बस में अजनबी भाभी को चोदा

(Bus Me Ajanabi Bhabhi Ko Choda)

सभी पाठक पाठिकाओं को मेरे खड़े लंड का सलाम।

तो इस रसभरी सत्य कथा का मज़ा लीजिए और पढ़ते-पढ़ते जैसे चाहें मज़ा लीजिए, पर मुझे अपने कमेंट्स नीचे जरूर लिखिए।

दोस्तों, मेरा नाम मनाव है। मैं 25 साल का जवान लड़का हूँ, जो ग्वालियर के पास के एक छोटे से कस्बे में रहता हूँ। मेरा कद-काठी अच्छी है, 5 फुट 10 इंच लंबा, एथलेटिक बॉडी, और सबसे खास बात मेरा लंड – 7 इंच लंबा और मोटा, जो हमेशा जवानी की आग से तना रहता है।

मैं प्राइवेट जॉब करता हूँ, लेकिन वीकेंड पर घर जाता रहता हूँ। इस कहानी का किस्सा भी एक ऐसे ही बस यात्रा से जुड़ा है, जहाँ मैंने एक अजनबी भाभी को अपनी चुदाई की भूख का शिकार बनाया। ये सब कुछ इतना हॉट और वाइल्ड था कि आज भी सोचकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है। तो चलिए, शुरू करते हैं ये कामुक सफर।

ये घटना पिछले साल की है। मैं अपने ऑफिस से छुट्टी लेकर घर जा रहा था। ग्वालियर से रामगढ़ जाने वाली बस पकड़ी, जो हमेशा ओवरलोडेड रहती है। सुबह के 8 बजे की बस थी, लेकिन बारिश हो रही थी, तो भीड़ और ज्यादा हो गई।

मैंने अपनी सीट के पास खड़े होकर टिकट ली और पीछे की तरफ चला गया। बस में जगह तंग थी, लोग आपस में चिपके हुए थे। मैंने एक खाली सीट देखी, लेकिन वो आधी भरी हुई थी। वहाँ एक औरत बैठी थी – लगभग 30 साल की, साड़ी पहने, लेकिन साड़ी भीग गई थी बारिश से, तो उसके ब्लाउज से उसके बड़े-बड़े चूचे झलक रहे थे।

वो भाभी जैसी लग रही थी – गेहुँआ रंग, गोल चेहरा, लंबे काले बाल, और कमर पतली लेकिन गांड इतनी बड़ी और गोल कि साड़ी में भी उभरी हुई दिख रही थी। उसके होंठ मोटे और लाल थे, जैसे चूसने के लिए बने हों। मैंने सोचा, बस में सफर लंबा है, तो पास बैठ जाऊँ।

मैंने पूछा, ‘भाभी, मैं यहाँ बैठ सकता हूँ?’ वो मुस्कुराई और बोली, ‘हाँ बेटा, बैठ जाओ।’ लेकिन जगह कम थी, तो हमारी जांघें आपस में सट गईं। बस चल पड़ी, और झटकों से हम और करीब आते गए।

मेरा लंड पहले से ही सेमी-हार्ड था, क्योंकि सुबह से भूख लगी हुई थी। भाभी की साड़ी की खुशबू आ रही थी – मिट्टी और पसीने की मिली-जुली। धीरे-धीरे, बस के मोड़ पर झटका लगा, और मेरा हाथ उसके कंधे पर चला गया।

वो हिली नहीं, बस देखा मुझे। मैंने सॉरी बोला, लेकिन वो हँसी, ‘कोई बात नहीं, बस में तो ऐसा ही होता है।’ उसका नाम पूजा था, वो पास के गाँव से भोपाल जा रही थी अपने रिश्तेदारों से मिलने। शादीशुदा, लेकिन पति ट्रक ड्राइवर है, महीनों घर नहीं आता। बातों-बातों में पता चला कि वो भी अकेली है, और जवानी की प्यास बुझाने को तरस रही है।

बस में एसी नहीं था, गर्मी बढ़ रही थी। पूजा भाभी ने अपना दुपट्टा खोल दिया, तो उसके ब्लाउज से उसके भारी-भरकम चूचे बाहर झाँकने लगे। ब्रा नहीं पहनी थी, निप्पल्स साफ दिख रहे थे – भूरे और सख्त। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया, पैंट में दर्द करने लगा।

मैंने जानबूझकर अपनी टांग उसके ऊपर रख दी, और मेरी जांघ उसके चूत के पास सट गई। वो सिहर गई, लेकिन हटाई नहीं। ‘भाभी, गर्मी बहुत है ना?’ मैंने कहा। वो बोली, ‘हाँ, लेकिन तुम्हारी वजह से और गर्म हो रही है।’ ये सुनकर मेरा दिल धड़क गया।

बस अब हाईवे पर थी, लेकिन अचानक ब्रेक लगा – आगे जाम था। लोग चिल्लाने लगे, लेकिन हमारी सीट पीछे थी, अंधेरी। मैंने हिम्मत जुटाई और अपना हाथ उसके जांघ पर रख दिया। साड़ी के ऊपर से ही महसूस हो रहा था – नरम और गर्म। पूजा ने देखा, लेकिन कुछ बोली नहीं।

धीरे से उसने अपना हाथ मेरी जांघ पर रखा। ‘क्या कर रहे हो मनाव?’ वो फुसफुसाई। ‘भाभी, तुम्हारी जवानी देखकर काबू नहीं हो रहा।’ मैंने कहा। वो शरमाई, लेकिन उसकी साँसें तेज हो गईं।

जाम लंबा खिंच गया। मैंने अपना हाथ ऊपर सरकाया, साड़ी के अंदर। उसकी पैंटी गीली थी। उँगलियों से छुआ तो चूत के बाल महसूस हुए – घने और काले। ‘आह…’ वो सिसकारी। मैंने पैंटी साइड की और उंगली अंदर डाल दी। चूत इतनी गीली थी कि आसानी से घुस गई।

पूजा ने अपना मुँह मेरी गर्दन पर दबा लिया ताकि आवाज न निकले। मैंने उंगली अंदर-बाहर करने लगा, क्लिट को रगड़ने लगा। वो काँप रही थी, चूचे ऊपर-नीचे हो रहे थे। ‘मनाव, रुको… लोग देख लेंगे।’ लेकिन उसकी चूत और गीली हो रही थी।

मैंने अपना बेल्ट खोला, जींस नीचे सरकाई। मेरा लंड बाहर आ गया – तना हुआ, नसें फूली हुईं, सुपारा लाल। पूजा ने देखा और आँखें फैला दीं। ‘इतना बड़ा…?’ वो बोली। मैंने कहा, ‘भाभी, चूस लो ना।’ बस में शोर था, कोई ध्यान नहीं दे रहा। वो झुक गई, अपना मुँह मेरे लंड पर ले आई।

पहले जीभ से चाटा, फिर होंठों से पकड़ा। ‘उम्म…’ की आवाज आई। उसके मोटे होंठ लंड को घेर गए। वो चूसने लगी – धीरे-धीरे, फिर तेज। सलाइवा से गीला हो गया लंड। मैंने उसके बाल पकड़े, सिर दबाया। गले तक ले लिया।

बस चल पड़ी, लेकिन झटके लग रहे थे जो चूसाई को और मजेदार बना रहे थे। पूजा भाभी चूस रही थी जैसे भूखी हो – जीभ लंड की नसों पर घुमा रही, बॉल्स को सहला रही। मैं सिसकार रहा था, ‘भाभी, कमाल कर रही हो।

उसने एक बार सिर उठाया, ‘तेरा लंड इतना स्वादिष्ट है, पहली बार किसी अजनबी का चूस रही हूँ।’ फिर से मुंह में लिया। मैंने उसके ब्लाउज खोला, चूचे बाहर निकाले। निप्पल्स को चूसा, काटा। वो दर्द से चीखी लेकिन चूसती रही।

जाम खत्म हो गया, लेकिन हम रुके नहीं। बस की पिछली सीट पर कंबल फैला था, हमने उसे ढक लिया। पूजा ने अपना साड़ी ऊपर चढ़ाई, पैंटी उतारी। ‘मनाव, चोद मुझे।’ वो बोली। लेकिन जगह कम थी। मैंने उसे गोद में बिठाया, लंड को चूत पर रगड़ा।

सुपारा गीला था उसके रस से। एक झटके में अंदर धकेला। ‘आह्ह्ह!’ वो चिल्लाई, लेकिन मुँह दबा लिया। चूत टाइट थी, जैसे सालों से चुदाई न हुई हो। मैंने कमर पकड़ी, ऊपर-नीचे करने लगा। बस के झटकों से चुदाई अपने आप तेज हो रही थी।

उसके चूचे मेरे चेहरे पर उछल रहे थे। मैंने एक चूचा मुँह में लिया, चूसा। पूजा की चूत लंड को निचोड़ रही थी। ‘फाड़ दे मेरी चूत, मनाव!’ वो फुसफुसाई। मैंने स्पीड बढ़ाई, लंड पूरा अंदर-बाहर। गाड़ी के शोर में हमारी सिसकारियाँ दब रही थीं।

अचानक, पूजा काँप गई – ऑर्गेज्म आ गया। चूत से रस बहने लगा, लंड पर चिपचिपा। मैं रुका नहीं, और जोर-जोर से ठोका। ‘भाभी, मैं झड़ने वाला हूँ।’ ‘अंदर ही डाल दे!’ वो बोली। मैंने कमर दबाई, लंड फड़फड़ाया, और गर्म वीर्य चूत में भर दिया।

हम हाँफ रहे थे। पूजा ने लंड साफ किया अपने मुँह से – बाकी रस चाट लिया। ‘कितना गर्म था…’ वो बोली। बस अब गाँव के पास पहुँच रही थी। लेकिन हमारी भूख शांत न हुई। अगला स्टॉप आया, जहाँ कुछ लोग उतरे। हमने सोचा, और मज़ा ले लें। मैंने कहा, ‘भाभी, पीछे चलो, खड़े होकर चोदूँ।’ वो सहमत हुई। बस के आखिरी हिस्से में, जहाँ सामान रखा था, हम छिप गए।

वहाँ जगह थी खड़ी होने की। मैंने पूजा को दीवार से सटा दिया, साड़ी ऊपर की। अब पीछे से चोदने का मन था। उसकी गांड इतनी रसीली थी – गोल, मांसल। मैंने गांड पर थप्पड़ मारा, ‘भाभी, गांड मारवाओगी?’ वो शरमाई, ‘पहली बार किसी और को… लेकिन हाँ, कर लो।

मैंने थूक लगाया लंड पर, और गांड के छेद पर रखा। धीरे से दबाया। टाइट था, लेकिन गीला होने से घुस गया। ‘आह्ह्ह! दर्द हो रहा है!’ वो चीखी। मैं रुका, फिर धीरे-धीरे अंदर किया। पूरी लंबाई अंदर।

अब पीछे से पेलने लगा। गांड की दीवारें लंड को रगड़ रही थीं। पूजा दर्द और मजा दोनों में सिसकार रही थी। ‘चोदो जोर से, फाड़ दो!’ मैंने कमर पकड़ी, तेज-तेज धक्के मारे। बस चल रही थी, झटके लग रहे, जो चुदाई को और गहरा बना रहे।

उसके चूचे लटक रहे थे, मैंने आगे से पकड़े, निप्पल्स मरोड़े। पूजा फिर गीली हो गई, चूत से रस टपक रहा था। ‘मनाव, तू तो जानवर है!’ वो बोली। मैंने स्पीड बढ़ाई, गांड में लंड घुसाते हुए थप्पड़ मारे। आखिरकार, फिर झड़ गया – गर्म वीर्य गांड में भर दिया।

हम थक चुके थे, लेकिन मुस्कुरा रहे थे। बस रामगढ़ पहुँच गई। पूजा उतरी, लेकिन नंबर लिया मेरा। ‘फिर मिलेंगे, मनाव। वो बोली तेरी चुदाई भूलूँगी नहीं। मैं घर पहुँचा, लेकिन दिमाग में बस वही सीन घूम रहे थे।

दोस्तों, ये था मेरा बस वाला रोमांच। अगर तुम्हें पसंद आया, तो कमेंट करो। और हाँ, अगर ऐसी कोई स्टोरी हो तो शेयर करो।