नमस्ते दोस्तों, मैं हूं अंकित, आगरा का रहने वाला एक 25 साल का हैंडसम युवक। मैं पिछले एक साल से अहमदाबाद में अपनी मामी के साथ रह रहा हूं। यहां मैं एक लेडीज मसाज पार्लर में मसाज बॉय का काम करता हूं।
वहां मैं महिलाओं को फुल बॉडी मसाज देता हूं और कभी-कभी उनके घर जाकर सेक्स सर्विस भी प्रदान करता हूं। जिम जाने की वजह से मेरा शरीर मस्कुलर है, चौड़े कंधे, मजबूत छाती और पेट पर सिक्स पैक एब्स हैं। और सबसे खास बात, मेरा लंड घोड़े जैसा मोटा और लंबा है, जो महिलाओं को पागल कर देता है।
मैं अपनी इस सच्ची कहानी को सुनाने जा रहा हूं, जो बेहद हॉट और एक्साइटिंग है। अगर आप मेल रीडर हैं और आपके पास चूत की एक्सेस है, तो जाकर चोद लो। अगर नहीं है, तो मुठ मारो।
अगर आप फीमेल रीडर हैं और आपके पास लंड की एक्सेस है, तो जाकर चुदवा लो। अगर नहीं, तो उंगली डालकर मजा लो। ये कहानी पढ़ते हुए आपका लंड या चूत गीली हो जाएगी, यकीन मानो।
पहले वाली कहानी याद है ना? जहां मैंने रेहाना और मिंकी को डिफ्लावर किया था। वो दोनों वर्जिन थीं और मैंने उन्हें अपनी चूत फाड़कर चोदा था। उस दिन मैंने जानबूझकर अपने कमरे की खिड़कियां खुली छोड़ दी थीं।
हमारा घर और पड़ोस के बंगले के बीच सिर्फ 10 फुट की सड़क थी। मेरा कमरा सीधा उनके किचन की तरफ खुलता था। पड़ोस वाली भाभी और उनकी वर्जिन बहन दिशा दोनों ने सब कुछ साफ-साफ देख लिया था।
भाभी का नाम प्रीति है, लेकिन मैं उन्हें भाभी ही कहता हूं। उनकी बहन दिशा, नाम बदल दिया है, गोरी, खूबसूरत लड़की है, ग्रेजुएशन कर रही है। वो अपनी दीदी के पास रहती है। दिशा को चोदने का मन मुझे लंबे समय से था, लेकिन मौका नहीं मिला।
एक बार भाभी ने गलती से मेरे लंड पर गर्म चाय गिरा दी थी, जिससे वो जल गया था। उस वजह से मैं पार्लर के कस्टमर्स को सर्विस नहीं दे पाया। दिशा को मैं अपना टारगेट बना चुका था। फिर आया वो दिन, 21 फरवरी की सुबह।
रेहाना और मिंकी सेक्स के लिए आईं। घर में कोई मेल मेंबर नहीं था। भाभी का हसबैंड सुबह 7 बजे स्कूल और दुकान के लिए निकल गया था। मैंने फ्रंट विंडो खोल दी। सेशन शुरू हो गया।
दिशा किचन में चाय बनाने आई और सब कुछ देख लिया। रेहाना मेरे लंड पर सवार होकर उछल रही थी, मिंकी मेरी बॉल्स चूस रही थी। दिशा की आंखें फैल गईं, लेकिन वो चुपचाप देखती रही।
शाम को मैं जल्दी घर लौटा। मामी-मामा राजकोट में शादी में गए थे। मैं नंगा होकर कपड़े बदल रहा था, अंडरवियर तो पहनता ही नहीं। तभी भाभी के फोन से दिशा का कॉल आया। ‘हैलो अंकित भैया, वो… आपकी तरफ देखिए ना।
मैंने किचन की तरफ देखा, दिशा चाय बना रही थी। ‘क्या हुआ दिशा?’ मैंने तौलिए से लंड ढका। ‘आप नंगे क्यों हो?’ वो शरमाते हुए बोली। ‘कपड़े बदल रहा हूं ना।’ मैं हंसा। ‘भाभी कह रही हैं, डिनर कब खाओगे?’ ‘भूख लगी है, अभी आता हूं।’ वो बोली, ‘आ जाओ, खाना तैयार है।’
मैंने कपड़े पहने और चला गया। घर पर सिर्फ भाभी, उनका 6 साल का बेटा और दिशा थी। दिशा ने खाना सर्व किया। वो सोफे पर मेरे बगल में बैठी, लेकिन प्लेट की बजाय मेरी क्रॉच पर घूर रही थी।
जब मेरी रोटी खत्म हुई, हमारी नजरें मिलीं। उसकी नजरें मेरे लंड पर, मेरी उसकी आंखों पर। भाभी ने किचन से पुकारा, ‘दिशा, रोटी ला।’ दिशा रोटी लेकर आई और भाभी के पास बैठ गई। खाना खत्म होने पर दिशा ने प्लेटें साफ कीं और फिर मेरे बगल में बैठ गई।
भाभी बोलीं, ‘कल मैं राजकोट शादी में जा रही हूं। दिशा अकेली रहेगी, तो तुम ब्रेकफास्ट और डिनर समय पर खाना।’ मैंने हामी भरी। दिशा बोली, ‘दीदी, मैं प्रीति और दीक्षा को बुला लूं? साथ रहेंगी, पढ़ाई भी करेंगी।’ भाभी मान गईं।
दिशा ने उन्हें कॉल किया। मैं बाइक पर पार्लर चला गया। शाम को लौटा, फ्रेश हुआ। अभी पजामा नहीं पहना था कि भाभी का कॉल आया, ‘डिनर के लिए आ जाओ।’ मैंने कपड़े पहने और गया।
वहां दो कमाल की लड़कियां मिलीं – प्रीति और दीक्षा। दोनों स्टनिंग ब्यूटी, गोरी चिट, स्लिम फिगर, छोटे-छोटे ब्रेस्ट्स। मेरा लंड खड़ा हो गया, लेकिन कंट्रोल किया।
दिशा ने इंट्रोड्यूस कराया। सबने साथ खाना खाया, कैजुअल चैट की। घर लौटकर मेरा लंड हार्ड था। टीवी देखते हुए दो बार मुठ मारी, तीनों को सोचकर। फिर सो गया।
अगली सुबह 8 बजे भाभी, हसबैंड और बेटा ट्रेन से राजकोट चले गए। थोड़ी देर बाद दिशा का कॉल, ‘भैया, ब्रेकफास्ट तैयार है।’ मैं टॉयलेट में फ्रेश हुआ और चला गया। घर पर सिर्फ दिशा, दीक्षा और प्रीति।
मैंने पूछा, ‘भाभी चली गईं?’ दिशा ने कान में फुसफुसाया, ‘हां, आज पूरा दिन हमारा है। तुम्हारे साथ एंजॉय करेंगे।’
दिशा मुझे अपने रूम में ले गई। ‘भैया, मैं तुम्हारा लंड देखना चाहती हूं।’ उसने पजामे के ऊपर से पकड़ लिया। ‘देख लो।’ मैं हंसा। वो बोली, ‘प्रीति, दीक्षा, आओ!’ दोनों आईं। प्रीति ने मेरे हाथ पकड़े, दीक्षा ने पैर।
मुझे उठा लिया। दिशा ने पजामा नीचे खींचा। मेरा नंगा लोअर बॉडी एक्सपोज हो गया। वो मुझे छोड़ दिया। दिशा बोली, ‘कौन जानती है लंड चूसना?’ प्रीति ने मेरा लंड पकड़ा, फोरस्किन पीछे किया, हेड पर किस किया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
तब तक दिशा और दीक्षा नंगी हो गईं। दीक्षा ने मेरी बॉल्स चूसी। दिशा बोली, ‘तुम दोनों ने कुछ नहीं छोड़ा मेरे लिए।’ मैंने कहा, ‘प्रीति और दीक्षा पीठ के बल लेटो। मैं घुटनों पर बैठूंगा। प्रीति लंड चूसेगी, दीक्षा बॉल्स, और दिशा तुम्हारी चूतें चाटेगी।
सब खुश हो गईं। दिशा ने प्रीति और दीक्षा की चूतें बारी-बारी चाटीं। दोनों मोअन करने लगीं और जोर से चूसने लगीं। फिर स्विच किया – प्रीति बॉल्स चूसने लगी, दीक्षा लंड। दिशा चाटती रही। प्रीति फिर दीक्षा की चूत से जूस स्क्वर्ट हो गया दिशा के मुंह में।
दिशा ने लंड और बॉल्स चूसना शुरू किया। प्रीति ने दिशा के ब्रेस्ट्स दबाए और चूसे। दीक्षा ने दिशा की चूत में उंगली डाली और क्लिट चाटा। दिशा मोअन करने लगी। जैसे ही दीक्षा की जीभ दिशा के क्लिट पर लगी, दिशा ने मेरा फोरस्किन पीछे किया और लंड चाटा। 10 मिनट बाद मैं जोर से झड़ गया उसके मुंह में।
उसने सब निगल लिया, हर बूंद चूसी जब तक लंड फिर से गरम लोहे की तरह सख्त न हो गया। हेड बड़ा लाल मशरूम जैसा फूल गया।
प्रीति बोली, ‘भैया, मुझे चोदो ना, बर्दाश्त नहीं हो रहा।’ तीनों की चूतें वर्जिन थीं, मैंने धीरे-धीरे शुरू किया। दीक्षा से कहा, ‘प्रीति के होंठ चूसो।’ दिशा से, ‘उसके ब्रेस्ट्स चूसो और दबाओ।’ दोनों ने किया। मैंने अपना लंड प्रीति की चूत पर रगड़ा। वो मोअन करने लगी। ‘आह… भैया…’
मैंने लंड उसके होल पर रखा और जोर से धक्का मारा। 4 इंच अंदर चला गया। प्रीति दर्द से कराह उठी, लेकिन दीक्षा के होंठों से मुंह बंद था। मैं रुका, फिर धीरे-धीरे धक्के मारे। दर्द सुख में बदल गया।
दिशा के ब्रेस्ट्स प्ले से प्रीति ने हिप्स ऊपर किए, ज्यादा लंड लेने को। मैंने पूरा बाहर निकाला और दोगुनी ताकत से धक्का मारा, 7 इंच अंदर। उसकी आंखें फटने को हुईं दर्द से। मैं रुका, 7 इंच पर धीरे धक्के मारे जब तक सुख न बढ़ जाए।
फिर दो जोरदार धक्के, पूरा लंड हिल्ट तक घुस गया। 2 मिनट रुका, एक ब्रेस्ट दबाया, दूसरा चूसा। प्रीति उछलने लगी, ‘फास्ट… भैया… चोदो तेज।’ मैंने स्पीड बढ़ाई, विभिन्न पोजिशन्स में चोदा – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल।
लंबे समय तक चुदाई चली। क्लाइमैक्स के पास मैंने पूछा, ‘कहां झड़ूं?’ प्रीति बोली, ‘अंदर ही, कोई रिस्क नहीं।’ 3 मिनट और धक्के मारे, गहराई में झड़ गया। उसके ऊपर गिर पड़ा। दोनों हांफ रहे थे। वो मुझे किस करने लगी, टाइट हग किया।
लंड बाहर निकाला, खून, पीरियड ब्लड और सीमेन से सना। प्रीति बोली, ‘तुमने मेरी चूत फाड़ दी।’ दीक्षा बोली, ‘लंड चूत फाड़कर ही घुसता है।’ प्रीति को पेशाब आया लेकिन उठ नहीं पाई। मैंने उसे बाथरूम ले जाकर चूत पानी से फिंगर से साफ की, अपना लंड धोया।
आधे घंटे रेस्ट के बाद दीक्षा को चोदा, वैसे ही। दीक्षा की चूत टाइट थी, वो चिल्लाई, ‘आह… दर्द हो रहा है… लेकिन मजा भी आ रहा।’ मैंने धीरे-धीरे एंटर किया, पहले 3 इंच, फिर 5, फिर पूरा। वो मोअन करने लगी, ‘हां… चोदो… तेज… मेरी चूत तुम्हारी है।’ विभिन्न पोजिशन्स में घंटा भर चोदा। आखिर में अंदर झड़ गया। वो मुझे चूमने लगी, ‘भैया, तुम कमाल हो।’
फिर दिशा की बारी। दिशा सबसे एक्साइटेड थी। ‘भैया, अब मेरी चूत फाड़ो।’ मैंने प्रीति से कहा, ‘दिशा के होंठ चूसो।’ दीक्षा से, ‘ब्रेस्ट्स हैंडल करो।’ लंड दिशा की चूत पर रगड़ा। वो बोली, ‘डालो ना… इंतजार मत करो।
पहला धक्का, 4 इंच। दर्द से आंसू आ गए। धीरे-धीरे बढ़ाया। सुख आने पर वो बोली, ‘और गहरा… चोदो मुझे।’ पूरा लंड अंदर, फिर तेज चुदाई। दिशा चिल्लाई, ‘हां… अंकित… तुम्हारा लंड मेरी चूत को भर रहा है।’ क्लाइमैक्स पर अंदर झाड़ा।
सब थक गए, अब बताओ दोस्तों, कैसी लगी ये कहानी? कमेंट्स में बताओ।