मेरा नाम राहुल है। मैं पुणे में एक आईटी कंपनी में काम करता हूं। हमारा ऑफिस बड़ा है, और वहां तरह-तरह के लोग आते-जाते रहते हैं। लेकिन जब साहिल हमारी टीम में जॉइन हुआ, तो सबकी नजरें उस पर टिक गईं।
साहिल लंबा, छरहरा और जिम जाने वाला लड़का था। उसके तेज नुक्स, काली आंखें और हमेशा मुस्कुराता चेहरा किसी को भी आकर्षित कर सकता था। लड़कियां तो उसे देखते ही घूरने लगतीं, लेकिन मैं… मैं कुछ और ही महसूस करता था।
पहली नजर में ही मेरा दिल धड़कने लगा। उसके शरीर की बनावट, चौड़ी छाती और मजबूत बाहें देखकर मेरी सांसें तेज हो जातीं। लेकिन मैं जानबूझकर दूरी बनाए रखता। ऑफिस में किसी को शक नहीं होना चाहिए था।
साहिल का जॉइनिंग डे से ही मैं उसे चुपके-चुपके देखता रहता। मीटिंग्स में जब वह बोलता, तो उसकी गहरी आवाज मेरे कानों में गूंजती। लंच टाइम पर जब वह कैंटीन में आता, तो मैं दूर से ही उसकी हर हरकत पर नजर रखता।
महीनों बीत गए, लेकिन हमारी बातचीत कभी ज्यादा आगे नहीं बढ़ी। बस ‘हाय-हेलो’ और काम की बातें। मैं अकेला रहता हूं पुणे में, एक छोटा सा फ्लैट किराए पर। रातें अकेले कटतीं, और साहिल के ख्यालों में ही बीत जातीं। लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई कुछ कहने की।
फिर आया सैलरी का दिन। ऑफिस में सब खुश थे। शाम को साहिल मेरे पास आया और बोला, ‘राहुल, आज सैलरी आई है। चल ना, बीयर पीते हैं। बाहर बार में।’ मैंने हंसते हुए कहा, ‘अरे साहिल, तू तो नया-नया आया है, और पहले ही पार्टी देने को तैयार। ठीक है, चलते हैं।
हम दोनों ऑफिस से निकले और पास के एक बार में पहुंचे। वहां हमने दो-दो बीयर ऑर्डर कीं। साहिल ने बताया कि वह मुंबई से है, और यहां नई जॉब के लिए आया। बातों-बातों में वह अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में खुलने लगा।
यार राहुल, मेरी गर्लफ्रेंड रिया है। वो कितनी हॉट है, कल्पना भी नहीं कर सकता। हम लोग रात भर चुदाई करते रहते हैं। उसकी चूत इतनी टाइट है कि…’ वह हंसते हुए रुक गया।
उसकी बातें सुनकर मेरा दिल तेज धड़कने लगा। मैं कल्पना करने लगा कि साहिल कैसे अपनी गर्लफ्रेंड को चोदता होगा। उसका लंड कितना बड़ा होगा, कितना मोटा। बीयर पीते हुए मैंने उसकी ओर देखा।
वह इत्मीनान से बैठा था, लेकिन मेरी आंखें उसके क्रॉच पर चली गईं। क्या पता, उसके अंदर क्या छिपा है। हमने दो बीयर पी लीं, फिर फैसला किया कि घर लौट जाएं। साहिल ने कहा, ‘राहुल, मजा आया। अगली बार फिर चलेंगे।
मैंने हंसकर कहा, ‘हां भाई, लेकिन बार में तो महंगा पड़ता है। मेरे फ्लैट पर आ जाओ ना, कल शाम को। व्हिस्की लाकर पी लेंगे। सस्ता भी पड़ेगा।’ साहिल ने मुस्कुराते हुए सहमति दी, ‘ठीक है यार, कल शाम ऑफिस के बाद आ जाऊंगा।’
अगली शाम को हम ऑफिस से निकले। रास्ते में एक शॉप से व्हिस्की की बॉटल और सोडा खरीदा। मेरा फ्लैट छोटा सा था, लेकिन आरामदायक। लिविंग रूम में सोफा, टीवी और एक लैपटॉप। हमने बॉटल खोली, गिलास बनाए।
मैंने बैकग्राउंड में गजलें चला दीं। गुलाम अली की आवाज कमरे में गूंजने लगी। पहला पेग बनाकर हमने छुआ। साहिल ने कहा, ‘वाह राहुल, तेरी जगह अच्छी है। घर जैसा फील आ रहा है।’ मैंने हंसकर कहा, ‘हां यार, अकेला रहता हूं तो कभी-कभी ऊब जाता हूं। तू आया तो अच्छा लगा।’
दूसरा पेग पीते हुए साहिल की आंखें बंद हो गईं। गजलें उसे नशे में डुबो रही थीं। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने हिम्मत जुटाई और उसके हाथ को छुआ। ‘साहिल, तेरी बॉडी तो कमाल की है। जिम जाता है ना?’ वह मुस्कुराया, आंखें बंद रखे।
मैंने धीरे से उसके बाइसेप्स को दबाया। मसल्स सख्त थे, जैसे पत्थर। ‘वाह, कितने स्ट्रॉन्ग हैं।’ साहिल ने कुछ नहीं कहा, बस आनंद लेता रहा। मैंने और हिम्मत की। उसके कंधे पर हाथ फेरा, फिर छाती पर।
शर्ट के ऊपर से ही उसकी गर्माहट महसूस हो रही थी। तीसरा पेग बनाते हुए मैंने कहा, ‘साहिल, तू थक गया लगता है। मैं तेरे कंधे दबा दूं? मसाज कर दूं।’ वह बोला, ‘हां यार, कर दे। ऑफिस का काम तो सिर चढ़कर बोल रहा है।’
मैं उसके पीछे बैठ गया। शर्ट के ऊपर से कंधे दबाने लगा। धीरे-धीरे हाथ नीचे सरकाए। पीठ पर, कमर पर। फिर साहिल को घुमाया और सामने से छुआ। उसके निप्पल्स पर उंगलियां फेरीं। वह आंखें बंद रखे मुस्कुरा रहा था।
मैंने उसके जांघों पर हाथ रखा, धीरे से मसाज की। क्रॉच की ओर बढ़ा, लेकिन रुका। घंटों ऐसा चला। साहिल ने कुछ नहीं कहा, बस नशे में डूबा रहा। आखिरकार वह बोला, ‘राहुल, अब घर चलूं। कल सुबह ऑफिस है।’ मैंने कहा, ‘हां ठीक है। फिर आना।’ वह चला गया।
जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, मैं बाथरूम में गया। लंड खड़ा था, साहिल के स्पर्श की याद में। मैंने उसे सहलाया, फिर जोर-जोर से हिलाया। कल्पना की कि साहिल का लंड मेरे मुंह में है। कुछ ही मिनटों में गर्म वीर्य बाहर आ गया। मैं थककर बिस्तर पर लेट गया और सो गया।
अगले दिन ऑफिस में सब नॉर्मल। मैंने कुछ नहीं कहा। साहिल ने भी। लेकिन शुक्रवार शाम को वह खुद आया, ‘राहुल, आज फिर पीएंगे?’ मैंने हंसकर कहा, ‘हां यार, आ जा। बॉटल ले आ।
इस बार मैंने प्लान बनाया था। टेस्ट करूंगा उसकी। ऑफिस से लौटे, व्हिस्की पी। एक-दो पेग के बाद मैंने लैपटॉप पर पॉर्न मूवी चला दी। दो लड़के एक-दूसरे को चोद रहे थे। साहिल ने देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा। मैंने उसकी पैंट की ओर देखा। लंड सख्त हो रहा था, बल्ज बन गया।
साहिल ने खुद हाथ डाला और लंड को सहलाने लगा। मैंने हिम्मत की, उसका हाथ हटाया और खुद पकड़ लिया। पैंट के ऊपर से ही मोटाई महसूस हो रही थी। साहिल चुप रहा, पीता रहा और देखता रहा।
मैंने धीरे से जिपर खोला। बटन खोला। अंडरवियर के ऊपर से सहलाया। लंड कांप रहा था। साहिल ने मेरा हाथ अंदर डाल दिया। मैंने पकड़ा। लंबा, मोटा लंड। गर्म, नसें फूली हुईं। मैंने ऊपर-नीचे करने लगा। साहिल की सांसें तेज हो गईं।
कुछ देर बाद वह मेरे सिर को धीरे से दबाया। मैं समझ गया। झुका, लंड पर किस किया। जीभ से सिरा चाटा फिर मुंह में लिया। धीरे-धीरे अंदर ले गया। पूरा गले तक। चूसने लगा। साहिल ने मेरी पीठ सहलाई।
मैंने जोर-जोर से चूसा। चपचप की आवाजें आने लगीं। साहिल ने सिर दबाया, मुंह चोदने लगा। मैंने गले को ढीला किया, पूरा अंदर ले लिया। अचानक वह कांपा, और गर्म वीर्य मुंह में छूट गया। मैंने निगल लिया। साहिल उठा, ‘मैं बाथरूम जाऊं।’
वह लौटा, नया पेग बनाया फिर से पॉर्न देखने लगे। लेकिन जल्दी ही उसका लंड फिर खड़ा हो गया। मैं खुश हुआ। सीधे पूछा, ‘साहिल, मेरी गांड मारेगा?’ वह मुस्कुराया, आंख मारी। मुझे खींचा। मैं फिर लंड चूसने लगा।
साहिल बोला, ‘कंडोम ला।’ मैं लाया। उसने पहना मुझे पेट के बल लिटाया। गांड पर थूक लगाया। लंड का सिरा दबाया। टाइट था। दर्द हुआ। ‘रिलैक्स कर राहुल।’ मैंने गहरी सांस ली। धीरे-धीरे अंदर गया। दर्द सहा। फिर वह अंदर-बाहर करने लगा। दर्द कम हुआ, मजा आने लगा।
फिर वह बोला, ‘पीठ के बल लेट।’ मैं लेटा पैर ऊपर उठाए। सामने से चोदा आंखों में आंखें डालकर मुस्कुराया ‘आ रहा हूं। कहां छोड़ूं?’ मैंने मुंह खोला। उसने कंडोम निकाला, मुंह में डाला। चोदा, फिर वीर्य छोड़ा हम नहाए साथ में। फिर वह चला गया।
इसके बाद कई बार हुआ। कभी ऑफिस के बाद, कभी वीकेंड पर। कभी पॉर्न देखते, कभी सीधे। लेकिन कभी बात नहीं की…………..