मुकेश बारहवीं कक्षा का लड़का था। उसके परिवार के चने के खेत गाँव के बाहर फैले हुए थे। दोपहर के बाद जब सब लोग घर पर आराम करते, मुकेश अकेले खेतों में घूमता। आज भी वह चने के पौधों के बीच से गुजर रहा था कि उसे दूर से एक औरत दिखाई दी।
वह औरत थी पड़ोस की चाची, जिन्हें गाँव में राधा चाची कहते थे। वे चने के पौधे तोड़ रही थीं और एक थैले में भर रही थीं। मुकेश को समझ आ गया कि वे चोरी कर रही हैं। उसने धीरे से आगे बढ़कर उन्हें देखा।
राधा चाची पौधों के बीच झुकी हुई थीं। उन्होंने अपनी साड़ी ऊपर उठा रखी थी और नीचे बैठकर पेशाब कर रही थीं। उनका गोल-गोल नंगा चूतड़ मुकेश को साफ दिख रहा था। पहली बार किसी औरत का नंगा बदन देखकर मुकेश का सात इंच का लंड तुरंत खड़ा हो गया।
राधा चाची ने सिर उठाया और मुकेश को देख लिया। वे घबरा गईं।
“अरे मुकेश! तू यहाँ क्या कर रहा है? भाग यहाँ से!”
मुकेश वहीं खड़ा रहा। उसका लंड उसके पजामे में साफ उभरा हुआ था।
“चाची, आप चोरी कर रही थीं। मैं पापा को बता दूंगा।”
राधा चाची का चेहरा सफेद पड़ गया। वे उठकर मुकेश के पास आईं।
“नहीं बेटा, ऐसा मत करना। तेरे पापा को मत बताना। मैं कुछ भी कर दूंगी।”
मुकेश ने उनकी तरफ देखा।
“कुछ भी?”
“हाँ बेटा, कुछ भी।”
मुकेश ने अपनी पजामी का नाड़ा खोला। उसका मोटा लंड बाहर निकल आया।
“चाची, मुझे सेक्स करना आता नहीं। आप सिखा दो।”
राधा चाची ने गहरी सांस ली। वे घुटनों के बल बैठ गईं। उनके हाथ मुकेश के लंड को छूने लगे।
“यह देख, इसको लंड कहते हैं। और यह गेंदें अंडकोष हैं। जब कोई औरत इनको छूती है तो लंड खड़ा हो जाता है।”
उन्होंने मुकेश का लंड हाथ में लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगीं। मुकेश का लंड और भी सख्त हो गया।
“अब मुंह में लो चाची।”
राधा चाची ने मुकेश का लंड अपने मुंह में लिया। उन्होंने जीभ से लंड के सिरे को चाटा और फिर पूरा लंड गले तक ले गईं। मुकेश का लंड उनकी गर्म सांसों में सिकुड़ रहा था।
“चाची, और जोर से चूसो।”
राधा चाची ने मुकेश के अंडकोष को भी हाथ में लिया और उन्हें सहलाते हुए लंड चूस रही थीं। मुकेश का लंड उनकी जीभ पर फड़क रहा था।
“अब खड़ी हो जाओ चाची।”
राधा चाची ने अपनी साड़ी ऊपर उठाई और मुकेश के सामने खड़ी हो गईं। उन्होंने अपने चूत को मुकेश के लंड पर रखा।
“देख बेटा, यह चूत है। इसमें लंड डालने से मजा आता है।”
उन्होंने मुकेश का लंड अपने चूत में घुसा लिया। मुकेश का लंड उनकी ढीली चूत में आसानी से समा गया। राधा चाची ऊपर-नीचे होने लगीं।
“मुकेश, मेरे स्तन दबाओ।”
मुकेश ने राधा चाची के स्तनों को दोनों हाथों से दबाया। उनके स्तन बड़े और मुलायम थे। राधा चाची जोर-जोर से चूत मार रही थीं।
“आह… मुकेश… और जोर से दबाओ… चूत फाड़ दो मेरी…”
मुकेश का लंड उनकी चूत में घुसता और निकलता रहा। कुछ ही मिनटों में मुकेश झड़ गया।
“चाची… मैं… आ रहा हूं…”
मुकेश का लंड राधा चाची की चूत में झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उनकी चूत में भर गया।
राधा चाची ने मुकेश का लंड अपने मुंह में लिया और फिर से चूसने लगीं। मुकेश का लंड दोबारा खड़ा हो गया।
“अब मेरी गांड मारो बेटा।”
राधा चाची चारों हाथ-पैरों के बल बैठ गईं। उन्होंने अपनी गांड मुकेश की तरफ उठा दी।
“चाची, गांड में कैसे डालूं?”
राधा चाची ने अपनी उंगली मुकेश के मुंह में डाली।
“थूक लगा के मेरी गांड में उंगली डाल।”
मुकेश ने राधा चाची की गांड में उंगली डाली। उनकी गांड बहुत तंग थी। मुकेश ने थूक लगाकर उंगली अंदर घुसाई।
“और एक उंगली डाल बेटा।”
मुकेश ने दूसरी उंगली भी डाली। राधा चाची की गांड धीरे-धीरे ढीली हो रही थी।
“अब लंड डालो।”
मुकेश ने अपना लंड राधा चाची की गांड पर रखा और जोर लगाया। लंड आधा अंदर घुस गया। राधा चाची चीख पड़ी।
“आह… दर्द हो रहा है… धीरे…”
मुकेश ने और जोर लगाया। लंड पूरी तरह अंदर घुस गया। राधा चाची की गांड से खून निकल रहा था।
“मुकेश, खून लग रहा है।”
“चाची, दर्द हो रहा है क्या?”
“नहीं बेटा, दर्द ठीक है। अब जोर से मारो।”
मुकेश ने राधा चाची की गांड मारनी शुरू कर दी। उनका लंड उनकी गांड में घुसता और निकलता रहा। राधा चाची जोर-जोर से चीख रही थीं।
“आह… मुकेश… गांड फाड़ दो… और जोर से…”
मुकेश ने राधा चाची की कमर पकड़ ली और जोर-जोर से गांड मारने लगा। उनका लंड उनकी गांड में पूरी तरह समा रहा था।
“चाची… मैं फिर झड़ने वाला हूं…”
“अंदर ही झड़ जा बेटा।”
मुकेश का लंड राधा चाची की गांड में झड़ गया। उन्होंने दस मिनट तक गांड मारी थी।
राधा चाची ने अपनी साड़ी के पल्लू से मुकेश का लंड साफ किया।
“मुकेश, तेरा लंड बहुत मोटा है। कल फिर आना।”
मुकेश ने अपनी पजामी पहनी और घर की तरफ चल दिया।
उस रात मुकेश को नींद नहीं आई। वह सोच रहा था कि कल फिर राधा चाची से मिलेगा।
दूसरे दिन मुकेश फिर खेत में गया। राधा चाची पहले से वहां मौजूद थीं।
“आ गया बेटा? आज क्या करना है?”
“चाची, आज आप मुझे सब कुछ सिखाओ।”
राधा चाची ने मुकेश को जमीन पर लिटा दिया। उन्होंने अपनी साड़ी उतार दी। उनका पूरा बदन मुकेश के सामने था।
“देख बेटा, औरत का बदन कैसा होता है।”
मुकेश ने राधा चाची के स्तनों को चूसा। उनके स्तन बड़े और काले थे। मुकेश ने उनके स्तनों को काटा।
“आह… मुकेश… स्तन काटो… और जोर से…”
राधा चाची ने मुकेश के लंड को हाथ में लिया और उसे चूसने लगीं। मुकेश का लंड उनकी गर्म मुंह में फड़क रहा था।
“चाची, अब चूत में डालो।”
राधा चाची ने मुकेश के ऊपर बैठकर लंड को अपनी चूत में घुसा लिया। उन्होंने ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया।
“मुकेश, मेरी चूत फाड़ दो।”
मुकेश ने राधा चाची की कमर पकड़ ली और जोर-जोर से ऊपर धक्का लगाने लगा। उनका लंड राधा चाची की चूत में घुसता और निकलता रहा।
“चाची… मैं झड़ने वाला हूं…”
“अंदर ही झड़ जा।”
मुकेश का लंड राधा चाची की चूत में झड़ गया।
राधा चाची ने मुकेश का लंड फिर से चूसा। मुकेश का लंड दोबारा खड़ा हो गया।
“अब मेरी गांड मारो।”
राधा चाची चारों हाथ-पैरों के बल बैठ गईं। मुकेश ने अपना लंड उनकी गांड में घुसा दिया।
“आह… मुकेश… गांड फाड़ दो…”
मुकेश ने राधा चाची की गांड मारनी शुरू कर दी। उनका लंड उनकी गांड में घुसता और निकलता रहा।
“चाची… मैं फिर झड़ने वाला हूं…”
“अंदर ही झड़ जा।”
मुकेश का लंड राधा चाची की गांड में झड़ गया।
राधा चाची ने मुकेश को गले लगाया।
“मुकेश, तू बहुत अच्छा लड़का है। कल फिर आना।”
मुकेश ने अपनी पजामी पहनी और घर की तरफ चल दिया।
उसके बाद मुकेश हर दिन खेत में जाता। राधा चाची भी वहां आतीं। वे दोनों खेत में सेक्स करते।
एक दिन मुकेश ने राधा चाची से पूछा।
“चाची, क्या मैं और औरतों के साथ भी सेक्स कर सकता हूं?”
“हां बेटा, क्यों नहीं। गांव में बहुत सी औरतें हैं जो सेक्स करना चाहती हैं।”
मुकेश ने गांव की दूसरी औरतों से भी दोस्ती की। वे भी खेत में आतीं और मुकेश के साथ सेक्स करतीं।
मुकेश ने कई औरतों की चूत और गांड मारी। वे सभी मुकेश के लंड की तारीफ करतीं।