मुकेश कई दिनों से बीमार पड़ा था। पेट की समस्या ने उसे इतना कमजोर कर दिया था कि वह बिस्तर से भी नहीं उठ पा रहा था। माँ-बाप बार-बार कहते, “अस्पताल चल, इलाज करवा ले।” आखिरकार वे उसे अस्पताल ले गए।
डॉक्टरों ने जांच की, दवाइयाँ दीं और कुछ दिनों के इलाज के बाद मुकेश को घर भेज दिया। शरीर तो ठीक हुआ, लेकिन मन में एक नई चिंता घर कर गई—नौकरी। पुरानी नौकरी छोड़ चुका था, नई नौकरी ढूंढना आसान नहीं था।
मुकेश ने अपने मामा जी से मदद मांगी। मामा जी ने उसे अपने ऑफिस में नौकरी दिलवा दी। पहली सुबह जब मुकेश ऑफिस पहुंचा तो चारों ओर नई-नई चेहरों की भीड़ थी। एक डेस्क के पास बैठी एक लड़की ने मुस्कुराते हुए नमस्ते किया।
उसका नाम आयशा था। लंबे समय से ऑफिस में काम कर रही थी। मुकेश ने भी मुस्कुराकर जवाब दिया। धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं। चाय के ब्रेक में, लंच के समय, फाइलें शेयर करते हुए—दोनों एक-दूसरे के करीब आने लगे।
मुकेश को आयशा पसंद आने लगी। उसकी हँसी, उसकी बातें, उसका काम करने का अंदाज—हर चीज मुकेश को भाती थी। लेकिन दिल की बात कहने में डर लगता था। कहीं आयशा नाराज न हो जाए।
कई रातों तक सोच-विचार के बाद एक शाम मुकेश ने हिम्मत करके अपना प्यार जाहिर कर दिया। आयशा ने भी मुस्कुराते हुए हाँ कर दी। दोनों का रिश्ता शुरू हो गया।
मुकेश के घर वाले जब रिश्ते की बात सुनी तो पहले तो हैरान हुए, फिर आयशा से मिलकर बहुत खुश हुए। आयशा के माता-पिता भी मिले। दोनों परिवारों ने रिश्ता स्वीकार कर लिया। सगाई हो गई। अंगूठी पहनकर दोनों एक-दूसरे के हो गए।
एक दोपहर मुकेश का घर खाली था। माँ-बाप रिश्तेदारों के यहाँ गए थे। मुकेश ने आयशा को बुलाया। आयशा आई तो दोनों अकेले थे। मुकेश ने आयशा का हाथ थामा। उसकी आँखों में प्यार देखकर आयशा शरमा गई। मुकेश ने झुककर उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। पहले धीरे से, फिर जोश से चूमने लगा। आयशा भी उसके गले में हाथ डालकर चूमने लगी।
मुकेश ने आयशा की जांघों को सहलाया। कपड़ों के ऊपर से ही वह आयशा के शरीर को छू रहा था। आयशा की सांसें तेज हो गईं। मुकेश ने आयशा की कमीज़ उतारी। फिर ब्रा खोल दी।
आयशा की गोरी छाती सामने आ गई। मुकेश ने दोनों स्तनों को हाथों में लिया और जोर से दबाने लगा। फिर मुंह लगाकर चूसने लगा। आयशा की आवाजें निकलने लगीं। “आह… मुकेश…”
आयशा ने मुकेश की पैंट खोली। उसका खड़ा लंड बाहर निकल आया। आयशा ने उसे हाथ में लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। फिर मुंह में लेकर चूसने लगी। मुकेश का लंड आयशा के गले तक जा रहा था। आयशा की जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। मुकेश का सारा शरीर सिहर रहा था।
मुकेश ने आयशा को बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी सलवार और पैंटी उतार दी। आयशा पूरी तरह नंगी हो गई। उसकी गोरी जांघें, गुलाबी चूत—सब कुछ मुकेश को देखने को मिल रहा था।
मुकेश ने आयशा की चूत पर मुंह लगाया। जीभ से चाटने लगा। आयशा के रस उसकी जीभ पर चिपक रहे थे। आयशा जोर-जोर से कराह रही थी।
मुकेश ने अपना लंड आयशा की चूत के पास ले जाकर लगाया। थूक लगाकर उसे गीला किया। फिर धीरे से धक्का दिया। आयशा की चूत का हymen टूटा। खून और रस का मिश्रण निकलने लगा।
मुकेश ने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। आयशा के स्तन उछल रहे थे। दोनों का पसीना एक-दूसरे के शरीर पर गिर रहा था।
मुकेश का लंड आयशा की चूत में पूरा घुस रहा था। आयशा के पैर मुकेश की कमर में लिपटे हुए थे। मुकेश तेजी से चोद रहा था। आयशा चीख-चीखकर चीख रही थी, “मुकेश… और जोर से…” मुकेश ने और तेजी से धक्के मारे। दोनों का शरीर काँपने लगा।
आखिरकार मुकेश ने आयशा की चूत के अंदर ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य आयशा की चूत को भर रहा था। आयशा ने भी चरम सुख महसूस किया।
दोनों थककर एक-दूसरे की बाहों में सो गए। जब मुकेश ने लंड निकाला तो आयशा की चूत से खून और वीर्य दोनों टपक रहे थे।
दोनों ने पहली बार इतना गहरा आनंद लिया था। आयशा ने मुकेश के गाल पर हाथ फेरा। मुकेश ने आयशा को चूम लिया। दोनों की सांसें अभी भी तेज चल रही थीं।
मुकेश ने आयशा को फिर से चूमना शुरू कर दिया। इस बार और धीरे-धीरे, जैसे हर चुम्बन में नया जुनून भर रहा हो।
आयशा की नंगी पीठ पर हाथ फिराते हुए मुकेश ने उसे अपनी छाती से चिपका लिया। आयशा की मुलायम छाती मुकेश की छाती से सटकर दब रही थी। दोनों की सांसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
मुकेश ने आयशा के बालों में उंगलियां डालीं और उन्हें पीछे की तरफ खींचा। आयशा की गर्दन सामने आ गई। मुकेश ने उस पर होंठ रख दिए। चूमा, चाटा और फिर काट लिया। आयशा की आंखें बंद थीं। वह सिर्फ सिसकारियां भर रही थी।
मुकेश ने आयशा को पलटकर उसके ऊपर चढ़ गया। आयशा की जांघों को अलग किया और फिर से अपनी कड़ी लंड को उसकी चूत के पास ले आया। इस बार धीरे से घुसाया। आयशा की चूत अभी भी गीली थी। लंड आसानी से अंदर चला गया। मुकेश ने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया।
आयशा ने मुकेश की पीठ पर नाखून गड़ा दिए। मुकेश को दर्द भी हुआ और मजा भी। वह और जोर से धक्का मारने लगा।
आयशा की चूत से हर धक्के के साथ चिपचिपी आवाजें आ रही थीं। मुकेश ने आयशा के स्तन फिर से मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा।
आयशा ने मुकेश को नीचे खींचा और खुद ऊपर आ गई। वह मुकेश के लंड पर बैठ गई। फिर ऊपर-नीचे होने लगी। मुकेश आयशा की कमर पकड़कर ऊपर की तरफ धक्का मार रहा था। आयशा के स्तन उछल रहे थे। मुकेश ने उन्हें हाथों में लिया और दबाने लगा।
आयशा झुककर मुकेश के होंठों पर मुंह रखकर चूमने लगी। दोनों की जीभें एक-दूसरे के मुंह में घुस रही थीं। आयशा की चूत मुकेश के लंड को निगल रही थी। दोनों का पसीना मिलकर चिपचिपा हो गया था।
मुकेश ने आयशा को फिर से नीचे लिटाया। इस बार उसने आयशा की टांगें अपने कंधों पर रख लीं। लंड और गहराई तक घुसने लगा। आयशा चीख रही थी। मुकेश का लंड उसकी चूत की गहराई तक जा रहा था।
मुकेश ने तेजी से चोदना शुरू कर दिया। आयशा की चूत से हर बार लंड निकलते समय चिपचिपी आवाज आ रही थी। मुकेश ने आयशा के स्तनों को जोर से दबाया। आयशा के निप्पल सख्त हो चुके थे। मुकेश उन्हें चूस रहा था।
आयशा ने मुकेश को फिर से ऊपर खींचा। दोनों एक-दूसरे के शरीर से चिपके हुए थे। मुकेश का लंड आयशा की चूत में पूरी तरह घुसा हुआ था। दोनों एक साथ चरम सुख की ओर बढ़ रहे थे।
मुकेश ने आयशा की चूत में फिर से झड़ने से पहले आयशा को चूमा। फिर जोर से धक्का मारा। आयशा भी चीख पड़ी। दोनों एक साथ झड़ गए। मुकेश का वीर्य फिर से आयशा की चूत में भर गया।
दोनों थककर गिर पड़े। मुकेश ने आयशा को अपनी बाहों में लिया। आयशा ने मुकेश की छाती पर सिर रखा। दोनों की सांसें धीरे-धीरे शांत हो रही थीं।
मुकेश ने आयशा के बालों को सहलाया। आयशा ने मुकेश की छाती पर उंगली से घेरा बनाया। दोनों मुस्कुरा रहे थे।
मुकेश ने आयशा से पूछा, “कैसा लगा?” आयशा ने शरमा कर कहा, “बहुत अच्छा लगा।” दोनों फिर से चूमने लगे।
मुकेश ने आयशा को फिर से चूमना शुरू कर दिया। आयशा की जीभ मुकेश के मुंह में घुस रही थी। मुकेश ने आयशा की जीभ को चूसा। दोनों की सांसें तेज हो गईं।
मुकेश ने आयशा को पलटकर उसके ऊपर चढ़ गया। आयशा की जांघों को अलग किया और लंड को चूत में डाल दिया। इस बार और जोर से धक्के मारने लगा। आयशा की चूत से हर धक्के के साथ चिपचिपी आवाज आ रही थी।
आयशा ने मुकेश की पीठ पर नाखून गड़े। मुकेश को दर्द भी हुआ और मजा भी। वह और जोर से धक्का मारने लगा। आयशा चीख रही थी।
मुकेश ने आयशा के स्तनों को मुंह में लिया और चूसने लगा। आयशा के निप्पल सख्त हो चुके थे। मुकेश उन्हें काट रहा था।
आयशा ने मुकेश को नीचे खींचा और खुद ऊपर आ गई। वह मुकेश के लंड पर बैठ गई। फिर ऊपर-नीचे होने लगी। मुकेश आयशा की कमर पकड़कर ऊपर की तरफ धक्का मार रहा था।
आयशा के स्तन उछल रहे थे। मुकेश ने उन्हें हाथों में लिया और दबाने लगा। आयशा झुककर मुकेश के होंठों पर मुंह रखकर चूमने लगी।
दोनों का शरीर पसीने से तर हो गया था। मुकेश का लंड आयशा की चूत में पूरी तरह घुसा हुआ था। आयशा की चूत मुकेश के लंड को निगल रही थी।
मुकेश ने आयशा को फिर से नीचे लिटाया। इस बार उसने आयशा की टांगें अपने कंधों पर रख लीं। लंड और गहराई तक घुसने लगा। आयशा चीख रही थी।
मुकेश ने तेजी से चोदना शुरू कर दिया। आयशा की चूत से हर बार लंड निकलते समय चिपचिपी आवाज आ रही थी। मुकेश ने आयशा के स्तनों को जोर से दबाया।
आयशा ने मुकेश को फिर से ऊपर खींचा। दोनों एक-दूसरे के शरीर से चिपके हुए थे। मुकेश का लंड आयशा की चूत में पूरी तरह घुसा हुआ था।
मुकेश ने आयशा की चूत में फिर से झड़ने से पहले आयशा को चूमा। फिर जोर से धक्का मारा। आयशा भी चीख पड़ी। दोनों एक साथ झड़ गए।
मुकेश का वीर्य फिर से आयशा की चूत में भर गया। दोनों थककर गिर पड़े। मुकेश ने आयशा को अपनी बाहों में लिया। आयशा ने मुकेश की छाती पर सिर रखा।
दोनों की सांसें धीरे-धीरे शांत हो रही थीं। मुकेश ने आयशा के बालों को सहलाया। आयशा ने मुकेश की छाती पर उंगली से घेरा बनाया। दोनों मुस्कुरा रहे थे।
मुकेश ने आयशा से पूछा, “फिर से करना है?” आयशा ने शरमा कर कहा, “हाँ।” दोनों फिर से चूमने लगे……………..