मेरा नाम रोहित साहू है। मैं मुंबई में एक मार्केटिंग स्पेशलिस्ट हूं। मेरी जिंदगी काफी व्यस्त है, लेकिन मेरे कुछ करीबी दोस्त हैं जो इसे रोचक बनाते हैं। उनमें से एक है अनवर, मेरा सबसे अच्छा दोस्त।
हम दोनों ने साथ में पढ़ाई की है। अनवर पुणे में एक मैनेजर के तौर पर काम करता है, लेकिन उसके परिवार का मुंबई में एक फ्लैट है। अनवर का पिता दुबई में काम करता है और साल में सिर्फ एक-दो बार ही आता है। इसलिए अनवर की मां सलमा अकेले ही मुंबई के फ्लैट में रहती हैं।
अनवर और मैं बहुत क्लोज हैं। जब भी मैं मुंबई में होता हूं, तो उसके फ्लैट पर चला जाता हूं। वहां पार्टियां होती हैं, दोस्त इकट्ठे होते हैं, और मस्ती चलती रहती है। अनवर पुणे चला जाता है तो भी मैं उसके घर आता रहता हूं।
सलमा आंटी से मेरी अच्छी बॉन्डिंग है। वे 38 साल की हैं, लेकिन दिखने में बिल्कुल जवान लगती हैं। उनकी खूबसूरती ऐसी है कि लगता है वे अनवर की बहन हैं, मां नहीं। सलमा एक अमीर पुणे परिवार से हैं।
उनका रंग गोरा है, फिगर कमाल का है – पतली कमर, भरी हुई छाती और गोल गोल कूल्हे। जब वे साड़ी पहनती हैं, तो उनका ब्लाउज इतना टाइट होता है कि चूचियां बाहर आने को बेताब लगती हैं।
मैं सलमा आंटी के साथ हमेशा फ्लर्ट करता रहता हूं। जब हम कार्रोम खेलते हैं, तो मैं उनकी गोरी चूचियों को घूरता रहता हूं। कभी-कभी मजाक में कहता हूं, ‘आंटी, आपकी आंखें तो कमाल की हैं, लेकिन ये…’ और इशारा उनकी छाती की ओर।
वे हंस देती हैं और कहती हैं, ‘रोहित, तू तो शरारती है।’ लेकिन कभी नाराज नहीं होतीं। एक बार कार्रोम खेलते हुए मैंने जानबूझकर अपना खड़ा लंड उनकी गांड से रगड़ दिया। वे मुस्कुराईं और कुछ नहीं बोलीं। कभी-कभी मैं उनकी चूचियां दबा देता हूं, और वे बस शरमाकर हंस देती हैं।
मेरा घर उनके फ्लैट से सिर्फ 1 किलोमीटर दूर है। अनवर न होने पर भी मैं हफ्ते में 1-2 बार उनके पास चला जाता हूं। खाना खा लेता हूं, बातें करता हूं। फ्लर्टिंग जारी रहती है। वे भी मजा लेती हैं। धीरे-धीरे मेरी सलमा आंटी के प्रति आकर्षण बढ़ता गया।
मैं कल्पना करने लगा कि अनवर की मुस्लिम मां को चोदूंगा। रोज रात को उनके बारे में सोचकर मुठ मारता। उनकी गोरी चूत, उनकी गांड, उनकी चूचियां – सब कुछ मेरे दिमाग में घूमता। मैंने फैसला कर लिया कि सलमा को अपना शिकार बनाऊंगा।
एक शनिवार की शाम को सलमा आंटी का फोन आया। ‘रोहित, आज डिनर के लिए आ जाना। कल तो संडे है, आराम से रहना।’ मैंने हामी भर ली। लेकिन काम में उलझ गया। कुछ एरंड्स भी करने पड़े। आखिरकार 8:30 बजे पहुंचा।
आने से पहले नहा लिया, कॉफी पी ली। लेकिन जाते वक्त सलमा के बारे में सोचते हुए मेरा लंड खड़ा हो गया। मुझे लगा कि आज रात कुछ होगा। उनकी शरारतें, उनकी मुस्कान – सब कुछ इशारा कर रहा था कि वे भी चाहती हैं। मैंने रास्ते में वायग्रा की गोली खा ली। आज रात सलमा की चूत फाड़नी है।
फ्लैट का दरवाजा अनलॉक था। मैं अंदर घुसा। किचन से आवाज आ रही थी। सलमा वहां खड़ी थीं, एक टाइट नाइटी पहने हुए। नाइटी इतनी पतली थी कि उनकी गांड का शेप साफ दिख रहा था। गोल, मोटी गांड जो हिल रही थी।
मैंने दरवाजा लॉक कर दिया। पीछे से जाकर उन्हें गले लगा लिया। ‘आंटी, कितनी खूबसूरत लग रही हो।’ मेरे हाथ उनकी चूचियों पर चले गए। मैंने जोर से दबाया। मेरा सख्त लंड उनकी गांड की दरार में दब गया।
सलमा हंस पड़ीं। ‘रोहित, तू इतनी देर से आया। अनवर नहीं है, तो तू और आना चाहिए था।’ वे घूमीं नहीं, बस पीछे से सटे रही। उनकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उन्हें घुमाया और होंठों पर किस कर दिया। वे भी उत्साह से चूसीं। हमारा किस इतना गहरा था कि सांसें रुक सी गईं।
किचन में ही सब शुरू हो गया। मैंने उनकी नाइटी ऊपर सरका दी। ब्रा और पैंटी भी उतार दी। वे पूरी नंगी हो गईं। मैंने गैस बंद कर दी। उनकी चूचियां मसलने लगा, गांड पर थप्पड़ मारे। सलमा ने मेरी पैंट में हाथ डाला, लंड निकाला और सहलाने लगीं। ‘रोहित, ये तो बहुत बड़ा है।’ उन्होंने मेरी टी-शर्ट उतार दी।
मैंने उन्हें दीवार से सटा दिया। दो उंगलियां उनकी चूत में डाल दीं। वे चीखीं, ‘स्स्सी… आह्ह… ओह्ह… उम्म…’ उनका शरीर मछली की तरह तड़पने लगा। वे मेरे लंड को जोर-जोर से सहला रही थीं। मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दी। अब हम दोनों नंगे थे।
सलमा बोलीं, ‘चलो बेडरूम में चलें।’ लेकिन मैंने कहा, ‘नहीं, यहां किचन में ही चुदाई करूंगा। थ्रिल होगा।’ वे सहमत हो गईं। ‘हां रोहित, लेकिन मुझे आंटी मत कहना। सलमा कहो। तुम मेरे मालिक हो, पति हो, राजा हो। मेरी चूत फाड़ दो।
मैंने उन्हें किचन स्लैब पर बिठा दिया। टांगें फैलाईं और चूत चाटने लगा। जीभ से चूत के होंठ चाटे, क्लिटोरिस को रगड़ा। उंगलियां अंदर डालीं।
सलमा चीखने लगीं, ‘आह्ह रोहित, तेरी जीभ तो कमाल की है। किसी लंड से भी बेहतर। मैंने कभी इतना मजा नहीं लिया। चूत फाड़ दो, राजा।’ वे मेरे सिर को चूत से दबा रही थीं। कमर हिला रही थीं। ‘और जोर से चाटो।’ अचानक वे झड़ गईं। चूत से रस निकला, जो मैंने पी लिया। फिर दूसरी बार, तीसरी बार। वे बार-बार झड़ीं, चीखती रहीं।
अब सलमा बोलीं, ‘रोहित, अपना लंड डालो। मेरी चूत प्यासी है। बुझाओ इसे।’ मैंने लंड पर थूक लगाया, चूत के मुंह पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर कर दिया। सलमा सिसकारी भर ली, ‘आह्ह… कितना मोटा है।’
मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। उनकी चूचियां पकड़ लीं। वे कमर उठा-उठा कर मिल रही थीं। ‘चोदो मुझे दार्लिंग, चूत को और जोर से चोदो। फाड़ दो इसे। मुझे अपनी रंडी बना दो। हां… हां… आह्ह!’ वे हिंदी और इंग्लिश में चीख रही थीं। तीसरी बार झड़ गईं।
मैं अभी भी अंदर ही था। उन्हें गोद में उठा लिया। वे टांगें लपेट लीं। दीवार से सटा कर चोदता रहा। किचन में उनकी चीखें गूंज रही थीं। फिर उन्हें गोद में लेकर बेडरूम चला गया, लंड चूत में ही डाले। बेड पर लेट गया। वे ऊपर चढ़ गईं। जोर-जोर से उछलने लगीं। मैं चूचियां निचोड़ रहा था। पांचवीं बार वे झड़ीं।
सलमा थक गईं। ‘रोहित, अब और नहीं सहन होता। लेकिन तेरा लंड तो अभी भी खड़ा है। हाथी का ट्रंक जैसा।’ वे हंस रही थीं। फिर बोलीं, ‘अब गांड मरवा लूं? धीरे-धीरे डालना, फट न जाए।’ मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में बिठाया। थूक से गांड चिकनी की। उंगली डाली, फिर लंड। धीरे से अंदर गया। फिर जोर-जोर से पेला।
शुरू में सलमा सिसक रही थीं, लेकिन जल्दी ही मजा आने लगा। ‘फाड़ दो गांड को राजा। और जोर से चोदो। मुझे ये सनसनी पसंद आ गई। बर्बाद कर दो मेरी गांड।’ वे पीछे धकेल रही थीं। 10 मिनट बाद मैं झड़ गया। गांड में गर्म वीर्य डाला। बाहर निकाला तो देखा, सफेद रस टपक रहा था।
सलमा ने मेरा लंड चूसा, साफ किया। फिर नंगे होकर किचन गए। मटन बिरयानी खाई, एक-दूसरे को हाथ से खिलाया। बेड पर लिपटे और रात भर चुदाई की। सुबह 3 बजे तक। नंगे सो गए।
सुबह 8 बजे साथ नहाए, फिर चुदाई। पूरा संडे नंगे रहे, दिन भर चोदते रहे…………………………………