दोस्त की शादी में उसकी नौकरानी को चोदा

(Dost Ki Shadi Mein Uski Naukrani Ko Choda)

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम राहुल है, मैं सूरत से हूँ। ये मेरी सच्ची कहानी है। मैं 25 साल का हूँ, सूरत में एक छोटी सी जॉब करता हूँ। बॉडी फिट है, जिम जाता हूँ, और हाइट 5 फीट 10 इंच। लड़कियों को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है, खासकर जब कोई हॉट लगे। मैं अपने फ्रेंड की शादी में राजस्थान के उदयपुर गया था। उदयपुर पहुँचते ही फ्रेंड ने वेलकम किया। उसका नाम विक्रम है, हम कॉलेज टाइम से दोस्त। उसके घर बड़ा सा है, शादी की तैयारी में सब व्यस्त। मैं गेस्ट रूम में रुका।

पहले दिन तो सब ठीक चला। शाम को मेहंदी की रस्म थी। रात को थककर सो गया। दूसरे दिन सुबह उठा तो देखा घर में हलचल मची है। विक्रम की मम्मी चिल्ला रही थीं, ‘कपड़े साफ करो, सब कुछ परफेक्ट होना चाहिए।’

मैं ब्रेकफास्ट कर रहा था कि दरवाजा खटखटाया। एक लड़की अंदर आई, ट्रे में चाय का कप लिए। वो नौकरानी थी, नाम था सीमा। उम्र लगभग 22-23 साल, गाँव से आई लगती थी। काले लंबे बाल, गोरी त्वचा, लेकिन साड़ी में बॉडी ऐसी कि देखते ही मन डोल गया। साड़ी थोड़ी ढीली थी, ब्लाउज टाइट, जिससे उसके स्तन बाहर आने को तैयार लग रहे थे। कमर पतली, गांड गोल-गोल।

‘साहब, चाय लाई हूँ,’ उसने कहा, आवाज मधुर। मैंने मुस्कुराकर लिया। वो मेरी शर्ट पर नजर डाल रही थी। ‘आपके कपड़े गंदे हो गए हैं, मैं धो दूँ?’ मैंने हाँ कहा। वो मेरे रूम में चली गई, बेड से कपड़े उठाने लगी। मैं पीछे-पीछे गया। वो झुककर कपड़े उठा रही थी, साड़ी की चोली से कमर दिख रही थी। मेरा लंड हल्का सा उभर आया। ‘सीमा, तुम्हारा नाम क्या है?’ मैंने पूछा। ‘सीमा जी, साहब। गाँव से हूँ, यहाँ काम करती हूँ।’ वो शर्मा गई।

शादी की तैयारियाँ जोरों पर थीं। दोपहर को सब बाहर गए मंडप सजाने। मैं घर पर रुका, थोड़ा रेस्ट लेने। सीमा झाड़ू-पोंछा कर रही थी। मैंने बुलाया, ‘सीमा, पानी ला।’ वो आई, गिलास देते हुए हाथ छू गया। उसकी त्वचा मुलायम। ‘तुम्हें शादी पसंद है?’ मैंने बात शुरू की। ‘हाँ साहब, लेकिन यहाँ काम ज्यादा।’ हम बातें करने लगे। पता चला वो अनाथ है, विक्रम के घर साल भर से काम करती है। कोई बॉयफ्रेंड नहीं। मेरे मन में ख्याल आया, शायद मौका मिले।

शाम को संगीत का प्रोग्राम था। सब डांस कर रहे थे। सीमा किचन में खाना बना रही थी। मैं चुपके से गया। ‘सीमा, थोड़ा ब्रेक लो।’ वो मुस्कुराई। हम बाहर वरांडा में बैठे। रात का अंधेरा था। मैंने उसका हाथ पकड़ा। ‘तुम बहुत सुंदर हो।’ वो लजा गई, लेकिन हाथ नहीं छुड़ाया। ‘साहब, ऐसा मत कहो।’ लेकिन उसकी आँखों में चमक थी। मैं करीब सरका। उसके गाल पर किस किया। वो सिहर गई। ‘नहीं साहब…’ लेकिन विरोध कमजोर था।

मैंने उसके होंठ चूमे। पहले हल्का, फिर गहरा। उसकी जीभ मेरे मुँह में आई। किसिंग का मजा आ गया। उसके स्तन मेरे चेस्ट से दब रहे थे। मैंने हाथ डाला, ब्लाउज के ऊपर से दबाया। नरम थे, बड़े। वो सिसकारी लेने लगी। ‘आह… साहब।’ हम 5 मिनट तक किस करते रहे। फिर मैं पीछे हटा। ‘कल मिलते हैं।’ वो चली गई, चेहरा लाल।

रात को सोया नहीं। मन में सीमा घूम रही थी। अगला दिन बारात का था। सुबह उठा तो सीमा ने चाय दी। आँखों में शरम। ‘कल रात…’ मैंने कहा। ‘चुप साहब, कोई देख लेगा।’ लेकिन शाम को मौका मिला। सब मंडप में व्यस्त। मैंने उसे बुलाया रूम में। ‘सीमा, आ जाओ।’ दरवाजा बंद किया। सीधे गले लगा लिया। किस करने लगा। इस बार वो भी जवाब दे रही थी। मेरे हाथ उसकी साड़ी में घुस गए। पेट सहलाया। नाभि में उंगली डाली। वो काँप रही थी।

‘साहब, डर लग रहा है।’ लेकिन मैं रुका नहीं। ब्लाउज खोल दिया। ब्रा बाहर। काले रंग की, सस्ती। स्तन बाहर निकाले। गुलाबी निप्पल्स। मैंने चूसा। जीभ से घुमाया। वो चीखी, ‘ओह… अच्छा लग रहा है।’ दूसरा स्तन दबाया। नीचे हाथ डाला। पेटीकोट में। चूत पर छुआ। गीली थी। ‘तुम्हें अनुभव है?’ मैंने पूछा। ‘नहीं साहब, पहली बार।’ मेरा लंड सख्त हो गया।

मैंने अपनी शर्ट उतारी। पैंट खोली। लंड बाहर। 6.5 इंच का, मोटा। सीमा ने देखा, आँखें फटीं। ‘इतना बड़ा…’ मैंने उसका हाथ पकड़ाया। सहलाने को कहा। वो धीरे-धीरे रगड़ने लगी। मजा आया। फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया। साड़ी ऊपर की। पैंटी उतारी। चूत साफ नहीं, लेकिन बाल कम। गुलाबी। मैंने जीभ डाली। चाटने लगा। क्लिट को चूसा। वो पागल हो गई। ‘आह… साहब, मत रुको।’ उसकी चूत का रस बह रहा था। नमकीन स्वाद।

10 मिनट चाटा। वो झड़ने लगी। शरीर काँप रहा। ‘बस… अब डालो।’ मैं ऊपर चढ़ा। लंड चूत पर रगड़ा। धीरे से धक्का दिया। अंदर गया आधा। टाइट थी। ‘दर्द हो रहा है।’ वो बोली। मैं रुका, फिर पूरा अंदर। खून निकला। वर्जिन थी। धीरे-धीरे पेलने लगा। स्ट्रोक बढ़ाए। वो दर्द से सिसक रही थी, लेकिन मजा भी ले रही। ‘जोर से… चोदो साहब।’ मैंने स्पीड बढ़ाई। बेड हिल रहा। उसके स्तन उछल रहे। मैंने चूसे।

15 मिनट चली चुदाई। मैंने पोजीशन बदली। उसे डॉगी बनाया। पीछे से घुसा। गांड पकड़ी। जोर-जोर से ठोका। ‘हाँ… ऐसे ही।’ वो चिल्लाई। मेरी टांगें उसकी गांड से टकरा रही। आखिरकार झड़ गया। स्पर्म चूत में डाला। हम लेटे रहे। साँसें तेज। ‘कैसा लगा?’ ‘दर्द तो हुआ, लेकिन अच्छा।’ वो मुस्कुराई।

लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी। शादी के तीन दिन बाकी थे। हर रात मौका मिलता। कभी रूम में, कभी किचन में। एक रात बारात के बाद, सब सो गए। मैं सीमा को बाहर बगीचे में ले गया। अंधेरे में। साड़ी ऊपर की, लंड डाला। खड़े-खड़े चोदा। वो दीवार से टिकी। ‘आह… साहब, जोर से।’ स्पर्म बाहर गिरा।

दूसरे दिन हल्दी की रस्म। सब पीले रंग में। सीमा ने मेरे लिए पानी भरा। चुपके से हाथ छुआ। शाम को फिर रूम। इस बार मैंने एनल ट्राई किया। ‘नहीं साहब, वहाँ दर्द होगा।’ लेकिन लुब्रिकेंट की तरह तेल लगाया। धीरे से उंगली डाली। फिर लंड। गांड टाइट। वो चीखी। लेकिन अंदर गया। पीछे से पेला। ‘ओह… मजा आ रहा है।’ 10 मिनट चली। स्पर्म गांड में।

शादी का मुख्य दिन। बारात आई। रात को विदाई। सब थके। लेकिन मैं और सीमा जागे। आखिरी रात। बेड पर। 69 पोज। मैं चूत चाट रहा, वो मेरा लंड चूस रही। पहली बार ब्लोजॉब। जीभ से चोटी चाटी। मैं झड़ने लगा। मुँह में लिया। निगल गई। फिर चुदाई। मिशनरी, काउगर्ल। वो ऊपर बैठी, उछल रही। स्तन हिल रहे। ‘चोदो मुझे साहब, हमेशा।’

शादी खत्म हुई। मैं सूरत लौटा। लेकिन सीमा से कॉन्टैक्ट रखा। कभी-कभी उदयपुर जाता। वो अब मेरी रखैल। गाँव में शादी कर ली, लेकिन हमारी चुदाई जारी। यार, शादी में नौकरानी को चोदना अनुभव अद्भुत था।

तो यह थी मेरी चुदाई की कहानी उम्मीद है आपको पसंद आई होगी।