अगले दिन सुबह, घर में सब कुछ सामान्य लग रहा था। प्रिया की मां रसोई में चाय बना रही थीं, और पिता अखबार पढ़ रहे थे।
चाचा जी नीचे से ऊपर आ रहे थे, उनके चेहरे पर एक चालाकी भरी मुस्कान थी। प्रिया अभी भी बिस्तर पर लेटी हुई थी, उसके शरीर में दर्द था लेकिन मन में एक नई उत्तेजना।
वह सोच रही थी कि रात का वो पल सपना तो नहीं था? लेकिन जब उसने अपना हाथ चूत पर रखा, तो दर्द ने बता दिया कि सब सच था।
दोपहर को, जब घर के बाकी लोग बाहर गए, चाचा जी प्रिया के कमरे में घुस आए। दरवाजा बंद करते ही उन्होंने प्रिया को कसकर गले लगा लिया।
“प्रिया, कल रात की याद आ रही है?” उन्होंने उसके कान में फुसफुसाया। प्रिया का चेहरा लाल हो गया।
“चाचा जी, प्लीज… कोई देख लेगा।” लेकिन चाचा जी कहां मानने वाले थे। उन्होंने प्रिया की साड़ी ऊपर सरका दी और उसके नंगे जांघों पर हाथ फेरने लगे। प्रिया की चूत फिर से गीली होने लगी।
चाचा जी ने प्रिया को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गए। उनका लंड पैंट में तन चुका था।
उन्होंने पैंट उतारी और अपना मोटा लंड बाहर निकाला। प्रिया ने डरते-डरते उसे छुआ। “चाचा जी, ये इतना बड़ा कैसे? कल तो दर्द बहुत हुआ था।
” चाचा जी हंसे, “आज मजा आएगा, बेटा।” उन्होंने प्रिया की चोली खोल दी और उसके छोटे-छोटे स्तनों को मुँह में भर लिया। जीभ से चूसते हुए उन्होंने निप्पल्स को काटा। प्रिया चीख पड़ी, लेकिन आवाज दबा ली।
चाचा जी नीचे सरक गए और प्रिया की चूत पर मुँह लगा दिया। उनकी जीभ ने चूत की दरार को चाटना शुरू किया।
प्रिया के शरीर में करंट दौड़ गया। “आह… चाचा जी… क्या कर रहे हो?” लेकिन चाचा जी नहीं रुके। उन्होंने जीभ अंदर डाल दी और चूसने लगे। प्रिया की चूत से रस बहने लगा।
वह अपनी कमर हिलाने लगी। चाचा जी ने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और चूत को सहलाने लगे। प्रिया का पहला ऑर्गेज्म आ गया, वह चीखी और चूत से पानी छूट गया।
अब चाचा जी उठे और अपना लंड प्रिया की चूत पर रगड़ने लगे। “तैयार है, प्रिया?” प्रिया ने सिर हिलाया।
चाचा जी ने धीरे से लंड अंदर डाल दिया। आज दर्द कम था, लेकिन चूत अभी भी टाइट थी। चाचा जी ने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए।
प्रिया ने उनके कंधों को नाखूनों से चुभोया। “चाचा जी… तेज… और तेज…” चाचा जी ने स्पीड बढ़ा दी। कमरा चुदाई की आवाजों से गूंज उठा – प्लक प्लक की।
वे दोनों पसीने से तर थे। चाचा जी ने प्रिया को पलटा और डॉगी स्टाइल में चुदाई शुरू की। उनके हाथ प्रिया की गांड पर पड़े।
“तेरी गांड भी मस्त है, प्रिया। कभी मौका मिला तो उसे भी मारूंगा।” प्रिया शरमा गई लेकिन उत्तेजित हो गई। चाचा जी ने जोर-जोर से धक्के मारे। प्रिया का दूसरा ऑर्गेज्म आया, वह कांपने लगी।
चाचा जी भी अब क्लाइमैक्स पर थे। उन्होंने लंड बाहर निकाला और प्रिया के मुँह पर वीर्य छोड़ दिया। प्रिया ने पहली बार चाचा जी का रस चखा, नमकीन लेकिन स्वादिष्ट।
शाम को, जब सब घर लौट आए, प्रिया और चाचा जी के बीच एक गुप्त नजर मिलन चल रहा था। रात में, जब सब सो गए, चाचा जी फिर प्रिया के कमरे में आ गए। इस बार वे और साहसी थे।
“प्रिया, आज कुछ नया ट्राई करेंगे।” उन्होंने प्रिया को नंगा कर दिया और खुद भी उतर गए। चाचा जी ने प्रिया को अपनी गोद में बिठा लिया। प्रिया का चूत उनके लंड पर रगड़ रही थी। फिर चाचा जी ने उसे नीचे किया और लंड को चूत में घुसेड़ दिया। प्रिया ऊपर-नीचे होने लगी।
चाचा जी के हाथ प्रिया की गांड पर थे, उंगलियां अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे। प्रिया डर गई, “चाचा जी, ना… वहां दर्द होगा।”
लेकिन चाचा जी ने एक उंगली अंदर डाल दी। प्रिया चीखी लेकिन चुदाई का मजा इतना था कि वह सह ले गई। वे दोनों तेजी से हिल रहे थे।
चाचा जी ने प्रिया के स्तनों को चूसा, काटा। प्रिया का तीसरा ऑर्गेज्म आया। चाचा जी ने इस बार चूत के अंदर ही झड़ दिया। गर्म वीर्य प्रिया के अंदर भर गया।
अगले कुछ दिनों में, चाचा जी और प्रिया की चुदाई का सिलसिला चलता रहा। कभी रसोई में, जब कोई न हो, चाचा जी प्रिया की साड़ी ऊपर करके पीछे से चोदते। कभी बाथरूम में, नहाते समय।
प्रिया अब पूरी तरह चाचा जी की गुलाम हो चुकी थी। उसकी चूत हमेशा गीली रहती, चाचा जी के लंड की याद में।
एक दिन, प्रिया की सहेली मीरा घर आई। मीरा भी 18 साल की हसीन लड़की थी, लेकिन प्रिया से थोड़ी बोल्ड। वे दोनों कमरे में बातें कर रही थीं।
चाचा जी ने झांका तो मीरा की टाइट ब्लाउज में उभरे स्तन देखकर उनका लंड खड़ा हो गया। शाम को, जब मीरा चली गई, चाचा जी ने प्रिया से कहा, “तेरी सहेली भी मस्त है। कभी उसे भी बुला।” प्रिया हंस पड़ी, “चाचा जी, आप तो लालची हो।”
लेकिन अगले हफ्ते, मीरा फिर आई। इस बार तीनों अकेले थे। चाचा जी ने शराब का बहाना बनाया और तीनों ने पी। प्रिया और मीरा नशे में हंस रही थीं। चाचा जी ने कहा, “चलो, कोई गेम खेलें।”
उन्होंने स्ट्रिप पोकर सुझाया। प्रिया शर्मा गई लेकिन मीरा तैयार हो गई। कुछ राउंड्स में दोनों लड़कियां आधी नंगी हो गईं। चाचा जी का लंड पैंट फाड़ने को तैयार था।
मीरा ने चाचा जी की ओर देखा, “अंकल, आपका तो कुछ खास लग रहा है।” चाचा जी हंसे और पैंट उतार दी। उनका मोटा लंड बाहर आ गया। मीरा की आंखें फैल गईं। “वाह… इतना बड़ा।”
प्रिया ने कहा, “मीरा, ये चाचा जी का कमाल है।” चाचा जी ने मीरा को पास खींचा और उसके होंठ चूसने लगे। मीरा ने विरोध नहीं किया। प्रिया देख रही थी, उसकी चूत गीली हो गई।
चाचा जी ने मीरा की स्कर्ट ऊपर की और पैंटी उतार दी। मीरा की चूत साफ-सुथरी थी। चाचा जी ने जीभ से चाटना शुरू किया।
मीरा चीखी, “आह… अंकल…” प्रिया ने चाचा जी का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। कमरा अब चुदाई की महक से भर गया। चाचा जी ने मीरा को लिटाया और लंड अंदर डाल दिया। मीरा की चूत टाइट थी, वह दर्द से कराह रही थी। लेकिन चाचा जी ने धक्के मारे।
प्रिया मीरा के स्तनों को चूस रही थी। तीनों की चुदाई चल रही थी। चाचा जी ने मीरा को चोदा, फिर प्रिया को। दोनों लड़कियां एक-दूसरे को चूम रही थीं।
चाचा जी ने कहा, “अब गांड मारूं?” मीरा डर गई लेकिन प्रिया ने कहा, “ट्राई करो, मीरा।” चाचा जी ने मीरा की गांड पर थूक लगाया और उंगली डाली। फिर लंड को धीरे से अंदर किया। मीरा चीखी लेकिन मजा लेने लगी।
रात भर चुदाई चली। चाचा जी ने दोनों की चूत और गांड मारी। वीर्य कहीं चूत में, कहीं मुँह में, कहीं स्तनों पर। सुबह तक तीनों थक गए। मीरा ने कहा, “अंकल, ये तो कमाल था। फिर बुलाऊंगी।” प्रिया मुस्कुराई, अब उनकी जिंदगी और रोमांचक हो गई थी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कुछ दिनों बाद, प्रिया की मां को शक हो गया। वह चाचा जी को देखकर कुछ कहना चाहतीं लेकिन चुप रहतीं। एक रात, जब चाचा जी प्रिया के कमरे जा रहे थे,
प्रिया की मां ने उन्हें रोका। “भाई साहब, क्या चल रहा है?” चाचा जी घबरा गए लेकिन फिर मुस्कुराए। “बहन, तू भी जॉइन कर।” प्रिया की मां शॉक हो गईं लेकिन उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई।
अगली रात, तीनों – चाचा जी, प्रिया और उसकी मां – एक कमरे में थे। प्रिया की मां का नाम सीमा था, 40 साल की लेकिन फिगर अभी भी कमाल का। चाचा जी ने सीमा को नंगा किया। उसके बड़े स्तन लटक रहे थे। चाचा जी ने उन्हें चूसा। सीमा कराहने लगी। “भाई साहब… ये गलत है… लेकिन…” चाचा जी ने कहा, “गलत नहीं, मजा है।”
प्रिया अपनी मां की चूत चाट रही थी। सीमा शर्मा रही थी लेकिन उत्तेजित। चाचा जी ने पहले सीमा को चोदा। उनका लंड सीमा की चूत में आसानी से घुस गया। सीमा चीखी, “आह… कितने साल बाद…” प्रिया चाचा जी के लंड को चूस रही थी। फिर चाचा जी ने प्रिया को चोदा, जबकि सीमा प्रिया के स्तनों को सहला रही थी।
मां-बेटी दोनों चाचा जी के लंड पर सवार हो रही थीं। चुदाई के दौरान सीमा ने कहा, “प्रिया, तू तो कुंवारी थी… चाचा ने तोड़ा?” प्रिया हंस पड़ी, “हां मां, और मजा आया।”
चाचा जी ने दोनों की गांड भी मारी। सीमा की गांड टाइट थी, वह दर्द से चीखी लेकिन सह गई। रात भर ग्रुप चुदाई चली। वीर्य हर जगह फैल गया।
अब घर में चुदाई का राज खुल चुका था। पिता को भी पता चल गया, लेकिन वह चुप रहे। कभी-कभी वह भी जॉइन करते। लेकिन मुख्य हीरो चाचा जी थे। प्रिया की जिंदगी
अब चुदाई के इर्द-गिर्द घूमने लगी। वह स्कूल जाती, लेकिन मन चाचा जी के लंड में। मीरा भी आ जाती, और पार्टियां होतीं।
एक दिन, चाचा जी ने प्रिया को बाहर ले जाकर एक होटल में चोदा। वहां उन्होंने नई पोजीशन्स ट्राई कीं – 69, एनल, ओरल।
प्रिया का शरीर चाचा जी का था। चुदाई के बाद वे लेटे रहे, “चाचा जी, मैं आपसे शादी कर लूं?” चाचा जी हंसे, “बेटा, ये तो हमारा राज है। लेकिन हमेशा साथ रहेंगे।”