मेरा नाम कार्तिक है। मैं भोपाल में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूं। हमारा घर एक तीन बेडरूम का फ्लैट है जो कि किराए पर लिया गया है। यहां मैं अपने कजिन भाई सुभाष और उनकी पत्नी आंशु के साथ रहता हूं।
सुभाष का मार्केटिंग का काम है इसलिए वो अक्सर बाहर घूमते रहते हैं। घर का माहौल बहुत ही आरामदायक है लेकिन कभी-कभी अकेलापन भी महसूस होता है। खासकर जब सुभाष दिल्ली या किसी दूसरे शहर में होते हैं।
ये कहानी 2019 की है। उस समय सुभाष दिल्ली गए हुए थे। एक सुबह मैं उठा तो देखा कि आंशु भाभी का बुखार बहुत तेज है। वो बिस्तर पर लेटी हुई थीं और उनके चेहरे पर पसीना आ रहा था। मैंने तुरंत उन्हें उठाया और कहा, “भाभी, आपका बुखार तो बहुत तेज लग रहा है।
चलिए मैं आपको हॉस्पिटल ले जाता हूं।” आंशु ने कमजोरी से कहा, “कार्तिक, बस थोड़ा आराम कर लूं तो ठीक हो जाऊंगी।” लेकिन मैंने जिद की और उन्हें कार में बिठाकर नजदीकी हॉस्पिटल ले गया।
डॉक्टर ने चेकअप किया और कुछ दवाइयां दीं। मैंने दवाइयां खरीदीं और घर लौट आए। शाम तक आंशु का बुखार उतर गया। वो थोड़ी बेहतर महसूस कर रही थीं। रात को मैंने उन्हें कहा, “भाभी, आप सो जाइए।
अगर कुछ जरूरत हो तो मुझे बुला लेना।” आंशु ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है कार्तिक, तुम भी सो जाओ। थैंक यू इतना ख्याल रखने के लिए।” वो सो गईं और मैं अपने कमरे में चला गया।
रात के करीब 11 बजे अचानक आंशु की आवाज आई, “कार्तिक… कार्तिक…” मैं दौड़कर उनके कमरे में गया। वो कांप रही थीं ठंड से। “भाभी, क्या हुआ?” मैंने पूछा। उन्होंने कहा, “बहुत ठंड लग रही है।
बुखार तो उतर गया लेकिन शरीर कांप रहा है।” मैंने जल्दी से एक कंबल लाकर उन्हें ओढ़ा दिया। फिर सोचा कि शायद गर्मी की जरूरत है। मैंने कंबल के ऊपर से उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया ताकि मेरी बॉडी हीट उन्हें गर्माहट दे सके।
आंशु ने विरोध नहीं किया। धीरे-धीरे उनकी कांपना बंद हो गई और वो सो गईं। लेकिन मैं जागता रहा। उनके शरीर की गर्माहट महसूस कर रहा था। मेरी बॉडी में एक अजीब सी उत्तेजना हो रही थी।
मेरा लंड खड़ा हो गया था। पूरी रात मैं उन्हें ऐसे ही पकड़े रहा लेकिन कुछ किया नहीं। बस उनकी सांसों की गर्मी महसूस करता रहा। सुबह होने पर मैं थककर सो गया।
सुबह उठा तो आंशु पहले से उठ चुकी थीं। ब्रेकफास्ट बनाया हुआ था। हमने साथ खाया लेकिन मैं उनकी आंखों में देखने से बच रहा था। खाने के बाद मैंने धीरे से कहा, “भाभी, कल रात के लिए सॉरी।” आंशु ने मुस्कुराई और कहा, “अरे कार्तिक, क्या सॉरी? वो तो जरूरत थी।
मैंने कुछ नहीं कहा और ऑफिस चला गया। लेकिन दिमाग में उनकी बॉडी घूम रही थी। काम पर भी ध्यान नहीं लग रहा था।
दोपहर के दो बजे मेरा फोन बजा। आंशु का नंबर था। मैं डर गया लेकिन उठाया। “हैलो भाभी,” मैंने कहा। आंशु ने कहा, “कार्तिक, कल रात की बात को भूल जाओ। वो तो मजबूरी थी। लेकिन सच कहूं तो मुझे बहुत अच्छा लगा जब तुमने मुझे पकड़ रखा था।
सुभाष तो कभी ऐसा नहीं करते। वो महीने में 20 दिन बाहर रहते हैं और मैं अकेली रह जाती हूं।” मैं चुप रहा। फिर उन्होंने कहा, “कार्तिक, मेरी इच्छाएं अधर में लटकी रहती हैं। सुभाष वो सुख बहुत कम देते हैं जो एक औरत को चाहिए। क्या तुम मुझे वो खुशी दे सकते हो?”
मैं स्तब्ध रह गया। मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। लंड फिर से सख्त हो गया। लेकिन मैंने फोन काट दिया। घर लौटने का मन नहीं था लेकिन शाम सात बजे मैं डुप्लीकेट चाबी से घर में घुसा। आंशु ने मुझे देखा और मुस्कुराई।
वो साड़ी में लग रही थीं अद्भुत। उनका गोरा रंग, उनकी भरी-भरी बॉडी… मुंह में पानी भर आता था। वो मेरी ओर आईं और मुझे गले लगा लिया। फिर उनके होंठ मेरे होंठों पर आ गए।
मैंने भी उन्हें जोर से हग किया। मन तो कर रहा था कि उन्हें टेबल पर लिटा दूं और चोद दूं लेकिन मैंने सोचा धीरे-धीरे चलना चाहिए। हमने डिनर किया। फिर बीयर पी। आंशु थोड़ी नशे में आ गईं। फ्लर्ट करने लगीं। “कार्तिक, तुम कितने हैंडसम हो,” उन्होंने कहा।
मैंने हंसकर कहा, “भाभी, आप तो कमाल की हैं।” फिर मैंने उन्हें गोद में उठाया और उनके बेडरूम में ले गया। दरवाजा लॉक किया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया।
मैंने अपनी शर्ट उतारी। उनके जांघों के पास बैठ गया और उनके होंठ चूमने लगा। आंशु बीयर और वासना से मदहोश हो रही थीं। वो तड़पने लगीं। मेरा लंड देखते ही सख्त हो गया। आंशु ने कहा, “कार्तिक, मुझे पूरा सुख दो। सुभाष वो कभी नहीं दे पाते।
मैंने उनके शरीर को चूमना शुरू किया। उनकी साड़ी, ब्लाउज सब उतार दिया। अंदर लाल ब्रा और पैंटी में उनका गोरा शरीर चमक रहा था।
मैंने उनके स्तनों को मसाज करना शुरू किया। फिर उनके रसीले होंठ चूसे। वो भी मेरी पीठ सहलाने लगीं। मैंने ब्रा का हुक खोला। उनके बड़े स्तन बाहर आ गए। मैंने उन्हें जोर-जोर से चूसा। आंशु चीखीं, “आह… कार्तिक… और चूसो…” मैंने चूसा जब तक वो लाल न हो गए।
उनकी चूत गीली हो गई। आंशु ने मुझे धक्का दिया और ऊपर चढ़ गईं। मेरी पैंट उतारी। अंडरवियर के ऊपर से मेरे लंड को मसाज करने लगीं।
मैंने नीचे से उनके स्तनों को पकड़ा और निचोड़ लिया। वो मेरे शरीर को चूमने लगीं। अंडरवियर उतारा और मेरे आठ इंच के खड़े लंड को हाथ में ले लिया। “वाह कार्तिक, कितना बड़ा है,” उन्होंने कहा।
फिर उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं। पांच-छह मिनट तक चूसा। मैं आनंद में खो गया। फिर वो रुकीं और बोलीं, “मेरी चूत जल रही है प्यास से।” हम 69 पोजीशन में आ गए।
मैंने उनकी क्लिट चाटना शुरू किया। वो उछलने लगीं। मैंने उनकी गांड सहलायी। वो मेरे लंड को चूस रही थीं। दस मिनट तक चला। फिर आंशु साइड में लेट गईं। मैंने उनके शरीर को चूमते हुए नीचे आया।
उनकी टांगें फैलाईं। अपना लंड उनकी गीली चूत पर रगड़ा। फिर धीरे से अंदर डाला। आंशु चीखीं, “आह…” उनके स्तन ऊपर उठ गए। मैंने उनकी पीठ सहारा दी ताकि स्तन और उभरें। फिर अंदर-बाहर करने लगा।
उनकी चीखें सुनकर मैं और जोर से ठोकने लगा। फिर वो ऊपर चढ़ गईं। लंड अंदर ले लिया। मैंने उनकी गांड पकड़ी और नीचे से धक्के मारे। लंड गहराई तक जा रहा था। दस मिनट बाद वो झड़ गईं और मेरे ऊपर गिर पड़ीं।
मैं अभी नहीं झड़ा था। धीरे-धीरे अंदर हिलाता रहा। उनकी बड़ी मुलायम गांड सहलायी। “भाभी, डॉगी स्टाइल करेंगे?” मैंने पूछा। “हां कार्तिक, करो,” उन्होंने कहा।
वो चारों हाथ-पैरों पर आ गईं। मैंने पीछे से चूत में डाला। अंगूठे से उनकी गांड के छेद में उंगली डाली। धक्के मारते हुए अंगूठा अंदर-बाहर किया। आंशु कराहने लगीं, “और जोर से कार्तिक… मेरी चूत फाड़ दो।
मैंने जबरदस्त चोदा। क्लाइमैक्स आने वाला था। “कहां झड़ूं भाभी?” “अंदर ही कार्तिक, कोई प्रॉब्लम नहीं,” उन्होंने कहा। मैंने जोर का धक्का मारा और गहराई में झड़ गया। चूत में स्पर्म भर दिया।
हम आराम करने लगे। आंशु ने सांस लेते हुए कहा, “कार्तिक, तुमने तो मेरी प्यास बुझा दी।” मैंने लंड बाहर निकाला। वो थोड़ा चूसीं। फिर मेरे कंधे पर सिर रखा। उंगलियां मेरी छाती पर फिराने लगीं। हम सो गए। रात के एक बजे मैं जागा।
उनकी गांड मेरी ओर थी। मैंने चाटना शुरू किया। वो जागीं। मैंने जीभ से गांड का छेद गीला किया। थूक लगाकर लंड पर लगाया और गांड में डाल दिया।
शुरू में वो चीखीं लेकिन फिर एंजॉय करने लगीं। बीस मिनट तक गांड मारी और झड़ गया। फिर गले लगकर सो गए। आंशु ने कहा, “काश सुभाष भी ऐसा करते। लेकिन तुमने सब कुछ पूरा कर दिया।
उस रात हमने तीन बार चुदाई की। एक-दूसरे का रस निकाला। ये सिलसिला 2021 तक चला। बाद में आंशु की बहन को भी चोदा। उनकी फ्रेंड को पता चला तो उसे भी चोदा। अब मैं कॉल बॉय बन गया हूं। कैसे हुआ, वो बाद में बताऊंगा……………………….