मुस्लिम ड्राइवर ने घोड़ी बना कर चोदा

(Muslim Driver Ne Ghodi Bana Kar Choda)

कोमल एक 32 साल की सुंदर हिंदू महिला थी, जो एक स्कूल में टीचर के रूप में काम करती थी। उसकी शादी को आठ साल हो चुके थे, और वह एक बेटी की मां थी। उसका पति विदेश में नौकरी करता था, जो महीनों से घर नहीं लौटा था।

कोमल की जिंदगी सामान्य लगती थी, लेकिन उसके अंदर एक गुप्त आग सुलग रही थी। वह आग थी उसके पुराने प्रेमी बशीर इक्का की, जो एक 50 साल का मुस्लिम ऑटो ड्राइवर था।

बशीर का शरीर मजबूत था, त्वचा काली और चेहरे पर दाढ़ी, जो उसे और आकर्षक बनाती थी। उसके छह बच्चे थे और दो बीवियां, लेकिन कोमल के लिए वह एक जुनून था।

लॉकडाउन के दौरान उनका अफेयर जोरों पर था। बशीर रोजाना कोमल को स्कूल छोड़ने आता, और कभी-कभी घर के पास पार्किंग में रुककर चुपके से मिलते। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों और सख्ती के कारण यह रुक गया।

कोमल को बशीर का स्पर्श याद आता, खासकर उसके मोटे लंड का जोरदार धक्का। वह रातों को अकेले में अपनी चूत में उंगली डालकर कल्पना करती, ‘बशीर, तुम्हारा बीज मेरे अंदर चाहिए।’ अब 2021 में लॉकडाउन ढीला पड़ गया था। कोमल ने फैसला किया कि वह फिर से बशीर से मिलेगी।

एक जून का शुक्रवार था। कोमल ने अपनी बेटी को मां के पास भेज दिया था। ‘मां, बेटी को आपके भाई के घर ले जाओ ना, कुछ दिनों के लिए। स्कूल का काम है मेरा।’ मां ने सहमति दी। पति तो विदेश में था ही।

कोमल ने अपना पसंदीदा कपड़ा पहना: गहरा भूरा स्लीवलेस ब्लाउज और मैचिंग एप्पल ग्रीन कॉटन साड़ी। साड़ी उसके गोरे शरीर पर चिपककर उसकी 36-28-38 की फिगर को उभार रही थी। उसके स्तन भरे हुए थे, कमर पतली और गांड गोल।

स्कूल से लौटते समय बशीर का ऑटो आया। कोमल चढ़ी, ‘इक्का, आज घर ही छोड़ दो। शाम पांच बजे हो गए।’ बशीर ने आईने से देखा, ‘हुजूर, आपकी साड़ी कितनी सुंदर लग रही है।

लॉकडाउन के बाद पहली बार देखा आपको।’ कोमल शरमाई, ‘चुप रहो इक्का, कोई सुन लेगा।’ घर पहुंचे। बशीर ने कहा, ‘रात आठ बजकर तीस मिनट पर आऊंगा। तैयार रहना।’ कोमल ने सिर हिलाया।

बारिश शुरू हो गई, तेज। आकाश काला हो गया। बशीर आया, ऑटो गेट के अंदर पार्क किया। दरवाजा खटखटाया। कोमल ने खोला, ‘इक्का, अंदर आओ, भीग जाओगे।’ बशीर अंदर घुसा, उसका लुंगी और वेस्ट गीला था। ‘

हुजूर, चाय या कॉफी दोगी?’ कोमल बोली, ‘बैठो, लाता हूं।’ लेकिन बशीर ने उसे रोक लिया। ‘नहीं हुजूर, मुझे तुम्हारी जरूरत है।’ वह कोमल को गले लगा लिया, होंठों पर जोर से चूमने लगा।

कोमल का शरीर कांप उठा। वे दस मिनट तक किस करते रहे, जीभें लड़ाते, सांसें तेज। बशीर के हाथ कोमल की कमर पर, फिर गांड पर। ‘उम्म… इक्का… कितने दिन हो गए।’

अचानक कोमल का फोन बजा, मां का वीडियो कॉल। कोमल घबरा गई, ‘इक्का, बाहर जाओ, मां का कॉल है।’ बशीर बाहर चला गया, लेकिन बारिश और तेज हो गई। कोमल ने कॉल काटा, फिर बुलाया, ‘इक्का, अंदर आ जाओ, ठंड लग जाएगी।’

बशीर लौटा, उसके पैर कीचड़ से सने थे। कम रोशनी थी, बारिश और पास के खेतों की वजह से। बशीर ने टॉर्च जलाई, कोमल के पास आया। कोमल पहले से गीली थी, साड़ी चिपक गई थी उसके शरीर से।

‘हुजूर, आज बाहर बारिश में चुदाई करें। बैकयार्ड में, उस चट्टान के पीछे। कोई नहीं देखेगा, प्राइवेसी है।’ कोमल हिचकिचाई, ‘इक्का, कोई देख लेगा या सांप… डर लगता है।’ बशीर ने कहा, ‘डरो मत, मैं हूं ना। वैरायटी आएगी।’ कोमल मान गई।

बशीर ने कोमल को गोद में उठाया, बैकयार्ड ले गया। चट्टान के पीछे रखा। अपना लुंगी और वेस्ट उतार दिया। उसका लंड खड़ा था, मोटा और लंबा, नसें फूली हुईं। ‘रंडी, ले आया हूं तुझे।’ कोमल का पल्लू खींचा।

कोमल पीठ के बल लेट गई चट्टान पर। बशीर उसके ऊपर झुका, पूरे शरीर को चूमने लगा। बारिश उनके ऊपर बरस रही थी, ठंडा पानी बह रहा। ‘आह इक्का… ठंडा लग रहा है लेकिन मजा आ रहा।’

बशीर ने धीरे-धीरे साड़ी खोलनी शुरू की। पीछे से रोशनी का प्रतिबिंब था। ‘हुजूर, आज तुम्हारा लुक अलग है, कितनी सेक्सी लग रही हो।’ कोमल ने उसे कसकर गले लगाया, ‘तुम्हें पसंद आया तो ठीक।’

बशीर ने पेटीकोट के अंदर हाथ डाला, पैंटी के ऊपर से चूत पर उंगलियां फेरने लगा। जोर से रगड़ा, ट्रिम्ड बालों को छुआ। ‘हुजूर, बाल ट्रिम किए हो, लगता है मेरी राह देख रही थी।’ कोमल शरमाई, बारिश में चेहरा लाल हो गया, ‘हां इक्का, तुम्हारे लिए ही।’

बशीर उसके ऊपर चढ़ गया, क्लिवेज चाटा, नाभि में जीभ डाली। उंगलियां गहराई तक, पैंटी के अंदर। कोमल तड़पी, ‘ओह… इक्का… तेज… आह…’ साड़ी पूरी उतार दी, फेंक दी।

पेटीकोट घुटनों तक ऊपर किया, टांगें चूसीं। ब्लाउज खोला, बिना चेतावनी के स्तनों को चाटा, काटा। कोमल के निप्पल सख्त हो गए। उंगलियों से चूत रगड़ते हुए वह मिनटों में झड़ गई, ‘अई… इक्का… मैं… आ गई…’

पेटीकोट और ऊपर किया, पैंटी उतारी। नंगी चूत पर जीभ फेरी। फिर ऊपर आया, दांतों से ब्लाउज का हुक खोला। आधा खुल गया। महीनों बाद पहली बार लंड चूत में डाला, धीरे से। ‘हुजूर, कितनी टाइट हो गई।’

धक्के शुरू, धीमे फिर तेज। दस मिनट की जोरदार चुदाई बारिश में। कोमल सोच रही थी, ‘ये सस्ता 50 साल का मुस्लिम ड्राइवर मुझे चोद रहा है, छह बच्चों का बाप, दो बीवियों वाला। उम्र, रंग, धर्म सब अलग।’ बशीर तीस मिनट बिना रुके चोदता रहा, पानी बहते हुए।

अचानक रुका, लंड बाहर निकाला। कोमल को डॉगी स्टाइल में किया, पीछे से चूत में फिर डाला। दस मिनट बाद ब्लाउज पूरी उतार दिया। ब्रा और पेटीकोट में चोदता रहा। ‘ले रंडी, तेरी चूत फाड़ दूंगा।’ कोमल चीखी, ‘हां इक्का… चोदो… मजा आ रहा है।

मिनटों में बशीर ने गांड में झाड़ दिया, एनल क्रीपी। लंड अंदर ही रखा, गिर पड़ा कोमल पर। कोमल होश में आई, जल्दी कपड़े पहने, घर दौड़ी। गांड से वीर्य टपक रहा था।

बाथरूम में गई। बशीर अंडरवियर में आया, लंड अभी भी सख्त, वीर्य चिपका। ‘हुजूर, साफ कर लूं।’ कोमल की ब्रा और पेटीकोट धीरे से उतारा। दोनों नंगे। सोलर वॉटर से गर्म शावर लिया। किस करते, साबुन लगाते। एक-दूसरे को साफ किया।

समय रात के ग्यारह बज रहा था। ‘इक्का, अब सो जाओ।’ लेकिन बशीर बोला, ‘नहीं हुजूर, अभी बेडरूम में। मैंने तुझे हर जगह चोदा, लेकिन तेरे वैवाहिक बेड पर नहीं। अब समय आ गया।’

बशीर ने कोमल को नंगी गोद में उठाया, बेड पर ले गया। बेड पर बैठ गया, कोमल का मुंह अपनी जांघों पर। ‘चूस ले हूजूर, मेरी बॉल्स और लंड।’ कोमल ने धीरे से बॉल्स चाटीं, फिर लंड मुंह में लिया। चूसी, ऊपर-नीचे।

बशीर ने कोमल की चूत पकड़ी, चाटने लगा। उंगलियां अंदर। कोमल तड़पी, ‘आह… इक्का… तेरी जीभ… ओह…’ 69 पोजीशन में मजा लेते। कोमल ने बॉल्स चाटीं, फिर गांड चाटने लगी। स्वाद बुरा था, लेकिन प्यार से। ‘इक्का, तुम्हारी गांड चाट रही हूं।’ बशीर की चाट तेज, कोमल फिर झड़ी।

उत्तेजना में बशीर ऊपर चढ़ा, लंड चूत में डाला। धीरे-धीरे चोदने लगा। कोमल के सिर, आंखें, होंठ, नाक चूमा। कान के लोब चूसे। ‘हुजूर, दो साल का अफेयर, हर बार बेहतर हो रहा।’ कोमल बोली, ‘हां इक्का, हम सारा दिन कर सकते हैं।’ हाथ और मुंह से शरीर सहलाया। कोमल ने टांगें बांध ली पीठ पर, ‘चोदो इक्का… तेज…’

बशीर बोला, ‘हुजूर, मेरा सपना है क्रीपी करना, लेकिन प्रेग्नेंसी का डर।’ कोमल ने कहा, ‘शादी के बाद कभी अंदर नहीं झाड़ा पति ने।’ बशीर उत्साहित, ‘तो मैं भर दूंगा अपना मुस्लिम बीज तेरी हिंदू कोख में।

एक बेटा चाहिए मुझे, काला सा।’ कोमल बोली, ‘हां इक्का, गर्भवती कर दो। मेरा पति झूठ बोल दूंगी, तलाक दूंगी अगर जरूरी। तेरी गुलाम बन जाऊंगी।

बशीर ने गहराई तक धक्का मारा, वीर्य छोड़ा चूत में। कोमल कांपी, ‘आह… गर्म बीज… गर्भ ठहर जाएगा।’ बाद में पीरियड आया, लेकिन बशीर न रुका। कोमल ने बर्थ कंट्रोल पिल्स शुरू की………….