पड़ोसी अंकल ने मेरी चूत मारी

(Padosi Uncle Ne Meri Choot Maari)

मेरा नाम प्रिया है। उम्र 23 साल। दिल्ली के एक व्यस्त इलाके में माता-पिता के साथ एक अपार्टमेंट में रहती हूं। कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद घर पर ही समय बिताती हूं। कभी-कभी पड़ोस के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हूं। हमारा पड़ोसी शर्मा अंकल हैं, उम्र करीब 52 साल। उनकी पत्नी की मौत एक साल पहले हो चुकी है। वह अकेले रहते हैं, कभी-कभी हमारे घर आते-जाते रहते हैं।

लंबे कद-काठी के, गठे हुए शरीर के मालिक, सफेद बालों के बावजूद उनकी आंखों में हमेशा एक शरारत भरी चमक रहती है। मैंने कभी खास ध्यान नहीं दिया, लेकिन पिछले कुछ महीनों से महसूस किया कि उनकी नजरें मेरी छाती और नितंबों पर अटक जाती हैं। कभी-कभी बातचीत के दौरान उनकी नजरें मेरी कमर पर टिक जातीं, और मैं शरमाकर मुस्कुरा देती।

एक गर्मियों की शाम थी। जून का महीना, जब हवा भी पसीने से तर लगती है। बिजली की कटौती हो रही थी, और घर में घुटन भरी गर्मी। मम्मी-पापा रिश्तेदारों के यहां गए हुए थे, दो दिन बाद लौटने वाले। मैं घर पर अकेली थी। हल्की सी साड़ी पहनी हुई थी, नीचे ब्लाउज और पेटीकोट। पसीना बह रहा था, साड़ी चिपक रही थी शरीर से। बाहर से शर्मा अंकल की आवाज आई, “प्रिया बेटी, घर पर हो?”

मैंने दरवाजा खोला। वह खड़े थे, हाथ में एक थाली लिए। “ये मिठाई लाया हूं तेरे लिए। अकेली है तो खा ले।” मैंने मुस्कुराते हुए थाली ले ली। “आ जाइए अंकल, अंदर। इतनी गर्मी में बाहर मत खड़े रहिए।” वह अंदर आ गए। लिविंग रूम में सोफे पर बैठे। मैंने उन्हें पानी का गिलास दिया। उनकी नजरें मेरी कमर पर टिक गईं, जहां साड़ी से नाभि झांक रही थी। पसीने की बूंदें चमक रही थीं।

बातें शुरू हो गईं। “प्रिया, तू कितनी बड़ी हो गई है। कॉलेज में क्या-क्या पढ़ा?” “अंकल, डिग्री पूरी हो गई। अब जॉब की तलाश में हूं।” वह हंसे, उनकी हंसी में कुछ अजीब सा था। “अच्छा, तो अब शादी का समय आ गया। कोई बॉयफ्रेंड तो नहीं?” मैं शरमाई, चेहरा लाल हो गया। “नहीं अंकल, ऐसा कुछ नहीं।” तभी उनकी उंगली मेरी गोद में सरक गई, हल्के से छुई। “झूठ मत बोल बेटी, इतनी सुंदर लड़की हो, कोई न कोई तो होगा।” मैं चौंकी, लेकिन हाथ हटाने की बजाय एक अजीब सी सिहरन महसूस हुई।

अचानक बिजली आ गई। पंखा घूमने लगा, लेकिन गर्मी कम न हुई। अंकल ने अपना शर्ट का ऊपरी बटन खोल दिया। उनकी चौड़ी छाती दिखी, जो बालों से ढकी हुई थी। “प्रिया, तुझे भी गर्म लग रही होगी। साड़ी का आंचल सरका ले, आराम मिलेगा।” मैं हंस दी, “अंकल, क्या कह रहे हैं आप।” लेकिन वह गंभीर थे। “बेटी, मैं तो तेरा चाचा जैसा हूं। कुछ बुरा नहीं होगा।” उनका हाथ मेरी पीठ पर आ गया, धीरे से साड़ी का आंचल खींच लिया। ब्लाउज दिख गया, मेरी छाती ऊपर उठी हुई।

“अंकल…” मैंने धीमी आवाज में कहा, लेकिन आवाज में ताकत न थी। वह मुझे करीब खींच लिया। उनके होंठ मेरे गाल पर लगे, फिर गर्दन पर। चूमने लगे, हल्के-हल्के। एक सिहरन सी दौड़ गई पूरे शरीर में। मैंने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन उनका हाथ मेरी कमर पर कस गया, इतना जोर से कि सांस रुक गई।

“प्रिया, तू कितनी नरम है, कितनी कोमल।” उन्होंने ब्लाउज के हुक खोल दिए। ब्रा बाहर आ गई, काली रंग की। उन्होंने छाती दबा दी, निप्पल्स सख्त हो गए। मुंह ले जाकर एक चूची चूसने लगे। जीभ से घुमाया, दांतों से हल्का सा काटा। “आह… अंकल…” मैं कराही, शरीर कांपने लगा।

दूसरी चूची पर हाथ फेरा, पिंच किया। फिर पेटीकोट की नाड़ी खींची। पैंटी दिख गई, जो पसीने और उत्तेजना से गीली हो चुकी थी। “देख बेटी, तेरी चूत कितनी उत्तेजित हो गई है।” उनकी उंगली पैंटी के ऊपर से चूत पर रगड़ने लगी। मैं कांप गई, पैर लड़खड़ा गए। “अंकल, ये तो गलत है…” “क्या गलत? बस मजा ले ले, कोई नहीं जानता।”

उन्होंने पैंटी नीचे सरका दी। चूत नंगी हो गई, बाल कम थे, गुलाबी होंठ चमक रहे थे। उंगली अंदर डाल दी, गीला रस निकलने लगा। “कितनी टाइट है तेरी चूत, जैसे पहली बार।” दो उंगलियां डालीं, अंदर-बाहर करने लगे। तेजी से। अंगूठे से क्लिटोरिस दबाया। मैं चिल्लाई, “आह… अंकल… मत रुको।”

उन्होंने मुझे सोफे पर लिटा दिया। पैर फैला दिए। मुंह चूत पर ले आए। जीभ अंदर डाल दी, चाटने लगे। क्लिटोरिस को चूसा, जीभ से घुमाया। “कितनी मीठी है तेरी चूत का रस।” मैं झड़ने लगी, कमर उभारी। “अंकल… आ रहा है…” रस बाहर बहा, उन्होंने सब चाट लिया।

उनका चेहरा चमकदार हो गया, रस से। अब उनकी बारी थी। उन्होंने पैंट खोल दी। लंड बाहर आ गया – मोटा, 8 इंच लंबा, नसें फूली हुईं, सिरा गीला। मैंने हाथ में लिया, सहलाया। “वाह अंकल, कितना बड़ा है।” मुंह में डाला, चूसने लगी। सिरा जीभ से चाटा, गले तक लिया। वह कराहे, “अच्छा चूस रही है बेटी, जैसे प्रोफेशनल।” हाथ मेरे बालों में फंसाया, मुंह चोदने लगे, गहराई से।

फिर वह ऊपर आए। लंड चूत के होंठों पर रगड़ा। “डालूं प्रिया?” “हां अंकल, चोदो मुझे, भर दो।” धकेला, पूरा लंड अंदर चला गया। पहले दर्द हुआ, फिर सुख की लहर। चोदने लगे, धीरे-धीरे, फिर तेज। हर धक्के से चूत की दीवारें रगड़ रही थीं। छाती दबाई, निप्पल्स मुंह में लिए। “तेरी चूत ने लंड को कस लिया है, कितनी गर्म है।” मैंने पैर उनके कूल्हों पर लपेट लिए। “जोर से अंकल, चोदो जोर से।” पसीना बह रहा था दोनों से, चपचप की आवाजें आ रही थीं।

मैं दूसरी बार झड़ गई। चूत सिकुड़ गई, रस बाहर। वह रुके नहीं, और तेज चोदते रहे। “अंदर झाड़ूंगा बेटी।” “हां, भर दो अंकल, सब अंदर।” वह चिल्लाए, गर्म वीर्य चूत में भर दिया। बाहर टपकने लगा। हम दोनों लेटे रहे, सांसें तेज। “अच्छा लगा प्रिया?” “बहुत अंकल, कभी इतना मजा न आया।”

लेकिन रात अभी लंबी थी। हम बाथरूम गए, नहाने। गर्म पानी के नीचे खड़े। उन्होंने साबुन लिया, मेरे शरीर पर लगाया। छाती पर रगड़ा, चूत पर। लंड फिर खड़ा हो गया। “फिर तैयार हो गई तू।” दीवार से सटा दिया, एक पैर ऊपर उठाया। लंड चूत में डाला, खड़े होकर चोदने लगे। पानी बह रहा था, फिसलन बढ़ गई। धक्के जोरदार। “कितनी गीली हो गई फिर से।” हम दोनों झड़े, वीर्य पानी में मिल गया।

बेडरूम में पहुंचे। रात भर चुदाई चली। पहले डॉगी स्टाइल। मैं घुटनों पर, गांड ऊपर। लंड चूत में डाला। हाथ से गांड थपथपाई। “एक दिन तेरी गांड भी मारूंगा प्रिया।” “हां अंकल, जब मन हो।” तेज चुदाई, वीर्य फिर चूत में भरा। फिर मैं ऊपर बैठी, राइडिंग। लंड पर उछली, ऊपर-नीचे। छाती हिल रही थीं, उन्होंने दबाईं। “उछल बेटी, जोर से।” झड़ी मैं, फिर वह।

सुबह हुई। बालकनी में खड़े होकर फिर चुदाई। सूरज उग रहा था, हल्की ठंडी हवा। नंगे शरीर। लंड चूत में, खड़े होकर। “कोई देख लेगा अंकल।” “देख ले, तेरी चुदाई देखें।” तेज धक्के, वीर्य बाहर गिरा।

दोपहर में लंच। नंगे ही खाए। फिर बाथरूम में शावर। साबुन से लंड चिकना किया। गांड पर रगड़ा। “आज गांड मारूं?” “हां, लेकिन धीरे से।” पहले उंगली डाली गांड में, लुब्रिकेंट की तरह साबुन। फिर लंड धीरे से अंदर। टाइट था, दर्द हुआ। लेकिन धीरे-धीरे मजा आने लगा। चोदा गांड, साथ में चूत में उंगली। झड़े दोनों।

शाम को टीवी देखते हुए। मेरी गोद में उनका सिर। लंड चूसा मैंने। फिर सोफे पर चुदाई। मिशनरी पोजिशन। पैर कंधों पर। गहराई से चोदा। “तेरी चूत हमेशा मेरी रहेगी।” “हां अंकल, आपकी।”

रात को साथ सोए। सुबह तक कई बार। पड़ोसी अंकल अब मेरा प्रेमी। चूत हमेशा उनकी। लेकिन ये राज रहा, सिर्फ हमारा।