राहुल की शादी उसकी सपनों की राजकुमारी सलोनी से हुई। पूरे घर में खुशी की लहर दौड़ रही थी।
राहुल का चेहरा चमक रहा था। वह बार-बार सोचता कि आज रात सलोनी पूरी तरह उसकी हो जाएगी। शादी की रस्में खत्म होते ही सब अपने-अपने कमरों में चले गए। राहुल उत्सुकता से अपने कमरे की ओर बढ़ा।
कमरे में फूलों की मादक खुशबू फैली हुई थी। बिस्तर पर लाल गुलाब बिखरे पड़े थे।
एक तरफ दूध का गिलास रखा था। राहुल ने दरवाजा बंद किया और सलोनी को खोजने लगा। वह कहीं नहीं मिली। अचानक स्टोर रूम से चूड़ियों की खनक सुनाई दी।
राहुल खिड़की के पास गया। परदे से झाँका तो उसकी साँस रुक गई। सामने सलोनी थी। उसकी पतली कमर, भारी गांड और नंगे स्तन हिल रहे थे। वह अपने ससुर रजत के ऊपर सवार होकर तेजी से उछल रही थी।
उसके गले में मंगलसूत्र और हाथों में चूड़ियाँ झनकार रही थीं। रजत की उम्र पचास-पचपन के आसपास थी। वह सलोनी की कमर पकड़कर जोर-जोर से ऊपर धक्के लगा रहा था।
सलोनी की आँखें आधी बंद थीं। उसके मुँह से निकल रही थीं—”आह्ह्ह… उफ्फ्फ… और जोर से…” रजत की मोटी लंड सलोनी की चूत में पूरी गहराई तक घुसकर बाहर आ रही थी।
हर धक्के के साथ सलोनी का शरीर काँपता। उसके स्तन रजत के मुँह के पास आकर झूलते। रजत उन्हें चूसता और काटता।
सलोनी ने रजत के बाल पकड़कर अपनी चूत और गहरी दबाई। “मुझे अपनी बहन लीना समझो… आज रात तुम मुझे लीना ही समझो…
रजत की आँखें लाल हो गईं। उसने सलोनी को पलटकर नीचे लिटा दिया और उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखकर जोर-जोर से चोदने लगा।
सलोनी की चीखें बढ़ गईं। “हाँ… हाँ… लीना की चूत को चोदो…” रजत की लंड तेजी से अंदर-बाहर हो रही थी। सलोनी की चूत से चिकनाहट की आवाजें आ रही थीं। रजत ने सलोनी के स्तनों को दोनों हाथों से दबाया और अपनी रफ्तार और बढ़ा दी।
राहुल बाहर खड़ा देखता रहा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। पर वह कुछ बोल नहीं पाया। दरवाजा बंद था। वह लौटकर अपने कमरे में चला गया।
शाम को इंस्पेक्टर गौरव का फोन आया। गौरव ने बताया कि राहुल का जुड़वां भाई मयंक था। लीना मयंक से प्यार करती थी।
मयंक ने लीना को गर्भवती कर दिया और फिर उसे छोड़ दिया। रजत ने लीना को घर से निकाल दिया था। लीना ने आत्महत्या कर ली थी।
गौरव ने आगे बताया कि सलोनी ने ही रजत को वियाग्रा का ओवरडोज दिया था। रजत को हार्ट अटैक आया और उसकी मौत हो गई। सलोनी ने रजत को लीना की याद में बहका कर मारा था।
राहुल ने सब कुछ सुना। वह मानसिक रूप से टूट गया। दस साल बीत गए। राहुल मंदिर में भिखारी की तरह रहने लगा। सलोनी भी अकेली रह गई। वह अक्सर राहुल को देखने जाती पर वह उसे पहचान नहीं पाता।
सलोनी का जीवन खाली हो चुका था। वह रात को रोती। राहुल की हालत देखकर उसका दिल फटता।
पर वह सच नहीं बता पाती थी। राहुल अभी भी सलोनी को बच्चे की तरह प्यार करता था। वह उसकी वापसी की उम्मीद में जी रहा था।
सलोनी के मन में हमेशा वही रात घूमती रहती। रजत की मोटी लंड उसकी चूत में घुसना, उसके स्तनों को चूसना, और लीना का नाम लेकर चोदना। सलोनी की चूत अभी भी गीली हो जाती जब वह उस रात को याद करती।
रजत की मौत के बाद सलोनी ने कभी किसी और को नहीं छुआ। वह राहुल के पास लौटना चाहती थी पर डरती थी। राहुल का दिमाग खराब हो चुका था। वह सलोनी को देखकर मुस्कुराता पर कुछ बोल नहीं पाता।
दस साल बाद भी सलोनी की चूत रजत की याद से गीली होती। वह रात को अकेली लेटकर अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डालती और रजत के धक्कों को याद करती। “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… और जोर से…” उसकी सिसकियाँ कमरे में गूँजती।
राहुल मंदिर में बैठा रहता। कभी-कभी सलोनी आती और उसके पैर छूती। राहुल मुस्कुराता पर कुछ नहीं बोलता। सलोनी का दिल टूट जाता।
वह सोचती कि अगर उस रात वह राहुल के पास होती तो शायद सब कुछ अलग होता।
सलोनी की गांड अभी भी भारी थी। उसके स्तन अभी भी बड़े थे। पर वह किसी को नहीं छूने देती थी। वह राहुल की वापसी की प्रार्थना करती। पर राहुल का दिमाग खराब था। वह सलोनी को पहचानता ही नहीं था।
रजत की मौत के बाद सलोनी ने कई बार सोचा कि वह भी मर जाए। पर राहुल की हालत देखकर वह रुक जाती। वह सोचती कि अगर वह मर गई तो राहुल अकेला रह जाएगा।
राहुल मंदिर में भिखारी की तरह बैठा रहता। कभी-कभी वह सलोनी का नाम लेता। सलोनी दूर से देखती और रोती। दस साल बीत गए पर न राहुल ठीक हुआ न सलोनी अपने दर्द से बाहर आई।
सलोनी की चूत अभी भी रजत की याद से गीली होती। वह रात को अकेली लेटकर अपनी उंगलियाँ डालती और रजत के धक्कों को याद करती। “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… और जोर से…” उसकी सिसकियाँ कमरे में गूँजती।
राहुल मंदिर में बैठा रहता। कभी-कभी सलोनी आती और उसके पैर छूती। राहुल मुस्कुराता पर कुछ नहीं बोलता। सलोनी का दिल टूट जाता।
दस साल बाद भी सलोनी की चूत रजत की याद से गीली होती। वह रात को अकेली लेटकर अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डालती और रजत के धक्कों को याद करती।
राहुल मंदिर में भिखारी की तरह बैठा रहता। कभी-कभी वह सलोनी का नाम लेता। सलोनी दूर से देखती और रोती।
सलोनी की गांड अभी भी भारी थी। उसके स्तन अभी भी बड़े थे। पर वह किसी को नहीं छूने देती थी। वह राहुल की वापसी की प्रार्थना करती।
रजत की मौत के बाद सलोनी ने कई बार सोचा कि वह भी मर जाए। पर राहुल की हालत देखकर वह रुक जाती।
राहुल मंदिर में भिखारी की तरह बैठा रहता। कभी-कभी वह सलोनी का नाम लेता। सलोनी दूर से देखती और रोती।
सलोनी की चूत अभी भी रजत की याद से गीली होती। वह रात को अकेली लेटकर अपनी उंगलियाँ डालती और रजत के धक्कों को याद करती।
राहुल मंदिर में बैठा रहता। कभी-कभी सलोनी आती और उसके पैर छूती। राहुल मुस्कुराता पर कुछ नहीं बोलता।
दस साल बीत गए पर न राहुल ठीक हुआ न सलोनी अपने दर्द से बाहर आई।
सलोनी की चूत अभी भी रजत की याद से गीली होती। वह रात को अकेली लेटकर अपनी उंगलियाँ डालती और रजत के धक्कों को याद करती।
राहुल मंदिर में भिखारी की तरह बैठा रहता। कभी-कभी वह सलोनी का नाम लेता। सलोनी दूर से देखती और रोती।
सलोनी की गांड अभी भी भारी थी। उसके स्तन अभी भी बड़े थे। पर वह किसी को नहीं छूने देती थी।
रजत की मौत के बाद सलोनी ने कई बार सोचा कि वह भी मर जाए। पर राहुल की हालत देखकर वह रुक जाती।
राहुल मंदिर में भिखारी की तरह बैठा रहता। कभी-कभी वह सलोनी का नाम लेता। सलोनी दूर से देखती और रोती।
सलोनी की चूत अभी भी रजत की याद से गीली होती। वह रात को अकेली लेटकर अपनी उंगलियाँ डालती और रजत के धक्कों को याद करती।
राहुल मंदिर में बैठा रहता। कभी-कभी सलोनी आती और उसके पैर छूती। राहुल मुस्कुराता पर कुछ नहीं बोलता।
दस साल बीत गए पर न राहुल ठीक हुआ न सलोनी अपने दर्द से बाहर आई।