प्रिया की योजना और शिवानी की चूत

(Priya's Plan and Shivani's Pussy)

मुकेश की नजर से यह पूरी कहानी बयां हो रही थी। प्रिया अब अपने पिता के लगातार पीछे लगने से तंग आ चुकी थी। उसके पिता हर रात उसके कैश की मांग करते थे, और वह इससे छुटकारा पाना चाहती थी।

उसने फैसला किया कि वह जल्दी से उसके शर्त पूरी कर देगी, चेक कैश कराएगी और फिर अपनी मर्जी से सेक्स का मजा लेगी। दो तीन दिनों में सब कुछ सुलझा लेना था।

प्रिया ने सबसे पहले रतनलाल को फोन लगाया। रतनलाल एक ऐसा आदमी था जो इस धंधे में माहिर था। प्रिया ने कहा, ‘रतनलाल जी, मुझे आपकी मदद चाहिए। रवि सेठ की बेटी शिवानी को संपर्क करना है।

उसे वेश्यावृत्ति के धंधे में फंसाना है। इसके बदले मैं आपको एक लाख रुपये दूंगी।’

रतनलाल ने उत्साह से जवाब दिया, ‘प्रिया बेटी, बताओ तो सही क्या करना है। मैं सब तैयार हूं। रवि सेठ की बेटी? वाह, वह तो अमीर घर की लड़की है। लेकिन पैसे के लिए सब कुछ हो जाता है।’

प्रिया ने पूरी बात समझाई। कैसे शिवानी को लालच देना है, कैसे उसे पैसे की तंगी का फायदा उठाना है। रतनलाल ने हामी भर ली और कहा, ‘ठीक है, मैं कल से ही काम शुरू कर दूंगा। बस पैसे की बात पक्की कर लो।’

फिर प्रिया ने रेहाना को फोन किया। रेहाना एक औरत थी जो इस काम में पुरानी थी। प्रिया ने कहा, ‘रीहाना दीदी, आपको शिवानी से मिलना है। उसकी कमजोरियां ढूंढनी हैं और उसे सेक्स वर्क में फंसाना है। एक लाख रुपये मिलेंगे।’

रीहाना ने खुशी से कहा, ‘अरे प्रिया, यह तो मजेदार काम लग रहा है। शिवानी जैसी पढ़ी लिखी लड़की को फंसाना? मैं कर लूंगी। बताओ, कैसे अप्रोच करूं?’

प्रिया ने डिटेल्स दीं। रेहाना ने सहमति जताई और बोली, ‘चिंता मत करो, मैं रतनलाल के साथ मिलकर काम करूंगी। हम उसे ट्रस्ट में ले लेंगे।’

अब प्रिया, रतनलाल और रेहाना ने मिलकर योजना बनाई। हर कोई अपना तरीका अपनाएगा शिवानी को फंसाने का। शिवानी की जिंदगी में पहले से ही मुश्किलें थीं। उसके बॉयफ्रेंड के साथ वैजाइनल सेक्स हो चुका था, लेकिन अब वह बॉयफ्रेंड एक अमीर लड़की के साथ चला गया था।

वह अमीर लड़की महंगे कपड़े, मेकअप पर खर्च करती थी, और शिवानी के पास इतने पैसे नहीं थे। वह अपने पिता से मांग भी नहीं सकती थी, क्योंकि बॉयफ्रेंड की बात छिपानी थी।

रीहाना और रतनलाल ने मिलकर शिवानी को अप्रोच किया। एक दिन रेहाना शिवानी से मिली। रेहाना ने कहा, ‘शिवानी बेटी, मैं तुम्हारी आंटी हूं। सुना है तुम्हें पैसे की जरूरत है। एक रात होटल में किसी आदमी के साथ बिताओ, अच्छे पैसे मिलेंगे। बस दो तीन घंटे का काम।’

शिवानी ने गुस्से से कहा, ‘क्या बकवास कर रही हो आंटी? मैं ऐसी लड़की नहीं हूं। जाओ यहां से।’

रीहाना ने शांत स्वर में कहा, ‘अरे बेटी, गुस्सा मत हो। जिंदगी कठिन है। तुम्हारा बॉयफ्रेंड तो चला गया ना? पैसे से सब कुछ ठीक हो सकता है। सोचो, पचास हजार रुपये एक रात में।’

शिवानी ने सोचा। पैसे की तंगी थी। बॉयफ्रेंड को वापस पाने के लिए महंगे गिफ्ट्स चाहिए थे। आखिरकार वह मान गई। ‘ठीक है आंटी, लेकिन डिटेल्स बताओ। सुरक्षित तो होगा ना?’

रीहाना ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘बिल्कुल सुरक्षित। अगर तुम कुंवारी हो तो दोगुना पैसे मिलेंगे।’

शिवानी के मन में लालच आ गया। वह झूठ बोल सकती थी। ‘हां आंटी, मैं कुंवारी हूं। कभी किसी लड़के को हाथ भी नहीं लगने दिया।’

रीहाना ने खुशी से कहा, ‘बहुत अच्छा बेटी। तो एक लाख रुपये मिलेंगे। आज रात को रतनलाल तुम्हें होटल ले जाएगा।’

शिवानी ने हामी भरी। शाम को रतनलाल अपनी कार में आया। शिवानी को देखा, वह मॉडर्न ड्रेस में थी। जींस, टॉप, हाई हील सैंडल। बाल फिल्मी हीरोइनों जैसे बिखरे हुए। रतनलाल ने कहा, ‘बेटी, चलो। होटल में प्रदीप जी इंतजार कर रहे हैं। वह अच्छे आदमी हैं। बस रिलैक्स रहना। कमरा नंबर 205 है। मैं छोड़ दूंगा।’

शिवानी ने घबराते हुए कहा, ‘अंकल, डर तो लग रहा है। क्या होगा अगर कुछ गलत हो गया?’

रतनलाल ने हंसते हुए कहा, ‘कुछ नहीं होगा। पैसे लेकर निकल जाना। बस मुस्कुराना और एंजॉय करना।’

होटल पहुंचे। रतनलाल ने उसे छोड़ा और चला गया। शिवानी ने कमरा नंबर 205 पर दस्तक दी। दरवाजा खुला। अंदर एक बूढ़ा आदमी खड़ा था, प्रदीप। शिवानी चौंक गई। वह सोच रही थी कि कोई जवान आदमी होगा, लेकिन प्रदीप की उम्र साठ के करीब थी।

प्रदीप ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। शिवानी ने दुपट्टा चेहरे पर रखा था, लेकिन बॉडी दिख रही थी। रेहाना ने बताया था कि कुंवारी है, तो प्रदीप के मुंह में पानी आ गया। उसकी जवां बॉडी देखकर। ‘आओ अंदर बेटी।’

वह उसे अंदर खींच लिया, दरवाजा बंद कर लिया। शिवानी घबरा गई। प्रदीप ने कहा, ‘रिलैक्स हो जाओ। कोई डरने की बात नहीं। सब सीक्रेट रहेगा।’

प्रदीप ने सोडा में शराब मिलाई, दो घूंट लिए। फिर शिवानी को इशारा किया, ‘आओ पास। नाम क्या है तुम्हारा?’

शिवानी हिली नहीं। प्रदीप ने जोर दिया, ‘आराम से आओ। तुम्हारा चेहरा देखना है। इतना सुंदर चेहरा छिपा क्यों रखा?’

शिवानी की ड्रेस टाइट जींस थी, जो उसके मोटे जांघों और नितंबों को उभार रही थी। ब्रेस्ट्स आर्म्स के नीचे छिपे थे। प्रदीप ने कहा, ‘अगर पास नहीं आओगी तो कम से कम चेहरा तो दिखाओ।’

वह एक और घूंट लिया और बेड पर लेट गया। उसके तौलिए के नीचे लंड सख्त हो गया था। बीस साल की कुंवारी लड़की का ख्याल आते ही। उभार थोड़ा दिख रहा था।

शिवानी ने कोई रिएक्शन नहीं दिया। प्रदीप गुस्सा हो गया, ‘ड्रामा क्वीन हो क्या? इतनी शर्म अगर है तो सेक्स के लिए क्यों आई? मैं रतनलाल को फोन करता हूं, ले जाओ इसको।’

शिवानी घबरा गई, हाथ चेहरे से हटाए, ‘किसको फोन कर रहे हो अंकल? प्लीज मत करो।’

प्रदीप ने कहा, ‘रतनलाल को। तुम इतनी नाजुक हो, बेकार हो। पैसे नहीं मिलेंगे।’

शिवानी ने गिड़गिड़ाया, ‘नहीं अंकल, रुको। पैसे चाहिए मुझे। मैं बैठ जाती हूं।’

वह बेड पर बैठ गई। प्रदीप ने फोन रखा और उसके चेहरे को देखा। परफेक्ट फेस, काजल लगी आंखें। उसके फर्म ब्रेस्ट्स को घूरा। फिगर प्रिया जैसा, लेकिन फेस ज्यादा मैच्योर।

प्रदीप ने अपनी जांघें थपथपाईं, ‘आओ पास।’

शिवानी ने सैंडल उतारी और घुटनों के बल आ गई। प्रदीप ने पूछा, ‘नाम?’

‘शिवानी।’ वह धीरे से बोली और आंखों में देखा। मासूम आंखें।

प्रदीप खुश हुआ, ‘शिवानी, अच्छा नाम। किस कॉलेज में पढ़ती हो?’

उसने अपनी उंगली उसके माथे से ब्रेस्ट्स तक फेर दी। शिवानी ने आंखें बंद कर लीं। प्रदीप ने उसके नेक पर गहरा किस किया। शिवानी सिहर गई, शराब की बदबू से चिढ़ गई।

‘आंखें खोलो।’ प्रदीप ने कहा।

शिवानी ने खोलीं, लेकिन तौलिए का टेंट देखकर मुंह खुला रह गया, जैसे लंड चूसने को तैयार।

प्रदीप ने हंसा, ‘यह तुम्हें ज्यादा ट्रबल नहीं देगा। छू तो सको।’

उसने उसका हाथ पकड़कर तौलिए पर रखना चाहा। शिवानी ने थोड़ा रोका, लेकिन याद आया मकसद। हाथ रख दिया।

प्रदीप पागल हो गया उसकी खूबसूरती से। शिवानी ने लंबाई और मोटाई महसूस की, चूत गीली हो गई।

‘कपड़े उतारो।’ प्रदीप ने ऑर्डर दिया।

शिवानी ने सिर हिलाया। प्रदीप ने टॉप ऊपर किया, वह हाथ ऊपर कर दी। टॉप निकला, ब्रा में बड़े फर्म ब्रेस्ट्स।

क्लिवेज देखकर लंड धड़का। प्रदीप ने ब्रेस्ट्स के साइड्स पर हाथ रखे, जीभ से क्लिवेज चाटा।

शिवानी सिसकारी, ‘उफ्फ… अम्मा… आह अंकल।’

वह उससे चिपक गई, कमर मोड़ दी।

‘शर्माती हो ना मेरी जान?’ प्रदीप ने पूछा।

शिवानी ने सिर हिलाया, हाथों से ब्रेस्ट्स ढका लिए, शराब की बदबू से परेशान।

‘अब शर्म का क्या फायदा। आज रात हम पति पत्नी हैं। मैं तुमसे प्यार करूंगा, तुम मुझसे। अब जींस भी उतारो, मैं उतारूंगा।’

शिवानी कुछ बोल पाती इससे पहले प्रदीप घुटनों पर आ गया, जींस का बटन खोला। चूत का माउंड आउटलाइन दिखा, मुंह में लार भर आई।

शिवानी ने कहा, ‘अंकल, ऐसे मत देखो, मैं पिघल रही हूं।’

प्रदीप ने जींस जांघों तक खींची। ‘शर्म मत करो, एंजॉय करो।’

चेहरा पैंटी के पास लाया, चूत की महक सूंघी। उसकी सांसों से गर्म ठंडी सेंसेशन हुई।

बर्दाश्त न हुआ, जींस पूरी खींच ली। शिवानी ने पैर उठाकर मदद की।

‘चूत देखनी है। फिर शराब पिएंगे।’ प्रदीप ने कहा।

उसके पैर फैलाए, पैंटी साइड की। स्टिकी, सूजी हुई, हल्के बालों वाली चूत। प्रिया की याद आई।

उंगली स्लिट पर फेरने लगा, गहराई तीन इंच अनुमानित। मिडिल फिंगर अंदर डालने की कोशिश की, शिवानी ने पैर कस लिए और पीछे हट गई।

‘क्या हुआ?’ प्रदीप ने पूछा।

शिवानी ने गिल्टी फेस से कहा, ‘सॉरी अंकल।’

प्रदीप मुस्कुराया, ‘कुंवारी नहीं हो तुम। मेरी आंखों से कुछ नहीं छिपता। यही प्रॉब्लम है।’

शिवानी ने कबूल किया।

प्रदीप ने हाथ खींचा, उसे गोद में उठा लिया जैसे फूल। उम्र के बावजूद ताकत से इंप्रेस हुई। ‘कन्फेस करो।’

‘अंकल, मैं कुंवारी नहीं हूं। बॉयफ्रेंड के साथ एक बार किया, खून देखकर डर गई। फिर कभी नहीं।’

प्रदीप हंसा, ‘फिर झूठ क्यों बोला?’

‘दोगुने पैसे के लिए।’

‘कितने मिले?’

‘पचास हजार।’

प्रदीप ने हेयर पिन निकाला, लंबे बाल पीठ पर बिखर गए। सिडक्टिव टोन में, ‘लंड चूसना आता है?’

तौलिए पर स्ट्रोक करते हुए। उसका पुराना फेटिश।

शिवानी शर्मा गई, ‘नहीं आता, लेकिन आपके लिए सीख लूंगी।’

उसकी मासूमियत से, तौलिया गिराया। मोटा मजबूत लंड लहराता हुआ, थिरकता।

वेस्ट उतारा, पूरी नंगा। ब्रा अनहुक की, नंगे फर्म ब्रेस्ट्स देखकर आंखें चमकीं।

कंट्रोल खो दिया, ब्रेस्ट्स पकड़े, धीरे से दबाए। शिवानी का हाथ उसके गर्म लोहे जैसे लंड पर कस गया।

प्रदीप औरतों को उत्तेजित करने का मास्टर था। शिवानी पर असर साफ।

अब कहानी आगे बढ़ती है। प्रदीप ने शिवानी को बेड पर लिटा दिया। उसके होंठों पर किस करने लगा। शिवानी ने पहले तो मना किया, लेकिन फिर एंजॉय करने लगी। प्रदीप की जीभ उसके मुंह में घुस गई, सलाइवा एक्सचेंज हो रहा था। ‘उम्म… अंकल, यह तो अच्छा लग रहा है।’

प्रदीप ने कहा, ‘बेटी, अभी तो शुरुआत है। तुम्हारी चूत को मैं ऐसे चाटूंगा कि तुम चिल्ला उठोगी।’

वह नीचे सरक गया। शिवानी की पैंटी उतार दी। नंगी चूत देखकर लंड और सख्त हो गया। हल्के बाल, गुलाबी होंठ, गीली। प्रदीप ने जीभ निकाली और क्लिट पर चाटा। शिवानी उछल पड़ी, ‘आह्ह्ह… अंकल, क्या कर रहे हो?’

‘एंजॉय करो।’ प्रदीप ने दो उंगलियां चूत में डालीं। अंदर बाहर करने लगा। शिवानी की सांसें तेज हो गईं। ‘उफ्फ… हां… और तेज।’

प्रदीप ने स्पीड बढ़ाई। चूत से रस बहने लगा। शिवानी ने उसके सिर को पकड़ लिया। ‘अंकल, मैं झड़ने वाली हूं।’

प्रदीप ने मुंह लगा लिया, चूसने लगा। शिवानी चीखी और ऑर्गेज्म हो गया। रस उसके मुंह में आ गया। प्रदीप ने चाट लिया। ‘स्वादिष्ट है तुम्हारा रस।’

अब शिवानी की बारी। प्रदीप ऊपर आया, लंड उसके मुंह के पास। ‘चूसो बेटी।’

शिवानी ने हिचकिचाते हुए मुंह खोला। लंड अंदर लिया। प्रदीप ने सिर पकड़कर धक्का दिया। ‘हां, ऐसे। जीभ घुमाओ।’

शिवानी सीख रही थी। चूसने लगी। प्रदीप की सिसकारियां आने लगीं। ‘बहुत अच्छा। तुम नेचुरल हो।’

कुछ मिनट बाद प्रदीप ने निकाला। ‘अब असली मजा।’

वह कंडोम पहना, शिवानी के ऊपर चढ़ा। लंड चूत पर रगड़ा। शिवानी बेचैन हो गई। ‘अंदर डालो अंकल।’

प्रदीप ने धक्का मारा। लंड आधा अंदर शिवानी दर्द से सिकुड़ी।

प्रदीप ने धीरे धीरे पूरा अंदर किया। फिर पिस्टन की तरह चलने लगा। शिवानी की चीखें बदल गईं सिसकियों में। ‘हां… फक मी अंकल… हार्डर।’

प्रदीप ने स्पीड बढ़ाई। ब्रेस्ट्स दबाए, नेक चाटा। कमरा सेक्स की आवाजों से गूंज रहा था। पचास मिनट बाद प्रदीप झड़ा। कंडोम में स्पर्म।

दोनों थक गए। प्रदीप ने कहा, ‘कैसा लगा बेटी?’

शिवानी मुस्कुराई, ‘बहुत अच्छा। पैसे के लायक।’

लेकिन यह तो शुरुआत थी। प्रदीप ने कहा, ‘रात भर रुको। और राउंड्स होंगे।’

शिवानी ने हामी भरी। अगले राउंड में प्रदीप ने डॉगी स्टाइल ट्राई किया। शिवानी की गांड ऊपर, लंड पीछे से। ‘आह… गहरा जा रहा है।’

प्रदीप ने थप्पड़ मारे गांड पर। ‘एंजॉय करो रंडी।’

शिवानी एक्साइटेड हो गई। ‘हां, मैं तुम्हारी रंडी हूं आज।’

सुबह तक शिवानी थक गई, लेकिन पैसे मिले।

अब प्रिया की योजना सफल हो रही थी। वह सोच रही थी कि शिवानी अब धंधे में फंस गई। रतनलाल और रेहाना को बोनस देना था।

शिवानी होटल से निकली। पैसे हाथ में थे। लेकिन मन में अजीब सा एहसास। प्रदीप के साथ रात भर सेक्स किया था। लंड की मोटाई, चुदाई की तीव्रता याद आ रही थी। ‘क्या मैं वाकई यह कर रही हूं?’

घर पहुंची। पिता रवि सेठ ने पूछा, ‘कहां थी रात भर?’

शिवानी झूठ बोली, ‘फ्रेंड्स के यहां।’

अगले दिन रेहाना फोन किया। ‘कैसा रहा बेटी?’

‘अच्छा आंटी। पैसे मिल गए।’

रीहाना ने कहा, ‘और काम चाहिए? ज्यादा पैसे।’

शिवानी हिचकिचाई, लेकिन लालच आया। ‘हां, क्यों नहीं।’

इस तरह शिवानी धंधे में फंसती गई। प्रिया खुश थी उसका पिता का शर्त पूरा हो गया। अब वह फ्री थी।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं। प्रिया ने खुद भी मजा लेना शुरू किया। वह रतनलाल से मिली। ‘अब मुझे ग्राहक चाहिए।’

रतनलाल हंसा, ‘तुम तो पहले से ही स्टार हो।’

प्रिया की नई जिंदगी शुरू हो गई। सेक्स, पैसे, आजादी…………………….