राजेश रायबरेली के एक छोटे से बैंक में क्लर्क था तीस साल की उम्र में वह साधारण दिखता था लेकिन उसकी आंखों में एक शांत आत्मविश्वास था।
दो साल पहले प्रिया से शादी हुई थी जो घर संभालती थी और उसकी खूबसूरती राजेश को हर रोज मोहित कर देती।
प्रिया की त्वचा गेहुंआ रंग की थी आंखें बड़ी काली और होंठ भरे हुए जो मुस्कुराते समय चमक उठते।
वे दोनों ने फैसला किया था कि अगले पांच साल बच्चा नहीं लेंगे ताकि एक-दूसरे को पूरी तरह समझ सकें।
उनका वैवाहिक जीवन सुखमय था खासकर रातें जब वे बिस्तर पर एक-दूसरे के शरीर को सहलाते चूमते और घंटों तक प्यार की आग में जलते।
प्रिया की कामुकता राजेश के लिए नशा थी वह उसके स्तनों को चूसता उसके नितंबों को दबाता और प्रिया की चूत में धीरे-धीरे घुसते हुए उसे चीखने पर मजा लेता।
गर्मी का मौसम चरम पर था रायबरेली की सड़कें तप रही थीं घर के पंखे भी हवा की बजाय गर्मी उगल रहे थे।
एक शाम प्रिया ने राजेश के कंधे पर सिर रखते हुए कहा “राजेश हमें कहीं घूमने जाना चाहिए यह गर्मी तो बर्दाश्त से बाहर हो गई है जीना मुश्किल लग रहा है”।
राजेश ने उसके बालों में उंगलियां फेरते हुए जवाब दिया “हां प्रिया तुम बिल्कुल सही कह रही हो चलो महाबलेश्वर चलते हैं वहां का मौसम ठंडा होता है पहाड़ियां हरी-भरी और हम कुछ दिन शांति से बिता सकेंगे”।
प्रिया की आंखें चमक उठीं वह तुरंत योजना बनाने लगी टिकट बुकिंग होटल का इंतजाम सब कुछ।
मुंबई से महाबलेश्वर जाने के लिए ट्रेवल एजेंट की जरूरत थी राजेश ने अपने एक पुराने दोस्त से अर्जुन का नाम सुना जो युवा और भरोसेमंद था।
अर्जुन सस्ते दामों पर अच्छी सर्विस देता था। राजेश ने फोन किया “हैलो अर्जुन जी मैं राजेश बोल रहा हूं महाबलेश्वर के लिए दो लोगों का टिकट और कार का इंतजाम हो सकता है क्या”।
अर्जुन ने उत्साह से कहा “बिल्कुल सर मैं सब संभाल लूंगा कल सुबह मुंबई से कार भेज दूंगा ड्राइवर का नाम विक्रम है वह बहुत अनुभवी ड्राइवर है रास्ते में कोई परेशानी नहीं होगी”।
राजेश ने प्रिया को बताया और दोनों अगले दिन मुंबई के लिए रवाना हो गए।
सुबह स्टेशन पर सफेद इनोवा कार खड़ी थी विक्रम बाहर खड़ा था लंबा कद-काठी वाला लगभग 35 साल का आदमी उसके चेहरे पर एक चालाक मुस्कान थी आंखें तेज और शरीर मजबूत।
“नमस्ते सर मैम मैं विक्रम हूं चलिए महाबलेश्वर के लिए निकल पड़ते हैं” उसने कहा।
प्रिया ने राजेश की ओर देखा थोड़ा घबराहट महसूस की लेकिन कार में बैठ गई।
यात्रा शुरू हुई रास्ता सुहावना था हरी पहाड़ियां धीरे-धीरे दिखने लगीं प्रिया खिड़की से बाहर झांक रही थी हवा उसके बालों को उड़ा रही थी राजेश उसके कंधे पर हाथ रखे बैठा था।
विक्रम ड्राइविंग करते हुए बातें करता रहा “सर पहली बार महाबलेश्वर जा रहे हैं क्या”।
राजेश ने कहा “हां हम दोनों बहुत उत्साहित हैं”।
विक्रम हंसा “वहां का नजारा कमाल का है स्ट्रॉबरी फार्म झरने और वो ठंडी हवा जो रात में कंबल ओढ़ने पर भी लगती है”।
कुछ घंटों बाद रास्ते में ब्रेक हुआ विक्रम ने कार रोकी “सर थोड़ा रेस्ट ले लीजिए मैं चाय लाता हूं पास की ढाबे से”।
लेकिन तभी एक और आदमी कार की ओर आया करण था विक्रम का साथी जो खुद को सहायक ड्राइवर बता रहा था।
करण मोटा-तगड़ा था चेहरे पर भूखी नजर आंखें प्रिया पर टिक गईं। “भाई विक्रम मैं भी साथ चलूं रास्ता लंबा है” उसने कहा।
विक्रम ने सहमति दी और करण पीछे की सीट पर बैठ गया ठीक प्रिया के बगल में।
प्रिया को असहज लगा उसके शरीर से निकलने वाली गंध और नजरें उसे परेशान कर रही थीं लेकिन उसने राजेश की ओर देखा जो सोच में डूबा था और कुछ नहीं कहा।
यात्रा जारी रही शाम ढलने लगी पंचगनी के पास पहुंचे विक्रम ने कहा “सर आज रात यहीं रुक जाते हैं कल सुबह महाबलेश्वर पहुंच जाएंगे मैंने एक बंगले का इंतजाम किया है शांत जगह पर”। राजेश ने हामी भरी।
बंगला पहाड़ियों के बीच था पुराने स्टाइल का बाहर से सुंदर लगता था अंदर का माहौल थोड़ा रहस्यमय लेकिन साफ-सुथरा।
विक्रम और करण ने सामान उतारा प्रिया थकी हुई थी और नहाने चली गई। बाथरूम छोटा था लेकिन गर्म पानी उपलब्ध था।
वह दरवाजा बंद करके साड़ी उतारी फिर ब्लाउज ब्रा पैंटी सब कुछ। नंगा शरीर पानी के नीचे आ गया उसके स्तन गोल उभरे हुए निप्पल्स सख्त हो रहे थे पानी की गर्मी से।
वह साबुन से रगड़ने लगी कमर पतली नितंब गोल चूत पर हाथ फेरा अनजाने में एक हल्की सिसकी निकली।
बाहर राजेश लिविंग रूम में बैठा था विक्रम ने चाय दी “सर बंगला मालिक का है वे बिजनेसमैन हैं लेकिन आज खाली है आप आराम करें”।
लेकिन विक्रम की नजरें बाथरूम की ओर जा रही थीं करण भी पास खड़ा था चुपके से मुस्कुरा रहा था।
अचानक विक्रम ने राजेश से कहा “सर आप थोड़ी देर बाहर टहल आएं ताजी हवा लगेगी मैं प्रिया मैम को कॉल कर दूंगा जब नहा लें”।
राजेश ने सोचा ठीक है और बाहर चला गया।
जैसे ही दरवाजा बंद हुआ विक्रम और करण बाथरूम की खिड़की की ओर बढ़े।
पर्दा थोड़ा खुला था वे चुपके से झांकने लगे।
प्रिया नंगी होकर नहा रही थी पानी उसके शरीर पर बह रहा था स्तनों से नीचे पेट पर फिर चूत तक।
विक्रम का मुंह सूख गया “भाई करण देख तो क्या बॉडी है ये स्तन कितने रसीले गांड चोदने लायक” वह फुसफुसाया।
करण की सांसें तेज हो गईं “हां यार चूत भी गुलाबी लग रही है आज रात इसे पकड़ लेंगे”।
विक्रम ने फोन निकाला वीडियो बनाना शुरू कर दिया प्रिया के नंगे शरीर का हर कोण कैद हो रहा था उसके बाल धोते हुए स्तन हिलते हुए नितंब मरोड़ते हुए।
प्रिया को कोई शक नहीं था वह गुनगुना रही थी नहाने का मजा ले रही थी।
विक्रम का लंड जींस में खड़ा हो गया वह ऊपर से दबा रहा था “वीडियो से ब्लैकमेल करेंगे राजेश को बाहर रखेंगे”।
करण ने सिर हिलाया “हां मेरी बारी पहले चोदूंगा”।
प्रिया नहाकर बाहर आई पतली साड़ी पहनी जो गीले शरीर पर चिपक गई स्तनों की रूपरेखा साफ दिख रही थी निप्पल्स के निशान भी।
विक्रम ने उसे देखा मुस्कुराया “मैम नहा लिया अच्छा लगा ना”।
प्रिया शर्माते हुए बोली “हां बहुत अच्छा पानी गर्म था”।
राजेश लौट आया रात का खाना बनाया गया सबने साथ खाया विक्रम और करण ने शराब का बहाना बनाया प्रिया को पिलाने की कोशिश की लेकिन प्रिया ने मना कर दिया “नहीं मैं नहीं पीती”।
रात गहराई राजेश और प्रिया अपने कमरे में चले गए लेकिन विक्रम का मन बैचेन था वह और करण बरामदे में बैठे योजना बना रहे थे “सुन करण कल सुबह राजेश बाजार जाएगा हम प्रिया को अकेला पकड़ लेंगे वीडियो दिखाकर मजा लेंगे”।
करण हंसा “सही है पहले मैं चोदूंगा फिर तू गांड मारेगा”।
अगली सुबह सूरज निकला महाबलेश्वर का मौसम ताजा था हल्की ठंडक हवा में।
राजेश ने प्रिया से कहा “प्रिया मैं बाजार चला जाता हूं कुछ सामान ले आऊंगा फल और स्नैक्स”।
प्रिया बोली “ठीक है लेकिन जल्दी आना मैं इंतजार करूंगी”।
राजेश बाहर निकल गया विक्रम और करण का इंतजार खत्म।
वे प्रिया के कमरे की ओर बढ़े प्रिया साड़ी में बेड पर लेटी आराम कर रही थी।
विक्रम ने दरवाजा खटखटाया “मैम अंदर आ सकते हैं क्या”।
प्रिया ने कहा “हां आइए”। वे अंदर घुसे विक्रम ने फोन निकाला वीडियो प्ले किया प्रिया का नंगा शरीर स्क्रीन पर घूम रहा था पानी की बूंदें चमक रही थीं।
प्रिया का चेहरा सफेद पड़ गया “ये क्या है आपने ये कैसे बनाया कृपया डिलीट कर दो”।
विक्रम हंसते हुए बोला “मैम कल रात नहाते समय बहुत हसीन लग रही थीं अब अगर चुपचाप हमारी बात मानेंगी तो किसी को नहीं बताएंगे वरना राजेश सर को भेज देंगे फैमिली को भी”।
प्रिया डर गई आंसू आ गए “कृपया मत कीजिए मैं क्या करूं बताओ”।
करण ने कहा “सरल है मैम कपड़े उतारो हमें संतुष्ट करो वरना सब बर्बाद”।
प्रिया रोने लगी लेकिन विक्रम ने साड़ी खींच ली ब्लाउज खुल गया स्तन बाहर आ गए गोल उभरे हुए।
विक्रम ने उन्हें पकड़ लिया “वाह कितने मुलायम हैं चूसने लायक” वह दबाने लगा निप्पल्स चूसे।
प्रिया चीखी “नहीं छोड़ो मुझे दर्द हो रहा है” लेकिन करण ने मुंह पर हाथ रख दिया “चुप रह साली वरना चिल्ला दे”।
वे प्रिया को बेड पर पटक दिया विक्रम ने पैंट उतारी लंड मोटा लंबा खड़ा थरथरा रहा था “चूस इसे” प्रिया के मुंह में ठूंस दिया।
प्रिया घुटनों पर थी लंड चूस रही थी आंसू बह रहे थे विक्रम बाल पकड़कर आगे-पीछे कर रहा था “हां ऐसे ही अच्छी चूसती हो रंडी”।
करण ने पीछे से साड़ी ऊपर की पैंटी उतार दी प्रिया की चूत नम थी डर और थोड़ी उत्तेजना से।
करण ने उंगली डाली “गीली हो गई है तैयार है चुदाई के लिए” वह उंगली अंदर-बाहर करने लगा।
विक्रम ने मुंह छोड़ा प्रिया को बेड पर लिटा दिया ऊपर चढ़ गया लंड चूत पर रगड़ा “अब चोदता हूं तुझे” धक्का दिया।
प्रिया चीखी “आह दर्द हो रहा है रुको” लेकिन विक्रम रुका नहीं जोर-जोर से पेलने लगा प्रिया का शरीर हिल रहा था स्तन उछल रहे थे।
विक्रम एक स्तन मुंह में लिया चूसा “तेरी चूत कितनी टाइट है मजा आ रहा है सालि”।
करण इंतजार न कर सका प्रिया के मुंह में लंड ठूंस दिया “चूस मेरी भी”।
प्रिया दो लंडों के बीच फंसी थी विक्रम नीचे से चोद रहा था करण ऊपर से मुंह चोद रहा था।
कमरा चीखों सिसकियों और थप्पड़ों की आवाज से गूंज रहा था।
विक्रम ने स्पीड बढ़ाई “हूं हूं ले साली चोद” प्रिया की चूत से रस बहने लगा दर्द के साथ आनंद भी महसूस हो रहा था “नहीं रुको प्लीज” वह कह रही थी लेकिन शरीर कांप रहा था।
विक्रम ने प्रिया को पलटा डॉगी स्टाइल में नितंब पकड़े पीछे से घुसेड़ा “तेरी गांड भी चोदूंगा”।
प्रिया डर गई “नहीं वो मत गांड फट जाएगी” लेकिन विक्रम ने थूक लगाया लंड पर रगड़ा और गांड में डाल दिया। प्रिया की चीख निकल गई “आह फट गई मर जाऊंगी” विक्रम हंस रहा था “सहन कर मजा आएगा” वह गांड मारने लगा जोरदार धक्के।
करण सामने से चूत में उंगली डाल रहा था प्रिया का शरीर पसीने से तर था आंसू बह रहे थे लेकिन धीरे-धीरे गांड में दर्द कम हो रहा था एक अजीब सनसनी आ रही थी।
कुछ मिनट बाद विक्रम ने प्रिया को सीधा किया “अब मिलकर चोदेंगे” करण नीचे लेट गया प्रिया को ऊपर बिठाया करण का लंड चूत में गया विक्रम पीछे से गांड में।
प्रिया दो लंडों से भरी हुई थी “बस करो मर जाऊंगी” वह चिल्लाई लेकिन वे एक साथ धक्के मारने लगे।
“ले डबल पेनिट्रेशन रंडी” विक्रम बोला प्रिया का शरीर हिल रहा था स्तन लटक रहे थे करण उन्हें चूस रहा था चबा रहा था।
प्रिया की सांसें तेज थीं दर्द और सुख का मिश्रण उसे पागल कर रहा था।
आखिरकार विक्रम झड़ने लगा “हूं आ रहा हूं” गांड में वीर्य छोड़ दिया गर्म गर्म। करण भी चूत में झड़ गया “ले मेरा रस”।
प्रिया थक चुकी थी लेटी सिसक रही थी शरीर कांप रहा था लेकिन वे रुके नहीं “अभी तो शुरुआत है” विक्रम ने कहा।
उन्होंने प्रिया को उठाया बाथरूम ले गए वहां फिर नहलाया लेकिन इस बार लंडों से रगड़कर।
विक्रम ने प्रिया को दीवार से सटाया पानी के नीचे लंड उसके स्तनों पर रगड़ा “साफ कर अपनी चूत” प्रिया ने हाथ से धोया लेकिन करण ने पीछे से उंगली डाली फिर लंड घुसेड़ा।
बाथरूम में पानी की आवाज चीखों के साथ मिल रही थी।
दोपहर हो चुकी थी राजेश लौट आया विक्रम ने रोका “सर प्रिया मैम सो रही है थक गई हैं यात्रा से”।
राजेश को शक नहीं हुआ वह आराम करने लगा।
लेकिन शाम तक विक्रम और करण ने प्रिया को तीन-चार बार चोदा हर बार नया तरीका।
एक बार प्रिया को खड़ा करके दीवार से सटाकर विक्रम ने उसके पैर उठाए लंड चूत में डाला “ले ऐसे चोद” प्रिया दीवार से टिककर चुद रही थी सिसकियां ले रही थी करण पीछे से गांड में घुसा दो लंड फिर से।
प्रिया के पैर कांप रहे थे “प्लीज बस” लेकिन वे हंस रहे थे “मजा आ रहा है ना”।
फिर बेड पर प्रिया को उल्टा लिटाया विक्रम ने मुंह में लंड डाला करण ने चूत चोदी।
प्रिया का मुंह भरा हुआ था गले तक लंड जा रहा था वह खांस रही थी लेकिन विक्रम बाल पकड़कर पेल रहा था।
शाम ढली राजेश ने प्रिया को देखा वह थकी लग रही थी लेकिन मुस्कुराई “सब ठीक है”।
रात में जब राजेश सो गया विक्रम और करण फिर आए प्रिया डर के मारे चुप थी “चलो आज लिविंग रूम में गैंगबैंग” विक्रम ने कहा।
उन्होंने प्रिया को लिविंग में ले जाया सोफे पर पटका विक्रम मुंह में लंड ठूंस दिया करण चूत में।
प्रिया के शरीर पर पसीना था वे बारी-बारी चोद रहे थे फिर साथ में। विक्रम ने प्रिया के स्तनों पर थप्पड़ मारे “उछाल इनको” करण ने नितंबों पर काट लिया।
प्रिया चीख रही थी लेकिन आवाज दबा रही थी राजेश न जाग जाए।
आखिर में दोनों झड़े प्रिया के मुंह पर चूत पर वीर्य के धब्बे लग गए वह थककर सो गई।
अगले दिन महाबलेश्वर घूमने गए स्ट्रॉबरी फार्म पर लेकिन विक्रम ने प्रिया को अकेले में पकड़ा झरने के पास छिपकर साड़ी ऊपर की लंड डाला “शशश चुप रह चोद रहा हूं”।
प्रिया सह रही थी पानी की आवाज में चीखें दब गईं “हां धीरे” लेकिन विक्रम जोर से पेला।
करण ने भी मौका लिया पास के पेड़ के पीछे प्रिया की गांड मारी। प्रिया का शरीर अब उनके इशारे पर था डर था लेकिन एक अजीब लत लग गई थी।
यात्रा के दौरान हर रात और दिन वे मौके ढूंढते प्रिया को चोदते।
एक बार कार में राजेश सो रहा था विक्रम ने प्रिया को पीछे बिठाया लंड मुंह में डलवाया “चूस चुपचाप”।
प्रिया चूस रही थी आंसू बह रहे थे लेकिन लंड चाट रही थी।
यात्रा के अंतिम दिन बंगले में आखिरी रात विक्रम और करण ने प्रिया को पूरी तरह लूट लिया।
वे तीनों साथ थे प्रिया बीच में दो लंड चूत और गांड में मुंह में तीसरा हाथ से।
प्रिया चिल्ला रही थी “बस अब और नहीं” लेकिन वे रुके नहीं घंटों चुदाई चली।
विक्रम ने कहा “तू हमारी रंडी बन गई है” प्रिया सिसकी “हां जो कहो”।
सुबह राजेश को कुछ पता नहीं चला वे घर लौटे लेकिन प्रिया बदल गई थी उसके मन में वो यादें बसी रहीं।
विक्रम ने वीडियो रखा धमकी दी कभी-कभी बुलाएंगे।
प्रिया डरती थी लेकिन एक हिस्सा उत्साहित भी।
यात्रा खत्म हुई लेकिन उत्तेजना की आग बुझी नहीं राजेश के साथ रातें अब पहले जैसी नहीं थीं प्रिया के मन में विक्रम और करण के लंड घूमते थे।
कभी-कभी वह अकेले में खुद को सहलाती सोचती उन धक्कों की। जीवन चलता रहा लेकिन वो साहसिक यात्रा प्रिया के लिए एक गुप्त संसार बन गई जहां दर्द और सुख की सीमा मिट गई थी।