देवर ने की भाभी की जबरजस्त चुदाई

(Devar Ne Ki Bhabhi Ki Jabardast Chudai)

मेरा नाम पूजा शर्मा है और मैं गुजरात के एक छोटे से शहर में अपने ससुराल में रहती हूँ। मेरी शादी को पाँच साल हो गए, लेकिन मेरे पति आर्मी ऑफिसर हैं और पिछले एक साल से चाइना बॉर्डर पर पोस्टेड हैं।

एक साल… 365 दिन… बिना सेक्स के। मैं खुद को बहुत हॉट और सेक्सी समझती हूँ – गोरा रंग, बड़े गोल टाइट स्तन, मोटी जांघें, पतली कमर और एक बड़ा गोल मांसल चूतड़। जब भी मैं घर में घूमती हूँ, मेरे सास-ससुर कुछ नहीं कहते, लेकिन मेरा शरीर जवानी से चिल्ला रहा होता है।

मैं रोज रात को बिस्तर पर करवटें बदलती, अपनी चुत को हाथ से सहलाती और कल्पना करती कि कोई मुझे जोर से चोद रहा है। लेकिन सब बेकार।

फिर दशहरा आया। पूरे घर में रौनक थी, क्योंकि मेरे देवर – मेरे पति का छोटा भाई – दिल्ली से पढ़ाई करके घर लौट रहा था। उसका नाम रोहित है, 22 साल का, पढ़ाई में होशियार, लेकिन शरीर से काफी मजबूत और निडर।

दुबला-पतला नहीं, बल्कि चौड़े कंधे, मजबूत हाथ और एक ऐसा चेहरा जो देखते ही बनता है। पिछली बार जब वह आया था, तब मैंने उसकी तरफ देखा भी नहीं, लेकिन इस बार कुछ अलग ही होने वाला था।

दुर्गा पूजा के दिन मैंने व्रत रखा था – निर्जला व्रत। पूरे दिन कुछ नहीं खाया, बस पानी पिया। शाम को पूजा की, फिर मिठाई बाँटी, लेकिन सिर में भारी दर्द होने लगा। बॉडी में भी अजीब सी कमजोरी और दर्द था।

सास ने कहा – “बेटा, तुम ऊपर जाकर आराम करो। हम लोग नीचे सो रहे हैं।” मैं राजी हो गई। ऊपर के कमरे में मेरा और पति का बेडरूम है। वहाँ एक बड़ा किंग-साइज़ बेड है, खिड़की से बाहर बगीचा दिखता है।

मैंने लाइट जलाई, हल्का गुलाबी मूड सेट किया और अपना पिंक ट्रांसपेरेंट नाइटी पहन लिया। ब्रा नहीं पहनी – क्योंकि घर में सब नीचे सो रहे थे और मुझे लगा कोई ऊपर नहीं आएगा। मेरे बड़े-बड़े निप्पल उस पतले कपड़े के नीचे साफ दिख रहे थे, लेकिन मुझे परवाह नहीं थी।

Devar ne ki Bhabhi ki jabardast chudai

लगभग 11 बजे होंगे। मैं करवट बदल-बदल कर दर्द से कराह रही थी। अचानक दरवाजे पर आवाज आई – खट-खट “भाभी, सो गई? ”

मैं चौंक गई। यह रोहित था। मैंने तुरंत आवाज दी – “अंदर आ जाओ, नहीं सोई।”

वह अंदर आया। हाथ में एक छोटा सा बैग था। उसने मुझे बिस्तर पर लेटे देखा और पूछा – “भाभी, क्या हुआ? तबीयत खराब है? सुना मम्मी ने बताया कि आपको सिरदर्द है।”

मैंने करवट ली और उसकी तरफ देखा – “हाँ, यार। सारा दिन खाली पेट रही, अब बॉडी में दर्द हो रहा है और सिर फट रहा है।”

रोहित पास आया और पूछा – “मैं हेड मसाज कर दूं? मेरे पास बाम है।”

मैंने सोचा – कोई बात नहीं, देवर है, भाई जैसा। उसने बाम निकाला और मेरे सिर पर लगाने लगा। उसकी उंगलियाँ मेरे बालों में घूम रही थीं। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन फिर धीरे-धीरे उसकी उंगलियाँ मेरी गर्दन से होती हुई मेरे कंधों पर आ गईं।

मैंने आँखें बंद कर लीं और पूरी तरह रिलैक्स हो गई। तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी उंगलियाँ मेरी नाइटी के नीचे जा रही हैं और मेरे स्तनों को छू रही हैं। मेरा शरीर झटके से अकड़ गया। मैंने सोचा – ‘यह जानबूझकर कर रहा है?’ मैंने उसका हाथ नहीं हटाया।

वहाँ एक तनावपूर्ण खामोशी थी। फिर उसने मेरे निप्पल को उँगली से घुमाया और मैंने एक गहरी साँस ली।

मैंने अपना हाथ बढ़ाया और ‘गलती से’ उसकी जाँघ के पास रख दिया। वहाँ मैंने महसूस किया – उसका लंड पूरी तरह खड़ा था, पैंट के अंदर एक बड़ी सी सूजन।

मैंने उसकी तरफ देखा और बोली – “रोहित, मुझे सिर के साथ-साथ पूरी बॉडी में दर्द है। अगर तुम चाहो तो तेल ले आओ और पूरी बॉडी की मसाज कर दो।”

उसकी आँखें चमक उठीं। वह तुरंत बोला – “हाँ भाभी, मैं लेकर आता हूँ।”

वह नीचे गया और नारियल का तेल लेकर आया। दरवाजा बंद कर लिया। अब मैं और वह कमरे में अकेले थे। मैंने उससे कहा – “पहले पैरों की मालिश करो, बहुत दर्द है।”

उसने मेरी नाइटी को ऊपर उठाया और मेरे पैरों पर तेल लगाना शुरू किया। उसकी बड़ी-बड़ी हथेलियाँ मेरी मोटी जाँघों पर घूम रही थीं। मैंने अपनी आँखें मूँद लीं और महसूस किया कि मेरी चुत में गीलापन आ रहा है।

तेल के साथ उसकी उंगलियाँ मेरी चूत के पास पहुँच रही थीं लेकिन अभी अंदर नहीं गई थीं। मैंने करवट ली और बोली – “अब पीठ और चूतड़ की मालिश कर दो, बहुत अकड़ है।”

उसने मुझे पेट के बल लेटने को कहा। मैंने नाइटी को ऊपर कर दिया, अब मेरी पूरी पीठ और गांड नंगी थी। सिर्फ पैंटी थी जो मेरी कमर पर कसी हुई थी। उसने तेल डाला और मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगा।

फिर धीरे-धीरे वह मेरी गांड के पास आया। उसने मेरी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया और मेरे एक-एक गाल को दबाने लगा। मैंने कराहते हुए कहा – “हाँ… हाँ… और जोर से दबाओ… यही होता है दर्द।”

फिर उसने मेरी पैंटी नीचे खींच ली। मैंने विरोध नहीं किया। उसने तेल डालकर मेरी पूरी गांड पर हाथ फेरा और फिर अपनी उंगली मेरी चूत के अंदर डाल दी। मैं चीख पड़ी – “आह! रोहित! यह क्या कर रहे हो?”

लेकिन मेरी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक अजीब सी हाँफती हुई उत्तेजना थी। उसने मेरे कान में फुसफुसाया – “भाभी, आपको तो यही चाहिए था न? आपने मुझे मौका दिया। मैं आपकी पूरी बॉडी की मालिश करूँगा, हर इंच की।”

उसने अपनी हाथ मेरे स्तनों पर रख दिए और दोनों को दबाने लगा। मेरे निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने करवट ली और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई और मैंने उसका रस पी लिया।

मेरे हाथ उसकी पैंट के बटन पर गए और मैंने उसे खोल दिया। उसका लंड बाहर निकला – मोटा, लंबा और सफेद। मैंने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी।

“रोहित, तुमने तो मुझे पागल कर दिया। एक साल से कोई मुझे छूता तक नहीं। आज तुम ही मेरी भाभी का दर्द निकाल दो।”

रोहित ने मेरी नाइटी पूरी तरह उतार दी और मैं नग्न हो गई। उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी गर्दन, कान, कंधे, निप्पल – सब चाटने लगा।

उसने मेरे दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसा, दूध पीने की कोशिश की (हालाँकि मैं माँ नहीं थी, फिर भी उत्तेजना में वह ऐसा करता रहा) फिर वह नीचे गया और मेरी नाभि को चाटता हुआ मेरी चूत तक पहुँचा।

उसने मेरी चूत को फैलाया और अपनी जीभ अंदर डाल दी। मैं चीख पड़ी – “हाय! रोहित! मेरी जान… इतनी देर से क्यों नहीं किया यह… आह… हाँ… ठीक वहाँ… चाटो मेरी चूत…”

मैंने उसका सिर पकड़ लिया और अपनी चूत को उसके मुँह पर जोर से दबाया। मैं ऐसे उछल रही थी जैसे कोई मछली पानी में तड़प रही हो। मेरी चूत से सफेद पानी निकलने लगा था। रोहित ने वह सब पी लिया।

फिर उसने कहा – “भाभी, अब आप मेरा लंड चूसो।”

मैंने कोई इनकार नहीं किया। मैं उसके ऊपर चढ़ गई और उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया। मैंने उसे जोर-जोर से चूसना शुरू किया। उसका लंड मेरे गले तक जा रहा था, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। वह मेरी चूत चाटता रहा और मैं उसका लंड चूसती रही। यह 69 पोजीशन थी।

कुछ देर बाद मुझसे और सहन नहीं हुआ। मैंने उसका लंड मुँह से निकाला और बोली – “अब और नहीं रोक सकती। रोहित, अपना लंड मेरी चूत में डाल दे। जोर से चोद मुझे। प्लीज… मैं तरस गई हूँ।”

उसने मुझे लिटाया, मेरी टाँगें फैलाईं और अपना मोटा-लंबा लंड मेरी चूत के छेद पर रखा। एक झटके में उसने पूरा अंदर घुसा दिया। मैं चीख पड़ी – “हाय… रोहित… बहुत बड़ा है… लेकिन अच्छा लग रहा है… चोदो मुझे… चोदो मेरी चूत को…”

Devar ne ki Bhabhi ki jabardast chudai

उसने धीमी गति से शुरू किया, फिर तेज़ होता गया। मेरे स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और अपने होठों पर अपने दाँत दबा लिए ताकि चीख न निकले। लेकिन वह जानबूझकर मेरे मुँह को चूम रहा था और अपनी जीभ से मेरी जीभ को भिगो रहा था।

उसने मेरे स्तनों को भी चूसा, मेरी बाँहों को चाटा और मेरे बगल के नीचे की त्वचा को भी। इस दौरान उसने अपनी उंगली मेरी गांड में डाल दी और मैं और पागल हो गई।

“रोहित… और जोर से… आह… मैं निकलने वाली हूँ… और अंदर डालो…”

उसने और तेज़ी से चोदा और मैं फिर से चरम सीमा पर पहुँच गई। इस बार मेरी चूत ने उसके लंड पर पानी छोड़ दिया। लेकिन वह रुका नहीं। उसने मुझसे कहा – “अब आप ऊपर आइए, आपको चोदना है मुझे।”

मैंने उसकी बात मान ली। मैं उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी चूत में उसका लंड लेकर ऊपर-नीचे होने लगी। यह वह पोजीशन है जिसमें लंड पूरा अंदर जाता है और चूत का हर कोना खुल जाता है। मैं तेज़ी से उछल रही थी और रोहित मेरे स्तनों को दबा रहा था और मेरे निप्पल चूस रहा था।

रात भर यह सिलसिला चलता रहा। हमने कई पोजीशन बदले – डॉगी स्टाइल, साइड फकिंग, ऑन द एज, स्पूनिंग। मैं पूरी तरह तृप्त हो गई। सुबह लगभग 5 बजे तक हम चोदते रहे। फिर जब मेरी लस्ट शांत हुई, तब हमने एक-दूसरे को गले लगाकर आराम किया।

अगले दिन फिर से वही कहानी दोहराई गई। दिन के उजाले में भी हमने खूब चोदाई की। मैंने उससे कहा – “रोहित, तू मेरा बेदर्दी देवर है। साल भर की भूख मिटा दी तूने। अब जब भी दिल्ली से आएगा, तो मेरी चूत तेरी ही होगी।”

उसने मुस्कुराकर कहा – “भाभी, आपकी चूत का स्वाद ही कुछ और है। मैं तो रोज आना चाहूँगा।”

यह कहानी मैंने adulthindistories.com पर साझा की है और आप लोगों से अनुरोध है कि इसी तरह और कहानियाँ चाहिए तो कमेंट में बताएं।