समीर एक इंजीनियरिंग का छात्र था। उसकी जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन उसके दिल में हमेशा एक पुरानी याद बसी हुई थी। वह अंकिता को भूल नहीं पाया था। अंकिता उसकी पहली प्रेमिका थी।
दोनों का ब्रेकअप कई साल पहले हो गया था। लेकिन किस्मत ने फिर से उन्हें मिला दिया। यह कहानी उसी दिन की है जब वे अचानक मार्केट में मिले।
समीर मार्केट में घूम रहा था। अचानक उसकी नजर अंकिता पर पड़ी। वह वैसी ही खूबसूरत लग रही थी जैसी पहले। उसके बाल लंबे और काले थे।
चेहरा चमकदार और आंखें बड़ी-बड़ी। समीर का दिल धड़कने लगा। वह धीरे से उसके पास गया और बोला,
“अंकिता? तुम हो? इतने सालों बाद?”
अंकिता ने मुड़कर देखा। उसके चेहरे पर खुशी की लाली छा गई। वह मुस्कुराई और बोली,
“समीर! वाह, क्या संयोग है। हां, मैं हूं। तुम्हारी हालत कैसी है?”
दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया। बातों का सिलसिला शुरू हो गया। समीर ने बताया कि वह इंजीनियरिंग कर रहा है और सिंगल है। अंकिता ने कहा कि वह पास ही रहती है। दोनों ने फैसला किया कि कॉफी पीते हैं। वे पास के कैफे में गए।
कॉफी पीते हुए अंकिता ने अपनी जिंदगी के बारे में बताया। “समीर, मेरी शादी हो गई थी लेकिन वह टूट गई। छह साल पहले तलाक हो गया। मेरा पति मेरे साथ अच्छा नहीं था। रोमांस तो बिल्कुल नहीं। उसके बाद मां-बाप और ससुराल वाले भी गुजर गए। अब मैं अकेली हूं।”
समीर ने सहानुभूति से कहा,
“मुझे बहुत दुख हुआ सुनकर। लेकिन अब सब ठीक हो जाएगा। हम फिर से मिले हैं ना।”
बातें करते-करते शाम हो गई। समीर ने कहा,
“मैं तुम्हें घर छोड़ दूं?”
अंकिता ने हामी भरी। कार में जाते हुए दोनों पुरानी यादें ताजा करने लगे। अंकिता के घर पहुंचकर समीर बोला,
“कल मिलते हैं?”
“हां, जरूर।” अंकिता ने कहा।
अगले दिन समीर अंकिता के घर पहुंचा। अंकिता ने दरवाजा खोला। वह साड़ी में लग रही थी। कमरा साफ-सुथरा था। दोनों सोफे पर बैठे। चाय पीते हुए बातें शुरू हुईं।
“समीर, तुम्हारी जिंदगी कैसी चल रही है? कोई गर्लफ्रेंड?” अंकिता ने पूछा।
“नहीं, ब्रेकअप के बाद किसी से नहीं जुड़ा। तुम्हारी शादी में सब कैसा था?” समीर ने काउंटर किया।
अंकिता ने शर्माते हुए कहा,
“रोमांस कम ही था। सेक्स तो बस ड्यूटी की तरह। मैं तेरह साल से अकेली हूं। कोई टच तक नहीं।”
समीर का दिल तेज धड़का। वह बोला,
“मैं भी तेरह साल से किसी के साथ नहीं हूं। पुरानी यादें ताजा हो रही हैं।”
अचानक अंकिता ने समीर का हाथ पकड़ा। “समीर, क्या हम फिर से… मतलब…”
समीर ने समझ लिया। वह उठा और अंकिता को गले लगा लिया। उनके होंठ मिल गए। किसिंग शुरू हो गई। समीर के हाथ अंकिता की कमर पर फेरने लगे। अंकिता की सांसें तेज हो गईं।
“समीर, मुझे छू लो।” अंकिता ने फुसफुसाया।
समीर ने उसकी साड़ी खींची। ब्लाउज खोला। अंकिता के स्तन बाहर आ गए। वे गोल और मोटे थे। समीर ने उन्हें दबाया। निप्पल्स चूसने लगा। अंकिता कराहने लगी। “आह… समीर… अच्छा लग रहा है।”
समीर ने अंकिता को बेडरूम ले जाया। बेड पर लिटाया। पेटीकोट ऊपर किया। चूत पर हाथ फेरा। अंकिता की चूत गीली हो चुकी थी। समीर ने उंगली डाली। “तुम कितनी वेट हो।”
“हां, लंबे समय से। चाट लो ना।” अंकिता बोली।
समीर ने सिर नीचे किया। जीभ से चूत चाटने लगा। क्लिटोरिस को चूसा। अंकिता के पैर कांपने लगे। “ओह… समीर… बस…”
फिर समीर खड़ा हुआ। पैंट उतारी। उसका लंड बाहर आया। मोटा और लंबा। अंकिता ने देखा और बोली,
“वाह, कितना बड़ा है। मुठ मारूं?”
“हां, करो।” समीर ने कहा।
अंकिता ने लंड पकड़ा। ऊपर-नीचे करने लगी। समीर की सांसें तेज। फिर वह बोला,
“अब चूसो।”
अंकिता ने मुंह में लिया। चूसने लगी। जीभ घुमाई। समीर ने सिर पकड़ लिया। गले तक डाला। अंकिता खांसने लगी लेकिन जारी रखा।
कुछ मिनट बाद समीर ने अंकिता को लिटाया। लंड चूत पर रगड़ा। “डालूं?”
“हां, चोदो मुझे।” अंकिता चिल्लाई।
समीर ने धक्का दिया। लंड अंदर चला गया। चूत टाइट थी। समीर ने जोर-जोर से पेलना शुरू किया। अंकिता चीखने लगी। “आह… हां… तेज…”
वे घंटों चुदाई करते रहे। पोजिशन बदलते। डॉगी स्टाइल में समीर ने गांड पर थप्पड़ मारे। फिर चूत में ही तेज धक्के। आखिरकार समीर बोला,
“आ रहा हूं।”
“अंदर ही डाल दो।” अंकिता ने कहा।
समीर ने चूत में झड़ दिया। गर्म वीर्य भर दिया। दोनों पसीने से तर। लेटे रहे।
“कितना अच्छा था।” अंकिता बोली।
“हां, पुराने दिनों जैसा।” समीर ने कहा।
वे नहाने गए। साथ में स्नान किया। एक-दूसरे को साबुन लगाया। फिर कपड़े पहने। समीर बोला,
“कल फिर आऊंगा।”
“हां, इंतजार रहेगा।” अंकिता मुस्कुराई।
अगले दिन समीर सुबह ही पहुंचा। अंकिता ने दरवाजा खोला। वह नंगी थी। “आज पूरा दिन साथ।”
समीर ने दरवाजा बंद किया। सीधे किस करने लगा। अंकिता के स्तन दबाए। नीचे हाथ डाला। चूत फिर गीली। “तुम तैयार हो।”
“हां, रात भर सोई नहीं। सोचती रही” अंकिता बोली।
वे बेड पर गए। समीर ने अंकिता को उल्टा लिटाया। गांड ऊपर की “आज गांड मारूं?”
“हां, लेकिन धीरे।
समीर ने थूक लगाया। उंगली डाली। फिर लंड रगड़ा। धीरे से डाला। अंकिता दर्द से चीखी। “आह… धीरे…”
समीर ने धीरे-धीरे पेला। गांड टाइट थी। मजा आ रहा था। अंकिता अभ्यस्त हो गई।
समीर ने स्पीड बढ़ाई। गांड चोदने लगा। हाथ से चूत रगड़ता रहा। अंकिता झड़ गई। चूत से पानी निकला। समीर भी गांड में झाड़ने वाला था। “बाहर निकालूं?”
“नहीं, अंदर।” अंकिता बोली।
समीर ने गांड में भर दिया। फिर बाहर निकाला। वीर्य टपक रहा था। अंकिता ने मुड़कर लंड चाटा साफ किया।
फिर बेड पर सारी रात चुदाई। सुबह तक थक गए।
समीर ने सोचा, यह कहानी कभी खत्म नहीं होगी। वह अगली बार और डिटेल्स शेयर करेगा…………….