दो साल पहले की बात है। मैं अमृतसर में नौकरी करता था। एक दिन मुझे जलंधर जाना पड़ा।
सुबह आठ बजे घर से निकला। काम निपटाकर रात नौ बजे वापस लौट रहा था। रास्ते में कार का फैन बेल्ट टूट गया।
अंधेरा हो चुका था और ग्यारह बज चुके थे। मैं परेशान होकर खड़ा था।
तभी एक ट्रैक्टर आया। ड्राइवर का नाम फिरोज था। उसने मेरी मदद की। बोला, “भाई, गाँव पास ही है। कार को टो करके ले चलते हैं। रात भर रुक जाओ।” मैं मान गया।
फिरोज मुझे अपने घर ले गया। घर में उसकी माँ आईशा रहती थीं। उम्र चालीस-बयालीस के आसपास।
शरीर भरा-भरा, गोरा-गोरा। उनकी छाती बहुत बड़ी थी। कुरते के नीचे ब्रा नहीं थी, इसलिए दोनों स्तन साफ दिख रहे थे।
फिरोज ने माँ को बुलाया और कहा, “अम्मी, ये मेहमान हैं। रात रुकेंगे।”
रात का खाना खाने के बाद फिरोज ने मुझे लुंगी और कुर्ता दिया। बोला, “सो जाओ, मैं खेतों में पानी लगाने जा रहा हूँ।” वह चला गया।
मैं दूसरे कमरे में लेटा था। आईशा की मोटी गांड और बड़ी छाती का ख्याल आते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने लुंगी के अंदर हाथ डालकर हस्तमैथुन शुरू कर दिया।
तभी दरवाजा खुला और आईशा अंदर आईं। उन्होंने काला लुंगी-कुर्ता पहना हुआ था।
कपड़ा उनके मोटे कूल्हों पर चिपक रहा था। उन्होंने कहा, “बेटा, गाँव में बाथरूम नहीं है। बाहर जाकर पेशाब कर लो।”
मैं उठा और उनके साथ बाहर निकला। वे मुझे घर से काफी दूर ले गईं। मैंने पेशाब करने के लिए लुंगी ऊपर उठाई। मेरा लंड अभी भी खड़ा था।
आईशा की मोटी गांड देखकर और भी सख्त हो गया।
वापस जाते समय मैं फिसल गया। सीधा उनके पीछे जा लगा। मेरा खड़ा लंड उनकी गांड से रगड़ खाने लगा। एक हाथ अनजाने में उनकी नरम छाती पर पड़ गया।
आईशा रुक गईं। उन्होंने महसूस किया कि मेरा लंड कितना कड़ा है। मुस्कुराते हुए बोलीं, “तेरा लंड हमेशा ऐसा ही खड़ा रहता है क्या?”
मैंने जवाब दिया, “जब कुछ खास देखता हूँ तो खड़ा हो जाता है।”
“क्या देखा?” उन्होंने पूछा। मैंने उनकी गांड पर हाथ फेरते हुए कहा, “ये।”
“गांड़ चाहिए या चूत?” उन्होंने सीधा सवाल किया।
“दोनों,” मैंने बिना सोचे जवाब दिया।
आईशा ने अपनी लुंगी खोल दी। हाथ मेरी लुंगी के अंदर डालकर मेरा मोटा आठ इंच का लंड पकड़ लिया। उसे अपनी गांड से सटा कर रगड़ने लगीं।
मेरा कंट्रोल टूट गया। मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया। दोनों हाथों से उनकी बड़ी-बड़ी छातियाँ निचोड़ने लगा।
कुर्ते के नीचे ब्रा नहीं थी, इसलिए निप्पल सख्त खड़े हो चुके थे।
मैंने उनका कुर्ता उतारा। सामने दो विशाल स्तन लटक रहे थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा।
आईशा ने दूसरा स्तन मेरे मुंह में ठूंस दिया और बोलीं, “पी ले बेटा, सालों बाद कोई चूस रहा है। ताजा दूध पी ले।”
वे और भी ज्यादा उत्तेजित हो गईं। बोलीं, “जोर से चूस, और जोर से।” मैंने उनकी छातियाँ दोनों हाथों से दबाते हुए निप्पलों को चूस-चूस कर लाल कर दिया।
मैंने अपना कुर्ता और लुंगी उतार दी। पूरी तरह नंगा हो गया। आईशा ने मेरा मोटा लंड पकड़ लिया और तुरंत मुंह में ले लिया।
वे लालच से चूसने लगीं। जीभ से लंड के सिरे को चाटतीं, गले तक ले जातीं।
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें खड़ा किया। उनकी टांगें फैलाईं। घुटनों के बल बैठकर उनकी गीली चूत चाटने लगा।
जीभ अंदर तक डालकर चोदने लगा। आईशा जोर-जोर से चीखने लगीं। उनकी चूत से पानी निकलकर मेरे मुंह में भर गया। वे झड़ गईं।
हमने जोर से गले मिलकर चूमा। उनकी चूत का स्वाद हमारे मुंह में घुल रहा था।
आईशा लेट गईं। बोलीं, “पहले चूत में डाल, फिर गांड़ में।”
मैं उनके ऊपर चढ़ गया। मेरा पूरा आठ इंच का लंड उनकी चूत में घुसा दिया। वे चीख उठीं।
टांगें मेरी कमर में लपेट लीं। “जोर से चोद, रुक मत,” वे बार-बार कह रही थीं।
पंद्रह मिनट तक मैं उनकी चूत को जोर-जोर से ठोकता रहा। लंड पूरी गहराई तक जाता, सर्विक्स से टकराता। आईशा पागल हो रही थीं।
फिर मैंने कहा, “अब गांड़ मारूंगा।” उन्होंने तेल लाकर दिया। वे कुत्ते की तरह चारों हाथ-पैरों पर बैठ गईं।
मैंने उनके गांड़ के छेद पर तेल लगाया। धीरे-धीरे लंड घुसाने लगा। आईशा चीखीं, “पहली बार है, धीरे से।”
जब पूरा लंड अंदर घुस गया तो मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। एक हाथ से उनकी छातियाँ निचोड़ता, दूसरा हाथ उनकी कमर पकड़े हुए था।
धीरे-धीरे आईशा को मजा आने लगा। वे खुद पीछे धक्का लगाने लगीं। “और जोर से मार, और गहरा,” वे चीख रही थीं।
मैंने उनकी गांड़ में जोर से झड़ते हुए अपना पूरा माल अंदर छोड़ दिया। फिर उनके ऊपर गिर पड़ा।
थोड़ी देर बाद दोनों बाहर निकले। आमने-सामने बैठकर पेशाब करने लगे। मैंने पहली बार किसी औरत को पेशाब करते देखा।
रात भर हमने एक-दूसरे को चोदा। चूत, गांड़, मुंह—हर जगह। सुबह फिरोज लौटा तो मैं चुपचाप चला गया।