जनवरी का महीना था और दिल्ली की कड़ाके की ठंड अपने चरम पर थी। बाहर कोहरा छाया हुआ था, लेकिन साकेत के एक पॉश क्लब के अंदर का माहौल पूरी तरह से अलग था। वहाँ की हवा में परफ्यूम, शराब और जवान जिस्मों की महक घुली हुई थी।
लाउड म्यूजिक की बेस सीधे दिल की धड़कनों से टकरा रही थी। रंग-बिरंगी लेजर लाइट्स पूरे डांस फ्लोर पर किसी जादू की तरह नाच रही थीं।
अभय, जो 25 साल का एक सफल सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, अपनी गर्लफ्रेंड ऐशा के साथ डांस फ्लोर के बीचों-बीच था। अभय का व्यक्तित्व प्रभावशाली था—6 फीट लंबा कद, जिम में तराशा हुआ मस्कुलर बदन और एक गहरी आवाज जो किसी भी लड़की को दीवाना बना दे। उसके बगल में ऐशा नाच रही थी, जो 22 साल की थी और अभी कॉलेज के आखिरी साल में थी।
ऐशा का चेहरा मासूमियत से भरा था, लेकिन उसका शरीर किसी अप्सरा से कम नहीं था। उसने उस रात एक सुर्ख लाल रंग की ‘बॉडीकॉन’ ड्रेस पहनी थी, जो उसके शरीर के हर कर्व को उभर रही थी। उसकी पतली कमर, चौड़े कूल्हे और 34B के सुडौल स्तन उस टाइट ड्रेस में कैद होने के लिए छटपटा रहे थे। जब वह हिलती, तो उसकी ड्रेस की सिल्कन चमक अभय की आँखों में आग लगा देती।
डांस करते-करते अभय ने अपनी पकड़ ऐशा की कमर पर मजबूत कर ली। उसने ऐशा को अपनी ओर खींचा, जिससे उनके शरीर एक-दूसरे से पूरी तरह सट गए। अभय को ऐशा के स्तनों का दबाव अपनी छाती पर महसूस हो रहा था। ऐशा ने अपने हाथ अभय की गर्दन के पीछे डाल दिए और उसकी आँखों में आँखें डालकर देखने लगी।
“अभय… आज तुम बहुत हैंडसम लग रहे हो,” ऐशा ने संगीत के शोर में उसके कान के पास आकर कहा। उसकी गर्म साँसें अभय की गर्दन को सहला गईं।
अभय ने उसके कान की लौ को धीरे से अपने होंठों से छुआ और फुसफुसाया, “और तुम… तुम आज कयामत लग रही हो ऐशा। यह रेड ड्रेस… यह तुम्हें इतना सेक्सी बना रही है कि मेरा खुद पर काबू खो रहा है।”
ऐशा थोड़ा शरमाई, लेकिन उसने अपनी नजरें नहीं हटाईं। वे पिछले छह महीनों से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। उनके बीच बहुत सारे रोमांटिक पल आए थे, गहरे किस हुए थे, लेकिन ऐशा ने हमेशा अपनी वर्जिनिटी को एक सीमा की तरह बनाए रखा था। वह डरती थी, लेकिन आज रात उसके मन में डर से ज्यादा जिज्ञासा और चाहत थी।
“अभय,” ऐशा ने उसकी शर्ट के बटन के साथ खेलते हुए कहा, “आज रात… मैं चाहती हूँ कि हम इस दूरी को खत्म कर दें। मैं अब और इंतजार नहीं करना चाहती।”
अभय का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने ऐशा की कमर को थोड़ा और नीचे से पकड़ा और उसे अपने करीब दबाते हुए कहा, “क्या तुम सच में तैयार हो? मैं तुम्हें मजबूर नहीं करना चाहता।”
ऐशा ने मुस्कुराते हुए उसके होंठों पर एक छोटा सा किस किया और कहा, “चलो यहाँ से। मुझे तुम्हारे पास होना है, अकेले में।”
क्लब से बाहर निकलते ही दिल्ली की ठंडी हवा ने उन्हें घेरा, लेकिन उनके अंदर की आग उन्हें गर्म रखे हुए थी। अभय ने तुरंत एक उबर बुक की। टैक्सी की पिछली सीट पर बैठते ही अभय का हाथ ऐशा की नंगी जांघ पर जा टिका, जहाँ उसकी ड्रेस ऊपर चढ़ गई थी।
ऐशा की त्वचा मखमली और कोमल थी। अभय ने अपनी उंगलियों से उसकी जांघ को सहलाना शुरू किया। ऐशा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर अभय के कंधे पर रख दिया। जैसे-जैसे टैक्सी अंधेरी सड़कों से गुजर रही थी, अभय का हाथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर सरकने लगा। ऐशा ने एक गहरी साँस ली और अभय के हाथ को अपनी जांघों के बीच और जोर से दबा लिया।
“अभय, प्लीज… अभी नहीं,” ऐशा ने धीमी आवाज में कहा, हालाँकि उसकी पकड़ कुछ और ही कह रही थी।
अभय ने उसके कान के पीछे किस किया और कहा, “बस थोड़ा सा एहसास, ऐशा। तुम नहीं जानती कि तुम कितनी टाइट और गर्म महसूस हो रही हो।”
अभय का लंड उसकी पैंट के अंदर पूरी तरह से सख्त हो चुका था। वह ऐशा की खुशबू और उसकी निकटता से पागल हो रहा था। 15 मिनट का सफर उन्हें घंटों जैसा लग रहा था। जैसे ही अभय का फ्लैट आया, उसने जल्दी से पेमेंट की और ऐशा का हाथ पकड़कर लिफ्ट की ओर भागा।
फ्लैट के अंदर कदम रखते ही अभय ने दरवाजा बंद किया और ऐशा को दीवार से सटा दिया। कमरे में अंधेरा था, बस बाहर की स्ट्रीट लाइट की हल्की रोशनी खिड़की से छनकर आ रही थी। अभय ने बिना एक पल गंवाए ऐशा के होंठों को अपने होंठों में भर लिया।
यह एक भूखा और जंगली किस था। उनकी जीभें एक-दूसरे से टकरा रही थीं, एक-दूसरे का स्वाद ले रही थीं। ऐशा ने भी उसी शिद्दत से जवाब दिया। उसके हाथ अभय के बालों में उलझ गए और वह उसे और करीब खींचने लगी। अभय के हाथ ऐशा की पूरी बॉडी पर घूम रहे थे—ऊपर से नीचे, उसके कर्व्स को महसूस करते हुए।
“आह… अभय,” ऐशा ने किस के बीच में सिसकी ली।
अभय ने उसे गोद में उठाया और लिविंग रूम के सोफे पर ले गया। उसने ऐशा की ड्रेस की जिप धीरे से नीचे की। जैसे ही जिप खुली, ऐशा की गोरी पीठ और उसकी ब्लैक लेस वाली ब्रा की पट्टी दिखाई दी। अभय ने ड्रेस को उसके कंधों से नीचे सरकाया। लाल ड्रेस फर्श पर गिर गई, और अब ऐशा सिर्फ अपनी काली ब्रा और पैंटी में थी।
अभय की नजरें ऐशा के जिस्म पर जम गईं। “तुम कितनी खूबसूरत हो ऐशा… बिल्कुल एक सपने जैसी।”
उसने ऐशा को बेडरूम में ले जाने का फैसला किया। बेडरूम में पहुँचकर उसने हल्की मद्धम रोशनी वाली लैंप जलाई। ऐशा बेड पर लेटी हुई थी, उसकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। अभय ने अपनी शर्ट उतारी और अपना मस्कुलर सीना दिखाया। फिर उसने अपनी पैंट और अंडरवियर भी उतार फेंकी।
जब ऐशा ने अभय के 7 इंच लंबे और मोटे लंड को पहली बार पूरी तरह नग्न देखा, तो उसकी आँखें फैल गईं। वह डरी हुई भी थी और आकर्षित भी।
“अभय… यह… यह बहुत बड़ा है,” उसने धीरे से कहा।
अभय ने मुस्कुराते हुए उसके पास लेटकर उसे गले लगाया। “डरो मत जान, मैं बहुत धीरे चलूँगा।”
अभय ने ऐशा की ब्रा के हुक को एक झटके में खोल दिया। जैसे ही ब्रा हटी, ऐशा के सुडौल और सख्त चूचे बाहर निकल आए। उनके निप्पल्स ठंड और उत्तेजना की वजह से गुलाबी और सख्त हो चुके थे। अभय ने अपनी हथेलियों में उन दोनों को भर लिया और उन्हें धीरे-धीरे दबाने लगा।
“ओह… अभय… हाँ… वहीं,” ऐशा ने अपनी कमर ऊपर उठाते हुए कहा।
अभय ने अपना सिर नीचे झुकाया और एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया। उसने उसे अपनी जीभ से सहलाया और फिर धीरे से चूसा। ऐशा के मुँह से एक तीखी सिसकी निकली। अभय ने दूसरे स्तन को अपने हाथ से मसलना जारी रखा। वह बारी-बारी से दोनों को चूस रहा था, जैसे कोई प्यासा पानी पी रहा हो।
“तुम्हारे चूचे बहुत मीठे हैं ऐशा,” अभय ने कहा और उसके पेट पर किस करने लगा।
उसका हाथ अब ऐशा की पैंटी के अंदर जा चुका था। वहाँ पहुँचते ही उसे महसूस हुआ कि ऐशा की कुंवारी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। उसकी उँगलियों ने चूत के रेशमी बालों को छुआ और फिर उसके गीले होंठों को सहलाया।
“अभय… वहाँ बहुत अजीब सा महसूस हो रहा है… गुदगुदी हो रही है,” ऐशा ने अपने पैर फैलाते हुए कहा।
अभय ने अपनी एक उँगली धीरे से उसकी टाइट चूत के अंदर डाली। ऐशा का शरीर एक झटके के साथ काँप उठा। “आह! अभय… यह क्या है?”
“यह तुम्हारी चाहत है ऐशा। तुम बहुत गीली हो चुकी हो,” अभय ने उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया। वह उसकी ‘क्लिट’ (clit) को अपने अंगूठे से रगड़ रहा था। ऐशा अब पूरी तरह से बेकाबू हो रही थी। उसके हाथ बेड की चादर को कसकर पकड़ चुके थे।
अभय ने ऐशा की पैंटी पूरी तरह से उतार दी। अब वह पूरी तरह नग्न थी। अभय ने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और अपना चेहरा उसकी चूत के पास ले गया। ऐशा की चूत गुलाबी, साफ और बेहद टाइट दिख रही थी।
अभय ने अपनी जीभ निकाली और उसकी चूत के ऊपरी हिस्से को चाटना शुरू किया। ऐशा ने कभी ऐसा कुछ महसूस नहीं किया था। उसे लगा जैसे उसके शरीर में बिजली के झटके लग रहे हों।
“अभय! तुम क्या कर रहे हो? आह… मत रुको… प्लीज!” ऐशा चिल्लाई।
अभय ने अपनी जीभ उसकी चूत के छेद के अंदर डाली और उसे गोल-गोल घुमाने लगा। वह उसके काम-रस को बड़े चाव से चाट रहा था। ऐशा का सिर बेड पर इधर-उधर हिल रहा था। उसकी सिसकियाँ अब चीखों में बदल रही थीं।
अचानक ऐशा का पूरा शरीर अकड़ गया। उसकी चूत की दीवारें अभय की जीभ को जकड़ने लगीं। “अभय… मैं… मैं आ रही हूँ! आह!” वह अपने पहले ऑर्गेज्म तक पहुँच गई थी। उसकी चूत से रस का फव्वारा छूटा जिसे अभय ने पूरा पी लिया।
अब ऐशा की बारी थी। अभय ने उसे अपने ऊपर बैठने को कहा। ऐशा ने शर्माते हुए अभय के लंड को अपने हाथ में लिया। वह गर्म और लोहे जैसा सख्त था। उसने धीरे से अपना मुँह खोला और उसके ऊपरी हिस्से को चूसना शुरू किया।
“आह… ऐशा… तुम बहुत अच्छा कर रही हो,” अभय ने उसके बालों को पकड़ते हुए कहा। ऐशा ने धीरे-धीरे उसे पूरा मुँह में लेने की कोशिश की। अभय को उसके मुँह की गर्मी पागल कर रही थी।
अब वह वक्त आ गया था जिसका दोनों को इंतजार था। अभय ने एक कंडोम निकाला और उसे पहना। उसने ऐशा को सीधा लेटाया और उसके पैरों को फैलाकर उनके बीच आ गया।
“ऐशा, थोड़ा दर्द होगा, लेकिन फिर बहुत मजा आएगा। बस गहरी साँस लो,” अभय ने प्यार से कहा।
उसने अपने लंड की नोक को ऐशा की टाइट चूत के मुहाने पर रखा। जैसे ही उसने थोड़ा दबाव डाला, ऐशा के चेहरे पर दर्द की लकीरें उभर आईं। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि अभय का आधा लंड भी अंदर नहीं जा पा रहा था।
“अभय… रुक जाओ… बहुत दर्द हो रहा है,” ऐशा की आँखों में हल्के आँसू आ गए।
अभय ने उसे चूमना शुरू किया और उसके स्तनों को सहलाने लगा ताकि उसका ध्यान भटके। जैसे ही ऐशा थोड़ी रिलैक्स हुई, अभय ने एक जोरदार धक्का दिया।
“आहहहहह!” ऐशा की एक तेज चीख पूरे कमरे में गूँज गई।
अभय का पूरा 7 इंच का मोटा लंड ऐशा की वर्जिन चूत को चीरते हुए अंदर समा गया था। बेड की सफेद चादर पर खून की कुछ बूंदें नजर आने लगीं। ऐशा ने अभय के कंधों पर अपने नाखून गड़ा दिए। अभय कुछ देर के लिए रुक गया ताकि ऐशा उस भारीपन और दर्द को बर्दाश्त कर सके।
“तुम ठीक हो?” अभय ने उसके माथे को चूमा।
ऐशा ने धीरे से सिर हिलाया। “हाँ… अब ठीक है। बस… थोड़ा अजीब लग रहा है।”
अभय ने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। ‘मिशनरी’ पोजीशन में वह छोटे-छोटे थ्रस्ट (thrusts) दे रहा था। धीरे-धीरे ऐशा का दर्द कम होने लगा और उसकी जगह एक मीठी सी खुजली और मजे ने ले ली।
“अभय… और… और तेज करो,” ऐशा ने फुसफुसाया।
अभय ने रफ्तार बढ़ाई। उसके थ्रस्ट अब गहरे और ताकतवर थे। कमरे में उनके शरीर के टकराने की ‘चप-चप’ की आवाज गूँजने लगी। ऐशा के चूचे ऊपर-नीचे उछल रहे थे। अभय ने उन्हें अपने हाथों में भरकर जोर-जोर से दबाना शुरू किया।
जैसे-जैसे रात बीत रही थी, उनकी भूख बढ़ती जा रही थी। अभय ने ऐशा को घुमाया और ‘डॉगी स्टाइल में आने को कहा। ऐशा अपने घुटनों और हाथों के बल आ गई। उसका सुडौल पिछवाड़ाअब अभय के सामने था।
अभय ने पीछे से अपना लंड फिर से उसकी चूत में उतारा। इस पोजीशन में लंड और भी गहराई तक जा रहा था। अभय ने ऐशा की कमर पकड़ी और जंगली तरीके से उसे चोदना शुरू किया।
“ओह गॉड! अभय… तुम मुझे मार डालोगे… आह! बहुत गहरा जा रहा है!” ऐशा चिल्ला रही थी।
अभय ने उसके बालों को पीछे से पकड़ा और उसके बट पर एक हल्का थप्पड़ मारा। ऐशा उत्तेजना से काँप उठी। वह हर धक्के के साथ आगे की ओर झुक जाती। अभय के अंडकोष (balls) ऐशा की जांघों से टकरा रहे थे।
इसके बाद अभय ने ऐशा को अपने ऊपर बैठने को कहा। ‘काउगर्ल’ पोजीशन में ऐशा अब कंट्रोल में थी। वह अभय के लंड पर ऊपर-नीचे उछल रही थी। उसके चूचे अभय के मुँह के पास थे, जिन्हें वह बारी-बारी से चूस रहा था।
“अभय… मैं फिर से… आ रही हूँ!” ऐशा की आवाज लड़खड़ा रही थी। उसकी चूत की मांसपेशियाँ अभय के लंड को बुरी तरह निचोड़ रही थीं।
अभय भी अब अपने अंत के करीब था। उसने ऐशा को बेड के किनारे पर खड़ा किया और उसकी एक टांग अपने कंधे पर रखकर उसे आखिरी बार जोर-जोर से चोदना शुरू किया। यह सबसे इंटेंस पल था।
“ऐशा… मैं छोड़ रहा हूँ!” अभय ने चिल्लाते हुए कंडोम के अंदर ही अपना सारा वीर्य निकाल दिया। उसी पल ऐशा भी जोर से झड़ी और अभय के गले लग गई।
दोनों पसीने से लथपथ बेड पर गिर पड़े। कमरे की हवा में सेक्स की महक और उनकी भारी साँसों की आवाज थी। अभय ने चादर उठाई और दोनों को ढँक लिया। ऐशा ने अपना सिर अभय की चौड़ी छाती पर रख दिया।
“शुक्रिया अभय… यह मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात थी,” ऐशा ने मुस्कुराते हुए कहा।
अभय ने उसके बालों को सहलाया और कहा, “यह तो बस शुरुआत है ऐशा। अब तुम मेरी हो, पूरी तरह से।”
अगली सुबह जब सूरज की पहली किरण कमरे में आई, तो ऐशा की आँखों में एक नई चमक थी। वह अब एक लड़की नहीं, बल्कि एक औरत बन चुकी थी। बेड की चादर पर पड़े खून के दाग उनकी उस जंगली और प्यार भरी रात की गवाही दे रहे थे।