मेरा नाम कार्तिक है। मैं एक साधारण सा लड़का हूं, जो अपनी गर्लफ्रेंड प्रिया के साथ खुशहाल जीवन जी रहा हूं। प्रिया का परिवार बड़ा है, और उसके भाई की शादी हाल ही में हुई थी। प्रिया की भाभी, यानी मेरी गर्लफ्रेंड की भाभी, का नाम रिया है। रिया एक बेहद खूबसूरत और आकर्षक औरत है। उसकी उम्र करीब 24 साल की है, लंबे काले बाल, गोरी त्वचा, और एक ऐसा फिगर जो किसी को भी दीवाना बना दे।
शादी के बाद जब हम सब मिले, तो रिया ने प्रिया से कुछ बातें कीं, लेकिन एक शाम, जब प्रिया घर पर नहीं थी, रिया ने मुझे अकेले में बुलाया और अपनी सुहागरात की कहानी सुनाई। वो कहानी इतनी गर्म और उत्साहजनक थी कि मैं आज भी उसे याद करके सिहर उठता हूं। आइए, मैं आपको वो पूरी कहानी बताता हूं, जैसी रिया ने मुझे बताई।
रिया ने कहा, ‘कार्तिक, तुम्हें पता है ना, शादी का दिन कितना थकाऊ होता है? लेकिन सुहागरात… वो तो कुछ और ही होती है। मेरी शादी प्रिया के भाई अजय से हुई थी। अजय एक हैंडसम लड़का है, जिम जाता है, बॉडी अच्छी है। शादी की रस्में खत्म होने के बाद, जब सब सो गए, तो अजय मुझे होटल के कमरे में ले गया। कमरा फूलों से सजा था, लाल बेडशीट, और हल्की सी लाइट जल रही थी। मैं नर्वस थी, लेकिन उत्साहित भी।’
रिया ने अपनी साड़ी उतारनी शुरू की। वो लाल जोड़ी पहने थी, जो उसके कर्व्स को और उभार रही थी। अजय ने दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ देखा। उसकी आंखों में एक भूख थी। ‘रिया, तुम कितनी सुंदर लग रही हो,’ उसने कहा और धीरे से मेरी कमर में हाथ डाल लिया।
मैंने शरमाते हुए सिर झुका लिया, लेकिन अंदर से गर्मी महसूस हो रही थी। अजय ने मेरी साड़ी का पल्लू सरका दिया, और मेरी ब्लाउज के हुक खोलने लगा। मेरी चूचियां बाहर आने को बेताब थीं। ब्रा के अंदर से वो उभरी हुईं, गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे।
अजय ने मेरी ब्रा उतार दी और मुंह में एक चूची ले लिया। वो चूसने लगा, जीभ से चाटने लगा। ‘आह… अजय,’ मैं चीखी। दर्द और मजा दोनों हो रहा था। उसका हाथ मेरी साड़ी के अंदर घुस गया, पेटीकोट के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगा। मैं गीली हो रही थी।
‘रिया, तुम्हारी चूत कितनी नरम है,’ उसने कहा और पेटीकोट ऊपर सरका दिया। अब मैं सिर्फ पैंटी में थी। अजय ने मुझे बेड पर धकेल दिया और मेरी टांगें फैला दीं। पैंटी को साइड किया और उंगली अंदर डाल दी। ‘ओह गॉड… हल्के से,’ मैंने कहा, लेकिन वो तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। मेरी चूत से रस बहने लगा।
फिर अजय ने अपना शर्ट उतारा। उसकी छाती मस्कुलर थी, और पैंट के अंदर से उसका लंड उभरा हुआ दिख रहा था। वो पैंट उतारने लगा। बाहर आया एक मोटा, लंबा लंड, सिरा लाल और चमकदार। ‘ये देखो रिया, ये तुम्हारे लिए है,’ उसने कहा और लंड को मेरे मुंह के पास ला दिया।
मैंने पहली बार ऐसा देखा था। शरम आई, लेकिन उत्सुकता भी। मैंने जीभ निकाली और चाटा। नमकीन स्वाद था। अजय ने सिर पकड़ लिया और मुंह में ठूंस दिया। ‘चूसो रिया, अच्छे से चूसो।’ मैंने चूसना शुरू किया, ऊपर-नीचे। लंड मुंह में फुला गया। सलाइवा टपक रहा था।
कुछ मिनट बाद, अजय ने मुझे उठाया और बेड पर लिटा दिया। मेरी पैंटी उतार दी। अब मैं नंगी थी। मेरी चूत साफ-सुथरी, गीली चमक रही थी। अजय ने टांगें फैलाईं और लंड का सिरा चूत पर रगड़ने लगा। ‘तैयार हो रिया?’ उसने पूछा। मैंने हां में सिर हिलाया। धीरे से अंदर धकेला।
दर्द हुआ, जैसे फट रही हो। ‘आह… धीरे,’ मैं चिल्लाई। लेकिन वो रुका नहीं। पूरा लंड अंदर चला गया। खून निकला थोड़ा, लेकिन मजा भी आया। अजय ने धीरे-धीरे पेलना शुरू किया। अंदर-बाहर, तेजी से। मेरी चूचियां उछल रही थीं। ‘फक मी अजय, हार्डर,’ मैं चीखने लगी। कमरा हमारी सांसों और थप्पड़ों की आवाज से गूंज रहा था।
अजय ने मुझे डॉगी स्टाइल में कर दिया। पीछे से लंड ठोका। मेरी गांड हिल रही थी। हाथ से चूचियां मसल रहा था। ‘तुम्हारी गांड कितनी टाइट है,’ उसने कहा और एक थप्पड़ मारा। दर्द में मजा आया। मैं झुक गई, चूत और गीली हो गई। अजय की स्पीड बढ़ गई।
‘कम करने वाला हूं रिया,’ उसने कहा। ‘अंदर ही डाल दो,’ मैंने कहा। वो चिल्लाया और गर्म वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। हम दोनों पसीने से तर, गिर पड़े। लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी।
कुछ देर आराम के बाद, अजय फिर खड़ा हो गया। उसका लंड फिर सख्त था। इस बार उसने मुझे चूमना शुरू किया। होंठ चूसे, जीभ अंदर डाली। गले पर किस किया, चूचियों को काटा। मैं फिर गर्म हो गई। ‘अब तुम ऊपर आओ,’ अजय ने कहा। मैं उसके ऊपर चढ़ गई।
लंड को हाथ में पकड़ा और चूत में डाल लिया। अब मैं ऊपर-नीचे होने लगी। मेरी चूचियां उछल रही थीं, अजय ने पकड़ लीं। ‘राइड मी रिया, फास्ट,’ वो बोला। मैं तेजी से कूदने लगी। चूत में लंड घुसते-निकलते, रस बह रहा था। ऑर्गेज्म आ गया मेरा, चीख पड़ी। अजय ने नीचे से धक्के दिए और फिर कम कर दिया।
रात भर हमने ऐसे ही किया। कभी मिशनरी, कभी साइड बाय साइड। अजय ने मेरी गांड भी मारी। पहले उंगली से खोला, फिर लंड डाला। दर्द बहुत हुआ, लेकिन आदत पड़ गई। ‘अब तुम्हारी गांड भी मेरी है,’ वो बोला। सुबह तक हम थक गए। लेकिन वो रात मेरी जिंदगी की सबसे यादगार रात थी।
रिया ने ये कहानी सुनाते हुए मुस्कुराई। मैं कार्तिक, सुनते-सुनते खुद गर्म हो गया था। ‘भाभी, ये तो कमाल की कहानी है,’ मैंने कहा। रिया ने मेरी तरफ देखा, आंखों में चमक थी। ‘कार्तिक, क्या तुम्हें भी ऐसी रात चाहिए?’ उसने पूछा। लेकिन वो तो मजाक था, या शायद नहीं। प्रिया के आने से पहले हम हंस पड़े। लेकिन वो कहानी आज भी मेरे दिमाग में घूमती है।