बी.ए. की वार्षिक परीक्षा का तीसरा दिन था। हॉल में सत्तर से ज्यादा छात्र बैठे थे। हवा में पेन की खरोंच और घड़ी की टिक-टिक की आवाज़ें गूंज रही थीं। रिया मंच पर खड़ी थीं। उनकी उम्र चौबीस साल थी। एम.ए. और बी.एड. के बाद वे पार्ट-टाइम लेक्चरर की नौकरी कर रही थीं। सफेद कुर्ता और काली सलवार में उनका कद दुबला-पतला था। बालों को एक साधारण चोटी में बांधा हुआ था।
वे धीरे-धीरे कतारों के बीच चल रही थीं। अचानक उनकी नजर राजन पर पड़ी। राजन उर्फ राजा, छब्बीस-सत्ताईस साल का, मोटा-तगड़ा, महंगे कपड़ों में। उसकी आंखें उत्तर पुस्तिका से हटकर खुली किताब पर थीं। रिया रुकीं। उन्होंने राजन के पास जाकर किताब और उत्तर पुस्तिका दोनों जब्त कर लीं। राजन ने सिर उठाया। उसकी आंखें संकरी हो गईं।
“मैडम, क्या कर रही हैं?” राजन ने धीमी लेकिन सख्त आवाज में कहा।
“नकल करते पकड़ा है।” रिया ने जवाब दिया।
“ये मेरी किताब है।” राजन ने हाथ बढ़ाकर उत्तर पुस्तिका पकड़ने की कोशिश की। रिया ने पीछे हटकर किताब दूसरे शिक्षक को सौंप दी।
“चेतावनी दी थी ना मुझे।” दूसरे शिक्षक ने फुसफुसाकर कहा।
राजन ने रिया की ओर देखा। “तुमने गलती की।” उसने कहा।
परीक्षा खत्म होने के बाद रिया स्टाफ रूम में गईं। राजन बाहर खड़ा था। जैसे ही रिया निकलीं, राजन ने उनका हाथ पकड़ लिया।
“तुमने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी।” राजन ने कहा।
“तुमने नियम तोड़े।” रिया ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की।
राजन ने रिया के स्तन पर हाथ रख दिया। “ये देखो, ये छूना पसंद है क्या?” उसने जोर से दबाया।
रिया ने जोर से चीख मारी। “छोड़ो मुझे!”
“अगर प्रिंसिपल को शिकायत की तो देख लेना।” राजन ने कान में फुसफुसाया। “मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूंगा।”
रिया प्रिंसिपल के ऑफिस में गईं। उन्होंने पूरी घटना बताई। प्रिंसिपल ने अन्य शिक्षकों को बुलाया। दो गवाह भी आए जिन्होंने राजन को नकल करते देखा था।
“राजन को परीक्षा से निष्कासित किया जाता है।” प्रिंसिपल ने आदेश दिया। “और कॉलेज में उसकी एंट्री बंद।”
राजन को सूचना दी गई। वह गुस्से में चला गया।
दस दिन बाद रिया बी.एससी. प्रैक्टिकल की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के बाद देर शाम निकलीं। कॉलेज शहर से तीन किलोमीटर दूर था। आसपास कोई बस्ती नहीं थी। बस स्टॉप सूना पड़ा था।
रिया अंधेरे रास्ते पर चल रही थीं। अचानक पीछे से एक आदमी ने उनके मुंह पर मीठी महक वाला रुमाल दबा दिया। रिया ने हाथ-पैर मारने की कोशिश की लेकिन कुछ सेकंड में बेहोश हो गईं।
जब रिया की आंखें खुलीं तो वे एक अंधेरे हॉल में लकड़ी के मंच पर नंगी पड़ी थीं। ऊपर एक ही पीला बल्ब जल रहा था। हॉल में नमी की बदबू थी। रिया ने अपने शरीर को ढकने की कोशिश की लेकिन हाथ बंधे थे।
राजन मंच पर आया। उसने रिया के बाल पकड़कर खींचा। “जाग गई?” उसने जबरन रिया के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। जीभ जबरदस्ती मुंह में डाली।
“आज मेरी गैंग तुम्हारे शरीर को कुचलेगी।” राजन ने कहा।
सात और नंगे आदमी मंच के चारों तरफ खड़े हो गए। सबके लिंग खड़े थे। आकार अलग-अलग लेकिन सब तनाव में थे।
रिया ने अचानक हाथ छुड़ाने की कोशिश की। वे मंच से कूदकर भागने लगीं। लेकिन दो आदमियों ने उन्हें पकड़ लिया। एक ने जोरदार थप्पड़ मारा। रिया का सिर घूम गया।
“भागने की कोशिश मत कर।” राजन ने कहा।
उन्होंने रिया को घुटनों के बल बैठा दिया।
राजन ने रिया के सामने खड़े होकर अपने लिंग को रिया के मुंह के पास लाया। लिंग से पेशाब की हल्की बदबू आ रही थी। राजन ने रिया के जबड़े दबाकर मुंह खोला और लिंग अंदर ठूंस दिया।
“चूस।” राजन ने आदेश दिया।
रिया ने सिर हिलाने की कोशिश की लेकिन राजन ने बाल पकड़कर सिर आगे-पीछे किया। लिंग गले तक पहुंच गया। रिया का दम घुटने लगा।
बाकी आदमी रिया के स्तनों को मसलने लगे। निप्पलों को उंगलियों से दबाया।
उन्होंने रिया को मंच पर पीठ के बल लिटा दिया। राजन ने रिया की टांगें ऊपर उठाईं। लिंग को योनि के मुंह पर रखा और जोर से धक्का दिया।
कुंवारी झिल्ली फट गई। खून बहने लगा। राजन ने लिंग बाहर निकाला और खून दिखाया।
“देखो, ये कुंवारी थी।” राजन ने बाकियों को बताया।
फिर राजन ने फिर से लिंग अंदर डाला और जोर-जोर से चोदने लगा। रिया चीख रही थी।
राजन ने रिया को घुटनों के बल कर दिया। एक आदमी ने आगे से मुंह में लिंग डाल दिया। राजन ने पीछे से योनि में लिंग घुसा दिया।
दोनों तरफ से धक्के लगने लगे। रिया का शरीर आगे-पीछे हो रहा था।
रिया को खड़ा किया गया। एक आदमी ने उन्हें गोद में उठा लिया। लिंग योनि में घुसा। पीछे से दूसरे आदमी ने गुदा में लिंग डाला।
दोहरा प्रवेश हो गया। रिया चीखने लगी। तीसरा आदमी मुंह में लिंग डाल दिया। दो और लिंग हाथों में थमा दिए गए।
पांचों जगह एक साथ चोदे जाने लगे।
सब आदमी बारी-बारी से रिया के शरीर का इस्तेमाल करते रहे। योनि और गुदा पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया। हर बार नया आदमी आता और पुराना थक जाता।
रिया का शरीर वीर्य से लथपथ हो गया। सुबह तक उनकी हालत खराब हो चुकी थी। वे बेहोश हो गईं।
सुबह जब रिया होश में आईं तो हॉल खाली था। वे नंगी पड़ी थीं। आसपास फटी हुई कपड़े पड़े थे। रिया ने उन्हें पहनकर बाहर निकलने की कोशिश की।
वे घंटों चलती रहीं। आखिरकार बस स्टॉप पहुंचीं और घर लौटीं।