मेरा नाम अभय है। उम्र उन्नीस साल। देहरादून में रहता हूँ। लंड की लंबाई सात इंच। आज मैं अपनी पहली सेक्स स्टोरी लिख रहा हूँ।
मेरी भाभी की उम्र बत्तीस साल है। उनका फिगर ३६-३०-३८। मेरे चचेरे भाई की पत्नी।
भाई बेंगलुरु में रहते हैं लेकिन अचानक काम के सिलसिले में बाहर चले गए। भाभी अकेली देहरादून में ससुराल में रह रही थीं।
भाभी के पति गे हैं। उन्हें पुरुषों के साथ एनल सेक्स पसंद है। वे भाभी की चूत को कभी-कभार ही चोदते थे।
उन्होंने भाभी को खुली छूट दी हुई थी कि वे किसी से भी चुदवा सकती हैं। भाभी महीनों से चूत की भूखी थीं। फरवरी से उनकी चूत को किसी ने नहीं छुआ था।
एक दिन भाभी का सैड स्टेटस देखकर मैंने उनको रिप्लाई किया। बात शुरू हुई। धीरे-धीरे हम चैटिंग में ही प्यार करने लगे।
फिर फोन सेक्स शुरू हो गया। एक बार वीडियो कॉल पर भाभी ने अपनी ३६ इंच की मोटी-मोटी गांड और भारी-भारी चूचियाँ दिखाईं।
मैंने भी अपना सात इंच का खड़ा लंड दिखाया।
रात के बारह बजे भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। पूरा घर सो चुका था।
मैं चुपके से उनके कमरे में घुसा। भाभी ने दरवाजा बंद किया और मुझे गले लगा लिया।
हम दोनों के होंठ आपस में टकराए। मैंने उनकी जीभ चूसनी शुरू कर दी।
मेरे हाथ उनकी टी-शर्ट के ऊपर से ही उनकी ३६ इंच की मोटी चूचियों को दबाने लगे।
भाभी साँस लेने लगीं। मैंने उनकी टी-शर्ट ऊपर खींची और गुलाबी ब्रा खोल दी।
उनकी नंगी चूचियाँ सामने आ गईं। निप्पल सख्त खड़े थे। मैंने एक चूची मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
दूसरी चूची को हाथ से मसल रहा था। भाभी का सिर पीछे झुक गया।
मैंने उनकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से काटा और चूसा। भाभी की साँसें तेज हो गईं।
मैंने हाथ नीचे सरकाया और उनकी चूत पर हाथ रखा। पैंटी पहले से ही गीली थी।
मैंने पैंटी के अंदर उंगली डाली। भाभी की चूत पूरी तरह गीली और गर्म थी।
दो उंगलियाँ अंदर डालकर मैंने उनकी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया। भाभी कराहने लगीं।
मैं नीचे झुका और उनकी चूत के पास पहुँच गया। भाभी ने कभी भी चूत चटवाने का मजा नहीं लिया था।
मैंने उनकी जांघें खोलीं और जीभ से उनकी चूत चाटनी शुरू कर दी। पहले धीरे-धीरे, फिर तेजी से। भाभी का शरीर काँपने लगा।
उन्होंने मेरे बालों में हाथ डालकर मेरा सिर अपनी चूत में दबा लिया। मैंने उनकी चूत के अंदर जीभ घुसा दी और चूसने लगा। भाभी जोर-जोर से चीखने लगीं।
थोड़ी देर बाद भाभी ने मुझे ऊपर खींचा। उन्होंने मेरी अंडरवीयर उतारी।
मेरा सात इंच का लंड सामने आ गया। भाभी ने उसे हाथ में लिया और एक झटके में अपनी चूत में बैठ गईं। उनका पूरा लंड अंदर चला गया। भाभी चीख पड़ीं।
वे मेरे ऊपर सवार होकर ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी ३८ इंच की गांड मेरे लंड पर थप्पड़ मार रही थी।
दस मिनट तक भाभी मुझे चोदती रहीं। फिर मैंने उन्हें पलटा और मिशनरी पोजीशन में आ गया।
मैंने उनकी जांघें खोलीं और जोर-जोर से चोदने लगा। मेरा लंड उनकी गीली चूत में आसानी से घुस-घुसकर निकल रहा था।
भाभी के मुँह से “आह… अभय… और जोर से…” की आवाजें आ रही थीं।
भाभी पहले झड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ गया। मेरा गरम-गरम वीर्य उनकी चूत में भर गया। भाभी ने मुझे गले लगा लिया।
दूसरा राउंड शुरू हुआ। भाभी ने मेरा लंड मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
वे मेरे लंड को पूरा मुँह में लेकर चूस रही थीं। पंद्रह मिनट तक भाभी ने मेरे लंड को चूसा। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।
इस बार मैंने भाभी को कुत्ते वाली पोजीशन में डाला। मैंने उनके बाल पकड़कर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।
भाभी की ३८ इंच की गांड मेरे सामने लहरा रही थी। मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे। फिर उन्हें पीठ के बल लिटाया और उनकी जांघें कंधों पर रखकर चोदने लगा।
भाभी फिर से चीखने लगीं। “अभय… मेरी चूत फाड़ दो…” मैंने रफ्तार बढ़ा दी।
भाभी का दूसरा ऑर्गेज्म आ गया। उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। मैं भी झड़ गया। दूसरी बार मेरा वीर्य उनकी चूत में भर गया।
हम दोनों थककर एक-दूसरे की बाहों में सो गए। सुबह उठकर मैंने भाभी को किस किया और चुपके से अपने कमरे में चला आया।
भाभी ने बताया कि अगर वे बेंगलुरु में होतीं तो सत्तर लंड चुदवा चुकी होतीं। मैंने मजाक में कहा कि मैं पहले छह चूतें चोद चुका हूँ और वे मेरी सातवीं हैं।
भाभी ने कहा कि अगर मैं उनकी चूत की प्यास बुझा दूँ तो वे मुझे अपनी गांड भी चुदवाएंगी। उन्होंने अपने पति के गे होने और एनल सेक्स की बात भी बताई।
मैंने भाभी से वादा किया कि जब वे मेरे लंड से संतुष्ट हो जाएंगी तो मैं उनके लिए और लंड अरेंज करूँगा।
भाभी की गैंगबैंग की फैंटेसी पूरी करने का प्लान बनाने लगा।
रात भर हमने दो बार चुदाई की। दोनों बार मैंने भाभी की चूत में वीर्य छोड़ा।
भाभी की महीनों की प्यास बुझ गई। अब वे हर रात मुझे अपने कमरे में बुलाती हैं।