दोस्त की माँ के साथ चुदाई

(Dost Ki Maa Ke Saath Chudayi)

मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी जिंदगी में ऐसा कुछ होगा। मेरा नाम अभय है, और मैं एक साधारण सा छात्र हूं।

मेरी उम्र 20 साल है, और मैं मुंबई के एक कॉलेज में बीएससी का छात्र हूं। कॉलेज की पढ़ाई के अलावा, मैं अपने दोस्तों के साथ समय बिताता हूं।

मेरा सबसे अच्छा दोस्त है रोहन। हम दोनों बचपन से साथ पढ़ते आ रहे हैं। रोहन का घर मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है, और अक्सर मैं उसके घर जाकर पढ़ाई करता हूं।

लेकिन आज जो मैं आपको बताने जा रहा हूं, वो रोहन के घर से जुड़ी एक ऐसी घटना है, जो मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल गई।

रोहन की मां का नाम शालिनी है। शालिनी आंटी की उम्र करीब 42 साल है, लेकिन वो इतनी खूबसूरत और फिट लगती हैं कि कोई भी 30 साल की लड़की उनसे ईर्ष्या कर ले।

उनके लंबे काले बाल, गोरी त्वचा, और परफेक्ट फिगर देखकर कोई भी आदमी उनका दीवाना हो जाए।

शालिनी आंटी एक हाउसवाइफ हैं, लेकिन वो योगा करती हैं और खुद को हमेशा फिट रखती हैं। उनके स्तन बड़े और गोल हैं, कमर पतली, और गांड इतनी शेप्ड कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए।

रोहन के पिता एक बिजनेसमैन हैं, जो अक्सर बाहर रहते हैं। इसलिए घर पर ज्यादातर शालिनी आंटी और रोहन ही होते हैं।

ये बात पिछले साल की है। गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं, और कॉलेज बंद था। रोहन और मैं एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, इसलिए रोज उसके घर जाते। एक दिन दोपहर को,

हम दोनों रोहन के कमरे में बैठे प्रोजेक्ट पर डिस्कस कर रहे थे। बाहर बहुत गर्मी थी, और शालिनी आंटी ने हमें नींबू पानी दिया था। ‘बेटा, गर्मी बहुत है। पानी पी लो, वरना बीमार हो जाओगे,’ उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।

मैंने धन्यवाद कहा, ‘थैंक यू आंटी। आपका नींबू पानी तो कमाल का है।’

शालिनी आंटी हंस पड़ीं, ‘अरे अभय, तू तो हमेशा तारीफ करता रहता है। रोहन, तू भी अपने दोस्त से सीख।’

रोहन ने मजाक में कहा, ‘मां, अभय तो चापलूस है। लेकिन हां, पानी अच्छा है।’

हम हंसने लगे। फिर रोहन को फोन आया, उसके एक दोस्त ने बुलाया। ‘अभय, मैं थोड़ी देर में आता हूं। तू इंतजार कर।’

रोहन चला गया, और मैं अकेला रह गया। मैं प्रोजेक्ट के नोट्स देख रहा था, तभी शालिनी आंटी कमरे में आईं। वो एक साड़ी पहने हुए थीं, जो थोड़ी ट्रांसपेरेंट लग रही थी।

उनके ब्लाउज से उनके स्तन की शक्ल साफ दिख रही थी। ‘अभय, रोहन कब लौटेगा?’ उन्होंने पूछा।

मैंने कहा, ‘आंटी, जल्दी आ जाएगा। मैं इंतजार कर रहा हूं।’

शालिनी आंटी पास आकर बैठ गईं। उनकी खुशबू से मेरा दिल धड़कने लगा। ‘तू इतना मेहनती है अभय। रोहन को भी तुझसे सीखना चाहिए। तू कोई गर्लफ्रेंड रखता है क्या?’

मैं शरमाया, ‘नहीं आंटी, अभी पढ़ाई पर फोकस है।’

वो हंसकर बोलीं, ‘अरे, जवान हो, थोड़ा मजा भी तो करो। मैं तो रोहन के पापा से शादी के बाद ही सब सीखी।’

उनकी बातों से मेरा मन डगमगा गया। तभी अचानक बिजली चली गई। कमरा अंधेरा हो गया। शालिनी आंटी चीखीं, ‘अरे, लाइट चली गई। गर्मी तो मार डालेगी।’

मैंने कहा, ‘आंटी, मैं कैंडल ले आता हूं।’

लेकिन बाहर बारिश शुरू हो गई। मैं बाहर नहीं जा सका। हम दोनों कमरे में ही बैठे रहे। अंधेरे में शालिनी आंटी की सांसें सुनाई दे रही थीं। धीरे-धीरे हमारी बातें शुरू हुईं।

‘अभय, तू अकेला रहता है ना? घर पर कोई नहीं?’

‘हां आंटी, मम्मी-पापा गांव में हैं।’

‘फिर तू अकेला कैसे रहता होगा? कोई जरूरत हो तो आंटी से कहना।’

उनकी आवाज इतनी प्यारी थी कि मेरा लंड खड़ा होने लगा। अंधेरे का फायदा उठाकर मैंने उनका हाथ छुआ। वो चौंकीं, लेकिन हटाया नहीं। ‘आंटी, आप बहुत खूबसूरत हैं।’

शालिनी आंटी की सांस तेज हो गई। ‘अभय, ये क्या कह रहा है तू? मैं तो तेरी आंटी हूं।’

लेकिन मैं रुक नहीं सका। मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा। अंधेरे में हमारे होंठ मिल गए। शालिनी आंटी ने पहले विरोध किया, लेकिन फिर जवाब देना शुरू कर दिया।

उनके होंठ गर्म और नरम थे। हम किस करते रहे। मेरी जीभ उनके मुंह में चली गई।

‘अभय, ये गलत है। रोहन आ जाएगा,’ वो फुसफुसाईं।

‘आंटी, प्लीज। कोई नहीं जानता,’ मैंने कहा और उनके स्तनों को छुआ। ब्लाउज के ऊपर से ही उनके मम्मे इतने सख्त लग रहे थे।

शालिनी आंटी सिसकारी भरने लगीं। ‘आह अभय, मत छू। लेकिन… कितना अच्छा लग रहा है।’

मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया। अंधेरे में उनके निप्पल्स को महसूस किया। मैंने चूसना शुरू किया। शालिनी आंटी चीखीं, ‘ओह! सख्त चूसो बेटा। कितने दिनों बाद किसी ने छुआ।’

रोहन के पापा बाहर रहते हैं, इसलिए शालिनी आंटी लंबे समय से सेक्स से दूर थीं। मैंने उनकी साड़ी ऊपर की और पैंटी में हाथ डाला। उनकी चूत गीली हो चुकी थी। ‘आंटी, आप कितनी वेट हो गईं।’

‘हां अभय, मुझे चोद दे। तेरी लंड चाहिए,’ वो बोलीं।

मैंने अपना पैंट उतारा। मेरा लंड 8 इंच का था, मोटा और खड़ा। शालिनी आंटी ने उसे पकड़ा। ‘वाह बेटा, कितना बड़ा है। रोहन के पापा से भी ज्यादा।’

उन्होंने लंड चाटना शुरू किया। उनकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी। ‘मम्म, स्वादिष्ट लंड है।’

फिर मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। उनकी पैंटी उतारी। उनकी चूत बालों वाली थी, लेकिन गीली और गुलाबी। मैंने जीभ डाली। शालिनी आंटी कराहने लगीं, ‘आह! चाटो मेरी चूत। कितना मजा आ रहा है।’

मैंने चूत चाटी, क्लिट को चूसा। वो चिल्ला रही थीं, ‘हां, येस! मैं झड़ने वाली हूं।’

वो झड़ गईं, उनका रस मेरे मुंह में आ गया। फिर मैंने लंड उनकी चूत पर रगड़ा। ‘आंटी, तैयार हैं?’

‘हां बेटा, अंदर डाल। जोर से चोद।’

मैंने धक्का दिया। शालिनी आंटी की चूत टाइट थी। ‘आह! दर्द हो रहा है, लेकिन अच्छा दर्द।’

मैं अंदर-बाहर करने लगा। धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। उनके स्तन उछल रहे थे। मैंने चूसे। शालिनी आंटी चीख रही थीं, ‘फास्ट अभय, जोर से ठोक। तेरी लंड मेरी चूत को फाड़ रही है।’

हम पागलों की तरह चुदाई कर रहे थे। बेड हिल रहा था। आखिरकार मैं झड़ गया। मेरा रस उनकी चूत में भर गया।

हम दोनों पसीने से तर लेटे रहे। शालिनी आंटी बोलीं, ‘अभय, ये तो कमाल था। लेकिन ये हमारा राज रहेगा।’

मैंने कहा, ‘हां आंटी, लेकिन फिर से करना है।’

लाइट आ गई, लेकिन रोहन अभी नहीं आया था। हम कपड़े पहन लिए। रोहन आया तो सब नॉर्मल लग रहा था।

अगले दिन फिर वही हुआ। रोहन गया, और शालिनी आंटी ने मुझे बुलाया। ‘अभय, कल रात सो न सकी। आ जा मेरे कमरे में।’

मैं गया। वो नंगी लेटी थीं। ‘आज कुछ नया ट्राई करेंगे। मेरी गांड मारो।’

मैं हैरान, ‘आंटी, गांड?’

‘हां बेटा, तेरे रोहन के पापा कभी नहीं करते। आज तू कर।’

मैंने थूक लगाया और धीरे से लंड डाला। शालिनी आंटी चीखीं, ‘आह! बहुत टाइट है। स्लो।’

धीरे-धीरे वो एंजॉय करने लगीं। ‘अब फास्ट। जोर से गांड मार।’

मैंने जोर-जोर से ठोके। उनकी गांड मेरे लंड को निचोड़ रही थी। शालिनी आंटी चिल्ला रही थीं, ‘ओह फक! कितना मजा। मैं फिर झड़ रही हूं।’

मैंने गांड में रस छोड़ा। इसके बाद हम रोज मिलने लगे। जब रोहन स्कूल जाता, तो शालिनी आंटी मुझे बुला लेतीं। हम किचन में, बाथरूम में, हर जगह चुदाई करते।

एक दिन शालिनी आंटी ने कहा, ‘अभय, आज मेरी सहेली रानी आ रही है। वो भी विधवा है। क्या तू उसे भी संभाल सकता है?’

मैं उत्साहित, ‘हां आंटी, ट्राई तो कर लूं।’

रानी आंटी आईं। वो भी 40 की थीं, लेकिन हॉट। लंबी स्कर्ट में उनकी टांगें दिख रही थीं। शालिनी ने उन्हें बताया। रानी शरमाईं, ‘शालिनी, ये ठीक?’

‘हां रानी, अभय कमाल का है। देख।’

मैंने अपना लंड दिखाया। रानी ने पकड़ा, ‘वाह, कितना मोटा।’

शुरू हो गया थ्रीसम। शालिनी मेरी गेंदें चाट रही थीं, रानी लंड चूस रही थी। फिर मैंने रानी को चोदा। उनकी चूत ढीली थी, लेकिन मजा आया। ‘अभय, जोर से चोद।’

शालिनी चूत चाट रही थीं। हम तीनों मिलकर चुदाई कर रहे थे। रानी चीख रही थीं, ‘हां, फक मी हार्ड।’

मैंने दोनों को संतुष्ट किया। रस दोनों के मुंह में दिया।

इसके बाद रानी भी नियमित आने लगी। रोहन को शक नहीं हुआ। लेकिन एक दिन रोहन के पापा घर आए। उन्होंने देख लिया। ‘ये क्या हो रहा है?’

शालिनी रो पड़ीं। लेकिन पापा ने कहा, ‘मैं बाहर रहता हूं, तू अकेली है। चल, अभय को रख। लेकिन राज रखना।’

तो अब सब खुश। मैं रोहन का दोस्त हूं, और शालिनी आंटी का लवर। हमारी चुदाई जारी है।