चाचा ने भतीजी की कुवारी चूत मारी

(Chacha Ne Bhatiji Ki Kuwari Choot Maari)

रात के अंधेरे में गांव का घर शांत था। राजेश चाचा, 45 साल का एक मजबूत कद-काठी वाला आदमी, अपनी पुरानी चारपाई पर लेटा हुआ था। उसकी आंखें बंद थीं, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। दिमाग में घूम रही थी उसकी भतीजी प्रिया की। प्रिया, 18 साल की जवान लड़की, जो शहर से पढ़ाई के लिए वापस आई थी।

उसके माता-पिता, राजेश के भाई-बहन, शहर में नौकरी के सिलसिले में चले गए थे, और प्रिया को चाचा के पास छोड़ गए थे। राजेश को ये मौका मिला था, जिसका इंतजार वो सालों से कर रहा था।

प्रिया कमरे में सो रही थी, जो राजेश के कमरे के बगल में था। पतली दीवार के पार से उसकी सांसों की आवाज आ रही थी। राजेश का लंड कड़ा हो गया था। वो कल्पना कर रहा था प्रिया के नंगे बदन को। प्रिया का शरीर अब किशोरावस्था से निकलकर जवान हो चुका था।

उसके स्तन भरे हुए, कमर पतली, और गांड गोल। राजेश ने कई बार चुपके से उसे नहाते हुए झांकने की कोशिश की थी, लेकिन आज रात वो कुछ और करने वाला था।

सुबह हुई। प्रिया उठी और किचन में चाय बनाने लगी। राजेश आया, उसकी आंखें प्रिया की साड़ी पर टिक गईं। साड़ी हल्की थी, और प्रिया के ब्लाउज से उसके स्तन उभरे हुए दिख रहे थे। ‘चाचा जी, चाय पिएंगे?’ प्रिया ने मुस्कुराते हुए पूछा। राजेश ने हां कहा और उसके पास बैठ गया। उसके हाथ अनजाने में प्रिया की जांघ से छू गया। प्रिया चौंकी, लेकिन कुछ न बोली। राजेश का दिल धड़कने लगा।

दिन भर राजेश ने प्रिया पर नजर रखी। वो खेतों में काम करने गया, लेकिन दिमाग प्रिया पर अटका रहा। शाम को लौटा तो प्रिया नहा रही थी। राजेश चुपके से दरवाजे के पास गया। छेद से झांका। प्रिया नंगी थी। पानी उसके बदन पर बह रहा था। उसके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। नीचे उसकी कुंवारी चूत साफ-सुथरी, बिना बालों की। राजेश का लंड पैंट में तन गया। वो दबा-दबाकर सहला रहा था।

रात को खाना खाने के बाद प्रिया अपने कमरे में चली गई। राजेश इंतजार करता रहा। आधी रात को वो उठा। धीरे से प्रिया के कमरे में घुसा। प्रिया सो रही थी, साड़ी ऊपर सरक गई थी, उसकी जांघें नंगी दिख रही थीं। राजेश बिस्तर के पास बैठ गया। उसका हाथ प्रिया की जांघ पर रखा।

प्रिया हिली, लेकिन जागी नहीं। राजेश का हाथ ऊपर सरका। प्रिया की चड्डी तक पहुंच गया। वो गीली महसूस हुई। राजेश ने उंगली डाली। प्रिया की आंखें खुल गईं। ‘चाचा जी? क्या कर रहे हो?’ वो डरते हुए बोली।

राजेश ने मुस्कुराया। ‘प्रिया, तू बहुत सुंदर है। चाचा तुझे प्यार करता है।’ प्रिया घबरा गई। ‘नहीं चाचा, ये गलत है। मैं तुम्हारी भतीजी हूं।’ लेकिन राजेश ने उसका मुंह बंद कर दिया। ‘चुप रह, वरना सबको बता दूंगा कि तू क्या-क्या करती है शहर में।’ प्रिया डर गई। राजेश ने उसकी साड़ी खींच ली। प्रिया नंगी हो गई। उसके स्तन कांप रहे थे। राजेश ने एक स्तन पकड़ा और चूसने लगा। प्रिया चीखी, लेकिन राजेश ने दबा दिया।

राजेश का लंड बाहर निकला। मोटा, लंबा, नसों वाला। प्रिया ने देखा तो डर गई। ‘चाचा, प्लीज नहीं। मैं कुंवारी हूं।’ राजेश हंसा। ‘आज तेरी कुंवारी चूत चोदूंगा।’ वो प्रिया को दबोचे हुए लेट गया। प्रिया की टांगें फैलाईं। उसकी चूत पर लंड का सिरा रगड़ा। प्रिया रो रही थी। राजेश ने धक्का मारा। लंड आधा अंदर चला गया। प्रिया चीख पड़ी। खून निकलने लगा। राजेश ने पूरा लंड अंदर ठूंस दिया। प्रिया का बदन कांप गया।

राजेश चोदने लगा। धीरे-धीरे। प्रिया की चूत टाइट थी, लंड को निचोड़ रही थी। राजेश की गति बढ़ी। वो प्रिया के स्तनों को मसल रहा था। प्रिया का दर्द कम हो गया, अब आनंद आने लगा। वो स्टोन करने लगी। ‘आह… चाचा… धीरे…’ राजेश ने तेज किया। लंड चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। आवाज आ रही थी, चपचप। राजेश ने प्रिया को उल्टा किया। पीछे से चोदा। उसकी गांड पर थप्पड़ मारे। प्रिया चुदाई में खो गई।

कई मिनट बाद राजेश झड़ने वाला था। ‘प्रिया, चाचा का रस तेरी चूत में डालूंगा।’ प्रिया बोली, ‘हां चाचा, भर दो।’ राजेश ने जोर का धक्का मारा और स्पर्म छोड़ दिया। गर्म रस प्रिया की चूत में भर गया। दोनों पसीने से तर थे। राजेश लंड बाहर निकाला। खून और रस मिला हुआ। प्रिया थक गई, सो गई। राजेश मुस्कुराया। ये शुरुआत थी।

अगले दिन प्रिया सुबह उठी। चूत में दर्द था, लेकिन मन में अजीब सा आनंद। राजेश आया। ‘कैसी है मेरी रानी?’ प्रिया शरमाई। ‘चाचा, कल रात…’ राजेश ने चुप करा दिया। ‘आज फिर करेंगे।’ प्रिया ने हामी भर ली। दिन भर वो दोनों चुपचाप रहे, लेकिन नजरें मिलती रहीं।

शाम को खेत में गए। वहां अकेले में राजेश ने प्रिया को जमीन पर लिटाया। साड़ी ऊपर की और चोदना शुरू किया। प्रिया अब खुलकर स्टोन कर रही थी। ‘चाचा, और जोर से चोदो मेरी चूत।’

राजेश का लंड फिर कड़ा था। वो प्रिया की चूत में घुसेड़ा। तेजी से पेला। प्रिया की चीखें खेतों में गूंजीं। राजेश ने उसके मुंह में लंड डाला। प्रिया ने चूसा। पहली बार ब्लोजॉब। राजेश का रस मुंह में छूटा। प्रिया निगल गई। रात को घर लौटे। बाथरूम में नहाते हुए राजेश ने प्रिया को दीवार से सटाकर चोदा। पानी के नीचे चुदाई। प्रिया की चूत फिसलन भरी हो गई।

दिन बीतते गए। प्रिया के माता-पिता आने वाले थे, लेकिन तब तक राजेश ने प्रिया को अपनी रखैल बना लिया। हर रात चोदता। कभी कमरे में, कभी बाहर। प्रिया की चूत अब ढीली हो रही थी, लेकिन आनंद बढ़ रहा था। एक रात राजेश ने प्रिया को बांध लिया। हाथ-पैर बांधे और चोदा। प्रिया को BDSM का मजा आया। ‘चाचा, मुझे गुलाम बना लो।’ राजेश ने कोड़ा मारा गांड पर। फिर चोदा।

एक दिन प्रिया ने कहा, ‘चाचा, मैं प्रेग्नेंट हो जाऊंगी तो?’ राजेश हंसा। ‘तो हो जाएगी। चाचा का बच्चा पैदा करेगी।’ प्रिया खुश हो गई। वो दोनों की रातें और गर्म हो गईं। राजेश प्रिया की गांड भी मारने लगा। पहली बार एनल। प्रिया दर्द से चीखी, लेकिन फिर मजा आया। लंड गांड में अंदर-बाहर। स्पर्म गांड में।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। प्रिया के माता-पिता आए, लेकिन प्रिया चुप रही। चुपके से चाचा से मिलती। गांव के बाहर जंगल में चुदाई। कभी कार में। उनका रिश्ता गहरा होता गया। प्रिया की कुंवारी चूत अब चाचा का लंड की गुलाम थी।