डिनर के बाद सेक्सी भाभी की चुदाई

(Dinner Ke Baad Sexy Bhabhi Ki Chudai)

मेरी दुकान पर एक बहुत ही खूबसूरत महिला आती थी। उसका नाम पारी भाभी था। वह मारवाड़ी परिवार से थीं, गोरे रंग की, लगभग 5 फुट 3 इंच की ऊंचाई, घने काले लंबे बाल और बहुत ही भरी हुई जवान देह।

उनके पति नेवी में थे और साल में सिर्फ दो बार ही आते थे। पारी भाभी अक्सर अपने पति के बारे में शिकायत करती थीं कि वे बहुत बेरूखे से पेश आते हैं और उनमें रोमांस का बिल्कुल अभाव है।

करीब आठ महीने तक वह नियमित रूप से दुकान पर आती रहीं। फिर एक दिन उनकी सास का देहांत हो गया। अब वह पूरी तरह से घर पर अकेली रह गईं और बोर होने लगीं। मैंने उन्हें सुझाव दिया, “भाभी, आप रोज अपने काम निपटाकर मेरी दुकान पर आ जाया करें। हम दोनों का समय अच्छा बीतेगा।”

उन्होंने तुरंत हामी भर दी और उसी शनिवार से नियमित आना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे हमारी नजदीकियां बढ़ती गईं। एक दिन वह टाइट सफेद कुर्ता और सफेद लेगिंग पहनकर आईं।

उनके पैर देखकर मैं मंत्रमुग्ध हो गया। मैं उनकी पतली कमर और उभरी हुई छाती को निहारता रह गया।

दिवाली के समय मेरा पूरा परिवार 15 दिनों के लिए बाहर गया हुआ था। मैंने पारी भाभी को प्रस्ताव दिया, “भाभी, रोजाना होटल से खाना मंगवा लेते हैं। साथ में डिनर करेंगे।” वह मान गईं।

दो दिन बाद मैंने उनसे कहा, “भाभी, आज रात आप लाल रंग की साड़ी पहनिए। बहुत सुंदर लगेंगी। मैं डिनर के बाद आपको छोड़ दूंगा।”

उन्होंने मीठी मुस्कान दी और सिर हिलाया।

शाम को मैं होटल से ढेर सारा खाना पैक करवाया, गुलाब जामुन भी लिया, और उनके घर पहुंचा। दरवाजा खटखटाया। अंदर से आवाज आई, “आओ, आओ।”

दरवाजा खुलते ही मेरी सांसें थम गईं। पारी भाभी लाल रंग की चिफॉन साड़ी में इतनी खूबसूरत लग रही थीं मानो कोई अप्सरा हो। उन्होंने आगे बढ़कर मेरा हाथ पकड़ा और कहा, “अंदर आओ, प्लेट लगा रही हूं।”

मैंने कहा, “भाभी, मैं तो बस खाना देकर जाऊंगा।”

लेकिन वह बोलीं, “नहीं, आज तो तुम्हें रुकना ही होगा। बहुत दिनों से हमने साथ खाना नहीं खाया।”

मैं समझ गया कि मेरी चाहत का उनमें भी उतना ही जलवा है।

हमने साथ बैठकर खाना खाया। उन्होंने बहुत प्यार से मेरी प्लेट में गुलाब जामुन डाल दिए और कहा, “पहले मिठाई खाओ, फिर डिनर।”

खाने के बाद हम ड्राइंग रूम में बैठ गए। टीवी चल रहा था, लेकिन हमारा ध्यान एक-दूसरे पर था। बातचीत का रुख सेक्स की तरफ मुड़ गया।

पारी भाभी ने कहा, “मेरे पति तो बहुत जंगली हैं। उन्हें सिर्फ अपनी मर्जी से चाहिए। वे कभी मुझे किस नहीं करते। मैं तो रोमांस चाहती हूं, प्यार चाहती हूं।”

मैंने उनके पास सरक कर कहा, “भाभी, तो फिर आइए मैं आपको दिखाऊं असली रोमांस कैसे होता है।”

फिर मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और एक गहरा चुंबन दिया। पारी भाभी ने उस चुंबन को ऐसे लिया जैसे भूखी शेरनी हो। उनकी जीभ मेरी जीभ से लड़ने लगी। उन्होंने मेरे बालों में उंगलियां फिराईं और मुझे अपनी तरफ खींच लिया।

मैंने उन्हें उठाकर बेडरूम में ले गया। वहां बिस्तर पर लिटाकर मैंने उनकी साड़ी का पल्लू हटाया। उनके स्तन कसे हुए और लाल ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब थे। मैंने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। पारी भाभी की सांस तेज हो गई थी। उनकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।

ब्लाउज खुलते ही पता चला कि उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी। उनके स्तन सीधे मुलायम और कसे हुए थे। उनके निप्पल गुलाबी रंग के और सख्त खड़े थे। मैंने अपना मुंह उन पर रख दिया और जोर-जोर से चूसने लगा।

पारी भाभी ने कराहते हुए कहा, “हां… ऐसे… और चूसो मेरे दूध को… बहुत मजा आ रहा है।”

मैंने पूछा, “भाभी, कितनी देर से इनका इंतजार था?”

उन्होंने कहा, “सालों से मेरा कोई अच्छी तरह से प्यार नहीं करता। तुम आज मुझे वो सब दो जो मैंने कभी पाया नहीं।”

मैंने उनके एक स्तन को अपने मुंह में ले लिया और दूसरे को अपने हाथ से दबाने लगा। पारी भाभी के निप्पल बहुत संवेदनशील थे। जैसे ही मैंने दबाया, वह कराह उठीं।

“भाभी, मैं तुम्हें कभी निराश नहीं करूंगा। अब तुम मेरी हो,” मैंने धीरे से उनके कान में कहा।

उन्होंने मेरी गर्दन पकड़ कर मुझे खींचा और बोलीं, “हां, मैं सिर्फ तुम्हारी हूं। आज से हमेशा के लिए।”

मैंने उनके निप्पल को मुंह में लेकर दांतों से हल्के से दबाया और जीभ से गोल-गोल घुमाया। पारी भाभी ने न जाने कितनी बार कराह कर अपने बालों को सहलाया।

उन्होंने कहा, “धीरे से… बहुत ज्यादा मत दबाना, निप्पल बहुत नाजुक हैं।”

मैंने धीरे कर दिया और उनके माथे पर एक चुंबन दिया।

फिर पारी भाभी ने खुद ही अपनी साड़ी और पेटीकोट उतार दिए। अब वह सिर्फ काले रंग की पैंटी में थीं। मैंने उनके हाथ को रोका और कहा, “रुको भाभी, पैंटी उतारने का हक मेरा है।”

फिर मैंने खुद अपने कपड़े उतारे। मैं सिर्फ अंडरवियर में रह गया। मैं उनके पैरों के पास आ गया और उनके पेट को चूमने लगा। फिर नाभि के पास जीभ घुमाई।

पारी भाभी ने अपना पेट ऊपर-नीचे किया और कहा, “ओह… बहुत अच्छा लग रहा है। तुम सच में जानते हो कैसे प्यार करना है।”

मैंने उनके पेट से नीचे जाकर पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को चूमा। वहां वह बिल्कुल गीली हो चुकी थी। मैंने उनकी जांघों को चूमा और पैंटी को अपने दांतों से पकड़ कर धीरे-धीरे नीचे उतार दिया। पारी भाभी की चूत सामने आ गई। वह पूरी तरह से गीली थी, उससे रस टपक रहा था।

पारी भाभी ने कहा, “अब और मत तड़पाओ मुझे। बहुत ठंड लग रही है। जल्दी कुछ करो।”

मैंने उनके पैर फैलाए और उनकी चूत पर झुक गया। पहले मैंने उसकी बाहरी सिलवटों को जीभ से चाटा। फिर वहां के छोटे से छेद को जीभ से थपथपाया। पारी भाभी ने अपनी उंगलियां मेरे बालों में फंसा दीं और मेरा सिर नीचे दबाया।

“हां… वहां… बस वहीं… जीभ अंदर डालो,” वह बिलखने लगीं।

मैंने अपनी जीभ पूरी तरह से उनकी चूत के अंदर डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा। पारी भाभी की कमर ऊपर-नीचे होने लगी। उनकी चूत से निकलता रस मेरे मुंह में आ गया। मैंने ऐसे चूसा जैसे कोई प्यासा पानी पीता है।

कुछ ही देर में पारी भाभी ने अपनी पहली ऑर्गेज्म ले ली। उनका शरीर कांप गया और वह जोर से चीख पड़ीं, “हाय… मैं तो पिघल गई… रुको… रुको… बहुत हो गया। अब तुम अपना लंड निकालो।”

मैंने अपना अंडरवियर उतारा। मेरा सात इंच का लंड कड़ा हो चुका था। पारी भाभी ने उसे देखा तो उनकी आंखें चमक उठीं।

उन्होंने कहा, “वाह… कितना प्यारा सुग्गा है। लाल सिर वाला। मेरे पति का तो काला सांप जैसा है। लेकिन तुम्हारा तो बहुत ही सुंदर है।”

फिर उन्होंने मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगीं। उनकी जीभ की कारीगरी ने मुझे पागल कर दिया। वह जल्दी-जल्दी मुंह में लेतीं और फिर छोड़ देतीं, फिर उसे गाल के अंदर दबाकर दबातीं।

मैंने उनसे कहा, “भाभी, अब बहुत हुआ। चलो मैं तुम्हें चोदता हूं।”

उन्होंने तुरंत अपने पैर मेरे कंधों पर रख दिए। मैंने उनकी चूत के छेद पर अपने लंड का सिर रखा और धीरे-धीरे अंदर सरकाने लगा। पारी भाभी ने आंखें बंद कर लीं और अपने निचले होंठ को दांतों से दबा लिया।

जैसे ही मेरा लंड पूरी तरह से अंदर गया, उनकी चूत के अंदर की दीवारों ने मेरे लंड को जोर से दबाया। वह बहुत गर्म और नम था। जब मैंने धक्का दिया तो मेरा सिर उनके गर्भाशय तक पहुंच गया। पारी भाभी लगभग बेहोश हो गईं।

“आह… क्या कर रहे हो… बहुत अंदर चला गया…” वह बुदबुदाईं।

मैंने धीरे-धीरे गति शुरू की। पहले दस मिनट तक मैं धीमी गति से चोदता रहा। पारी भाभी की सांसें तेज हो गईं। वह मेरे बालों को पकड़ कर खींचने लगीं। फिर मैंने गति बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।

“और जोर… और जोर से चोदो मुझे… मुझे तुम्हारा लंड चाहिए… मैं तो तुम्हारे लिए पागल हो गई हूं…” पारी भाभी चीखने लगीं।

उनकी दूसरी ऑर्गेज्म आई। उनकी चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से दबाया कि मुझे लगा कि मेरा लंड निचुड़ जाएगा। मैंने तुरंत अपना लंड बाहर निकाला ताकि मैं खत्म न हो जाऊं।

मैंने उनके शरीर पर पानी की बोतल से थोड़ा पानी डाला और फिर से उनके ऊपर चढ़ गया। इस बार मैंने उन्हें उल्टा कर दिया। पारी भाभी अपने हाथों और घुटनों के बल खड़ी हो गईं। मैंने उनके पीछे से अपना लंड उनकी चूत में डाला। इस पोजीशन में मेरा लंड और गहरा अंदर चला गया।

“हाय… बहुत अंदर गया… ऐसे मत चोदो… रुक जाओ… प्लीज…” वह इस बार कुछ और ही बोल रही थीं।

मैंने उनकी कमर पकड़ कर जोर-जोर से धकेलना शुरू किया। हर धक्के के साथ उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को थपथपाती थीं। पारी भाभी की तीसरी ऑर्गेज्म आई। इस बार वह ऑर्गेज्म इतनी जोरदार थी कि उन्होंने खुद को बिस्तर पर गिरा दिया।

मैंने उन्हें पलटा और उल्टा करवट लेकर फिर से चोदना शुरू किया। अब मुझे भी अपनी ऑर्गेज्म आने की कगार पर था। मैंने तेज धक्के लगाए और पारी भाभी की चौथी ऑर्गेज्म के साथ ही मैं भी खत्म हो गया। मेरा गर्म माल उनकी चूत के अंदर बह गया। पारी भाभी ने मेरी कमर को जोर से पकड़ लिया और मेरा सारा माल पी लिया।

जब हम खत्म हुए तो हम दोनों पसीने में तरबतर थे। उस दिन हमने 45 मिनट तक सेक्स किया। पारी भाभी चार बार ऑर्गेज्म हुईं और मैं तीन बार।

उस रात के बाद से हम पति-पत्नी की तरह रहने लगे। जब भी मौका मिलता, हम प्यार करते। पारी भाभी अब पूरी तरह से मेरी हो गई थीं। वह मुझसे कहतीं, “अब तो मैं सिर्फ तुम्हारे साथ ही जी सकती हूं। तुमने मुझे असली प्यार दिया।”

मैं भी उनसे बेइंतहा प्यार करता हूं। हर शाम जब वह दुकान पर आती हैं, हम अकेले में ढेर सारा प्यार करते हैं। वह मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गई हैं।

उस रात के बाद से हमारा रिश्ता पूरी तरह से बदल गया। पारी भाभी अब हर रोज मेरी दुकान पर आने लगीं। पहले वह कुछ देर ठहरती थीं, लेकिन अब वह घंटों बैठी रहती थीं। हम चाय की दुकान पर बैठकर बातें करते, और फिर जब कोई न होता तो वह मुझे अपने घर बुला लेती थीं।

एक दिन दुकान पर काम नहीं था। मैंने पारी भाभी को फोन किया, “भाभी, आज आप कैसी हैं?”

उन्होंने मीठी आवाज में कहा, “बस तुम्हारे इंतजार में हूं। कब आओगे?”

मैंने कहा, “दुकान बंद करके सीधे आ रहा हूं। आप दरवाजा खुला रखिए।”

वहां पहुंचा तो पारी भाभी ने एक ढीला सलवार कुर्ता पहन रखा था। लेकिन उनके स्तन कुर्ते से बाहर निकले हुए लग रहे थे। मैं अंदर गया तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया और कहा, “आज मैंने तुम्हारे लिए कुछ खास बनाया है। पहले खाना खाओ, फिर…”

मैंने हंसते हुए कहा, “फिर क्या? वही काम?”

उन्होंने मेरी गोद में बैठकर कहा, “हां, वही काम। तुम तो बहुत समझदार हो।”

खाना खाने के बाद हम बेडरूम में चले गए। इस बार पारी भाभी ने खुद ही अपने कपड़े उतार दिए। उन्होंने एक लाल रंग की कमीज पहनी थी जो उनके शरीर पर चिपक गई थी। मैंने उनकी कमीज के बटन खोले और उनके स्तनों को चूमने लगा। उनके स्तनों का रस मेरे मुंह में आ गया।

“आज मैं तुम्हें कुछ नया सिखाऊंगी,” पारी भाभी ने फुसफुसाया और फिर वह मेरी पैंट खोलने लगीं। मेरा लंड पहले से तैयार था। उन्होंने उसे अपने मुंह में ले लिया और गहरा चूसने लगीं। इस बार वह पहले से ज्यादा जोश में थीं।

“भाभी, आज तो बहुत जोर से चूस रही हो,” मैंने मजे से कहा।

उन्होंने मुंह से निकालकर कहा, “हां, क्योंकि तुम मेरे लिए सब कुछ हो। तुम्हारे बिना मेरा जीवन अधूरा है।”

फिर वह मेरे ऊपर चढ़ गईं और अपनी चूत को मेरे लंड पर रखकर धीरे-धीरे नीचे जाने लगीं। पहली बार हम इस पोजीशन में थे। पारी भाभी जैसे-जैसे नीचे उछलतीं, मैं उनके स्तनों को दबाता और उनकी जांघों को सहलाता। वह खुद की गति खुद तय कर रही थीं। कभी तेज, कभी धीमी।

“मेरी जान… मेरे राजा… तुम्हारा लंड मेरी चूत में पागल कर देता है। और चोदो मुझे, और गहरा,” वह चिल्लाईं।

करीब बीस मिनट तक वह ऊपर-नीचे होती रहीं। फिर उनकी पहली ऑर्गेज्म आई। उनकी चूत इतनी जोर से संकुचित हुई कि मुझे लगा कि वह फट जाएगी। मैंने उन्हें पकड़ कर नीचे लिटा दिया और खुद ऊपर चढ़ गया। मैंने अपने हाथों से उनके पैरों को पकड़ लिया और जोर-जोर से चोदने लगा।

“हां… यही तो चाहिए… और तेज… मार डालो मुझे… मैं तो तुम्हारी दीवानी हूं,” वह बिलखने लगीं।

दूसरी ऑर्गेज्म में मैंने भी अपना माल उनकी चूत में छोड़ दिया। इस बार हम दोनों एक साथ खत्म हुए। पारी भाभी ने मेरी पीठ पर हाथ फिराया और धीरे से बोलीं, “आज बहुत अच्छा लगा। तुम मेरी जिंदगी में आए तो मेरी जिंदगी बदल गई। पहले मैं सिर्फ मजबूरी में थी, लेकिन अब मैं खुश हूं।”

मैंने उनके माथे पर चुंबन दिया और कहा, “तुम भी मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा हो। जब तक तुम साथ हो, कोई चिंता नहीं।”

उस दिन के बाद से पारी भाभी और भी ज्यादा खुल गईं। वह अब बिना किसी झिझक के मेरे सामने कपड़े बदलतीं, नहाते समय मुझे अन्दर बुला लेतीं। हमारे प्यार का सफर रोज नए रंग लेता रहता है।

एक बार तो ऐसा हुआ कि दोपहर के समय पारी भाभी ने मुझे फोन किया, “जल्दी आओ, मेरे पति का फोन आया है कि वह अगले हफ्ते आ रहे हैं। तब तक तुम्हें मेरी भरपूर सेवा करनी होगी।”

मैं तुरंत पहुंचा। पारी भाभी ने एक पारदर्शी नाइटी पहन रखी थी। उसमें उनका शरीर साफ दिख रहा था। उन्होंने मुझे देखते ही मेरे कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इस बार वह बहुत उत्तेजित थीं। उन्होंने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और खुद ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने मेरे लंड को अपनी चूत में इस तरह डाला जैसे कोई सवारी कर रही हो।

“आज तो मैं पागल हो गई हूं। मेरे पति आ रहे हैं, तब तक तुम्हें मेरी प्यास बुझानी होगी,” वह बोलीं और अपनी चूत को मेरे लंड पर तेजी से घुमाने लगीं।

पूरे एक घंटे तक हम चोदते रहे। पारी भाभी ने तीन बार ऑर्गेज्म ली और मैंने दो बार। उस दिन के बाद से हमारा प्यार इतना गहरा हो गया कि मैं उनके बिना एक दिन भी नहीं रह सकता।

अब जब भी उनके पति आते हैं, पारी भाभी उनसे कहती हैं कि वह बदल गई हैं और अब उन्हें कोई ख्वाहिश नहीं है। लेकिन असली बात यह है कि वह पूरी तरह से मेरी हो चुकी हैं। हमारी जिंदगी एक-दूसरे के इर्द-गिर्द घूमती है। हम साथ घूमने जाते हैं, साथ खाना खाते हैं, और रात को साथ प्यार करते हैं।

यह कहानी सिर्फ एक बार की बात नहीं है। यह हमारे प्यार की कहानी है जो हर दिन नए सिरे से लिखी जाती है। भाभी ने मुझे सिखाया कि प्यार सिर्फ शरीर का मिलन नहीं, बल्कि आत्मा का मिलन है। और हमारी आत्माएं अब हमेशा के लिए जुड़ चुकी हैं।