फर्जी बाबा की मस्त चुदाई

(Farzi Baba Ki Mast Chudai)

काजल पांडे, 27 साल की एक खूबसूरत औरत, गोंडा जिले, उत्तर प्रदेश से थी। उसकी फिगर 34-28-37 की थी, त्वचा बहुत गोरी और चेहरा इतना आकर्षक कि कोई भी देखकर मोहित हो जाए।

उसके स्तन गोल और नरम थे, जैसे दो बड़े-बड़े खरबूजे। जब भी वह उत्तेजित होती, तो वह अपने स्तनों को निचोड़ती और मसलती, और अपनी चूत में उंगली डालकर मजा लेती। उसकी चूत जवानी भरी, रसीली थी, जिसमें लाल क्लिटोरिस बाहर लटकता हुआ बेरी जैसा लगता था।

काजल चार साल से शादीशुदा थी। उसका पति युवा और होशियार था, जो रोजाना उसे चोदता था। लेकिन बच्चा नहीं हो रहा था। काजल अक्सर शिकायत करती, ‘पति जी, हमें बच्चा चाहिए। क्या समस्या है?’ लेकिन पति हंसकर टाल देता, ‘चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा।’

उनके रोजाना के सेक्स से काजल की चूत ढीली हो गई थी, जिससे उसे पहले जैसा मजा नहीं मिलता। फिर भी पति अपनी वासना मिटाने के लिए जोर-जबरदस्ती करता।

काजल को अपना पहला सेक्स याद था। कॉलेज के दिनों में उसके बॉयफ्रेंड के साथ। वह दर्द भरा लेकिन सुखद था। एक रात उसके घर पर कोई नहीं था। बॉयफ्रेंड चुपके से आया, उसके कुंवारेपन को तोड़ा। खून निकला, लेकिन फिर पूरी रात कई राउंड चोदा। काजल को लगा कि वह उसके पति के सेल्फिश सेक्स से कहीं बेहतर था।

उसके ससुराल वाले अंधविश्वासी थे। वे फर्जी बाबाओं के पास जाते, प्रसाद लाते और कहते, ‘ये खा लो, बच्चा हो जाएगा।’ काजल को भरोसा नहीं था, लेकिन परिवार का दबाव था। एक दिन सास ने कहा, ‘बेटी, चलो एक बाबा के पास। वे संतान देते हैं।’ काजल ने हामी भर ली।

बाबा का आश्रम पहुंचीं। बाबा ने काजल के हाथों को छुआ, कंधे पर हाथ रखा। ‘बेटी, प्रसाद लो। ये खाओ, संतान सुख मिलेगा।’ काजल को असहज लगा, लेकिन चुपचाप चली गई। अगले दिन बाबा ने सास को फोन किया, ‘कल घर पर हवन कराओ। पैसे लाना पड़ेगा।’ सास खुश हो गई, ‘ठीक है बाबा जी।’

हवन की तैयारी हुई। पति और ससुर काम पर चले गए। घर पर सिर्फ काजल और सास। बाबा दो शिष्यों के साथ आया। लंबा कुर्ता, दाढ़ी, धोती। ‘हवन कमरे में होगा। सिर्फ काजल अंदर रहेगी। हम बाहर प्रार्थना करेंगे।’ काजल को शक हुआ, ‘सासु जी, ये ठीक है न?’ सास बोली, ‘हां बेटी, बाबा का आदेश है।’

कमरे में शिष्य हवन शुरू करने लगे। जोर-जोर से मंत्र पढ़ने लगे। बाबा ने काजल को जड़ी-बूटी दी, ‘ये खाओ, ये उर्वरता बढ़ाएगी।’ काजल ने आधा खाया, बाकी छिपा लिया। लेकिन जो खाया, उससे उसे चक्कर आने लगे। आंखें भारी हो गईं, शरीर सुन्न। वह गिर पड़ी।

बाबा मुस्कुराया, ‘अब मजा आएगा।’ उसने काजल को फर्श पर लिटाया। ब्लाउज खोला, उसके बड़े स्तनों को बाहर निकाला। वे कांप रहे थे। बाबा ने जोर से निचोड़ा, ‘वाह, कितने नरम हैं।’ फिर मुंह लगाया, चूसा। जीभ से निप्पल चाटा। काजल अर्धचेतन थी, लेकिन शरीर जाग उठा। उसे होश आया, लेकिन दवा के असर से विरोध न कर सकी।

बाबा ने गले लगाया, होंठ चूसे। काजल ने भी जवाब दिया, पैशन से किस किया। काटा, चूसा। बाबा के शरीर को सहलाया, जैसे पति को करती। बाबा ने स्तनों पर हमला बोला। निचोड़ा, चूसा, निप्पल काटा। चेहरे को दोनों के बीच दबाया। काजल कराहने लगी, ‘आह… उह्ह…’

बाबा की धोती में 9 इंच का मोटा लंड खड़ा हो गया। साफ दिख रहा था। काजल की आंखें उस पर टिक गईं। बाबा ने साड़ी उठाई, पेटीकोट ऊपर किया। नीली पैंटी फाड़ दी। चूत पर उंगली फेरी, क्लिटोरिस दबाया। काजल पागल हो गई, ‘ओह्ह… हां…’

बाबा ने लंड चूत की चोंचों पर रगड़ा, क्लिटोरिस पर मला। फिर धक्का दिया। मोटाई से दर्द हुआ, जैसे पहली बार। चूत की दीवारें फटने लगीं। काजल चीखी, ‘हाय… दर्द हो रहा है…’

बाबा ने जोर से धक्का मारा, पूरी तरह अंदर। शिष्य मंत्र तेज पढ़ने लगे, आवाजें दबाने के लिए। हवन खत्म किया, कमरे में घुस आए। एक ने स्तन निचोड़े, दूसरा सहलाया। बाबा जोर-जोर से चोदने लगा। ‘ले बेटी, संतान का बीज मिलेगा।’

काजल चिल्लाई, ‘हाय… ऊह… आह… मम्मी…’ लेकिन चूत गीली हो गई, फिसलन आ गई। दर्द सुख में बदल गया। बाबा तेज चोदा, फिर झड़ गया, गर्म वीर्य अंदर डाला। काजल कांपी, ऑर्गेज्म आया।

फिर शिष्यों की बारी। पहला शिष्य लंड डाला, चोदा। लेकिन बाबा जितना मजा नहीं। ‘आह… हल्का है।’ दूसरा भी चोदा, झड़ा। काजल थक गई, लेकिन संतुष्ट।

बाबा ने तिलक लगाया, फूल दिए। ‘अब पति को रात में वैसा ही करना। नौ महीने में बच्चा होगा।’ दरवाजा खोला। सास इंतजार कर रही थी। ‘क्या हुआ बाबा जी?’ ‘सब ठीक। निर्देश दे दिए।’ सास ने पैसे दिए।

नौ महीने बाद काजल ने बेटा जन्म दिया। सास बोली, ‘दूसरा भी चाहिए।’ काजल मुस्कुराई, ‘हां, बाबा के पास चलें।’ फिर वही रस्म। दवा, चोदना, गैंगबैंग……..