मैं एक छोटे से शहर में किराए के मकान में रहता हूँ। मकान मालकिन मोहनी 34 साल की विधवा औरत हैं। उनका रंग गेहुँआ है, आँखें हीरे जैसी चमकती हैं और शरीर में हर जगह परफेक्ट कर्व्स हैं। दो बच्चों की माँ होने के बावजूद कोई भी उन्हें माँ नहीं कह सकता।
उनके पति की दो साल पहले दुर्घटना में मौत हो गई थी। अब वे अपनी दो बेटियों और बहरी सास के साथ नीचे वाले फ्लोर पर रहती हैं। मैं ऊपर वाले फ्लोर पर अकेला रहता हूँ।
धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ी। मैं किराना लाने, ऑफिस से उठाने और घर के छोटे-मोटे कामों में मदद करने लगा। मोहनी ने किराया मांगना बंद कर दिया और मेरे लिए खाना बनाना शुरू कर दिया।
रात को अक्सर हम बातें करते। वे अपनी अकेलेपन की बातें बतातीं। पति के जाने के बाद उनका जीवन कितना मुश्किल हो गया था।
एक शाम रक्षा बंधन से पहले मोहनी ने मुझे बताया कि उनके ऑफिस के एक पुरुष साथी ने उन्हें टॉयलेट में कपड़े बदलते हुए गुपचुप वीडियो बना लिया है और अब ब्लैकमेल कर रहा है। मैंने अपनी पुलिस वाली दोस्त से मदद ली।
ब्लैकमेलर को गिरफ्तार करवा दिया गया और वीडियो भी नष्ट हो गई।
बच्चे दादी के घर समर वैकेशन पर चले गए। अब घर में सिर्फ मोहनी और उनकी बहरी सास रह गईं। एक दिन हम दोनों शॉपिंग करने गए। रात का खाना साथ खाया। उसके बाद मोहनी मेरे कमरे में नाइट suit में आई, बाल खुले हुए। हम छत पर गए।
हवा ठंडी थी। मोहनी ने मेरे हाथ में हाथ रखा और धीरे से कहा, “तुम्हारे बिना मैं इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाती।” हमारी निगाहें मिलीं और हमने एक-दूसरे को गहराई से चूम लिया।
हम नीचे उनके कमरे में आए। मोहनी ने दरवाजा बंद किया और बोली, “सासू माँ बहरी हैं, कुछ नहीं सुनेंगी।” मैंने उन्हें दीवार से लगाकर चूमना शुरू किया। उनकी नाइट suit की स्ट्रिंग खोली। नाइट suit नीचे गिर गई। अंदर हल्का सा ब्रा और पैंटी थी। मैंने ब्रा का हुक खोला।
उनके स्तन बाहर निकल आए। गोल, भरे हुए और निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन को मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा। मोहनी की साँस तेज हो गई। वे मेरे बालों में उँगलियाँ फेरने लगीं और धीमी-धीमी आवाज में कराहने लगीं।
मैंने उन्हें टेबल पर उठा लिया। टेबल के किनारे बैठाकर फिर से उनके स्तनों को चूसने लगा। एक हाथ से उनकी जांघों को सहलाता रहा। मोहनी की जांघें काँप रही थीं। उन्होंने मेरी कमीज के बटन खोले और मेरी छाती पर हाथ फेरा। मैंने उनकी पैंटी उतार दी।
उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उँगलियाँ फेरते ही मोहनी ने कमर ऊपर उठा दी।
मैं घुटनों के बल बैठ गया और उनकी चूत को चाटने लगा। जीभ से भग को सहलाता, फिर अंदर तक घुसा देता। मोहनी का शरीर ऐंठ रहा था। वे दोनों हाथों से मेरे सिर को दबाए हुए थीं। “आह… और अंदर…” उनकी आवाज काँप रही थी।
मैं उठा और अपनी पैंट उतार दी। मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था। मोहनी ने उसे हाथ में लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगीं। फिर उन्होंने खुद लेटकर पैर फैला दिए। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड को चूत के मुँह पर रखकर धीरे से धकेला।
मोहनी की साँस रुक गई। लंड आधा अंदर चला गया। फिर जोर का झटका मारा। पूरा लंड अंदर घुस गया। मोहनी चीख पड़ी, “आह… धीरे…” लेकिन उनकी आवाज में दर्द नहीं, मजे की सनसनाहट थी।
मैं तेजी से चोदने लगा। मोहनी की चूत मेरा लंड कसकर पकड़ रही थी। हर झटके के साथ उनकी चूचियाँ उछल रही थीं। मैंने एक चूची को मुँह में लेकर चूसते हुए चोदना जारी रखा। मोहनी के नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे। “और जोर से… मुझे और चाहिए…” वे बार-बार बोल रही थीं।
मैंने उन्हें पलटकर घोड़ी बना दिया। मोहनी घुटनों के बल बैठ गईं, गांड ऊपर उठा दी। मैंने पीछे से लंड घुसाया। इस बार और गहराई तक पहुँच रहा था। एक हाथ से उनकी कमर पकड़ी, दूसरा हाथ आगे बढ़ाकर चूत के पास की जगह को रगड़ने लगा।
मोहनी का सिर नीचे झुक गया था, बाल बिखर रहे थे। हर धक्के के साथ उनकी गांड के मांस लहरा रहे थे।
“मुझे घोड़ी की तरह चोदो…” मोहनी की आवाज काँप रही थी। मैंने उनकी चोटी पकड़ ली और और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मोहनी की चूत से चिकनाहट की आवाजें आ रही थीं। उनका शरीर पसीने से तर हो चुका था।
मैंने उन्हें फिर सीधा लिटाया। इस बार मिशनरी पोजीशन में। मोहनी की टाँगें मेरी कमर के चारों ओर लपेटी हुई थीं। मैं तेजी से चोद रहा था। मोहनी की आँखें बंद थीं, मुँह खुला था। “मैं झड़ने वाली हूँ…” उन्होंने कहा। कुछ सेकंड बाद उनका शरीर काँप उठा।
चूत ने मेरे लंड को और भी कस लिया। मैं भी रुक नहीं सका। जोर का झटका मारा और अंदर ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य मोहनी की चूत में भर गया।
हम दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे। मोहनी ने मेरे गाल पर हल्का सा चूमा और फुसफुसाई, “आज के बाद तुम मेरे हो।”
रात भर हमने अलग-अलग पोजीशन में चोदा। कभी मोहनी ऊपर चढ़कर मेरे लंड पर उछलती रहीं, कभी मैं उन्हें दीवार से टिका कर पीछे से ठोकता रहा। हर बार मोहनी की चूत और भी ज्यादा गीली होती गई। आखिरकार सुबह होने से पहले हम दोनों थककर सो गए।
सुबह मोहनी ने मुझे चाय के साथ जगाया। उनकी आँखों में नई चमक थी। उन्होंने कहा, “बच्चे दो हफ्ते बाद आएंगे। तब तक तुम मेरे कमरे में ही सोना।”
मैंने उन्हें फिर से खींचकर चूम लिया। मोहनी की सास बहरी थीं, लेकिन हम सावधानी बरतते। दिन में जब सास आराम करतीं, हम चुपके से चोद लेते। रात को बिना किसी डर के पूरी रात चोदते। मोहनी को घोड़ी बनाने का मजा दोनों को आता था।
कभी-कभी वे खुद घुटनों के बल बैठ जातीं और पीछे मुड़कर कहतीं, “आज रात मुझे जंगली जानवर की तरह चोदो।”
एक रात मोहनी ने मुझे बाथरूम में बुलाया। उन्होंने नहाते हुए मुझे अंदर बुलाया। पानी की बौछार के नीचे हमने खड़े-खड़े चोदा। मोहनी की पीठ दीवार से लगी हुई थी, टाँगें मेरी कमर में लिपटी हुई। पानी की बूँदें उनकी चूचियों पर चमक रही थीं। मैं जोर-जोर से धक्के मार रहा था। मोहनी की चीखें पानी की आवाज में दब रही थीं।
दूसरे दिन हमने छत पर दोबारा चोदा। रात का अंधेरा था। मोहनी ने सिर्फ पैंटी पहनी हुई थी। मैंने उन्हें घुटनों के बल बिठाया और मुँह में लंड डाल दिया। मोहनी चूसने लगीं। उनकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी।
मैंने उनके बालों में हाथ डाला और धीरे से सिर आगे-पीछे करने लगा। मोहनी का मुँह पूरा भर गया था। लार उनके होंठों से टपक रही थी।
फिर मैंने उन्हें उठाया और दीवार से टिका कर चोदा। मोहनी की चूत में मेरा लंड बार-बार घुसता और निकलता। उनकी साँसें तेज थीं। आखिर में दोनों एक साथ झड़ गए। मोहनी की चूत से वीर्य टपक रहा था।
दो हफ्ते बाद बच्चे वापस आए। मोहनी ने मुझे अलग कमरा दे दिया, लेकिन रात को चुपके से मेरे पास आतीं। कभी-कभी हम बालकनी में भी चोद लेते। मोहनी की भूख बढ़ती जा रही थी। वे हर रात नई-नई पोजीशन आजमाना चाहतीं।
एक रात मोहनी ने कहा, “मुझे लगता है मैं गर्भवती हो गई हूँ।” मैं हैरान हुआ। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अगर हो गई तो तुम जिम्मेदारी लोगे ना?” मैंने उन्हें गले लगाकर कहा, “हाँ, पूरी जिम्मेदारी लूँगा।”
उस रात हमने और भी जोश से चोदा। मोहनी की चूत में बार-बार झड़ता रहा। वे चीख-चीख कर मेरा नाम ले रही थीं। सुबह तक दोनों थककर सो गए।
अब मोहनी और मैं एक-दूसरे के बिना रह नहीं सकते। हर रात हमारी चुदाई का सिलसिला जारी रहता है। मोहनी को घोड़ी बनाकर चोदने का मजा दोनों को आता है। उनकी चूत अब मेरे लंड की आदि हो चुकी है।
कभी-कभी मोहनी ऑफिस से आते ही मुझे बुलातीं। कपड़े नहीं बदलतीं, सीधे मेरे कमरे में आ जातीं। मैं उन्हें दीवार से टिका कर चोदता।
उनकी साड़ी ऊपर चढ़ जाती, पेटीकोट नीचे गिर जाता। मोहनी की चूत गीली हो चुकी होती और लंड आसानी से अंदर चला जाता।
एक शाम मोहनी ने मुझे रसोई में बुलाया। सास सो रही थीं। मोहनी ने मुझे कुर्सी पर बैठाया और खुद मेरे ऊपर बैठ गई। मेरे लंड को चूत में लेकर ऊपर-नीचे होने लगीं।
उनकी चूचियाँ मेरे मुँह के पास आ रही थीं। मैं एक-एक को चूसता जाता। मोहनी की साँसें तेज थीं। आखिर में दोनों झड़ गए। मोहनी की चूत से वीर्य टपक रहा था।
रात को मोहनी ने मुझे बताया, “मुझे लगता है मैं सच में गर्भवती हूँ।” मैंने उन्हें गले लगाया। मोहनी की आँखों में खुशी के आँसू थे।
अब हम दोनों एक परिवार की तरह रहते हैं। मोहनी की सास को कुछ नहीं पता। बच्चे भी खुश हैं।
और रातें हमारी चुदाई से भरी रहती हैं। मोहनी को घोड़ी बनाकर चोदने का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता।