नमस्कार दोस्तों, मैं अबरार हूँ। आज मैं आपको एक ऐसी सच्ची सेक्स स्टोरी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा बन गई। इसका टाइटल है ‘ढोंगी बाबा ने मेरी अम्मी की चूत चोदी’।
ये कहानी मेरी अम्मी साकीना के बारे में है, जो मेरे अब्बू के गुजर जाने के बाद घर और बिजनेस की मुश्किलों से जूझ रही थीं। मैंने ये सब अपनी अम्मी के फोन रिकॉर्डिंग्स सुनकर जाना। चलिए, शुरू से बताता हूँ।
मेरे अब्बू का देहांत हो चुका था। वो एक छोटे से बिजनेस वाले इंसान थे, जो कपड़ों का कारोबार करते थे। अब्बू के जाने के बाद छह महीने बीत चुके थे, लेकिन अम्मी का बिजनेस डूबने की कगार पर था।
ग्राहक कम हो गए थे, बिलें जमा हो रही थीं, और घर का खर्चा भी मुश्किल से चल रहा था। अम्मी दिन-रात परेशान रहतीं। वो 38 साल की थीं, लेकिन विधवा होने के बाद उनकी जिंदगी जैसे रुक सी गई थी।
उनका फिगर 34-30-36 का था, जो अभी भी जवान और आकर्षक था। लंबे काले बाल, गोरी रंगत, और वो मुस्कान जो कभी-कभी चेहरे पर आ जाती थी। लेकिन अब वो मुस्कान गायब हो चुकी थी।
एक दिन शाम को हमारी पड़ोसन रेशमा आंटी हमारे घर आईं। अम्मी उस वक्त किचन में थीं, तो मैंने दरवाजा खोला। रेशमा आंटी ने पूछा, ‘अबरार बेटा, साकीना कहाँ है? मैं दो-तीन दिन से उसे देख नहीं रही।’ मैंने कहा, ‘आंटी, अम्मी अंदर हैं। आइए’ अम्मी बाहर आईं और बोलीं, ‘अरे रेशमा, आ जाओ।
चाय पियोगी?’ रेशमा आंटी ने अम्मी को गले लगाया और कहा, ‘साकीना, तुम्हारी हालत देखकर दुख हो रहा है। बिजनेस कैसा चल रहा है?’ अम्मी ने सिर झुका लिया और बोलीं, ‘बहुत बुरा रेशमा। ग्राहक ही नहीं आते। घर का क्या हाल है, वो तो तुम जानती हो।’
रेशमा आंटी ने सहानुभूति दिखाई और कहा, ‘साकीना, मैंने एक बाबा के बारे में सुना है। बाबा अकरम। उन्होंने मेरे घर के बिजनेस की सारी समस्या सुलझा दी। एक रस्म की थी, उसके बाद सब ठीक हो गया। तुम्हें भी मिलना चाहिए।’
अम्मी ने हँसते हुए कहा, ‘रेशमा, मैं इन ढोंगी बाबाओं पर यकीन नहीं करती। ये सब धोखा है। मेरे पति का देहांत हो गया, तो ये सब ऊपर वाले की मर्जी है।’ रेशमा आंटी ने जोर दिया, ‘नहीं साकीना, ये सच है। बाबा अकरम असली हैं।
कम से कम नंबर तो ले लो। जब जरूरत पड़े तो फोन कर देना।’ अम्मी ने आखिरकार हामी भर ली और नंबर ले लिया।
दिन बीतते गए। बिजनेस और बिगड़ता गया। एक रात अम्मी को नींद नहीं आ रही थी। वो बिस्तर पर करवटें बदल रही थीं। मैं अपने कमरे से सुन रहा था। सुबह उठकर अम्मी ने रेशमा आंटी को फोन किया। ‘रेशमा, वो बाबा अकरम का नंबर दो ना।
शायद कुछ मदद मिल जाए।’ रेशमा आंटी ने नंबर दिया और कहा, ‘साकीना, बाबा को सब बता देना। वो घर आकर देखेंगे।’ अम्मी ने धन्यवाद कहा और फोन काट दिया।
अम्मी ने उसी शाम बाबा अकरम को फोन किया। मैं छिपकर सुन रहा था। अम्मी बोलीं, ‘हैलो, क्या बाबा अकरम बोल रहे हैं? मैं साकीना बोल रही हूँ। रेशमा ने आपका नंबर दिया है।’ बाबा की आवाज आई, ‘हाँ बेटी, बोलो। क्या समस्या है?’ अम्मी ने रोते हुए कहा, ‘बाबा जी, मेरे पति का देहांत हो गया।
बिजनेस बर्बाद हो रहा है। घर में सुख-शांति नहीं है। कृपया मदद करें।’ बाबा ने कहा, ‘बेटी, मैं घर आकर देखता हूँ। मंगलवार को आऊँगा। दोपहर 11 बजे। लेकिन तुम्हें अकेले रहना होगा। बेटा स्कूल जाएगा।’ अम्मी ने कहा, ‘ठीक है बाबा जी। मैं इंतजार करूँगी।’
मैंने ये सब सुन लिया। मंगलवार को मैंने बीमारी का बहाना बनाया। ‘अम्मी, मुझे बुखार है। स्कूल नहीं जा पाऊँगा।’ अम्मी ने माथा टटोला और कहा, ‘ठीक है बेटा, आराम करो।’ लेकिन मैंने पहले से ही लिविंग रूम में एक छोटा सा माइक और कैमरा छिपा रखा था, जो मेरे मोबाइल से कनेक्ट था। मैं अपने कमरे में लेटा रहा और सब देखने लगा।
मंगलवार दोपहर 11 बजे बाबा अकरम आए। वो 45 साल के थे, मोटे-तगड़े कद के, काले कपड़ों में। गले में माला, कलाई पर कंगन। अम्मी ने उन्हें अंदर आने दिया। अम्मी ने काला सूट पहना था, जो उनके फिगर को और आकर्षक बना रहा था।
अम्मी बोलीं, ‘बाबा जी, आइए। बैठिए।’ बाबा ने कमरे को नजर दौड़ाई, आँखें बंद कीं और कुछ मंत्र पढ़ने लगे। फिर बोले, ‘बेटी, इस घर में काला साया है। तुम्हारे पति की आत्मा परेशान है।
बिजनेस की बाधा उसी की वजह से है।’ अम्मी घबरा गईं, ‘बाबा जी, क्या करें?’ बाबा ने कहा, ‘भोग चढ़ाना पड़ेगा। तुम्हें अपने पति की आत्मा से संभोग करना होगा। मैं माध्यम बनूँगा। इससे काला साया दूर हो जाएगा।’
अम्मी का चेहरा लाल हो गया। वो बोलीं, ‘बाबा जी, ये क्या कह रहे हैं? मैं विधवा हूँ। ऐसा कैसे संभव है?’ बाबा ने सख्त लहजे में कहा, ‘बेटी, ये रस्म है। अगर नहीं करोगी तो समस्या और बढ़ेगी।’ अम्मी ने मना कर दिया, ‘नहीं बाबा जी, मैं नहीं कर सकती।’ बाबा उठे और चले गए, कहते हुए, ‘सोच लो बेटी। पछताओगी।’
कुछ दिन बीत गए। अम्मी को रातों में बुरे सपने आने लगे। एक काला साया उनके पास आता और नींद उड़ा देता। अम्मी डर गईं। आखिरकार उन्होंने बाबा को फोन किया। ‘बाबा जी, वो रस्म कर लूँगी। कृपया मदद करें।
बाबा खुश हुए, ‘ठीक है बेटी। गुरुवार की रात को आऊँगा। जुमेरात है, शुभ समय। रात 11 बजे। तब तक मैं दूर से साया को कंट्रोल कर लूँगा।’ अम्मी ने हामी भरी।
गुरुवार को अम्मी ने जल्दी डिनर कर लिया। मुझे कहा, ‘बेटा, सो जाओ। कल स्कूल है।’ मैंने हामी भरी और कमरे में चला गया। अम्मी ने मेरा कमरा लॉक कर दिया। रात 11:30 बजे बाबा आए। काले कुर्ते और लुंगी में।
अम्मी ने नाइटि पहनी थी। बाबा बोले, ‘बेटी, नाइटि उतारो। सफेद पंजाबी सूट पहनो।’ अम्मी ने वैसा ही किया। सूट के नीचे काली ब्रा और पैंटी दिख रही थी। उनका फिगर कमाल का लग रहा था।
बाबा ने अम्मी को पास खींचा और जोर से किस करने लगे। ‘उम्माह उम्माह।’ अम्मी ने थोड़ा विरोध किया, लेकिन जल्दी ही उत्तेजित हो गईं और जवाब देने लगीं। बाबा बोले, ‘डार्लिंग, तुम्हें पूरी तरह मजा लेना होगा।
साया को खुश करने के लिए।’ उन्होंने अम्मी को अपनी गोद में बिठाया, स्तनों को दबाया और किस करते रहे। अम्मी सिसकारने लगीं, ‘आह बाबा जी।’ 15-20 मिनट तक ये चला। फिर दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतारे।
अम्मी ब्रा-पैंटी में रह गईं। बाबा पूरी तरह नंगे हो गए। उनका लंड मोटा और लंबा था, कम से कम 8 इंच का। मैं मोबाइल पर देखकर दंग रह गया।
बाबा ने अम्मी को लिटाया, ऊपर चढ़ गए और गहरा किस किया। जीभ से खेलते हुए। फिर अम्मी के शरीर पर किस करने लगे। स्तनों को दबाया, चूसे। ‘वाह बेटी, कितनी जवान हो। तुम्हारी चूचियाँ कितनी रसीली हैं।
अम्मी को अब्बू के बाद पहली बार ऐसा स्पर्श हो रहा था। वो आनंद में तड़पने लगीं। बाबा ने ब्रा उतारी, पैंटी खींची। अम्मी की चूत गीली थी। बाबा ने 10 मिनट तक चूत चाटी। अम्मी चिल्लाईं, ‘आह बाबा जी, मैं झड़ रही हूँ।’ बाबा ने उनका रस पी लिया।
फिर बाबा लेट गए। अम्मी ने उनका लंड सहलाया, चूसा। 10 मिनट तक डीप थ्रोट किया। बाबा के सीने को सहलाते हुए। मैं भी देखते-देखते मुठ मारने लगा। बाबा ने अम्मी के मुँह में झड़ दिया। अम्मी ने निगल लिया और लंड साफ किया।
फिर सहलाकर फिर से कड़ा कर दिया। बाबा ने दूध का ग्लास लाया, एक सैशे से पाउडर मिलाया। अम्मी को आधा पिलाया, खुद आधा पी लिया। (बाद में पता चला ये गर्भनिरोधक था।)
बाबा ने अम्मी की टाँगें फैलाईं, लंड चूत पर रगड़ा। अम्मी ने कूल्हे उठाए। बाबा ने पूरा लंड अंदर ठूँस दिया। धीरे-धीरे चोदा, फिर जोर-जोर से। अम्मी चिल्लाईं, ‘बाबा जी, और जोर से चोदो। गहरा ठोकिए।
बाबा ने 30 मिनट तक पहलवान की तरह चोदा। आखिर में चूत में झड़ दिया। अम्मी बोलीं, ‘बाबा जी, प्रेग्नेंट हो जाऊँगी तो?’ बाबा हँसे, ‘डरो मत, पाउडर से सब ठीक।’
फिर बाबा अम्मी पर लेटे, 10 मिनट किस किया। अम्मी ने फिर लंड कड़ा किया। अब 69 पोजीशन। अम्मी लंड चूस रही थीं, बाबा गांड चाट रहे थे। फिर बाबा ने डॉगी स्टाइल में अम्मी को घुटनों पर किया। ‘अब गांड मारूँगा।’
अम्मी बोलीं, ‘नहीं बाबा जी, दर्द होगा। मेरे पति ने कभी नहीं किया।’ बाबा बोले, ‘साया कर रहा है। पति को खुश करने के लिए।’ उन्होंने लंड थोड़ा सा ग्रीस लगाकर अंदर डाला। अम्मी दर्द से चीखीं, लेकिन धीरे-धीरे मजा आने लगा।
आह, चोदो बाबा जी।’ 10 मिनट डॉगी में, फिर मिशनरी में गांड चोदी और झड़ गए।
पूरी रात बाबा ने अम्मी को चार बार चोदा। अलग-अलग पोजीशन में। मैं तीन बार झड़ गया और सो गया। पता नहीं कब बाबा गए। सुबह अम्मी खुश नजर आ रही थीं। उसके बाद बाबा रोज आने लगे। सेक्स रुकने का नाम ही नहीं लेता।
कुछ दिनों बाद बिजनेस अपने आप सुधर गया। रिसेशन खत्म हो गया था, लेकिन अम्मी को लगा बाबा की जादूगरी से। वो अब बाबा से सब कुछ पूछतीं। सेक्स जारी रहा। दोस्तों, ये मेरी सच्ची स्टोरी है। उम्मीद है आपको पसंद आई।
धन्यवाद………………