नवी मुंबई की चकाचौंध भरी जिंदगी में मानव शर्मा नाम का एक 22 साल का युवक रहता था। वह एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम करता था। मानव की जिंदगी सामान्य लगती थी, लेकिन उसके अंदर एक कमी हमेशा खलती रहती थी।
उसके बाल कम थे, जो उसे लड़कियों को आकर्षित करने में बाधा बनते थे। इस वजह से वह अक्सर अकेलापन महसूस करता। शाम को ऑफिस से लौटने के बाद वह अपने छोटे से फ्लैट में अकेला बैठकर पोर्न स्टोरीज पढ़ता। ये स्टोरीज उसके लिए एक तरह का सहारा थीं, जहां वह अपनी कल्पनाओं को उड़ान दे सकता था।
एक शाम, मानव ने एक पॉपुलर वेबसाइट पर एक ऐसी ही स्टोरी पढ़ी। स्टोरी में एक युवक और एक परिपक्व महिला के बीच गर्मागर्म संबंधों की बात थी। मानव को ये स्टोरी इतनी पसंद आई कि उसने कमेंट बॉक्स में अपनी राय लिखी।
कमेंट के अंत में उसने अपना ईमेल आईडी भी दे दी, शायद कोई जैसे ही सोच रखने वाला व्यक्ति संपर्क कर ले। वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि ये छोटा सा कदम उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा।
कुछ दिनों बाद, मानव के इनबॉक्स में एक अनजान ईमेल आया। ईमेल की प्रेषक थीं सुनीता, एक 35 साल की तलाकशुदा महिला, जो भी नवी मुंबई में ही रहती थीं। सुनीता दो बच्चों की मां थीं। उनका तलाक हाल ही में हुआ था, क्योंकि उनके पति ने उन्हें धोखा दिया था।
एक अन्य महिला के साथ उनके पति का अफेयर चल रहा था, जिसकी वजह से सुनीता का वैवाहिक जीवन बर्बाद हो गया। तलाक के बाद सुनीता अकेली रह गईं, बच्चों को संभालते हुए। उनका यौन जीवन सालों से सूखा पड़ा था। तीन साल से किसी पुरुष का स्पर्श न होने से वह बेहद असंतुष्ट महसूस करतीं।
सुनीता ने मानव के कमेंट को पढ़ा और सोचा कि शायद ये युवक उनकी बात समझ सके। ईमेल में उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में थोड़ा बताया और सीधे प्रस्ताव रख दिया। ‘मैं एक तलाकशुदा महिला हूं।
मेरी जिंदगी में अब कोई पुरुष नहीं है। अगर आप इच्छुक हों, तो हम शारीरिक संबंध बना सकते हैं। ये सिर्फ शारीरिक होगा, कोई भावनात्मक बंधन नहीं।’ मानव ने ईमेल पढ़ा तो हैरान रह गया। क्या ये सच था? या कोई मजाक?
लेकिन सुनीता के शब्दों में इतनी ईमानदारी थी कि मानव ने सावधानी से जवाब दिया। ‘मैं मानव हूं। आपकी बात समझी। लेकिन पहले थोड़ा जान लें एक दूसरे को। क्या आप असली हैं?’
ईमेल का आदान-प्रदान शुरू हो गया। दोनों ने अपनी जिंदगी के बारे में खुलकर बात की। सुनीता ने बताया कि वह एक स्कूल में टीचर हैं और बच्चों के साथ व्यस्त रहती हैं। मानव ने अपनी नौकरी और बालों की समस्या के बारे में शेयर किया।
धीरे-धीरे चैट व्हाट्सएप पर शिफ्ट हो गई। फिर फोन नंबर्स एक्सचेंज हुए। पहली कॉल पर दोनों की आवाज सुनकर एक दूसरे को भरोसा हुआ। सुनीता की आवाज में एक मधुरता थी, जो मानव को खींच रही थी।
फिर आया फोटोज का दौर। मानव ने अपनी एक साफ-सुथरी फोटो भेजी, जिसमें वह मुस्कुराता दिख रहा था। सुनीता ने अपनी फोटो भेजी – एक खूबसूरत महिला, लंबे काले बाल, गोरा रंग, और आकर्षक फिगर।
फोटो देखकर मानव का दिल धड़कने लगा। सुनीता भी मानव की युवा ऊर्जा से प्रभावित हुईं। ‘तुम्हारी फोटो देखकर लगता है, तुम बहुत एनर्जेटिक हो। मैं तुम्हें मिलना चाहती हूं।’ सुनीता ने मैसेज किया। मानव ने सहमति दी।
मुलाकात तय हुई एक लोकप्रिय कैफे में। मानव थोड़ा नर्वस था। वह समय पर पहुंचा, ब्लू शर्ट और जींस में। कुछ मिनट बाद सुनीता आ गईं। उन्होंने हरी रंग की साड़ी पहनी थी, जो उनके गोरे शरीर पर चिपक रही थी। ब्लाउज लो-कट था, जिसमें उनका क्लीवेज साफ दिख रहा था।
साड़ी की प्लीट्स उनके कूल्हों को हाइलाइट कर रही थीं। मानव की नजरें उन पर टिक गईं। सुनीता मुस्कुराईं और बोलीं, ‘हाय मानव, मैं सुनीता हूं। तुम्हें पहचान लिया।’
दोनों ने कॉफी ऑर्डर की। बातें शुरू हुईं। सुनीता ने अपनी जिंदगी के दर्द साझा किए। ‘मेरा पति मुझे छोड़ गया। अब मैं अकेली हूं। बच्चों के अलावा कोई नहीं।’ मानव ने उनका हाथ थामा और कहा, ‘मैं समझता हूं। तुम्हें खुश देखना चाहता हूं।
कैफे से निकलने के बाद उन्होंने एक मूवी थिएटर जाने का प्लान बनाया। अंधेरे हॉल में बैठे हुए, मूवी शुरू होते ही सुनीता ने मानव का हाथ पकड़ा। धीरे-धीरे मानव ने उनका कंधा छुआ। सुनीता ने सिर झुकाकर कहा, ‘मानव, तीन साल बाद किसी पुरुष का स्पर्श हो रहा है। ये एहसास कितना अच्छा है।’
मानव का दिल तेज धड़क रहा था। उसने सुनीता के गाल पर हाथ फेरा। फिर धीरे से उनके होंठों पर चुंबन कर दिया। सुनीता ने जवाब में उसे कसकर पकड़ लिया। उनके होंठ एक दूसरे से मिले, जीभें लिपट गईं। मूवी के बीच में ही दोनों गर्म हो गए।
सुनीता का हाथ मानव की जांघ पर चला गया। मानव ने उनकी साड़ी के ऊपर से उनके स्तनों को दबाया। सुनीता सिसकारी भरने लगीं। ‘मानव, मुझे घर ले चलो। मैं और बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी।’
मानव ने तुरंत सहमति दी। वे मानव के फ्लैट पर पहुंचे। दरवाजा बंद होते ही दोनों एक दूसरे से लिपट गए। मानव ने सुनीता की साड़ी का पल्लू खींच लिया। हरी साड़ी उनके शरीर से सरकने लगी। ब्लाउज के हुक खोल दिए।
सुनीता के बड़े-बड़े स्तन ब्रा में उभरे हुए थे। मानव ने ब्रा भी उतार दी। गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। वह उन पर झुक गया और चूसने लगा। सुनीता चीखी, ‘आह मानव, कितना अच्छा लग रहा है। चूसो इन्हें।’
मानव ने पेटीकोट की नाड़ी खींची। पेटीकोट नीचे गिर गया। अब सुनीता सिर्फ पैंटी में थीं। मानव ने पैंटी भी उतार दी। सुनीता की चूत साफ-सुथरी थी, बाल हटाए हुए। मानव ने उंगली डाली। सुनीता की चूत गीली हो चुकी थी।
सुनीता, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है।’ मानव बोला। सुनीता ने कहा, ‘हां, तीन साल से कोई छुआ नहीं। अब तुम्हारा लंड डालो।’
दोनों बेडरूम में गए। मानव ने अपनी शर्ट, पैंट उतारी। उसका सात इंच का लंड सीधा खड़ा था। सुनीता ने उसे पकड़ा और सहलाया। ‘वाह मानव, कितना मोटा और लंबा है। मुझे खुशी हो रही है।’
मानव ने कंडोम पहना और सुनीता को बेड पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैलाईं। चूत पर लंड का सिरा रखा। धीरे से दबाया। सुनीता की चूत टाइट थी, लेकिन गीलापन मदद कर रहा था। आखिरकार पूरा लंड अंदर चला गया। सुनीता चिल्लाई, ‘आहहह, मानव, फाड़ दिया तुमने। जोर से चोदो।’
मानव ने जोर-जोर से धक्के मारे। बेड हिलने लगा। सुनीता के स्तन उछल रहे थे। वह चिल्ला रही थीं, ‘हां मानव, मैं तुम्हारी पत्नी हूं। हमेशा चोदना मुझे।’ मानव ने कहा, ‘हां सुनीता, तुम मेरी हो। तुम्हारी चूत मेरी है।
एक घंटे तक दोनों ने विभिन्न पोजीशन्स आजमाईं। डॉगी स्टाइल में मानव ने उनके गांड पर थप्पड़ मारे। सुनीता की चीखें कमरे में गूंज रही थीं। आखिरकार मानव ने झड़ दिया। कंडोम में स्पर्म भर गया।
दोनों थककर लेट गए। सुनीता ने मानव के होंठ चूमें और बोलीं, ‘मानव, तुम मेरी जिंदगी के साथी हो। ये रात कभी भूलूंगी नहीं।’ मानव ने कहा, ‘मैं भी। हर वीकेंड मिलेंगे।
इस तरह उनका रिश्ता शुरू हो गया। हर वीकेंड वे मिलते। कभी मानव के फ्लैट पर, कभी सुनीता के घर पर, जब बच्चे स्कूल में होते।
पहले वीकेंड पर सुनीता मानव के फ्लैट पर आईं। इस बार उन्होंने रेड कलर की सलवार कमीज पहनी थी। कमीज टाइट थी, जो उनके कर्व्स दिखा रही थी। मानव ने दरवाजा खोला और उन्हें अंदर खींच लिया।
सुनीता, तुम्हें देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया।’ सुनीता हंसकर बोलीं, ‘तो उतार दो मेरे कपड़े और संभाल लो।’ मानव ने कमीज ऊपर की। ब्रा हटाई। स्तनों को मुंह में लिया। सुनीता सिसकारियां भर रही थीं। ‘मानव, चूसो जोर से। दांतों से काटो।’
सलवार उतारी। पैंटी गीली थी। मानव ने चूत पर जीभ फेरी। सुनीता कांप गईं। ‘आह, कितना अच्छा। चाटो मेरी चूत।’ मानव ने चूत चाटी, क्लिटोरिस को चूसा। सुनीता का शरीर कांप रहा था। फिर मानव ने लंड डाला।
इस बार बिना कंडोम के, लेकिन सुनीता ने कहा, ‘सावधान रहना, गर्भ नहीं होना चाहिए।’ वे मिशनरी पोज में थे। मानव के धक्कों से सुनीता चिल्ला रही थीं। ‘चोदो मानव, फाड़ दो इस चूत को। तुम्हारा लंड कितना सख्त है।’ एक घंटे की मस्ती के बाद दोनों नहाने गए। शावर में फिर से चुंबन हुए।
दूसरे वीकेंड पर सुनीता ने अपने घर बुलाया। बच्चे दादी के पास थे। घर साफ-सुथरा था। सुनीता ने ब्लैक नाइटी पहनी थी। मानव आया तो सीधे बेडरूम में ले गईं। ‘आज मैं तुम्हें खुश करूंगी।
सुनीता ने मानव को लिटाया और लंड मुंह में लिया। ब्लोजॉब देना शुरू किया। जीभ से चाटा, चूसा। मानव सिसकारा, ‘सुनीता, तुम्हारा मुंह जन्नत है।’ फिर मानव ने उन्हें उल्टा किया। 69 पोजिशन में चूत चाटी और लंड चूसा गया।
फिर डॉगी स्टाइल में चुदाई। मानव ने गांड पर हाथ मारा। सुनीता बोलीं, ‘हां, मारो। मैं तुम्हारी रंडी हूं।’ धक्के तेज हुए। सुनीता की चूत से रस बह रहा था। ‘मानव, झड़ जाओ अंदर। आज सेफ है।’ मानव ने स्पर्म छोड़ा। दोनों लिपटकर सो गए। सुबह फिर से सेक्स।
इस तरह महीनों बीत गए। तीसरे महीने में वे एक ट्रिप पर गए। लोनावला के रिसॉर्ट में। रास्ते में कार में ही सुनीता ने मानव का लंड सहलाया। रिसॉर्ट पहुंचे तो पूल साइड पर। सुनीता ने बिकिनी पहनी।
मानव की आंखें भर गईं। रूम में जाकर दोनों नंगे हो गए। मानव ने सुनीता को दीवार से सटाकर चोदा। ‘आह मानव, यहां तो कोई सुन लेगा।’ लेकिन सुनीता खुद चिल्ला रही थीं। रात भर विभिन्न पोज – काउगर्ल, रिवर्स काउगर्ल।
सुनीता ऊपर बैठकर लंड पर उछल रही थीं। स्तन हिल रहे थे। मानव ने निप्पल्स पकड़े। ‘हां, दबाओ। चोदो मुझे।’
छठे महीने तक उनका रिश्ता गहरा हो गया। सुनीता ने कहा, ‘मानव, मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं। सिर्फ सेक्स नहीं।’ मानव ने जवाब दिया, ‘मैं भी। तुम मेरी जिंदगी हो।’ वे अब रोज बातें करते।
सेक्स के अलावा डिनर डेट्स, वॉक। लेकिन सेक्स हमेशा हॉट रहता। एक बार किचन में, सुनीता कुकिंग कर रही थीं। मानव पीछे से आया, साड़ी ऊपर की और चूत में लंड डाल दिया।
मानव, क्या कर रहे हो।’ लेकिन सुनीता पीछे की ओर झुक गईं। धक्के लगे। काउंटर पर टेक लगाकर चुदाई।
नौवें महीने में सुनीता के बच्चे घर पर थे। लेकिन वे चुपके से बेडरूम में मिले। जोश में मानव ने गांड मारी। पहली बार एनल सेक्स। सुनीता दर्द से चीखीं, लेकिन फिर मजा आया। ‘मानव, धीरे। लेकिन जारी रखो।’ लुब्रिकेंट लगाकर पूरा लंड अंदर। सुनीता की गांड टाइट थी। धक्कों से कमरा गूंजा।
बारहवें महीने तक सब ठीक था। लेकिन फिर सुनीता का ट्रांसफर हो गया फरीदाबाद। दोनों उदास हो गए। आखिरी मुलाकात में भावुक सेक्स। सुनीता रोते हुए बोलीं, ‘मानव, तुम्हें भूलूंगी नहीं।’ मानव ने कहा, ‘नया बॉयफ्रेंड बना लो। खुश रहो।’ वे जुदा हो गए।
मानव आज भी नवी मुंबई में है। ये कहानी नाम बदलकर शेयर की। अगर कोई महिला संपर्क करना चाहे, तो करे।