मेरा नाम नेहा है और मैं अभी 18 साल की हूँ। मेरे गोरे-गोरे बदन, लंबे काले बाल और 34-26-36 का फिगर है। मैं अपने मोहल्ले की सबसे हॉट लड़की हूँ और ये बात मुझे अच्छी तरह पता है।
मेरे घर के सामने ही ऑटो स्टैंड है और वहीं से मैं रोज स्कूल जाती थी। एक ऑटो वाला था विनोद, जो 21 साल का था, पहले वह मुझे हर दिन स्कूल छोड़ने और लाने आता था।
पहले तो बस आंखें मिलाना हुआ, फिर बातें करना शुरू हुआ। विनोद का शरीर मजबूत था, गोरा रंग था और बातें बड़ी मीठी करता था। धीरे-धीरे हमारी मुलाकातों में चुंबन और शरीर को सहलाना शामिल हो गया।
” नेहा, तुम तो बहुत खूबसूरत हो, मैं तुम्हें देखते ही रह जाता हूं” विनोद एक दिन बोला जब हम खाली पार्क में बैठे थे
मैंने शरमाते हुए कहा “अरे ऐसा क्या है मुझमें, तुम तो बस मुझे चिढ़ा रहे हो”
“नहीं नेहा, सच कह रहा हूं, तुम्हारी आंखें, तुम्हारे होंठ, तुम्हारा ये बदन… मैं पागल हो रहा हूं तुम्हारे लिए” विनोद ने मेरा हाथ पकड़ लिया
मुझे पहली बार किसी लड़के का हाथ छू रहा था तो मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने झटके से अपना हाथ छुड़ा लिया लेकिन मन ही मन अच्छा लग रहा था।
एक दिन मैंने स्कूल से भागने का प्लान बनाया। मैंने विनोद से कहा “आज मुझे स्कूल नहीं जाना, तुम मुझे कहीं ले चलो”
विनोद ने आश्चर्य से पूछा “लेकिन कहां नेहा, तुम्हारे घर वालों को पता चल गया तो?”
मैंने हंसते हुए कहा “कोई बात नहीं, मैंने मम्मी को बता दिया है कि आज टीचर्स मीटिंग है, स्कूल जल्दी छूट जाएगा”
विनोद मुझे एक सुनसान जगह पर ले गया जहां कोई नहीं था। वहां एक पुरानी बिल्डिंग थी जिसमें हम चले गए। अन्दर अंधेरा था और हम दोनों अकेले थे।
” नेहा, तुम सच में बहुत हॉट लग रही हो आज” विनोद ने मेरे पास आकर कहा
मैंने घबराते हुए कहा “विनोद, मैं डर रही हूं”
“डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा” कहते हुए विनोद ने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और धीरे से मेरे होंठों को चूमा
वो चुंबन बहुत गर्म था। उसकी जीभ ने मेरे होंठों को चीरा और मेरी जीभ से लड़ने लगी। मैं पहली बार इतना इंटेंस किस कर रही थी। उसके हाथ मेरी पीठ पर घूमने लगे और फिर मेरे स्तनों पर आ गए।
“नहीं विनोद, प्लीज” मैंने कमजोर आवाज में कहा
“थोड़ा और नेहा, बहुत अच्छा लगता है ना” विनोद फुसफुसाया और उसने मेरी स्कर्ट ऊपर कर दी
विनोद ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए और मैं विरोध नहीं कर पाई। उसने मेरी ब्रा खोल दी और मेरे स्तन उसके हाथों में आ गए। उसने मेरे निपल्स को चूसना शुरू किया और मेरी चूत में उंगली डाल दी।
“आह विनोद, दर्द हो रहा है” मैं चिल्लाई
“थोड़ी देर में मजा आएगा नेहा, बस थोड़ा सब्र करो” उसने कहा और फिर अपने कपड़े उतार दिए
विनोद का लंबा और मोटा लंड देखकर मैं डर गई। उसने मेरी टांगें खोलीं और अपना लंड मेरी चूत के पास ले गया।
“नहीं विनोद, ये तो बहुत बड़ा है, ये अंदर नहीं जाएगा” मैंने डरते हुए कहा
“जाएगा नेहा, बस थोड़ी देर दर्द होगा फिर पूरा मजा आएगा” विनोद ने कहा और धीरे-धीरे अपना लंड अंदर डालने लगा
“आह… आह… क्या दर्द है” मैं चीखी
“चुप रहो नेहा, कोई सुन लेगा, बस थोड़ा और” विनोद ने मेरा मुंह दबा दिया और एक झटके में पूरा लंड अंदर कर दिया
मेरी आंखों से आंसू निकल आए। ये दर्द मैंने कभी महसूस नहीं किया था। लेकिन धीरे-धीरे विनोद ने मूव करना शुरू किया और दर्द कम होने लगा।
“कैसा लग रहा है मेरी जान” विनोद ने मेरे कान में फुसफुसाया
“थोड़ा अच्छा लग रहा है अब” मैंने कहा और उसकी गर्दन पकड़ ली
विनोद ने तेजी से मूव करना शुरू किया और मैं पागल हो गई। पहली बार में ही मुझे चुदाई का मजा आ गया। उसने मेरे साथ कई पोजीशन में चुदाई की और आखिर में मेरी चूत के बाहर अपना माल गिरा दिया।
उस पहली बार के बाद से मैं सेक्स की आदी हो गई थी। मैं रोज विनोद के लंड के बारे में सोचती और अपनी चूत को हाथ लगाकर मस्टरबेट करती। मैं चाहती थी कि एक बार फिर से विनोद मुझे चोदे, लेकिन घर में मौका नहीं मिलता था।
एक दिन मैंने फैसला किया कि मैं विनोद को रात को अपने घर बुलाऊंगी। मेरे मम्मी-पापा गहरी नींद में सो जाते हैं तो कोई पकड़ में नहीं आएगा। मैंने विनोद को फोन किया।
“सुन विनोद, आज रात तुम मेरे घर आ जाओ, लेकिन छत के रास्ते आना, सामने का दरवाजा खोलूंगी तो आवाज होगी” मैंने कहा
“पक्का नेहा, तैयार रखना अपनी चूत, मैं आज पूरी रात तुझे चोदूंगा” विनोद ने उत्तेजित होकर कहा
“चुप रहो पागल, कोई सुन लेगा” मैंने कहा और फोन काट दिया
रात को 12 बजे के बाद जब सब सो गए, तो मैंने विनोद को मैसेज किया। आधे घंटे बाद मैंने छत पर आवाज सुनी। विनोद आ गया था।
मैंने छत का दरवाजा खोला और विनोद को अन्दर ले आई। वह मुझे देखकर मुस्कुराया और मुझे कसकर गले लगा लिया।
“आज तो बहुत हॉट लग रही हो नेहा, नीली नाइटी में तो जान निकल जाए” विनोद ने मेरे कान में फुसफुसाया
“चुप रहो विनोद, आवाज मत करो, मेरे कमरे में चलो” मैंने उसे अपने कमरे में ले जाया
कमरे का दरवाजा बंद करते ही विनोद ने मुझे दीवार से लगा लिया और मेरे होंठों को चूमने लगा। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई और मेरी जीभ को चूसने लगी।
“मम्मी… विनोद… इतनी जल्दी क्या है” मैंने बीच में सांस लेते हुए कहा
“तुम्हारी याद आ रही थी नेहा, कल से तुम्हारे बिना पागल हो रहा हूं” विनोद ने कहा और मेरी नाइटी के ऊपर से मेरे स्तनों को दबाने लगा
मैंने विनोद का शर्ट उतार दिया और उसके मजबूत चेस्ट को देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया। उसके चेस्ट पर बाल थे और पसीने से चमक रहे थे। मैंने उसके निपल्स को चूसना शुरू किया और उसकी बेल्ट खोल दी।
“पागल लड़की, इतनी भूखी है क्या” विनोद ने हंसते हुए कहा
“हां, तुम्हारे लंड की भूखी हूं विनोद, बहुत दिन हो गए” मैंने कहा और उसकी पैंट नीचे कर दी
विनोद का लंड बाहर निकला, चूमने लगी और फिर मुंह में ले लिया। मैंने उसके लंड को मुंह में डाला और चूसना शुरू किया।
“आह नेहा, बहुत अच्छा लग रहा है, और गहरा लो” विनोद ने मेरा सिर दबाते हुए कहा
विनोद ने मेरा मुंह पकड़ लिया और अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा। मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और मेरे मुंह से पानी निकल रहा था।
“अब बहुत हुआ, अब तो चोदूंगा तुझे” विनोद ने कहा और मुझे पलंग पर पटक दिया
उसने मेरी नाइटी ऊपर कर दी और मेरी चूत देखी। मेरी चूत पहले से ही गीली हो रही थी उसके ब्लोजॉब से।
“देखो कितनी गीली हो गई है तेरी चूत” विनोद ने अपनी उंगली मेरी चूत में डाली
“आह… मम्मी… बहुत अच्छा लग रहा है” मैं पलंग पर लेट गई और अपनी टांगें खोल दीं
विनोद ने मेरे दूध के रंग के शरीर को देखा और मेरे स्तनों को चूसने लगा। उसने पहले बाएं स्तन के निप्पल को चूसा, फिर दाएं को, काटा और चाटा। मैं पागल हो रही थी।
“बहुत हो गया अब, लंड डालो अपनी चूत में” मैंने विनोद से कहा
“इतनी जल्दी क्या है रात भर चोदूंगा तुझे” विनोद ने कहा और उसने अपनी उंगली डालकर मेरी चूत को और गीला किया
फिर उसने अपना लंड मेरी चूत के पास लगाया और धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया। मैं अपने फेफड़ों में गहरी सांस ले रही थी।
“आह… आह… कितना बड़ा है तेरा लंड” मैंने कहा
“चुप रह और मजा ले” विनोद ने कहा और एक बार में पूरा लंड अंदर कर दिया
“आह… मम्मी… क्या कर रहे हो” मैं चिल्लाई लेकिन विनोद ने मेरा मुंह अपने हाथ से दबा दिया
“चुप रह नेहा, पूरा घर जगा देगी क्या” विनोद ने कहा और धीरे-धीरे हिलना शुरू किया
पहले उसने धीमी गति से लंड डाला और निकाला, फिर स्पीड बढ़ा दी। मेरी चूत में उसका लंड दो-दो इंच अन्दर जा रहा था और निकल रहा था।
“तेरे पैरों को कंधे पर ले लूं क्या” विनोद ने पूछा
“हां, जो करना है करो लेकिन चोदते रहो” मैंने कहा
विनोद ने मेरी टांगें अपने कंधों पर ले लीं और गहराई से चोदना शुरू किया। उसका लंड मेरी कोख तक जा रहा था और मैं पागल हो रही थी।
“आह… आह… मैं तो… निकल रही हूं” मैं चिल्लाई
“हां निकल मेरी रांड, निकल” विनोद ने और तेजी से चोदा और मैं चूत से पानी निकल गई
10 मिनट तक चोदने के बाद विनोद ने अपना लंड निकाल लिया क्योंकि वह खत्म होने वाला था। लेकिन उसने खुद को रोक लिया और फिर से शुरू किया।
“अभी तो मैंने खत्म नहीं होना, अभी तो पूरी रात है” विनोद ने कहा और फिर मेरी टांगें खोलकर फिर से प्रवेश किया
इस बार मैं और कमजोर हो गई थी लेकिन फिर भी उसकी चुदाई का मजा ले रही थी। विनोद ने मेरे साथ मिशनरी पोजीशन में चोदा और मैंने फिर से चूत से पानी छोड़ा।
“रुको विनोद, बहुत हो गया, थक गई हूं” मैंने कहा
“थक गई है तो क्या हुआ, मैं तो चोदूंगा ही, तू तो मेरी रांड है” विनोद ने गुस्से में कहा और और जोर से चोदने लगा
“प्लीज विनोद, सुबह फिर से कर लेना, अब नहीं” मैंने हाथ जोड़े
लेकिन विनोद ने मेरी एक न सुनी और बिना रुके मेरी चूत को चोदता रहा। आखिर में उसने अपना लंड निकाला और मेरी चूत के ऊपर अपना माल गिरा दिया।
“देखो कितना माल निकला है तेरी वजह से” विनोद ने कहा
“बहुत हुआ, अब तुम जाओ, मैं सो जाऊंगी” मैंने कहा
चार बजे मैंने विनोद को जगाया और कहा “उठो विनोद, अब तुम जाओ, कोई देख लेगा”
“थोड़ी देर और सो लेने दे” विनोद ने कहा और करवट बदल ली
“नहीं विनोद, प्लीज उठ जाओ, मेरी मम्मी पकड़ लेंगी” मैंने उसे हिलाया
लेकिन जैसे ही विनोद उठा, उसका लंड फिर से खड़ा हो गया। मैंने देखा तो मेरा भी मन किया।
“देखो तो नेहा, तुम्हारी वजह से फिर से खड़ा हो गया है” विनोद ने अपना लंड दिखाते हुए कहा
“नहीं विनोद, अब नहीं, बहुत हो गया” मैंने कहा
विनोद गुस्से में आ गया और बोला “तूने बुलाया है मुझे और अब नहीं करेगी, मैं तो चोदूंगा ही”
उसने मुझे पकड़कर मेरे कपड़े उतार दिए और मेरे स्तनों को चूसने लगा। मैंने विरोध किया लेकिन वह ज्यादा ताकतवर था।
“फिर से मुंह में लो मेरा लंड” विनोद ने कहा
“नहीं विनोद, मेरा मुंह दुख रहा है” मैंने कहा
“मैंने कहा मुंह में लो” विनोद ने जोर से कहा और मेरा सिर पकड़कर अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया
मैंने उसका लंड मुंह में लिया और चूसने लगी। लेकिन विनोद ने मेरा मुंह पकड़ा और खुद हिलने लगा। उसका लंड मेरे गले तक जा रहा था और मुझे उल्टी सी आ रही थी।
“अच्छा लग रहा है तुझे मेरा लंड” विनोद ने पूछा
“हम… हम… (मुंह में लंड होने की वजह से आवाज नहीं निकल रही थी)” मैंने सिर हिलाकर हां कहा
जब उसका लंड सख्त हो गया तो विनोद ने मुझे डॉगी स्टाइल में कर दिया। मैं चारों पैरों पर थी और उसने मेरी चूत देखी।
“कितनी प्यारी चूत है तेरी, देखो कैसे खुल रही है मेरे सामने” विनोद ने कहा और मेरी चूत में थूक लगाया
“आह, विनोद, चोदो मुझे” मैंने कहा
विनोद ने लंबा और मोटा लंड मेरी चूत में डाला और गहराई से चोदना शुरू किया। मैं पलंग पकड़े हुए थी और उसकी हर थ्रस्ट पर कांप रही थी।
“जोर से विनोद, और जोर से” मैं चिल्लाई
“चुप रह साली, पूरा घर जगा देगी” विनोद ने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और तेजी से लंड अन्दर-बाहर करने लगा
“मम्मी… आह… मम्मी… बहुत अच्छा लग रहा है” मैंने दबी आवाज में कहा
“हां, यही तो चाहिए था तुझे, अपने ऑटो वाले का लंड चाहिए था ना” विनोद ने मेरे कान में फुसफुसाया
“हां विनोद, मुझे तुम्हारा लंड चाहिए, रोज चाहिए” मैंने कहा और पीछे धक्का देकर उसका लंड गहराई तक लेने लगी
विनोद ने मेरी पीठ पर थप्पड़ मारा और जोर-जोर से चोदता रहा। उसने मेरे बाल खींचे मुझसे कहा, “कितनी अच्छी रांड है तू नेहा, तेरी चूत कितनी मजेदार है”
“आह… आह… मम्मी… आह… निकल रही हूं” मैं फिर से चूत से पानी छोड़ने लगी
“हां निकल, निकल, मैं भी निकलने वाला हूं” विनोद ने कहा और तेजी से लंड अन्दर-बाहर करने लगा
“अन्दर मत निकालना विनोद, बाहर निकालना” मैंने कहा
लेकिन विनोद ने मेरी भी सुनी और न सुनी, उसने मेरी चूत से लंड निकाला और मेरे बट पर अपना गर्म माल गिरा दिया।
“ओह… कितना माल है” मैंने कहा
“तुम्हारी वजह से नेहा” विनोद ने कहा और मेरे बट को सहलाया
हम दोनों थक गए थे और पलंग पर लेट गए। मैंने विनोद से कहा “तुम रोज रात को आ सकते हो, जब सब सो जाएं तो आ जाना”
“सच में नेहा? रोज आ सकता हूं?” विनोद ने खुश होकर पूछा
“हां विनोद, मुझे तुम्हारी चुदाई बहुत अच्छी लगती है” मैंने कहा और उसके गले लग गई
“तो फिर मैं कल से आने लगूंगा, रोज रात को चोदूंगा तुझे” विनोद ने मेरे माथे पर किस किया
उस रात के बाद विनोद रोज रात को मेरे घर आने लगा। जब मेरे मम्मी-पापा सो जाते तो विनोद छत के रास्ते आता और हम पूरी रात चुदाई करते। कभी हम मिशनरी में चोदते, कभी डॉगी में, कभी मैं ऊपर होती और कभी वो। हर रात नए-नए पोजीशन में हम चुदाई करते।
विनोद ने मुझे चोदना सिखाया, ब्लोजॉब करना सिखाया, मेरी चूत को कैसे कंट्रोल करना है सिखाया। मैं उसकी चुदाई की आदी हो गई थी और बिना उसकी चुदाई के मेरी रात अधूरी थी।
दो साल तक हमने रोजाना सेक्स किया। कोई दिन ऐसा नहीं गया जब विनोद ना आया हो। हमारा प्यार और हमारी चुदाई दोनों बढ़ते गए।
आज भी जब मैं सोचती हूं कि उस रात मैंने कितनी मजेदार चुदाई की थी तो मेरी चूत गीली हो जाती है। उस पहली रात की चुदाई ने मुझे इतना addict कर दिया कि मैं दो साल तक रोज विनोद के साथ चुदाई करती रही।
उम्मीद करती हूं कि आपको मेरी ये देसी स्टोरी अच्छी लगी होगी। अपने कमेंट में बताइए कि आपको कैसी लगी मेरी कहानी।