यह कहानी है अंकित और मुस्कान की – दो ऐसे दिल जो कॉलेज की चारदीवारी में पहली बार एक-दूसरे से टकराए। अंकित 28 साल का जवान लड़का था जो प्यार की परिभाषा सिर्फ किताबों में पढ़कर जानता था जब तक कि एक दिन मुस्कान उसकी ज़िंदगी में नहीं आ गई।
मुस्कान की आँखें उसकी सबसे बड़ी ताकत थीं – काली, गहरी, जिनमें देखते ही अंकित अपना होश खो बैठता। उसके लंबे काले बाल कंधों तक लहराते और हर हवा के झोंके में उसकी सुंदरता और भी निखर जाती।
वह अक्सर हल्का-सा मेकअप करती, होंठों पर गुलाबी लिपस्टिक लगाती और छोटी स्कर्ट पहनती जो उसकी पतली टाँगों को और आकर्षक बनाती।
एक दिन पढ़ाई के दौरान दोनों एक साथ लाइब्रेरी में बैठे थे। अंकित ने नोट्स समझाते-समझाते गलती से उसके हाथ को छू लिया। उस दिन से दोनों के बीच कुछ बदल गया। मुस्कान ने उसकी तरफ देखा और शरमाते हुए हँस दी।
अंकित का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने हिम्मत करके पूछा, “तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?” मुस्कान ने सिर हिलाकर ना कहा। फिर उसने कहा, “लेकिन मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे पहले आदमी बनो।”
यह सुनते ही अंकित का माथा गर्म हो गया। उसे यकीन नहीं हुआ कि वह सच में ऐसा कह रही है। पर उसके चेहरे पर कोई झूठ नहीं था। दोनों ने तय किया कि अगले दिन अंकित के किराए के कमरे में मिलेंगे जब उसका रूममेट बाहर होगा।
अगले दिन दोपहर दो बजे मुस्कान उसके कमरे में आई। उसने एक सफेद पारदर्शी टॉप और नीली जींस पहनी थी जो उसके पतले शरीर को और भी उभार रही थी। अंकित ने दरवाज़ा खोला तो उसके चेहरे पर सैकड़ों ख्वाहिशें साफ दिख रही थीं।
उसने मुस्कान को अंदर बुलाया और दरवाज़ा बंद कर दिया। कमरे में कूलर नहीं था पर गर्मी दोनों के शरीर से निकल रही थी।
अंकित ने उसका हाथ पकड़ा और पलंग की तरफ ले गया। मुस्कान ने अपने बालों को एक तरफ हटाया और धीरे-धीरे अपनी टॉप उतारने लगी। अंकित ने उसे रोका और कहा, “रुको मुस्कान, मैं तुम्हें उतार दूँ।
उसने बड़ी ही कोमलता से उसकी टॉप के बटन खोले। हर बटन के साथ मुस्कान की साँसें तेज होने लगीं। तीसरे बटन के बाद उसके ब्रेस्ट दिखने लगे – बिल्कुल ताज़ा, मुलायम और ऐसे जैसे अभी-अभी खिले हों।
श्वेत रंग का ब्रा उसके स्तनों को ढँके हुए था पर उनकी गोलाई बाहर झांक रही थी।
अंकित ने अपने होंठों को उसकी गर्दन पर रखा और हल्के-हल्के काटने लगा। मुस्कान की पीठ में ऐंठन हुई और वह जोर से काँपी। उसके मुँह से निकला, “आह… अंकित… मैं… असहज हो रही हूँ…” अंकित ने उसके कान के नीचे चूमा और कहा, “डरो मत प्रिय, मैं बहुत ध्यान रखूँगा।”
उसके बाद अंकित ने जल्दी-जल्दी अपनी शर्ट फेंकी और मुस्कान को पूरी तरह नंगा कर दिया। उसकी जींस खींचते ही उसकी पीली ब्रा और पैंटी सामने आ गई। अंकित ने अपना मुँह उसके स्तनों के बीच रखा और उसके निप्पल को जोर से चूसा।
मुस्कान का शरीर एक बार झुक गया। वह चिल्लाई, “अंकित… ऐसा मत करो… मैं… ओह… मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा…” लेकिन उसकी आवाज़ में सुखद दर्द था।
अंकित ने धीरे-धीरे उसकी ब्रा के हुक खोले। जैसे ही ब्रा हटी, मुस्कान के दोनों स्तन बिल्कुल खुले हुए सामने आ गए। वे गोल, सफेद, हल्के गुलाबी निप्पल के साथ, जैसे आसमान में दो चाँद हों। अंकित ने अपनी दोनों हथेलियों से उन्हें अपने हाथों में ले लिया और फिर चुटकी के बीच उसके निप्पलों को दबाने लगा।
“ओह… अंकित… तुम्हारे हाथ… बहुत अच्छे लग रहे हैं,” मुस्कान की आवाज़ पूरी तरह बदल चुकी थी। वह अपनी आँखें बंद किए अपने पहले अनुभव का आनंद ले रही थी।
इसके बाद अंकित ने उसकी पैंटी को भी खींच लिया। उसकी गीली चूत पहले से ही उसकी इच्छा से भीगी हुई थी। पैंटी के बीच में एक नमी का धब्बा साफ दिख रहा था। अंकित ने अपनी उंगली से उसे रगड़ा और मुस्कान काँप उठी। उसके हाथ मुस्कान के कूल्हों पर थे और वह बिस्तर पर पूरी तरह पसरी हुई थी।
“अंकित… अब मैं तैयार हूँ… मेरी कुंवारी चूत फाड़ दो ना जानू… मुझे चाहिए तुम्हारा लंड,” मुस्कान ने आँखों में पानी लिए, गुस्ताखी और प्यार से एक साथ कहा।
अंकित ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा था – गुलाबी सिरा, मोटी नसें, और पूरी तरह तैयार। उसने लंड के सिरे को मुस्कान की चूत के ऊपरी हिस्से पर रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया।
पहला इंच अंदर जाते ही मुस्कान ने दर्द से अपनी आँखें बंद कर लीं। वह जोर-जोर से साँस ले रही थी। उसकी फैली हुई चूत एक पतली झिल्ली को पार करने के लिए तैयार थी।
“अगर दर्द हो तो मुझे बताना मेरी जान…” अंकित ने कहा।
“कोई बात नहीं, तुम आगे बढ़ो… मैं तुम्हारे लिए सबकुछ सह सकती हूँ,” मुस्कान ने उसके हाथ को जोर से पकड़ लिया।
अंकित ने एक गहरा धक्का दिया। एक बार में ही पूरा सिरा उसके कुंवारीपन की दीवार को तोड़ता हुआ अंदर घुस गया। मुस्कान के मुँह से एक चीख निकल गई – लेकिन वह दर्द की चीख से ज्यादा ख्वाहिश और आनंद की चीख थी। उसकी चूत के अंदर का खून निकल रहा था जो अंकित के लंड पर लग गया।
अंकित ने रुककर पूछा, “क्या तुम ठीक हो?”
“हाँ… लेकिन अब आगे भी चलाओ… मुझे तुम्हारी चुदाई चाहिए… पूरी गहराई तक…” मुस्कान की आँखें खुली थीं और उसमें पानी था, पर उसके चेहरे पर प्यार का एक अनोखा रूप था।
अंकित ने अपने लंड को धीरे-धीरे बाहर निकाला और फिर एक तेज धक्के के साथ पूरी तरह अंदर डाल दिया। मुस्कान की चूत अब पूरी तरह से उसके लंड के आकार में ढलने लगी थी। उसकी चूत की दीवारों ने अंकित के लंड को कस कर पकड़ लिया।
“भगवान… मुस्कान… तुम इतनी कसी हुई हो… मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूँ,” अंकित ने कहा।
“चोदो मुझे जल्दी… मैं आ रही हूँ अंकित… प्लीज़… मुझे ख़त्म कर दो,” मुस्कान की आवाज़ कांप रही थी।
अंकित ने अपने कूल्हों की गति तेज कर दी। पहले धीमी, फिर तेज… हर धक्के के साथ मुस्कान की चूत से एक चटपटी आवाज़ निकलती। उसके निचले होंठ सूज गए थे पर वह उस दर्द और आनंद को एक साथ महसूस कर रही थी।
दस मिनट बाद अंकित को अपना चरम बिंदु महसूस होने लगा। उसने मुस्कान से कहा, “मैं बाहर निकालता हूँ… नहीं तो भीतर गिर जाएगा…”
“मुझे अंदर चाहिए तुम्हारा माल… मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे पूरी तरह से भर दो,” मुस्कान ने बेताबी से कहा।
अंकित ने अपने लंड को गहराई में डालते हुए अपना कुम गिरा दिया। एक गर्म, चिपचिपी बाढ़ मुस्कान की चूत में भर गई। वह तीन बार और ऑर्गैज्म से काँपी, और फिर दोनों थककर बिस्तर पर लेट गए।
चादर पर लाल धब्बे थे – पवित्रता और प्यार के निशान। मुस्कान अंकित की बाँहों में लिपटी सो गई, और दोनों ने उस रात बहुत देर तक बातें कीं – प्यार, भविष्य, परिवार – सब कुछ।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। कुछ महीने बाद मुस्कान के पिता का तबादला पुणे से मुंबई हो गया। उसके जाने के बाद पहले तो कभी-कभार कॉल आते रहे, फिर धीरे-धीरे बातचीत कम हो गई।
अंकित ने उसे पकड़ने की कोशिश की पर दूरियाँ बहुत बड़ी हो चुकी थीं – शहर की दूरियाँ नहीं, बल्कि दिलों की दूरियाँ।
आज भी जब अंकित उस चादर को देखता है जिस पर उसकी मुस्कान के आँसू और खून बिखरे थे, उसे याद आता है कि पहला प्यार कभी नहीं मरता – बस धीरे-धीरे जख्मों में बदल जाता है। पर उस रात का मादक सुख, वह कुंवारी चूत का फटना, वह उसकी पहली चुदाई – सब दिल की गहराइयों में दफ्न हो गया, जैसे एक अधूरी प्रेम कहानी का अंतिम पन्ना।