मैं हमेशा से आंटियों के बारे में कल्पनाएँ किया करता था खासकर उन चाचियों के बारे में जो अपनी चूत बड़ी आसानी से किसी को भी दे देती हैं मेरी यह कहानी बनारस की है जहाँ मैंने एक मुस्लिम आंटी के साथ कुछ ऐसा अनुभव किया जो मैं कभी नहीं भूल सकता
बनारस के एक पुराने मोहल्ले में मैंने एक मकान में कमरा किराए पर लिया था उसी मकान की ऊपरी मंजिल पर एक मुस्लिम भाई और उनकी बीवी रहते थे आंटी की उम्र लगभग 39 साल के आसपास थी लेकिन उनका शरीर देखने लायक था दूध जैसी गोरी चमड़ी बड़े-बड़े भारी स्तन और कमर इतनी पतली कि लगता था जैसे किसी जवान लड़की का शरीर हो
भाई साहब प्रॉपर्टी डीलर थे और अक्सर अपने काम के सिलसिले में बाहर जाते रहते थे उनकी दोनों बेटियों की शादी हो चुकी थी तो आंटी अक्सर अकेली रह जाती थीं और रात में उन्हें डर भी लगता था
एक दिन भाई साहब ने मुझसे कहा
“बेटा मुझे एक हफ्ते के लिए बाहर जाना है तुम ऊपर वाली आंटी का ध्यान रखना वह अकेली हैं रात में डर जाती हैं तुम कभी-कभी देख लिया करो”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा “बिलकुल भाई साहब आप बेफिक्र रहिए मैं आंटी जी का पूरा ख्याल रखूंगा”
भाई साहब के जाने के बाद शाम का समय था मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था तभी दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई मैंने दरवाजा खोला तो देखते ही मेरी सांसें थम गईं
आंटी ने बहुत पतला और शीशे जैसा नाइटी पहना हुआ था जिसमें से उनके काले-काले निप्पल साफ नजर आ रहे थे उनके भारी स्तन नाइटी के अंदर से झूल रहे थे और हर हरकत के साथ उनकी शक्ल बदल रही थी
“बेटा क्या कर रहे हो तुम?” उन्होंने मीठी आवाज़ में पूछा
“कुछ नहीं आंटी जी आप बताइए” मैंने जवाब दिया
“आज मैंने चिकन और पुलाव बनाया है तुम्हें खिलाऊंगी रात को नौ बजे आ जाना ऊपर” उन्होंने कहा और मुस्कुराईं
“आऊंगा जरूर आंटी जी” मैंने कहा तो वह चली गईं और मैं उनके पीछे देखता रह गया उनके कूल्हे कितने गोल और मजबूत थे नाइटी के नीचे उनकी चूत का आकार साफ दिख रहा था
रात को नौ बजे मैं तैयार होकर ऊपर गया आंटी ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर ले गईं अब उन्होंने दूसरा नाइटी पहना था यह पिछले वाले से भी ज्यादा पतला था और आंटी के शरीर से चिपका हुआ था
“बैठो बेटा मैं खाना लगाती हूं” उन्होंने कहा और रसोई में चली गईं
मैंने डाइनिंग टेबल पर बैठते ही अपनी पैंट के नीचे अपना लंड रगड़ना शुरू कर दिया आंटी ने चिकन पुलाव प्लेट में सजाकर रख दिया और सामने बैठ गईं
खाते-खाते मैंने देखा कि आंटी अपना पैर मेरी जांघ पर रगड़ रही हैं मैंने खाना जारी रखा लेकिन मेरा ध्यान उनके पैर की हरकत पर था धीरे-धीरे उनका पैर मेरी जांघ से होता हुआ मेरे पेट तक आ गया और फिर उनके पैर की उंगलियां मेरी निचली पैंट पर मेरे खड़े लंड को दबाने लगीं
आंटी ने अपने पैर के अंगूठे से मेरे लंड की मालिश करनी शुरू कर दी उनकी आंखों में कामुकता साफ दिख रही थी वह चाव से देख रही थीं कि मेरा लंड उनके पैर के स्पर्श में कैसे सख्त होता जा रहा है
“आंटी जी बहुत स्वादिष्ट खाना बनाया है आपने” मैंने उनकी ओर देखते हुए कहा
“तो और खाओ बेटा मैंने तुम्हारे लिए ही बनाया है” उन्होंने उत्सुकता से कहा
मैंने जल्दी से खाना खत्म किया और हाथ धोने के बाद वापस आया तो आंटी सोफे पर बैठी थीं उनके नाइटी के ऊपर स्तन बहुत साफ नजर आ रहे थे
मैं सीधा उनके पास गया और बिना कुछ बोले मैंने उनके स्तनों को पकड़ लिया आंटी चौंकीं नहीं बल्कि उन्होंने आंखें बंद कर लीं
“आह उफ्फ और जोर से दबाओ” आंटी ने कराहते हुए कहा
मैंने उनका नाइटी ऊपर उठाया तो देखा कि उन्होंने पैंटी नहीं पहनी थी उनकी चूत बिल्कुल साफ थी बस उसके चारों ओर हल्के-हल्के बाल थे जो किसी काव्य रचना की तरह सजे हुए थे उनके गुदा का छेद थोड़ा खुला हुआ था जिससे लग रहा था कि वह अपने गुदा को गाजर या मूली से खोलती रहती हैं
“कितनी खूबसूरत चूत है आपकी आंटी जी” मैंने उनकी चूत की तारीफ की
“हाँ बेटा यह तुम्हारी ही चूत है तुम जैसे मर्द के लिए ही बनी है” आंटी ने कहा और मेरी पैंट खोल दी
मैंने उनके स्तनों को बाहर निकाला वह दूध जैसे गोरे और बहुत बड़े थे हिमालय जैसी चोटियाँ उनके सीने पर सजी हुई थीं मैंने एक निप्पल को मुंह में लिया और चूसने लगा वहीं दूसरे स्तन को जोर से दबाने लगा
“आह बहुत मजा आ रहा है और जोर से चूसो” आंटी कराह रही थीं
उन्होंने अपना हाथ मेरी पैंट में डाला और मेरे लंड को मसलने लगीं उनकी उंगलियां मेरे लंड के सिरे को सहला रही थीं जिससे मैं और उत्तेजित हो गया
“आंटी जी आप तो बहुत गर्म हैं” मैंने उनके कान में फुसफुसाया
“बेटा इतने दिनों से अकेली हूं तुम्हारे भाई साहब तो कभी घर रहते ही नहीं उन्हें तो अपनी प्रॉपर्टी से ही बस प्यार है उन्होंने मुझे कभी संतुष्ट नहीं किया” उन्होंने शिकायत करते हुए कहा
मैंने आंटी को सोफे के किनारे पर बिठाया और मैं उनके सामने घुटनों पर बैठ गया अपने अंडकोश को उनके मुंह के सामने लाया और उन्होंने बिना किसी झिझक के मेरे अंडकोश को अपने मुंह में ले लिया
“आह आंटी जी आप तो बहुत अच्छी तरह से चूसती हैं” मैंने कराहते हुए कहा
वह मेरे अंडकोश को ऐसे चूस रही थीं जैसे कोई आम का अचार चूसता है उनकी जीभ मेरे अंडकोश के चारों ओर घूमती रही और फिर उन्होंने मेरे लंड के सिरे को भी चूसना शुरू कर दिया
मुस्लिम आंटियों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वह किसी भी तरह के सेक्स के लिए तैयार रहती हैं उनके मन में कोई संकोच नहीं होता
आंटी ने मेरे लंड को अपने स्तनों के बीच दबाया और रगड़ने लगीं यह देखने लायक दृश्य था उनके बड़े-बड़े स्तन और बीच में मेरा खड़ा लंड
“आंटी जी अब आप करवट लेकर लेट जाइए” मैंने कहा
आंटी ने करवट ली और मैंने उनके पीछे से अपना लंड उनके गुदा में डालने की कोशिश की लेकिन पहले मैंने अपनी जीभ से उनके गुदा को चाटा
“आह बेटा यह क्या कर रहे हो” आंटी ने सिसकते हुए कहा
“चुप रहो आंटी जी आपको मजा आने वाला है” मैंने कहा और उनके गुदा को चाटना जारी रखा
फिर मैंने उन्हें चारों खाने चित या जैसे बकरा बनाया जाता है वैसे पोजीशन में करवा लिया और उनके गुदा पर थूका लगाया
“तैयार हो जाइए आंटी जी यह लंड आपके गुदा में जाएगा” मैंने कहा
“धीरे से लेना बेटा दर्द होगा” उन्होंने चिंता से कहा
मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे उनके गुदा में डालना शुरू किया आंटी ने चीख मारी लेकिन धीरे-धीरे मेरा पूरा लंड उनके गुदा में चला गया
“आह उफ्फ यह क्या हो रहा है बहुत मजा आ रहा है” आंटी कराह रही थीं
मैंने उनके गुदा में लंड डालकर जोर-जोर से झटके मारने शुरू कर दिए उनकी गांड के साथ-साथ उनकी चूत भी बजने लगी थी
“आह बेटा दार्लिंग तुम कहाँ थे इतने दिनों मैं तुम्हारे इस लंड के लिए तरसती रही हूं” आंटी चिल्ला रही थीं
मैंने एक हाथ से उनके स्तनों को दबाया और दूसरे हाथ से उनके कूल्हों को थामा और जोर-जोर से गांड मारने लगा
“आंटी जी आपकी चूत तो बहुत संकरी है और गांड भी बहुत सुंदर है” मैंने उनके कान में कहा
“यह सब तुम्हारे लिए है बेटा तुम जितना चाहो उतना ले सकते हो” उन्होंने उत्तर दिया
उनकी देसी गांड इतनी मुलायम थी कि मुझे लग रहा था जैसे मैं आसमान में उड़ रहा हूं उनके भाई साहब ने कभी भी उनकी गांड नहीं मारी थी यह पहली बार था जब किसी ने उनकी गांड मारी थी
काफी देर तक गांड मारने के बाद मैंने उन्हें पलट दिया और उनके स्तनों पर अपना वीर्य निकाल दिया फिर बचा हुआ वीर्य उनके मुंह में डाल दिया
आंटी ने मेरा सारा वीर्य पी लिया और चाट कर साफ किया
“बेटा आज तो मेरी बहुत संतुष्टि हो गई कल फिर आना” उन्होंने प्यार से कहा
“आऊंगा आंटी जी रोज आऊंगा जब तक भाई साहब नहीं आ जाते” मैंने कहा
उस रात के बाद हर रात मैं उनके पास जाता और हर बार कोई नया तरीका आजमाता कभी उनकी चूत कभी उनकी गांड और कभी उनका मुंह
भाई साहब जब वापस आए तो मुझसे पूछा
“कैसे रही आंटी बेटा”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा “बिल्कुल ठीक भाई साहब मैंने उनका पूरा ख्याल रखा”
उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई और कहा “शाबाश बेटा तुम पर भरोसा किया था ना”
आंटी ने ऊपर से मुझे देखा और अपनी जीभ होंठों पर घुमाई मैंने भी उन्हें देखा और मुस्कुराया हम जानते थे कि भाई साहब के जाने के बाद फिर से वही मजा लेंगे
अगली बार भाई साहब जब बाहर गए तो आंटी ने मुझे बुलाया और कहा

“बेटा आज मैं कुछ नया करना चाहती हूं”
“क्या करना चाहती हैं आंटी जी” मैंने उत्सुकता से पूछा
“आज तुम मेरे साथ पूरी रात रहो मैं तुम्हें वह सब सिखाऊंगी जो तुमने कभी किसी और से नहीं सीखा” उन्होंने कामुक नजरों से देखते हुए कहा
मैंने उन्हें चूमा और अपने कपड़े उतारने लगा वह भी अपने कपड़े उतार रही थीं हम दोनों नंगे थे और एक दूसरे के सामने खड़े थे
आंटी ने अपने हाथों से मेरे लंड को सहलाया और फिर उसे अपने मुंह में ले लिया उनकी जीभ मेरे लंड की नोक पर घूमती रही और फिर वह पूरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगीं
“आंटी जी आह बहुत मजा आ रहा है” मैं कराहता रहा
उन्होंने मेरी गांड को भी अपनी जीभ से चाटा और फिर मुझे उनके ऊपर बिठाकर चूत में अपना लंड डालने को कहा
मैंने उनकी चूत पर अपना लंड रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेला उनकी चूत गर्म और गीली थी मेरा लंड आसानी से अंदर चला गया
“आह बेटा बहुत अच्छा लग रहा है और जोर से मारो” आंटी चिल्लाईं
मैंने जोर-जोर से चूत मारना शुरू कर दिया हर झटके के साथ आंटी की चीखें बढ़ती जा रही थीं
“हाँ हाँ इसी तरह और जोर से मारो मैं तैयार हूं मेरी चूत से तुम्हारा सारा प्यार बाहर निकल जाए” वह पागलों की तरह बोल रही थीं
मैंने उनके मुंह को अपने मुंह से ढक दिया ताकि उनकी चीखें पड़ोसियों तक न पहुंचें और फिर जोर-जोर से चूत मारता रहा
काफी देर बाद मेरा वीर्य उनकी चूत के अंदर फूटा और गर्म गर्म उनके अंदर फैल गया वह भी चरम सुख तक पहुंच गई थीं और उनकी चूत से पानी बह रहा था
हम दोनों थक कर बिस्तर पर लेट गए और एक दूसरे को गले लगा लिया
“बेटा तुम्हारे साथ मैंने जो अनुभव किया है वह मैं कभी नहीं भूलूंगी” उन्होंने प्यार से कहा
“मैं भी नहीं भूलूंगा आंटी जी आपने मुझे जो कुछ सिखाया है वह जीवन भर याद रहेगा” मैंने उनकी आंखों में देखते हुए कहा
उस रात के बाद हमने और भी कई रातें साथ बिताईं हर रात कोई नया तरीका कोई नई क्रीड़ा आंटी ने मुझे पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था
मैं अब भी बनारस में रहता हूं और आंटी अब भी मेरी हैं भाई साहब को कभी पता नहीं चला कि उनकी अनुपस्थिति में उनकी बीवी किस तरह से अपना मजा लेती है
मैंने अपनी यह कहानी लिखी है ताकि आप लोग भी जान सकें कि मुस्लिम आंटियों की चूत और गांड में कितना मजा होता है
आप सभी से मेरी गुजारिश है कि अगर आपके पास भी कोई ऐसा अनुभव हो तो कृपया हमारे साथ साझा करें हम आपकी कहानियों का इंतजार करेंगे और उन्हें यहां प्रकाशित करेंगे
अब मैं इस कहानी को समाप्त करता हूं लेकिन हाँ यदि आपको कहानी पसंद आई हो तो कृपया टिप्पणी करें और बताएं कि क्या आपने भी कभी अपनी किसी मुस्लिम आंटी के साथ ऐसा किया है या नहीं
इस कहानी को लिखने का मेरा उद्देश्य यह बताना है कि हमारे समाज में जितनी भी आंटियां हैं वह सब कहीं न कहीं अपने पतियों से संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें एक ऐसे मर्द की जरूरत है जो उन्हें सच्चा प्यार और संतोष दे सके
मैंने आंटी को वह सब कुछ दिया जो उनके पति ने उन्हें कभी नहीं दिया था मैंने उन्हें प्यार किया संतुष्ट किया और उनके शरीर की हर जरूरत को पूरा किया
आंटी ने भी मुझे बदले में वह सब कुछ दिया जो एक मर्द चाहता है उनका प्यार उनका शरीर उनकी चूत और उनकी गांड
यही असली प्यार है यही असली संबंध है
अब मैं विदा लेता हूं लेकिन याद रखिएगा कि मैं जल्द ही एक और कहानी लेकर आऊंगा जो इससे भी ज्यादा गर्म और रोमांचक होगी तब तक के लिए अपनी अपनी आंटियों का ख्याल रखिए और उन्हें वह प्यार दीजिए जिसके वह हकदार हैं…