी जीभ पूरी तरह अंदर डाल दी। आंटी का शरीर हिल रहा था। उनकी सांस तेज हो गई थी।
“अब मेरी गांड चाटो,” उन्होंने कहा।
मैंने मुंह उनकी गांड के पास लगाया। उनकी गांड अभी भी लाल थी। मैंने जीभ से उसे चाटना शुरू कर दिया। आंटी का शरीर कांप रहा था।
“अंदर डालो,” उन्होंने कहा।
मैंने अपनी जीभ उनकी गांड के अंदर डाल दी। आंटी जोर से चीख पड़ीं।
“हाँ… ऐसे ही…” उन्होंने कहा।
आंटी ने मुझे उठाया और मेरे ऊपर बैठ गईं। उन्होंने मेरा लंड फिर से अपनी चूत में डाल लिया।
इस बार वे और तेजी से चुद रही थीं। उनका स्तन मेरे चेहरे पर लटक रहे थे। मैंने उन्हें दबाया और चूसा।
“मेरा दूध पीओ,” आंटी ने फिर से कहा।
मैंने उनके स्तन चूसना शुरू कर दिया। आंटी का दूध फिर से निकल रहा था।
हम दोनों पलट गए। अब आंटी नीचे थीं। मैंने उनकी टांगें कंधों पर रखीं और अपना लंड उनकी चूत में जोर-जोर से ठोकने लगा।
आंटी का शरीर बिस्तर पर उछल रहा था।
“और जोर से… मुझे मारो…” उन्होंने कहा।
मैंने और तेजी से धक्के मारे। आंटी का चेहरा लाल हो गया था। उनका शरीर पसीने से तर था।
“मैं फिर झड़ रही हूँ,” उन्होंने कहा।
आंटी का शरीर कांप उठा। उनकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया। मैंने भी अपना माल उनकी चूत में छोड़ दिया।
हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। आंटी ने मुझे गले लगा लिया।
“बेटा, आज तुमने मुझे बहुत खुश किया,” उन्होंने कहा।
मैं मुस्कुराया। आंटी ने मुझे फिर से चूम लिया।
“अब सो जाओ,” उन्होंने कहा। “रात में फिर शुरू करेंगे।”
मैं आंटी के सीने पर सिर रखकर सो गया।