मेरी बीवी सरिता की छोटी बहन भारती हमारे पास छुट्टियों में रहने आई थी।
एक ही कमरा, एक ही बिस्तर—तीनों एक साथ सोते थे। सरिता मुझे रोज मालिश करती थी, लेकिन उस रात कुछ और ही होने वाला था।
भारती की उम्र सिर्फ उन्नीस साल थी। उसकी गोरी त्वचा, कसी हुई जांघें और छोटी-छोटी गांठों वाली छाती ने मुझे दीवाना बना दिया था।
सरिता भी जानती थी कि मैं उसकी बहन को किस नजर से देखता हूं।
रात के दो बजे थे। बत्ती बंद थी। सरिता ने मेरे कान में फुसफुसाया, “आज भारती को चोदो… मेरे सामने।
मैं चौंक गया। सरिता ने मुस्कुराते हुए कहा, “उसकी पहली बार है। मैं देखूंगी।”
मैंने भारती को पीठ के बल लिटाया। उसने घबराकर पूछा, “जीजा जी… क्या कर रहे हो?” सरिता ने उसकी साड़ी ऊपर चढ़ाई और पैंटी उतार दी। भारती की कुंवारी चूत सामने थी—गुलाबी, बिना बालों वाली, सील बंद।
मैंने अपना मोटा लंड निकाला। सरिता ने खुद उसकी जांघें खोलीं। मैंने लंड की नोक भारती की चूत के मुंह पर रखी और धीरे-धीरे दबाया।
भारती चीख पड़ी, “उई माँ… दर्द हो रहा है!” सरिता ने उसका मुंह दबाया।
मैंने जोर से धक्का मारा। लंड का आधा हिस्सा अंदर घुस गया। भारती का शरीर कांप उठा। खून की बूंदें निकलकर बेडशीट पर फैल गईं।
सील टूट चुकी थी। मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर चला गया। भारती रो रही थी, “दीदी… बचाओ… मर गई मैं!”
सरिता ने बत्ती जलाई। खून से सनी चूत और मेरा लंड देखकर वह मुस्कुराई। “अब आराम से चोदो उसे,” उसने कहा।
मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। हर धक्के पर भारती की चीख निकलती, लेकिन सरिता ने उसे चूमकर चुप कराया।
थोड़ी देर बाद भारती की सांस तेज हो गई। दर्द कम होने लगा।
सरिता ने मेरा लंड बाहर निकाला और अपनी चूत में डाल लिया। “अब मुझे चोदो,” उसने कहा।
मैंने सरिता को जोर-जोर से चोदा जबकि भारती देखती रही। सरिता झड़ गई।
फिर मैंने भारती को फिर से चोदा। इस बार वह चीख नहीं रही थी। उसकी चूत गीली हो चुकी थी।
मैंने उसकी गांठों वाली छाती चूसी, उसके होंठ चूमे और जोर-जोर से चोदा। भारती भी सिसकारियां लेने लगी।
उस रात तीनों ने एक साथ चुदाई की। सरिता ने भारती की चूत चाटी, मैंने सरिता की गांड चोदी, और भारती ने मेरा लंड चूसा।
अगले दो महीने तक यही सिलसिला चला। हर रात तीनों एक साथ नंगी होकर चोदते थे।
भारती की चूत अब दर्द नहीं करती थी। वह खुद मांगती, “जीजा जी… आज पहले मुझे चोदो।”
सरिता भी मस्त रहती। वह भारती की चूत में उंगली डालकर देखती कि कितना गीला है। फिर कहती, “अब लंड डालो।”
भारती की गांड भी चोदी गई। पहले छोटे-छोटे दबाव, फिर पूरा लंड अंदर।
भारती चीखती, सरिता उसे चूमती, और मैं दोनों को बारी-बारी से चोदता।
कभी सरिता मेरे नीचे होती, कभी भारती। कभी दोनों एक साथ मेरे लंड को चूमतीं। कभी मैं एक को चोदता, दूसरी देखती।
दो महीने बाद भारती को जाना पड़ा। आखिरी रात तीनों ने पूरी रात चोदा।
सरिता ने कहा, “अब जब भी आएगी, सीधे बिस्तर पर आना।”
भारती मुस्कुराई, “दीदी… अब मैं रोज चुदना चाहती हूं।”
सरिता ने कहा, “जल्दी आना। हम दोनों इंतजार करेंगे।”
भारती चली गई। लेकिन यादें रह गईं—खून से सनी पहली रात, पहला लंड, पहली चुदाई, और दो महीने की बिना रुके चुदाई।
अब भी जब भारती आती है, तीनों एक बिस्तर पर सोते हैं।
और हर रात वही खेल दोहराया जाता है—बीवी के सामने साली को चोदना, साली की चूत में लंड डालना, और तीनों का एक साथ झड़ना।