पड़ोस बाली भाभी की गांड मारी

(Pados Bali Bhabhi Ki Gand Mari)

मेरा नाम कार्तिक हैं, मैं पंजाब से आया हूँ। दिल्ली में नौकरी की तलाश में था और इसी दौरान Adult Hindi Stories का बड़ा फैन बन गया। वहाँ की कहानियाँ पढ़कर मेरी सेक्स लाइफ में नया जोश आ गया।

एक दिन एक ब्रोकर ने मुझे एक रूम दिखाया, एक छोटे से अपार्टमेंट में। लैंडलेडी एक विधवा थीं, नाम रमा आंटी। उनके साथ उनकी सिस्टर-इन-लॉ शिल्पा रहती थीं। शिल्पा को देखते ही मेरा दिल धड़क गया।

वो 38 की थीं, लेकिन बॉडी 28 की लड़की जैसी। लंबी कद-काठी, गोरी स्किन, और वो फिगर – वाह! 42 इंच की चौड़ी गांड, जो साड़ी में लहराती रहती। ऊपर से 40 इंच की भारी चूचियाँ, जो ब्लाउज को तान देतीं।

कमर 38 इंच, लेकिन इतनी स्लिम कि पूरा फोकस कर्व्स पर चला जाता। बच्चे स्कूल जाते, हसबैंड बिजनेसमैन, अक्सर बाहर रहते।

मैंने रूम ले लिया। रोज मिलना-जुलना शुरू हो गया। शिल्पा भाभी खाना बनातीं, कभी-कभी शेयर करतीं। बातें होतीं, हँसी-मजाक। लेकिन मैं उनकी बॉडी को घूरता रहता। उनकी गांड देखकर लंड खड़ा हो जाता।

एक दिन वे नया घर लेने चली गईं, पास ही। मैं गया न था। फिर उनके फोन आए, ‘कार्तिक, कब आओगे? घर देख लो।’ मैं बहाने बनाता। लेकिन अंदर से प्लान कर रहा था सरप्राइज का।

एक दोपहर, 2 बजे, मैं पहुँचा। नया घर बड़ा था, मॉडर्न। बेल बजाई, फिर साइड में छिप गया। दरवाजा खुला, शिल्पा भाभी बाहर आईं। टाइट पिंक मैक्सी पहने, जो बॉडी को हग कर रही थी।

चूचियाँ ऊपर से उभरी हुईं, गांड नीचे से फैली हुई। बाल खुले, मेकअप लाइट। ‘कौन है?’ वे बोलीं। मैं कूदा, ‘बू! सरप्राइज भाभी!’ वे चिल्लाईं, हाथ छाती पर रखा, फिर हँस पड़ीं। ‘अरे वाह कार्तिक, तुम्हें कैसे पता चला? आओ आओ, अंदर आ जाओ। कितने दिन हो गए, एक कॉल भी न किया।’

मैं अंदर आया। घर सुंदर था, फर्नीचर नया। लेकिन मेरी नजरें उनकी गांड पर। हर कदम पर वो हिल रही, ड्रेस में चिपकी हुई। मेरा लंड पैंट में तन गया, चलना मुश्किल। वे मुझे लिविंग रूम में ले गईं, लेकिन फिर बोलीं, ‘चलो बेडरूम में, एसी चालू है, गर्मी बहुत है।

बेडरूम में घुसते ही ठंडक लगी। बड़ा बेड, एसी की हवा। ‘बैठो कार्तिक, क्या दूँ? चाय बना लूँ?’ ‘नहीं भाभी, कुछ कोल्ड हो तो।’ ‘ठीक है, मिल्क कोल्ड है फ्रिज में।’

जब वे मिल्क का नाम लिया, मैंने उनकी चूचियों को देखा। ‘भाभी, मिल्क तो अच्छा है, लेकिन आपका मिल्क और अच्छा होगा।’ वे रुक गईं, आँखें बड़ी कीं। ‘क्या बकवास कर रहे हो? मैं तो आंटी जैसी हूँ।’ लेकिन मुस्कान थी। ‘चलो, पहले कोल्ड मिल्क पी लो।’ वे किचन गईं। मैं बेड पर लेटा, कल्पना करने लगा। उनकी चूचियाँ चूसने की, गांड पकड़ने की। लंड और सख्त हो गया।

वे गिलास लेकर आईं। ‘लो कार्तिक।’ मैंने पिया, फिर बोला, ‘भाभी, ये तो प्लेन है। मीठा कुछ मिला दो।’ वे हँसीं, ‘कैसा मीठा मिल्क चाहिए?’ मैंने सीधे आँखों में देखा, ‘आपका भाभी। आपकी चूचियों का।

वे शरमाईं, गाल लाल हो गए। ‘अरे पागल, ऐसी बातें मत करो। मैं शादीशुदा हूँ, बच्चे हैं।’ लेकिन वे पास बैठ गईं। हम बातें करने लगे। घर की, मेरी जॉब की। फिर उन्होंने कहा, ‘चलो, घर घुमाती हूँ।’

घर घूमते हुए, किचन में, मैंने हाथ बढ़ाया, उनकी कमर छुई। वे मुड़ीं, लेकिन कुछ न कहा। डाइनिंग में, पीछे से गांड पर हाथ फेरा। ‘कार्तिक!’ लेकिन हल्की सी चीख। बाथरूम पहुँचे। दरवाजा खुला था, अंदर शावर चल रहा था? नहीं, फर्श गीला।

उनकी पैंटी गीली पड़ी थी। ‘ओह, ये तो भूल गई।’ वे झुकीं उठाने। मैं तुरंत पीछे चिपक गया। मेरा लंड उनकी गांड की दरार पर। ‘भाभी, कितनी टाइट है आपकी ड्रेस।’ मैंने रगड़ा। वे सिहर गईं, ‘कार्तिक, ये क्या? कोई देख लेगा।’ लेकिन बच्चे स्कूल में थे, घर खाली। ‘कोई नहीं भाभी, सिर्फ हम।’

हम बेडरूम लौटे। एसी की ठंडक में वे सोफे पर बैठीं। मैं पास। ‘भाभी, सच बताऊँ? मुझे आप बहुत पसंद हो।’ ‘कैसी पसंद?’ ‘ऐसे।’ मैंने हाथ पकड़ा। ‘कार्तिक, मैं तो बड़ी हूँ, मोटी हूँ।’ ‘नहीं, आप परफेक्ट हो।

आपकी बॉडी सेक्सी है।’ बातें फ्लर्टी हो गईं। ‘तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड?’ ‘नहीं, मैच्योर लेडीज पसंद। जैसे आप। सालों से देख रहा हूँ आपको।’ वे शरमाईं, लेकिन आँखें चमक रही थीं।

मैं उठा, उन्हें गले लगाया। ‘भाभी, मैं प्यार करता हूँ आपको।’ लिप्स पर किस। पहले हल्का, फिर डीप। वे रुकने की कोशिश की, ‘कार्तिक, ये गलत है।’ लेकिन हाथ मेरे बालों में। पैशनेट किस चला। जीभें मिलीं।

मेरा हाथ उनकी पीठ पर, फिर मैक्सी के बटन खोले एक-एक करके। अंदर नंगा बॉडी ब्रा-लेस, पैंटी-लेस चूचियाँ बाहर, ब्राउन निप्पल्स सख्त। ‘भाभी, कितनी ब्यूटीफुल हो।’ मेरा 7 इंच लंड पैंट फाड़ने को बेताब था।

मैंने चूचियाँ पकड़ीं, जोर से दबाईं। चूसा एक को, फिर दूसरे। ‘आह्ह्ह कार्तिक, प्लीज, इतना जोर से नहीं। उह्ह्ह, दर्द हो रहा, लेकिन मोअनिंग तेज मैं न रुका निप्पल्स काटे, चूसा हाथ नीचे, चूत छुई गीली थी नाभि चाटी, जीभ घुमाई फिर घुटनों पर बैठा, चूत मै बाल भरे, काले घने।

भाभी, ये बाल अच्छे लग रहे।’ ‘हसबैंड महीनों से टच ही नहीं किया, शेव करने का मन न हुआ।’ मैंने जीभ डाली, चूत चाटी क्लिटोरिस चूसा।

वे चीखीं, ‘ओह्ह्ह गॉड, कार्तिक, क्या कर रहे हो। आह्ह्ह, कभी इतना मजा न आया।’ कूल्हे ऊपर उठे, मेरे मुँह पर दबाई। ‘चाटो और, प्लीज।’ मैंने तेज चाटा, उंगलियाँ डालीं। वे झटके खाने लगीं ‘कार्तिक, मैं झड़ने वाली हूँ। आह्ह्ह!’ बॉडी काँपी, जूस बहा ‘अब चोदो मुझे कार्तिक, चूत में डालो। मैं तुम्हारी हूँ, हमेशा के लिए। बिना तुम्हारे न रह सकूँगी।’

मैं हँसा, ‘भाभी, चूत तो बाद में। पहले गांड दोगी। सालों तरस गया हूँ इस पर।’ वे पलटीं, डॉगी स्टाइल। 42 इंच की गांड ऊपर। गोल, सफेद ‘ये तो पैराडाइज है भाभी मैंने गांड चाटी दरार में जीभ डाली, गहराई तक ‘ओह्ह्ह, कार्तिक, नया है ये मजा आ रहा।

हसबैंड कभी जीभ न डाला बस ऊपर से रगड़ता।’ मैंने चाटा, सलाइवा लगाया फिर उंगली डाली टाइट थी। ‘भाभी, जोर से चोदूँगा।’ ‘नहीं, तुम्हारा लंड बड़ा है, 7 इंच। हसबैंड का 5 इंच, वो भी मुश्किल से दर्द होगा, फट जाएगी।’

‘ट्रस्ट मी भाभी।’ मैंने लंड निकाला, सलाइवा लगाया। टिप पर दरार रखी, धक्का मारा। पूरा अंदर वे चीखीं, ‘आआआह्ह्ह! दर्द, निकालो!’ आँसू आ गए। लेकिन मैं रुका नही। पकड़कर पाउंड किया पहले स्लो, फिर फास्ट ‘उह्ह्ह, कार्तिक, रुको।

लेकिन धीरे-धीरे मोअनिंग शुरू ‘अब अच्छा लग रहा। और जोर से मैंने स्पैंक किया गांड पर लाल हो गई। तेज धक्के आखिरकार, ‘भाभी, झड़ रहा हूँ!’ गर्म वीर्य अंदर भर दिया गहराई तक।

थककर उन पर गिरा, लंड अभी अंदर साँसें तेज। ‘भाभी, कैसा लगा?’ ‘शुरू में दर्द बहुत, लेकिन अब तो कमाल। हसबैंड ने कभी गांड नही मारी।

अब चूत और गांड दोनों तुम्हारी कार्तिक। तुम्हारे बिना न रहूँगी।’ मैं उठा, उन्हें गोद में लिया। बाथरूम ले गया। वहाँ शावर के नीचे। वे मूत्र करने लगीं, मेरे सामने। ‘भाभी, कितना हॉट।’ पानी से धोया। फिर घुटनों पर, चूत चाटी, गांड चाटी। साफ किया।

वे बोलीं, ‘कार्तिक, अब चूत में डालो। आग लगी है।’ मैंने दीवार से सटाया, लंड चूत में ठूँसा। जोर-जोर से चोदा पानी गिर रहा।

आह्ह्ह, हाँ कार्तिक, फक मी हार्ड।’ मैंने चूचियाँ दबाईं, किस किया तेज धक्के दिए वे फिर झड़ीं मैं भी चूत में झड़ा। आग बुझ गई।

बाथरूम से बाहर, तौलिये में लिपटे। बेड पर लेटे। बातें कीं। ‘कार्तिक, ये हमारा सीक्रेट रहेगा।

लेकिन दोबारा आना।’ ‘हाँ भाभी, रोज आऊँगा। मुझे सेक्स पसंद है, लेकिन गांड चोदना स्पेशल लगता है।