प्यार से दोस्त की गांड मारी

(Pyar Se Friend Ki Gand Mari)

मैं मानव हूँ। राजस्थान के एक छोटे से गाँव से आया हूँ। अभी बीएससी फाइनल ईयर का स्टूडेंट हूँ। गाँव में सब मुझे जानते हैं। मेरी जिंदगी में एक दोस्त है मुकेश। वो मेरी तरह ही बीएससी का स्टूडेंट है लेकिन उसकी बॉडी लड़की जैसी है।

गोरी चिट्टी स्किन, पतली कमर, छोटे छोटे स्तन जैसे चेस्ट। देखने में बिल्कुल लड़की लगता है। हम दोनों अच्छे दोस्त हैं। लेकिन मेरे मन में उसके लिए कुछ और ही ख्याल आते थे। खासकर उसकी गांड को देखकर।

वो गोल गोल मोटी गांड जो टाइट कुर्ते में हिलती है। मैं सोचता रहता कि एक दिन इसकी गांड मारूंगा।

एक रात मेरे मम्मी-पापा गाँव चले गए थे। घर पर मैं अकेला था। रात के करीब 10 बजे पापा का फोन आया। “मानव बेटा, अकेले मत सोना। डर लगेगा। किसी को बुला लो।” पापा बोले। मैंने सोचा मुकेश को ही बुला लूं।

उसके घर से मेरा घर ज्यादा दूर नहीं। मैंने फोन किया मुकेश को। “अरे मुकेश, आ जा यार। घर पर अकेला हूँ। पापा ने बोला किसी को बुला लूं। तू आ जा रात भर साथ सोएंगे।”

मुकेश ने कहा, “अरे ठीक है यार। लेकिन पापा को बोलना पड़ेगा।” मैं उसके घर पहुँचा। उसके पापा से बोला, “अंकल, मानव अकेला है। मुकेश को आज मेरे साथ भेज दीजिए।” पापा ने हामी भर दी।

मुकेश खुश होकर मेरे साथ आ गया। रात गर्म थी। हम मेरे कमरे में पहुँचे। एक ही बेड पर लेट गए। मैंने अपना कुर्ता पाजामा उतार दिया। सिर्फ अंडरवियर में रह गया। “यार गर्मी बहुत है। तू भी उतार दे।” मैंने कहा।

मुकेश हिचकिचाया। “नहीं यार। शरम आती है।” वो बोला। मैंने कहा, “अरे दोस्त हैं हम। कुछ नहीं होगा।” वो मान गया। अपना कुर्ता उतारा। चेस्ट दिखा। छोटे छोटे स्तन जैसे। नीचे पाजामा।

मैंने सोचा आज रात इसकी गांड चोदूंगा। मैंने नाटक किया। आधे घंटे बाद उठा। “यार मुकेश, गर्मी से नींद नहीं आ रही। कुछ देखें?” मुकेश बोला, “क्या देखें?”

मैंने फोन निकाला। “सेक्सी वीडियो देखें।” मुकेश शर्मा गया। “अरे क्या यार।” लेकिन मैंने जबरदस्ती ऑन कर दिया। एनल पोर्न लगा। एक मोटा लंड वाला आदमी गोरी लड़की की गांड मार रहा था।

लंड बहुत मोटा। मुकेश बोला, “वाह यार, कितना मोटा लंड है। गांड फट जाएगी।” मैंने कहा, “तू ट्राई करेगा कभी?” मुकेश हँसा। “पागल।”

मैंने कहा, “चल बाहर से रगड़ते हैं।” मुकेश बोला, “ठीक है लेकिन चादर से।” मैंने कहा, “नहीं गर्मी है। खिड़की पर मोटी चादर डाल देते हैं। लाइट कोई नहीं देखेगा।” मुकेश के घर के पास ही मेरा घर।

हमने खिड़की बंद की। लाइट ऑन की। दोनों नंगे हो गए। मुकेश की बॉडी देखी। गोरी चिट्टी। पतली। गांड गोल। लंड छोटा सा। मेरा लंड 8 इंच लंबा मोटा।

मुकेश बोला, “यार तेरा लंड बहुत बड़ा है। दर्द होगा। बाहर से ही रगड़ना। पहली बार है।”

मैंने उसे पकड़ा। पीछे से लंड गांड पर रगड़ा। फिर जोर से धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। मुकेश चिल्लाया, “आह्ह्ह! निकाल बाहर! दर्द हो रहा है! गांड फट गई!” खून निकलने लगा।

टाइट वर्जिन गांड। मैंने नहीं सुनी। पूरा लंड अंदर ठोक दिया। मुकेश रोने लगा। “प्लीज मानव! निकालो! मार डालोगे!” मैंने थप्पड़ मारा गांड पर। “चुप रह! मजा आएगा।” धीरे धीरे पेलने लगा।

मुकेश की चीखें कम हुईं। वो बोला, “अरे कुछ खुजली मिट रही है।” कमर हिलाने लगा। मैंने जोर जोर से चोदना शुरू किया। टाइट गांड ने मेरा लंड दबाया। 5 मिनट में झड़ गया। अंदर ही स्पर्म डाल दिया।

मुकेश बोला, “क्यों रुक गया? मजा आ रहा था।” मैंने कहा, “दूसरा राउंड करेंगे। अब गांड ढीली हो गई। दर्द नहीं होगा।” मुकेश हँसा। “ठीक है।”

मैंने लंड उसके मुँह में डाला। “चूस ले। पोर्न जैसा।” मुकेश ने चूसा। जीभ से चाटा। मैंने उसके स्तन दबाए। “तेरे मम्मे कितने सॉफ्ट।” मुकेश बोला, “हाहा। मजा आ रहा।” लंड सख्त हो गया।

मैंने उसे घोड़ी बनाया। पीछे से गांड में डाला। पूरा अंदर। मुकेश बोला, “आह्ह! और जोर से!” मैंने पेला। 30 मिनट चुदाई वो पीछे धक्का मारता। आखिर में निकाला मुकेश ने मुँह खोला। स्पर्म डाला। वो निगल गया। लंड चाटा।

सुबह दोनों खुश। मुकेश बोला, “बहुत मजा आया। अगली बार मैं शुरू करूंगा।”