हैलो दोस्तों, मेरा नाम मानव है और मैं पंजाब से हूं, मेरी उम्र 27 साल है और मैं शादीशुदा हूं, जो स्टोरी मैं आप लोगों से शेयर करने जा रहा हूं, ये तीन महीने पहले की है। मैं दिल्ली में एक आईटी कंपनी में काम करता हूं। शादी के दो साल हो चुके थे, लेकिन जिंदगी में एक रूटीन सा हो गया था।
घर, ऑफिस, घर। लेकिन तीन महीने पहले सब बदल गया जब मेरी नई बॉस आईं। उनका नाम सीमा था, उम्र करीब 35 साल, शादीशुदा, लेकिन लुक ऐसी कि कोई भी पागल हो जाए। लंबी हाइट, फिगर 36-28-38 का, हमेशा टाइट ब्लाउज और स्कर्ट पहनतीं, जो उनकी कर्व्स को हाईलाइट करता।
चेहरा गोरा, होंठ मोटे, आंखें काली गहरी। वो मार्केटिंग हेड थीं, और मैं उनके टीम में था।
पहली ही मीटिंग में उन्होंने मुझे नोटिस किया। ‘मानव, तुम्हारा प्रेजेंटेशन अच्छा था, लेकिन ज्यादा डिटेल्स डालो नेक्स्ट टाइम।’ उन्होंने कहा, उनकी नजरें मेरी आंखों में टिक गईं। मैंने हामी भरी, लेकिन दिल में कुछ खटका। ऑफिस में वो स्ट्रिक्ट थीं, लेकिन मेरे साथ थोड़ी सॉफ्ट।
लंच टाइम पर कॉफी मशीन के पास मिले। ‘मानव, तुम पंजाबी हो ना? घर में सब ठीक?’ उन्होंने पूछा। मैंने बताया शादीशुदा हूं, बीवी अमृतसर में रहती है। वो मुस्कुराईं, ‘मैं भी शादीशुदा हूं, हसबैंड आर्मी में है, महीने में एक बार आता है।’ बातें बढ़ीं, लेकिन तब तक कुछ नहीं सोचा।
एक हफ्ते बाद लेट नाइट शिफ्ट था। ऑफिस में सिर्फ हम दोनों। प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। सीमा ने कॉफी बनाई, ‘मानव, थक गए हो? ब्रेक लो।’ हम कन्फ्रेंस रूम में बैठे। उनकी स्कर्ट ऊपर सरक गई, जांघें दिख रही थीं। सफेद ब्लाउज में ब्रा की लाइन साफ।
मैंने नजर हटाई, लेकिन वो हंसीं, ‘क्या देख रहे हो?’ मैं शर्मा गया। ‘सीमा मैम, कुछ नहीं।’ उन्होंने हाथ पकड़ा, ‘मैम मत बोलो, सीमा बोलो।’ करीब आईं, सांस महसूस हुई। अचानक उनके होंठ मेरे होंठों पर। किस शुरू हो गया। जीभ अंदर, चूसने लगीं।
मैं स्तब्ध, लेकिन रेस्पॉन्ड किया। हाथ उनकी कमर पर, फिर गांड पर। मोटी, मुलायम।
‘सीमा, ये…’ मैं बोला, लेकिन वो चुप करा दीं। ‘शशश… कोई नहीं है।’ ब्लाउज के बटन खोले। काले लेस ब्रा में बड़े स्तन। ब्रा उतारी, निप्पल्स ब्राउन, सख्त। मैंने मुंह में लिया, चूसा। सीमा कराहीं, ‘आह… मानव, जोर से।’
दांत से काटा, वो तड़पी। उनका हाथ मेरी पैंट पर, जिपर खोला। लंड बाहर, कड़ा हो चुका। ‘वाह, कितना बड़ा।’ उन्होंने कहा, हिलाया। फिर घुटनों पर। मुंह में लिया, चूसने लगीं। जीभ से चोटी चाटी, बॉल्स सहलाईं। स्लॉपी आवाज आ रही थी।
मैं बाल पकड़े, गले तक धकेला। वो चोक हुईं, लेकिन जारी रहीं। आंसू आ गए, लेकिन आंखों में वासना।
मैंने उन्हें उठाया, टेबल पर बिठाया। स्कर्ट ऊपर की, पैंटी काली। उतारी, चूत साफ दिखी। शेव्ड, गीली। उंगली डाली, टाइट थी। ‘सीमा, कितनी टाइट है।’ मैं बोला। दो उंगलियां, अंदर बाहर। क्लिट रगड़ा। वो चिल्लाईं, ‘मानव… चाटो।’ मैं झुका, जीभ से चाटा।
रस चखा, खट्टा मीठा। क्लिट चूसा, उंगलियां तेज। उनका पहला ऑर्गेज्म आया, शरीर कांपा, रस बहा। मैंने लंड उठाया, चूत पर रगड़ा। ‘डालो… चोदो मुझे।’ सीमा बोलीं। धक्का मारा, पूरा अंदर। गर्म, चिपचिपी। पेलने लगा, धीरे-धीरे। उनके स्तन उछल रहे, पकड़े, मरोड़े।
‘फास्टर मानव!’ उन्होंने कहा। स्पीड बढ़ाई, टेबल हिल रहा। पसीना बहा। सीमा की चीखें, ‘हां… फाड़ दो चूत।’ मैंने जोर लगाया, गहराई तक। उनका दूसरा ऑर्गेज्म, चूत सिकुड़ गई, लंड दबा। मैं झड़ने वाला था।
अंदर ही… कंडोम नहीं।’ बोलीं। स्पर्म छोड़ा, गर्मी फैली। हम हांफ रहे थे। लेकिन वो रुकीं नहीं। ‘अभी गांड बाकी है।’ मुस्कुराईं।
टेबल से उतरीं, झुकीं। गांड ऊपर। गोल, सफेद। मैंने थूक लगाया लंड पर, फिर गांड पर। धीरे डाला। टाइट बहुत, दर्द हुआ। ‘आह… धीरे।’ लेकिन वो पीछे धकेल रही थीं। पूरा अंदर, पेलना शुरू, हाथ से चूत सहलाई। सीमा चीखी, ‘फाड़ दो गांड… हार्डर!
मैंने थप्पड़ मारे गांड पर, लाल हो गई। तेज धक्के, बॉल्स चटक रहे। उनका ऑर्गेज्म फिर, गांड सिकुड़ी। मैं बाहर निकाला, स्पर्म उनकी गांड पर छोड़ा। हम गिर पड़े, लिपटे।
उस रात घर लौटा, बीवी सो रही थी। लेकिन दिमाग में सीमा। नेक्स्ट डे ऑफिस में नॉर्मल हो गए। लेकिन लंच पर मैसेज आया: ‘कैबिन में आओ।’ गई तो दरवाजा लॉक।
सीमा कुर्सी पर, स्कर्ट ऊपर। ‘बोली चोदो फिर।’ बिना बात के लंड बाहर, चूत में डाला। कुर्सी पर पेला। स्तन चूसे। क्विक सेशन, लेकिन इंटेंस। स्पर्म अंदर डाल दिया।
इसके बाद रूटीन बन गया। हर हफ्ते 2-3 बार। कभी कन्फ्रेंस रूम, कभी पार्किंग, कभी उनके कैबिन। एक बार ओवरटाइम, लिफ्ट में। लिफ्ट रुकी, किस शुरू। पैंट नीचे, चूत में उंगली। लंड चूसा। लेकिन रिस्की था। एक बार क्लोज कॉल, सिक्योरिटी गार्ड आया।
दस दिन बाद, सीमा ने कहा, ‘वीकेंड पर होटल चलें?’ मैंने हामी भरी। शनिवार रात, फाइव स्टार होटल। सूट में एंटर। चैंपेन, डिनर। फिर बेडरूम में गये। सीमा ने रेड लिंगरी पहनी। ‘मानव, आज रात भर चोदना।’ किस किया, लंबा। लिंगरी उतारी। नंगा बदन, परफेक्ट। बेड पर लिटाया, पैर फैलाए।
चूत चाटी, लंबे समय तक। जीभ अंदर, क्लिट चूसा। उंगलियां गांड में। वो तड़पी, ‘ओह मानव… कमाल।’ ऑर्गेज्म तीन बार। फिर मैं लेटा, वो ऊपर। काउगर्ल, लंड पर बैठी। ऊपर नीचे। स्तन मेरे मुंह में।
लेकिन सीक्रेट था। घर में बीवी को शक नहीं। सीमा का हसबैंड अननोन। एक महीना बीता, इंटेंस हो गया। ऑफिस ट्रिप पर गए, मुंबई।
दो महीना बीता। सीमा प्रेग्नेंट हो गईं? टेस्ट पॉजिटिव। हसबैंड को लगा उनका। लेकिन मुझे पता। ‘मानव, तेरा बच्चा।’ बोलीं। मैं शॉक्ड, लेकिन खुश था। अब रिलेशनशिप डीप हो गया।
दोस्तो, ये थी सदीसुदा बॉस की चुदाई की कहानी। कहानी अच्छी लगी हो तो आप लोग कमेंट कर सकते है।