मेरा नाम अभय है। उम्र पच्चीस साल। इंदौर से हूँ। इंजीनियरिंग का छात्र हूँ। हमारा घर इंदौर रोड के आखिरी छोर पर है।
हमारे आसपास सिर्फ पाँच-छह मकान हैं। सबसे पास वाली दुकान अनीता भाभी की किराना दुकान है।
भाभी गोरी-चिट्टी, मोटी-तगड़ी औरत है। दो बच्चों की माँ। पति के साथ दुकान चलाती है।
हर सुबह भाभी का पति बाजार जाता है। दुकान भाभी संभालती है। मैं अक्सर वहाँ बैठा रहता हूँ।
एक दिन सामान रखने में मदद कर रहा था। भाभी झुकी हुई थी। मैंने पीछे से उनकी गांड पर हाथ रख दिया।
भाभी ने महसूस किया लेकिन कुछ नहीं बोली। सिर्फ मुस्कुरा दी।
उस दिन के बाद हमारी नजदीकियाँ बढ़ने लगीं। भाभी मुझे बाजार ले जाने के लिए बुलाती। मेरी बाइक पर बैठकर वे मेरे शरीर से चिपक जातीं।
एक दिन वापसी में भाभी ने साफ कहा, “अभय, मुझे तुम्हारे साथ सोना है।” मैंने भी हाँ कह दी।
उसी शाम दुकान बंद करके हम दोनों अंदर चले गए। पति और बच्चे बाहर थे। भाभी ने तुरंत मुझे दीवार से लगाकर खड़ा कर दिया।
उनकी साड़ी ऊपर चढ़ गई। मैंने उनकी चूत में अपनी लंड ठूंस दिया। भाभी जोर-जोर से चीखने लगीं। कुछ ही मिनटों में वे झड़ गईं।
रात को बारह बजे भाभी का फोन आया। वे छत पर इंतजार कर रही थीं। मैं छतों पर चलकर उनके घर पहुँचा।
छत पर ही हमने जल्दी-जल्दी सेक्स किया। उसके बाद दिन में दुकान की सीढ़ियों पर भी कई बार हम चुपके से मिलते।
एक बार पति बाहर गए थे। बच्चे सो चुके थे। पूरी रात हम वरांडे के बिस्तर पर रहे। भाभी पूरी तरह नंगी हो गईं।
मैंने उनके स्तन चूसे, उनकी चूत चाटी। थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी लंड भी मुँह में ली। फिर हमने मिशनरी, डॉगी स्टाइल में कई बार सेक्स किया।
भाभी दो बार झड़ीं। मैंने अंदर ही झड़कर उन्हें गर्भवती बनाने की कोशिश की।
उस रात हम तीन बार सेक्स कर चुके थे। बीयर पीने के बाद भी हम और जोश में आ जाते। भाभी कभी-कभी पैसे भी देतीं, खाना बनाकर खिलातीं।
वे कहतीं, “अभय, चलो कहीं भाग जाएँ।” लेकिन मैंने मना कर दिया।
पाँच साल तक यह चोरी-छुपे का सिलसिला चला। आखिर में मेरी शादी हो गई। भाभी के पति को सब पता चल गया। भाभी ने मुझसे बात करना बंद कर दिया।
फिर भाभी और मैं करीब 15 मिनट तक पड़े रहे। भाभी भी थक गई थी। कुछ देर बाद भाभी उठी और पानी लाई।
मैंने पानी पिया तो जान में जान आई। हमने उस रात 3 बार सेक्स किया। उसके बाद मैंने कई बार XXX हिंदी भाभी की चुदाई का मजा लिया।
और कई बार तो बियर पीकर चोदा क्योंकि भाभी घर में दारू भी रखकर बेचती थी। इस तरह भाभी ने मेरा बहुत साथ दिया।
चुदवाने से लेकर मुझे पैसे भी दिए। भाभी मुझे अक्सर अच्छा-अच्छा खाना बना कर खिलाती थी।
जब मेरा कॉलेज कंप्लीट हो गया और बात शादी की आई तो उसने मेरे साथ भागने तक का बोल दिया—चल अपन भाग जायें।
पर भागने से क्या मिलता! मैंने कहा—चुदाई तो अपनी हो जाएगी शादी के बाद भी! फिर क्या… मेरी शादी हो गई और भाभी के पति को हमारे चुदाई के चक्कर के बारे में पता भी चल गया। इसलिए भाभी आज मुझसे बात नहीं करती।
भाभी का पति व बच्चे नीचे अंदर सो चुके थे। मैंने भाभी की पेंटी निकाल कर भाभी की चूत में लंड भरा और चोदने लगा।
भाभी भी अपनी चूत चुदवाने को बेताब थी। फिर हम करीब 15 मिनट में झड़ गए। फिर भाभी और मैंने किस करी और भाभी नीचे चली गई।
मैं मेरे घर वापस छत पर आकर सो गया।
फिर उसके बाद से भाभी और मैं दुकान पर बैठते थे तो वहीं धूप का समय देखकर अंदर जाते और सीढ़ियों पर सेक्स करते।
खड़े खड़े ही भाभी को चोदना पड़ता। कोई झट से आ जाए… यह डर भी बना रहता था। क्या करें… पर चुदाई तो करना पड़ता है ना! कुछ दिन इसी तरह चलता रहा।
फिर एक दिन की बात है। भाभी का पति कुछ काम से बाहर गया। तो उस दिन उसने मुझे शाम के टाइम हिसाब के लिए दुकान पर रहने का बोला।
मुझे और भाभी को तो बड़ी खुशी हुई कि आज हमारी तमन्ना पूरी होगी।
तो मैं गया और सामान निकाल कर भाभी को दिया। जब भाभी सामान को नीचे रख कर कुछ देख रही थी, तब मेरी नजर भाभी की गांड पर पड़ी।
तब भाभी ने मुझे देख लिया था। फिर भी भाभी अपनी गांड दिखाए वैसे ही सामान देखती रही थी।
मैं भी ऊपर से उतर कर नीचे आया और बाहर निकलने के बहाने भाभी की गांड पर मेरा लंड टच करवाया और बाहर बैठ गया।
भाभी भी मेरी वासना को समझ गई थी। कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। मेरे मन में भाभी को चोदने की इच्छा थी। पर क्या करें… बोल नहीं पाया।
फिर एक दिन भाभी को मैंने बोला—भाभी, एक बात कहूँ? तो भाभी बोली—कहो ना! तब भी मेरी हिम्मत नहीं हुई।
फिर दूसरे दिन भाभी को कुछ लेडीज सामान लेने मार्केट जाना था और भाभी का पति दुकान पर था। उसने भाभी के साथ मुझे भेजा।
बाजार जाते समय भाभी मेरी बाइक पर पीछे बैठी थीं। उनकी साड़ी थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी। मैंने दर्पण में देखा कि उनकी जाँघें चमक रही थीं।
भाभी ने भी देखा कि मैं देख रहा हूँ। उन्होंने साड़ी और ऊपर खिसका दी। मैंने एक हाथ पीछे बढ़ाकर उनकी जाँघ पर रख दिया। भाभी ने हाथ नहीं हटाया।
बाजार में सामान खरीदते समय भाभी ने मुझे एक कोने में खींचकर कहा, “अभय, आज रात को छत पर आ जाना। पति बाहर हैं।” मैंने हाँ कर दी।
रात को जब मैं छत पर पहुँचा तो भाभी पहले से ही नंगी खड़ी थीं। उन्होंने मुझे देखते ही मेरी पैंट खोल दी और मेरी लंड को हाथ में ले लिया।
फिर घुटनों के बल बैठकर मेरी लंड को मुँह में ले लिया। मैंने उनके बालों में हाथ फेरा और उनकी सिर को आगे-पीछे किया।
भाभी की जीभ मेरी लंड पर घूम रही थी। वे चूस रही थीं और कभी-कभी गले तक ले जा रही थीं। मैंने उनकी चूत में उँगली डाली। भाभी की चूत गीली हो चुकी थी।
फिर भाभी खड़ी हुईं और दीवार से सटकर खड़ी हो गईं। मैंने उनके पीछे से लंड घुसा दिया। भाभी चीख पड़ीं।
मैंने उनकी गांड पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारे। भाभी की चूत से चिकनाहट की आवाजें आ रही थीं।
हमने सीढ़ियों पर भी सेक्स किया। भाभी सीढ़ी पर बैठी थीं और मैं उनके बीच में खड़ा था। मेरी लंड उनकी चूत में घुस-घुसकर बाहर आ रही थी।
भाभी मेरे बाल पकड़कर चूम रही थीं।
दुकान बंद करने के बाद भी हम अंदर चले जाते। भाभी ने एक बार मुझे काउंटर के पीछे घुटनों के बल बिठाया और अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ दी। मैंने उनकी चूत चाटी। भाभी जोर-जोर से सिसकारियाँ ले रही थीं।
एक बार पति के बाहर जाने पर हम पूरी रात वरांडे पर रहे। भाभी ने मुझे बीयर पिलाई। फिर नंगी होकर मेरे ऊपर बैठ गईं।
उनकी गांड मेरी जाँघों पर टकरा रही थी। मैंने उनके स्तन दबाए। भाभी ने मेरी लंड को अपनी चूत में डाला और ऊपर-नीचे होने लगीं।
भाभी ने कहा, “अभय, तेरी लंड बहुत मोटी है। मेरी चूत फट रही है।” मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारा। भाभी और तेजी से कूदने लगीं।
हमने कई पोजीशन आजमाईं। मिशनरी में भाभी की टाँगें मेरे कंधों पर थीं। डॉगी स्टाइल में भाभी आगे झुकी हुई थीं। मैंने उनकी गांड चाटी।
भाभी ने कहा, “अभय, मेरी गांड भी चोद।” लेकिन मैंने मना कर दिया।
भाभी ने मुझे पैसे दिए। कभी-कभी पाँच सौ, कभी-कभी हजार। वे कहतीं, “अभय, तू मेरा प्यार है।” मैंने भी उन्हें चूम लिया।
पाँच साल तक यह सिलसिला चला। भाभी के पति को शक होने लगा था। एक दिन उन्होंने मुझे पकड़ लिया।
भाभी ने रोते हुए कहा, “मैंने कुछ नहीं किया।” लेकिन पति को यकीन नहीं हुआ।
आज भाभी मुझसे बात नहीं करतीं। लेकिन यादें अभी भी ताजा हैं।