साली को सैट कर के बस में चोदा

(Sali Ko Set Kar Ke Bus Main Choda)

मुस्कान की परीक्षा के लिए पिता जी ने डबल स्लीपर बस की टिकटें बुक कर दी थीं। मैंने उसे लेकर बस में चढ़ते ही सीट नंबर देखा। हम दोनों की सीट ऊपरी बर्थ पर थी। बस रात दस बजे निकली।

मुस्कान ने हल्का सा सूट पहना हुआ था। उसकी कमर थोड़ी खुली हुई थी। मैंने लाइट बंद कर दी और सोने का नाटक करने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपना हाथ उसकी खुली कमर पर रख दिया। मुस्कान हिली लेकिन कुछ बोली नहीं।

मैंने धीरे धीरे अपना पैर भी उसकी जांघ पर रख दिया। वह करवट बदलकर मेरी तरफ मुड़ी और उसकी गोल गोल गांड मेरे खड़े लंड से सट गई। मैंने उसे और पास खींच लिया। मेरे हाथ अब उसके स्तनों पर थे। मैंने धीरे से उसके सूट के अंदर हाथ डालकर ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल दबाए। मुस्कान की सांस तेज हो गई।

“जीजा जी क्या कर रहे हैं” मुस्कान ने फुसफुसाते हुए कहा।

“शशश चुप रहो कोई नहीं देख रहा” मैंने उसके कान में कहा।

मैंने उसके सूट की जिप खोली और हाथ उसके पैंटी के अंदर डाल दिया। उसकी चूत पहले से ही गीली थी। मेरी उंगलियां उसकी फूली हुई चूत के होठों को छू रही थीं। मुस्कान ने आंखें बंद कर लीं। मैंने उसकी चूत में एक उंगली घुसा दी।

“आह्ह्ह” मुस्कान ने हल्की सी आवाज निकाली।

“बहुत गीली हो गई हो तुम” मैंने कहा।

“मुझे शर्म आ रही है” मुस्कान बोली।

“कोई बात नहीं आज रात तुम मेरी हो” मैंने कहा और उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। हम दोनों जोर से चूमने लगे। मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर घूम रही थी। मुस्कान भी मेरी जीभ चूस रही थी।

मैंने उसे घुमाया और हम 69 पोजीशन में आ गए। मैंने उसकी पैंटी नीचे खींची। उसकी चूत बिल्कुल साफ शेव की हुई थी। गुलाबी रंग की और बिल्कुल तंग। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर फेर दी। मुस्कान का शरीर कांप उठा।

“जीजा जी यह क्या कर रहे हैं” मुस्कान ने कहा।

“चुप रहो चूत चाट रहा हूं तुम्हारी” मैंने कहा और उसकी चूत के होठों को चूसने लगा।

मुस्कान ने मेरे पैंट का जिप खोला। मेरा लंड बाहर निकला। वह चौंक गई।

“इतना बड़ा” मुस्कान ने कहा।

“चूसो इसे” मैंने कहा।

मुस्कान ने मेरे लंड के सिरे को मुंह में लिया। वह धीरे धीरे चूसने लगी। मैंने उसके मुंह में और आगे धकेला। मुस्कान का मुंह भर गया। मैंने उसके अंडकोष भी चाटे।

“आह्ह्ह जीजा जी” मुस्कान ने कहा।

“चूसो अच्छे से” मैंने कहा।

हम दोनों एक दूसरे को चाट रहे थे। मेरी जीभ उसकी चूत के अंदर घुस रही थी। मुस्कान मेरे लंड को जोर जोर से चूस रही थी। कुछ देर बाद बस एक ढाबे पर रुकी। हमने कपड़े ठीक किए और बाहर निकले।

ढाबे पर खाना खाने के बाद हम वापस बस में आए। मुस्कान ने मुझे जगाया। उसका हाथ मेरे लंड पर था।

“जीजा जी फिर से खड़ा हो गया है” मुस्कान ने कहा।

“हां तुम्हारे हाथों से” मैंने कहा।

“मुझे सेक्स करना है” मुस्कान ने कहा।

“कंडोम नहीं है” मैंने कहा।

“खून निकलेगा” मुस्कान बोली।

“फिर भी करना है” मैंने कहा।

मैंने अपना लंड उसकी गांड की दरार में रखा। मुस्कान ने आंखें बंद कर लीं। मैंने लंड को उसकी चूत के होठों पर रगड़ा।

“आह्ह्ह दर्द हो रहा है” मुस्कान ने कहा जब मैंने थोड़ा सा दबाव डाला।

“रगड़ेंगे बस” मैंने कहा।

मैंने अपनी उंगलियां उसकी चूत में डालीं। मुस्कान ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ लिया। हम दोनों एक दूसरे को हाथों से संतुष्ट कर रहे थे। मुस्कान का शरीर कांप रहा था।

“आह्ह्ह जीजा जी” मुस्कान ने जोर से कहा।

“चुप रहो” मैंने कहा।

कुछ देर बाद हम दोनों झड़ गए। मुस्कान ने मेरे लंड पर अपना रस छोड़ा। मैंने भी उसके हाथों पर अपना वीर्य गिराया।

अगली सुबह मुस्कान की परीक्षा थी। परीक्षा के बाद हमने वापस जाने की टिकटें कैंसिल कर दीं। हमने परिवार को झूठ बोला कि परीक्षा के बाद कुछ और काम है। हमने होटल बुक किया।

मैंने मुस्कान के लिए लाल दुल्हन का सूट खरीदा। लिपस्टिक, सिंदूर, फूल और सोने की अंगूठी भी ली। सब कुछ होटल के कमरे में भेज दिया।

“मुस्कान आज रात तुम मेरी दुल्हन बनोगी” मैंने कहा।

“जीजा जी” मुस्कान ने शरमाते हुए कहा।

“तैयार हो जाओ” मैंने कहा।

मैंने वोदका पी ली और सेक्स बढ़ाने की गोली खा ली। कमरे में जाकर देखा मुस्कान बिस्तर पर बैठी थी। उसने लाल दुल्हन का सूट पहना हुआ था। घूंघट भी डाला हुआ था।

“मोह दिखाई” मैंने कहा और अंगूठी उसके हाथ में पहनाई।

“जीजा जी” मुस्कान ने कहा।

“घूंघट हटाओ” मैंने कहा।

मुस्कान ने घूंघट हटाया। हम दोनों जोर से चूमने लगे। मुस्कान ने अपना सूट उतारा। वह बिल्कुल नंगी हो गई।

“चलो फिर 69 करो” मैंने कहा।

हम फिर 69 पोजीशन में आ गए। मैंने उसकी चूत चाटी। मुस्कान ने मेरे लंड को चूसा।

“आह्ह्ह” मुस्कान ने कहा।

“चूसो” मैंने कहा।

मैंने वोदका उसकी छातियों पर डाली। मुस्कान का शरीर कांप उठा। मैंने उसकी छातियों को चाटा। फिर वोदका उसकी चूत पर डाली और चाटने लगा।

“जीजा जी” मुस्कान ने कहा।

“अब असली सेक्स करो” मैंने कहा।

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा। मुस्कान ने आंखें बंद कर लीं। मैंने जोर से धक्का मारा। मुस्कान की कुंवारी चूत फट गई। खून निकल आया।

“आह्ह्ह दर्द” मुस्कान ने जोर से चिल्लाया।

“चुप रहो” मैंने उसका मुंह बंद किया।

मेरा लंड उसकी चूत के अंदर घुस गया। मुस्कान का शरीर कांप रहा था। मैंने धीरे धीरे चोदना शुरू किया।

“आह्ह्ह जीजा जी” मुस्कान ने कहा।

“चोद रहा हूं तुम्हारी चूत” मैंने कहा।

हम दोनों जोर जोर से चोद रहे थे। मुस्कान के स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों से दबाया।

“आह्ह्ह” मुस्कान ने कहा।

“जोर से” मैंने कहा।

पहली बार हम दोनों एक साथ झड़ गए। मुस्कान की चूत से खून और वीर्य निकल रहा था।

“फिर से करो” मुस्कान ने कहा।

हमने चार बार सेक्स किया। हर बार मुस्कान की चूत और फूलती गई। सुबह चार बजे तक हम चोदते रहे। मुस्कान की चूत बहुत सूज गई थी। उसे बुखार भी हो गया।

“दवा खा लो” मैंने कहा।

मुस्कान ने दवा खाई और हम दोनों सो गए।

कैसी लगी कुंवारी साली की चुदाई की कहानी……………………………