मेरा नाम मोहनी है। मैं एक 28 साल की औरत हूं, जो अपनी जिंदगी में कई रोमांचक किस्से देख चुकी हूं। आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रही हूं जो मैंने खुद देखी थी। ये कहानी एक नवविवाहित कपल की है, जो बस में मिले और साथ ही सेक्सी मजे लेने लगे। हां, आपने सही सुना – बस में! वो भी एक भीड़भाड़ वाली सरकारी बस में, जहां लोग कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। मैं उस दिन दिल्ली से हरिद्वार जा रही थी, तीर्थयात्रा पर। बस रात की थी, लंबी यात्रा।
मैं सीट पर बैठी थी, लेकिन बस फुल थी। तभी बस स्टैंड पर एक जोड़ा चढ़ा – नवविवाहित लग रहे थे। लड़का शायद 25-26 का, लंबा, स्मार्ट, शादी का सूट पहना था लेकिन थोड़ा मैला। लड़की उसके बगल में, लाल साड़ी में लिपटी, मंगलसूत्र चमक रहा था, सिंदूर लगे माथे पर। दोनों हनीमून पर जा रहे लगते थे। कोई सीट नहीं मिली, तो वो पीछे खड़े हो गए, मेरी सीट के पास ही।
मैंने देखा, लड़का का नाम राहुल था, लड़की का नेहा। वो थोड़ा-बहुत बात कर रहे थे, लेकिन बस की हलचल में। राहुल ने नेहा को अपनी बाहों में लिया, जैसे संभाल रहा हो। नेहा शरमाती हुई उसके सीने से लग गई। बस चली, रास्ता ऊबड़-खाबड़ था, हर झटके पर लोग एक-दूसरे से टकराते। मैंने नोटिस किया कि राहुल का हाथ नेहा की कमर पर सरक रहा था। धीरे-धीरे नीचे, उसकी गांड पर। नेहा ने मुस्कुरा दिया, लेकिन कुछ बोली नहीं। भीड़ में कोई नोटिस नहीं कर रहा था।
राहुल ने नेहा के कान में कुछ फुसफुसाया। नेहा की सांसें तेज हो गईं। उसका हाथ राहुल की शर्ट के अंदर घुस गया, छाती सहला रही थी। राहुल का लंड पैंट में उभरने लगा। मैं सीट से देख रही थी, दिल धड़क रहा था। क्या ये हो रहा है? बस में? राहुल ने नेहा की साड़ी का पल्लू थोड़ा सा सरका दिया, ब्लाउज के ऊपर से चूचियां दबाईं। नेहा ने आंखें बंद कर लीं, होंठ काटे। ‘राहुल… यहां नहीं,’ वो धीरे से बोली, लेकिन उसकी आवाज में उत्साह था। राहुल ने कहा, ‘शशश… बस थोड़ा मजा लो। कोई नहीं देखेगा।’
बस के झटके ने नेहा को राहुल के ऊपर धकेल दिया। अब नेहा का मुंह उसके गले पर था। वो चूमने लगी, हल्के से काटने लगी। राहुल का हाथ साड़ी के अंदर चला गया, पेटीकोट ऊपर किया। उंगली से चूत को छुआ। नेहा गीली हो गई तुरंत। ‘आह… राहुल,’ वो सिसकी। मैंने देखा, नेहा की टांगें थोड़ी फैल गईं। राहुल ने दो उंगलियां अंदर डाल दीं, धीरे-धीरे हिलाने लगा। बस की आवाज में वो आवाजें दब गईं। नेहा का चेहरा लाल हो गया, सांसें उखड़ी हुईं।
अचानक बस रुकी, कोई चढ़ा-उतरा। लेकिन वो नहीं रुके। राहुल ने नेहा को घुमाया, अब वो उसके सामने खड़ी थी, पीठ राहुल की तरफ। राहुल ने अपनी पैंट का जिपर खोला, लंड बाहर निकाला। मोटा, लंबा, शादी की वजह से शायद पहली बार इस्तेमाल हो रहा था। नेहा ने पीछे देखा, मुस्कुराई। राहुल ने साड़ी ऊपर की, पैंटी साइड की और लंड का सिरा चूत पर रगड़ा। नेहा ने झुककर सहारा लिया, मेरी सीट की बैकरेस्ट पकड़ी। ‘डालो ना… जल्दी,’ नेहा फुसफुसाई। राहुल ने धक्का दिया। पूरा लंड अंदर। नेहा की चीख दब गई, लेकिन आंखें बंद हो गईं।
बस फिर चली। हर झटके पर राहुल लंड अंदर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से। नेहा की चूत से रस टपक रहा था, टांगों पर। राहुल ने एक हाथ से चूची मसली, दूसरा से कमर पकड़ी। ‘तेरी चूत कितनी टाइट है नेहा… सुहागरात का मजा तो कल था, आज बस में,’ राहुल बोला। नेहा ने पीछे मुड़कर किस किया। ‘तुम्हारा लंड इतना मस्त… फक मी हार्डर।’ भीड़ में लोग सो रहे थे या खिड़की देख रहे थे। कोई शक नहीं कर रहा था। मैं खुद सिहर रही थी, लेकिन देखती रही।
ये सिलसिला चला। राहुल ने स्पीड बढ़ाई। लंड तेजी से पेल रहा था। नेहा की गांड हिल रही थी, साड़ी गीली हो गई। ‘कम करने वाला हूं… अंदर?’ राहुल पूछा। नेहा ने हां कहा। राहुल ने जोर से धक्का दिया, वीर्य छोड़ दिया। नेहा भी कांप गई, ऑर्गेज्म आया। दोनों हांफ रहे थे। राहुल ने लंड निकाला, पैंट ठीक की। नेहा ने साड़ी संभाली। लेकिन रात लंबी थी।
कुछ देर बाद, बस फिर झटके लेने लगी। नेहा अब राहुल के सामने घूम गई। उसने राहुल का लंड फिर पकड़ा, पैंट से बाहर। मुंह में ले लिया। बस की लाइट धीमी थी, लेकिन मैं देख पा रही थी। नेहा चूस रही थी, जीभ घुमा रही। राहुल का सिर पीछे, आंखें बंद। ‘साली… तू तो प्रो हो गई एक रात में,’ राहुल हंसा। नेहा ने ऊपर-नीचे किया, गले तक लिया। सलाइवा टपक रहा था। राहुल ने उसके बाल पकड़े, मुंह में पेला। नेहा गग कर रही थी, लेकिन रुकी नहीं।
फिर राहुल ने नेहा को ऊपर उठाया। अब नेहा की टांगें राहुल की कमर पर लपेटीं। स्टैंडिंग पोजिशन में। राहुल ने लंड फिर चूत में डाला। नेहा लटक गई उसके ऊपर। बस के झटकों से खुद-ब-खुद धक्के लग रहे थे। ‘ओह येस… ऐसे ही,’ नेहा चीखी धीरे से। राहुल ने गांड पकड़ी, ऊपर-नीचे किया। चूचियां ब्लाउज से बाहर, राहुल चूस रहा था। निप्पल्स कड़े, लाल। नेहा का रस बह रहा था, फर्श पर टपक।
मैंने सोचा, ये तो पागल हैं। लेकिन मजा आ रहा था देखकर। अचानक एक औरत जागी, लेकिन कुछ समझ नहीं पाई। वो फिर सो गई। राहुल ने नेहा को नीचे उतारा, डॉगी स्टाइल जैसा बनाया। नेहा झुक गई, हाथ मेरी सीट पर। राहुल पीछे से ठोका। गांड पर थप्पड़ मारे। ‘तेरी गांड भी मारूं?’ राहुल बोला। नेहा ने हां कहा। पहले उंगली से खोला, फिर लंड डाला। नेहा दर्द से सिसकी, लेकिन ‘हां… मारो’ बोली। राहुल ने गांड मारी, तेजी से। नेहा की चीखें दबी हुईं।
रात भर ये चला। कभी मुंह में, कभी चूत में, कभी गांड में। बस के हर स्टॉप पर रुकते, लेकिन मजे नहीं रुके। सुबह होने लगी, तो वो थक गए। नेहा की साड़ी मैली, चेहरा चमकदार। राहुल ने उसे चूमा। ‘बेस्ट हनीमून,’ वो बोला। मैं उतरते समय मुस्कुराई। वो कहानी मेरी जिंदगी की सबसे हॉट याद है।