यह कहानी एक छोटे से गांव की है, जहां बीस साल पहले मेडिकल सुविधाएं बहुत कम थीं। लोग बीमार पड़ते तो डॉक्टर के पास जाने की बजाय बाबाओं और ओझाओं के चक्कर लगाते।
गांव का नाम था हरिपुर, जो पहाड़ियों के बीच बसा हुआ था। यहां के लोग सरल थे, लेकिन अंधविश्वास में डूबे हुए। गांव में एक बाबा रहता था, नाम था बाबा हरि दास। वह खुद को भूत-प्रेत बाधा हटाने वाला और शारीरिक-मानसिक बीमारियों का इलाज करने वाला बताता था।
लंबी दाढ़ी, भगवा वस्त्र, और एक छोटी सी कुटिया—ये सब उसे पवित्र बनाते थे। लेकिन सच्चाई यह थी कि बाबा हरि दास एक धोखेबाज था। वह इलाज के नाम पर गांव की महिलाओं और लड़कियों का यौन शोषण करता। अपनी हवस मिटाने के लिए वह झूठे मंत्र और टोटके बताता, और बदले में उनके शरीर का इस्तेमाल करता।
गांव वाले बाबा पर इतना भरोसा करते थे कि कोई सवाल नहीं उठाते। बाबा की कुटिया के बाहर हमेशा लाइन लगी रहती। कभी कोई बुखार से पीड़ित आता, तो कभी कोई संतान प्राप्ति के लिए।
बाबा हर समस्या का हल निकाल लेता, लेकिन उसका तरीका गंदा था। वह रात के अंधेरे में अपनी करतूतें करता, और सुबह तक मरीज को लगा कि चमत्कार हो गया। लेकिन धीरे-धीरे गांव में शक की किरणें फैलने लगीं। आखिरकार, एक दिन सच्चाई सामने आ गई।
गांव में लाजवंती नाम की एक 22 साल की लड़की रहती थी। वह सुंदर थी, लंबे काले बाल, गोरा रंग, और पतली कमर। लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसे अजीब सी बीमारी लग गई थी।
रात को बुखार आता, सिर घूमता, और शरीर में कमजोरी महसूस होती। डॉक्टर दूर था, और गांव के वैद्य ने भी कुछ नहीं कहा। लाजवंती के पिता रामलाल ने सुना कि बाबा हरि दास चमत्कारी इलाज करते हैं। उन्होंने लाजवंती को कंधे पर उठा कर बाबा की कुटिया ले जाया।
बाबा ने लाजवंती को देखा। उसकी आंखें चमक उठीं। ‘क्या हुआ बेटी? बताओ अपनी व्यथा,’ बाबा ने मीठी आवाज में कहा। लाजवंती ने रोते हुए बताया, ‘बाबा जी, मुझे रात को बुखार चढ़ जाता है। शरीर जलता है, और सुबह तक थकान रह जाती है।’
बाबा ने सिर हिलाया। ‘यह भूत का साया है। प्रेत बाधा है। लेकिन चिंता मत करो, मैं ठीक कर दूंगा। लेकिन इलाज के लिए तुम्हें मेरे साथ रात बितानी पड़ेगी। मंत्र पढ़ने होंगे।’ रामलाल ने झुक कर कहा, ‘बाबा जी, जो भी कहें, हम तैयार हैं। बस मेरी बेटी ठीक हो जाए।’
रात हुई। बाबा ने कुटिया का दरवाजा बंद कर लिया। लाजवंती डर रही थी, लेकिन भरोसा था। बाबा ने उसे बिठाया और कहा, ‘बेटी, यह बीमारी तुम्हारे शरीर में जमा विष से है। इसे निकालना पड़ेगा।
कपड़े उतारो, ताकि मैं मंत्र से तुम्हें स्पर्श कर सकूं।’ लाजवंती शर्मा गई, लेकिन बाबा की बात मान ली। वह नंगी हो गई। बाबा की आंखें लाल हो गईं। वह उसके पास आया और उसके स्तनों को छूने लगा। ‘यह मंत्र है,’ वह बोला। फिर धीरे से उसके होंठ चूमे। लाजवंती चौंकी, लेकिन बाबा ने कहा, ‘शांत रहो, यह इलाज का हिस्सा है।’
बाबा ने अपनी धोती उतारी। उसका लंड खड़ा था, मोटा और लंबा। वह लाजवंती को लिटा दिया। ‘अब मैं तुम्हारे शरीर में प्रवेश करूंगा, ताकि विष बाहर निकले।’ लाजवंती ने विरोध किया, ‘बाबा जी, यह क्या?’ लेकिन बाबा ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और जोर से धक्का मारा।
उसका लंड लाजवंती की चूत में घुस गया। दर्द से लाजवंती चीखी, लेकिन बाबा ने तेजी से चोदना शुरू कर दिया। ‘हां, यही तो इलाज है। विष निकल रहा है,’ वह हांफते हुए बोला। लाजवंती का शरीर कांप रहा था।
बाबा ने उसके स्तनों को मसलते हुए और तेज धक्के मारे। आधे घंटे तक वह चुदाई करता रहा। आखिरकार, बाबा ने अपने वीर्य का स्खलन किया, लाजवंती की चूत में गर्म गर्म बीज डाल दिया।
सुबह लाजवंती को घर भेज दिया। बाबा ने कहा, ‘रात को पेशाब करते समय गाजर या मूली को अपनी चूत पर रगड़ना। इससे बीमारी पूरी तरह चली जाएगी।’ लाजवंती ने वैसा ही किया। अजीब लगा, लेकिन अगले दिन से बुखार उतर गया।
वह स्वस्थ हो गई। कुछ महीनों बाद उसकी शादी हो गई। लेकिन गांव में बाबा का नाम फैल गया। लोग कहने लगे कि बाबा ने चमत्कार किया। लाजवंती ने कुछ नहीं कहा, शर्म से।
लाजवंती की कहानी के बाद बाबा की प्रसिद्धि और बढ़ गई। अब कुसुम नाम की एक 28 साल की औरत आई। कुसुम सुंदर थी, भरी हुई छाती, चौड़ी कूल्हे। वह और उसके पति शादी के पांच साल हो गए, लेकिन संतान नहीं हो रही थी।
वैद्य ने कहा कि कोई समस्या नहीं, लेकिन कुसुम को लगा कि कोई बाधा है। वह बाबा के पास पहुंची। ‘बाबा जी, मुझे बच्चा नहीं हो रहा। पति सब ठीक कहते हैं, लेकिन…’ कुसुम रो पड़ी।
बाबा ने मुस्कुराया। ‘यह नाड़ी में बंधन है। मैं खोल दूंगा। लेकिन इसके लिए तुम्हें मेरी शक्ति ग्रहण करनी पड़ेगी। रात को आना।’ कुसुम ने हामी भरी। रात को वह कुटिया में गई। बाबा ने दरवाजा बंद किया। ‘कपड़े उतारो, ताकि मैं तुम्हारी नाड़ी देख सकूं।
कुसुम ने झिझकते हुए साड़ी खोली। नंगी हो गई। बाबा ने उसके शरीर को छुआ। उसके निप्पलों को चूसा। कुसुम सिहर गई। ‘बाबा जी, यह क्या?’ ‘शांत, यह मंत्र है,’ बाबा ने कहा।
फिर बाबा ने अपना लंड बाहर निकाला। ‘अब मैं अपनी शक्ति तुम्हें दूंगा।’ वह कुसुम को लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। जोर से धक्का मारा। कुसुम की चूत में लंड घुस गया। ‘आह!’ कुसुम चीखी।
बाबा ने चोदना शुरू किया। तेज तेज धक्के। कुसुम का शरीर हिल रहा था। बाबा ने उसके गांड को भी मारा, लेकिन मुख्यतः चूत में। ‘हां, अब संतान आएगी। मेरी शक्ति तुम्हें गर्भ देगी,’ वह बोला। कुसुम दर्द और सुख के मिश्रण में खो गई। बाबा ने आधे घंटे चुदाई की। आखिर में अपने बीज छोड़े। कुसुम की चूत गीली हो गई।
सुबह कुसुम घर लौटी। दो महीने बाद पता चला कि वह गर्भवती है। गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। कुसुम ने सोचा, बाबा का चमत्कार है। लेकिन सच्चाई यह थी कि बाबा ने बस अपनी हवस मिटाई थी। कुसुम के पति को शक नहीं हुआ।
बाबा की करतूतें यहीं नहीं रुकीं। गांव में कई महिलाएं उसके जाल में फंसीं। एक थी सरला, 30 साल की विधवा। उसके पति की मौत हो गई थी, और वह अकेली रह गई थी। उसे रात को नींद नहीं आती, डर लगता।
बाबा ने कहा, ‘भूत का साया है। इलाज के लिए मेरे साथ सोना पड़ेगा।’ रात को सरला आई। बाबा ने उसे नंगा किया। उसके बड़े स्तनों को चूसा, फिर चूत में लंड डाला। जोर जोर से चोदा।
सरला चीखती रही, लेकिन सुबह उसे लगा कि डर कम हो गया। बाबा ने कहा, ‘हर रात आना, पूर्ण इलाज के लिए।’ सरला कई रातें गई। बाबा ने उसे गांड भी मरवाई।
एक और लड़की थी मीरा, 18 साल की। उसे पेट दर्द था। बाबा ने कहा, ‘विष है अंदर।’ रात को मीरा को चोदा। उसकी क्वारी चूत फाड़ दी। मीरा रोई, लेकिन बाबा ने मंत्र पढ़े। दर्द ठीक हो गया। मीरा ने घरवालों को बताया कि बाबा ने ठीक किया।
फिर राधा आंटी, 40 साल की। उसे जोड़ों का दर्द था। बाबा ने उसके शरीर पर तेल लगाया, फिर चोद दिया। ‘यह मालिश है,’ कहा। राधा को सुख मिला। वह बार बार आने लगी। बाबा की लिस्ट लंबी हो गई।
कम से कम 20 महिलाएं ऐसी थीं जिन्होंने बाबा के साथ शारीरिक संबंध बनाए। कुछ ने संतान पाई, कुछ बीमारी से मुक्ति। लेकिन सबका राज छिपा रहा।
बाबा न सिर्फ चोदता, बल्कि विविध तरीके अपनाता। कभी मुंह में लंड डलवाता, ब्लोजॉब लेता। कभी गांड मारता। महिलाओं को कहता, ‘यह टोटका है।’ वे मान लेतीं। एक बार दो महिलाओं को एक साथ बुलाया। लाजवंती और कुसुम को। लेकिन वे अलग अलग आईं। बाबा ने कल्पना की कि गैंगबैंग करेगा, लेकिन डर से नहीं किया।
धीरे धीरे गांव में बातें होने लगीं। एक महिला ने कहा, ‘बाबा रात को अकेले क्यों बुलाते हैं?’ दूसरी ने कहा, ‘मेरी बहन को भी बुलाया था।’ लेकिन कोई सबूत नहीं। बाबा अमीर हो गया। दान मिलता, पैसे लेता। उसकी कुटिया बड़ी हो गई।
एक दिन एक नई महिला आई, नाम था श्यामा। वह 25 साल की थी, साहसी। उसे सिर दर्द था। बाबा ने वही तरीका अपनाया। लेकिन श्यामा ने विरोध किया। ‘बाबा, यह इलाज नहीं, बलात्कार है!’ बाबा ने धमकाया, ‘चुप रहो, वरना भूत लग जाएगा।’ श्यामा चुप रही, लेकिन मन में शक पैदा हो गया।
श्यामा ने अपनी सहेली को बताया। सहेली ने कहा, ‘मेरा भी यही हुआ। लेकिन डर से चुप हूं।’ धीरे धीरे ग्रुप बना। वे मिलीं और फैसला किया कि बाबा को फंसाना है।
श्यामा ने योजना बनाई। वह बाबा के पास गई और कहा, ‘बाबा जी, मेरी नाड़ी बंद है। संतान के लिए खोलनी है। लेकिन मेरी सहेली के साथ।’ बाबा खुश हुआ, सोचा दो का मजा। लेकिन सहेली पुलिस वाली थी, गुप्त रूप से।
नहीं, सही कहानी यह है। एक महिला, जिसका नाम था गंगा, ने बाबा से कहा, ‘मेरी नाड़ी खोलो। लेकिन सावधानी से।’ यह कोड था। गंगा ने अपने पति को बता दिया, जो पुलिस में था। रात को जब बाबा गंगा को बुलाया, तो बाहर पुलिस छिपी थी।
रात हुई। गंगा कुटिया में गई। बाबा ने दरवाजा बंद किया। ‘कपड़े उतारो।’ गंगा ने उतारे। बाबा लंड निकाला। लेकिन जैसे ही वह चोदने लगा, दरवाजा टूटा। पुलिस अंदर घुसी। ‘हाथ ऊपर!’ बाबा घबरा गया। गंगा ने कपड़े पहने।
पुलिस ने बाबा को पकड़ लिया। पूछताछ में पता चला कि बाबा असली नाम रमेश था। वह जेल से भागा हुआ बलात्कारी था। शहर से आया, बाबा बन गया। कई केस थे उसके खिलाफ। गांव की महिलाओं ने बयान दिए। लाजवंती, कुसुम, सरला—सबने बताया कि कैसे बाबा ने शोषण किया।
कोर्ट में केस चला। बाबा को उम्रकैद हुई। गांव में जागरूकता आई। अब लोग डॉक्टरों पर भरोसा करते। लेकिन वो पुरानी यादें महिलाओं के दिल में दर्द छोड़ गईं।