मैं मुकेश हूँ, उम्र 28 साल। आज मैं अपनी सुहागरात की वो अनोखी रात के बारे में बताने जा रहा हूँ, जो मेरी जिंदगी का सबसे यादगार पल था। मेरी पत्नी गीतांजलि, मात्र 21 साल की, एकदम परी जैसी सुंदर।
उसकी आँखें काली और बड़ी-बड़ी, होंठ गुलाबी और मुलायम, चेहरा गोरा और चमकदार। उसके बाल लंबे, काले और घने, जो कमर तक लहराते हैं। शरीर का नाप 34-28-36, पतली कमर, भरी हुई छाती और गोल-गोल कूल्हे। पैर लंबे और सुडौल, त्वचा इतनी नरम कि छूने पर ही दिल धड़क जाए।
हमारी शादी एक पारंपरिक बंगाली रीति से हुई थी, और आज वो पहली रात थी जब हम अकेले थे।
रात के करीब 10 बजे हमारा कमरा सजाया गया था। लाल रंग की साड़ी में गीतांजलि बैठी थी, शरम से लाल हो रही थी। मैं भी कुर्ता-पाजामा में था। कमरे में हल्की रोशनी, अगरबत्ती की खुशबू और फूलों की महक।
मैं उसके पास गया और धीरे से हाथ पकड़ा। ‘गीतू, आज हम दोनों एक हो गए हैं। डरना मत, सब कुछ अच्छा होगा।’ मैंने कहा। वह मुस्कुराई, लेकिन आँखें नीची। ‘जी मुकेश जी, मैं थोड़ी घबरा रही हूँ। ये पहली बार है।’ उसकी आवाज काँप रही थी।
मैंने उसे गले लगाया। उसके शरीर की गर्मी महसूस हुई। ‘चलो, पहले थोड़ा बात करते हैं।’ मैंने कहा। हम बिस्तर पर बैठे। मैंने अपनी पुरानी यादें शेयर कीं। ‘तुम्हें पता है, नौ साल पहले मेरी बंगाली भाभी के साथ मेरा पहला अनुभव हुआ था।
वो मेरी उम्र से बड़ी थीं, लेकिन उन्होंने मुझे सब सिखाया। दर्द के बिना कैसे आनंद लिया जाए, कैसे पार्टनर को खुश रखा जाए। आज वही सीख तुम्हें दूँगा।’ गीतांजलि ने शरमाते हुए पूछा, ‘कैसा अनुभव था वो?’ मैंने हँसते हुए कहा, ‘वो एक राज है, लेकिन आज से हमारा राज बनेगा।’
धीरे-धीरे मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा। वह काँप गई। ‘आराम से, गीतू। मैं कुछ भी जबरदस्ती नहीं करूँगा।’ मैंने कहा। उसने सिर हिलाया। मैंने उसके गाल पर चुंबन किया। होंठ नरम थे। फिर धीरे से उसके होंठों पर। हमारा पहला किस। उसकी साँस तेज हो गई। मैंने जीभ डाली, वह हिचकिचाई लेकिन फिर साथ दिया। चुंबन लंबा चला, पाँच मिनट तक। उसके हाथ मेरी पीठ पर फिरने लगे।
अब मैंने उसकी साड़ी का आँचल सरकाया। ब्लाउज दिखा, कढ़ाई वाला।
छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। ‘तुम बहुत सुंदर हो।’ मैंने कहा। उसने शरम से मुंह फेर लिया। मैंने ब्लाउज के हुक खोले। अंदर सफेद ब्रा। मैंने ब्रा उतारी। उसके स्तन बाहर आए, गोल और भरे हुए। निप्पल गुलाबी और छोटे।
मैंने एक को मुंह में लिया। चूसा धीरे-धीरे। वह सिसकारी भरने लगी। ‘आह मुकेश जी।’ उसकी आवाज मीठी। दूसरा स्तन हाथ से दबाया। निप्पल सख्त हो गया।
मैंने साड़ी पूरी खोल दी। पेटीकोट बंधा था। कमर पतली, नाभि गहरी। मैंने पेटीकोट खोला। अंदर पैंटी। उसके पैर फैलाए। चूत के ऊपर हल्के बाल, गीली लग रही थी। ‘गीतू, तुम्हारी चूत कितनी प्यारी है।’ मैंने कहा। वह शरमाई, ‘नहीं देखो ना।
लेकिन मैंने पैंटी उतार दी। चूत गुलाबी, सील बंद जैसी। अनछुई थी। मैंने उंगली से छुआ। गीली। ‘तुम तैयार हो रही हो।’ मैंने कहा।
अब मेरी बारी। मैंने कुर्ता उतारा। छाती नंगी। फिर पाजामा। मेरा लंड बाहर आया, सीधा खड़ा। आठ इंच लंबा, मोटा। गीतांजलि ने देखा और आँखें बंद कर लीं। ‘ये तो बहुत बड़ा है। दर्द होगा।’ वह बोली। मैंने हँसकर कहा, ‘डरना मत।
भाभी ने सिखाया है, दर्द के बिना कैसे डालें। पहले तेल लगाऊँगा, फिर धीरे-धीरे।’ मैंने बेडसाइड से तेल की शीशी ली। अपने लंड पर लगाया। चमकदार हो गया। फिर उसकी चूत पर उंगली से तेल लगाया। वह काँप उठी। ‘ठंडा लग रहा है।’ कहा।
मैंने उसे लिटाया। पैर फैलाए। लंड का सिरा चूत पर रखा। धीरे दबाया। सील महसूस हुई। ‘आराम से साँस लो।’ मैंने कहा। वह बोली, ‘हल्का दर्द हो रहा है।’ मैंने रुका। चुंबन किया। स्तन चूसे। फिर दोबारा।
धीरे-धीरे अंदर गया। सील टूटी, लेकिन खून ज्यादा नहीं। तेल की वजह से चिकना। वह चीखी नहीं, बस सिसकारी ली। ‘आह, अब ठीक है।’ कहा। पूरा लंड अंदर। गर्मी महसूस हुई।
मैंने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। ऊपर-नीचे। चूत कसी हुई। आनंद आ रहा था। गीतांजलि की आँखें बंद, होंठ काट रही। ‘मुकेश जी, अच्छा लग रहा है।’ बोली। मैंने स्पीड बढ़ाई। ठोकने की आवाज आने लगी। पचास धक्के। वह भी कूल्हे हिला रही। ‘हाँ, ऐसे ही।’ कहा। मेरी साँस तेज। उसकी चूत गीली हो गई।
अब मैंने पोजीशन बदली। उसे ऊपर किया। वह सवार हुई। लंड अंदर। वह ऊपर-नीचे। स्तन लहरा रहे। मैंने पकड़े, चूसे। ‘गीतू, तुम कमाल हो।’ कहा। वह मुस्कुराई। ‘तुम्हारा लंड कितना मजबूत है।’ बोली। दस मिनट चला।
फिर मैंने नीचे से जोरदार धक्के दिए। वह चिल्लाई, ‘आह, आने वाला है।’ मैंने कहा, ‘मेरे साथ।’ दोनों झड़े। मेरा वीर्य अंदर। उसका रस बाहर। गीला बिस्तर।
हम लेटे। गले लगे। ‘पहली बार इतना अच्छा। दर्द नहीं हुआ।’ वह बोली। मैंने कहा, ‘भाभी की सीख काम आई।’ रात के दो बजे थे। थोड़ा आराम। फिर दोबारा। इस बार डॉगी स्टाइल।
उसके कूल्हे पकड़े। लंड अंदर। जोर-जोर से ठोका। चूत खुल गई। वह चीखी, ‘हाँ मुकेश, फाड़ दो।’ मैंने बाल खींचे। आनंद दोगुना। फिर मिशनरी। पैर कंधे पर। गहराई। दोनों पसीने से तर।
तीसरी बार ओरल। मैंने उसकी चूत चाटी। जीभ अंदर। वह पागल हो गई। ‘आह, क्या कर रहे हो।’ बोली। मैंने क्लिट चूसा। वह झड़ी। फिर उसने मेरा लंड मुंह में लिया। पहली बार। चूसा धीरे। मैंने सिखाया, ‘गहराई से।’ वह कोशिश की। गैग हुई लेकिन जारी। मैंने मुंह में झड़ दिया। वह निगल गई। ‘स्वाद अजीब।’ बोली।
रातभर पाँच बार। हर बार नया पोज। सुबह चार बजे सोए। थकान लेकिन खुशी। गीतांजलि बोली, ‘कल फिर।’ मैंने हँसकर कहा, ‘हमेशा………….