मेरा नाम मानव है। मैं एक इंजीनियरिंग कॉलेज का स्टूडेंट हूँ। मेरी उम्र 22 साल है। आज मैं आपको अपनी कहानी सुनाता हूँ जो मेरे कॉलेज की लैब और ऑफिस में घटी।
कॉलेज की पहली सेमेस्टर में ही मेरी नजर गार्गी पर पड़ी। गार्गी मेरी क्लासमेट थी। उसकी उम्र भी 21 साल थी। गार्गी की कद-काठी बहुत ही आकर्षक थी। उसकी गोरी चमड़ी, बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और गोल-गोल नितंब देखकर कोई भी लड़का दीवाना हो जाए।
हम दोनों की केमिस्ट्री लैब में एक साथ बैच था। एक दिन लैब में सिर्फ हम दोनों रह गए थे। सर ने हमें कुछ एक्सपेरिमेंट करने के लिए कहा था।
“मानव, ये केमिकल्स को मिला दो,” गार्गी ने कहा।
जब मैं केमिकल्स मिला रहा था, गार्गी मेरे पास आकर खड़ी हो गई। उसकी सांस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी। अचानक उसके हाथ मेरे हाथ से टकराए।
“ओह सॉरी,” गार्गी ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैंने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में कुछ अलग सी चमक थी। मैंने साहस करके उसके हाथ को पकड़ लिया।
“गार्गी, तुम बहुत सुंदर हो,” मैंने कहा।
“तुम भी तो कम नहीं हो,” गार्गी ने जवाब दिया।
हम दोनों एक दूसरे को देखते रहे। फिर अचानक गार्गी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। हम दोनों गहरा किस करने लगे।
मैंने गार्गी को अपनी बाहों में भर लिया। मेरे हाथ उसके स्तनों पर घूमने लगे। गार्गी की साँस तेज हो गई।
“यहाँ कोई आ जाएगा,” गार्गी ने फुसफुसाते हुए कहा।
“कोई नहीं आएगा, सब चले गए हैं,” मैंने जवाब दिया।
मैंने गार्गी की टी-शर्ट ऊपर उठाई। उसके काले ब्रा में बंद स्तन मेरी आँखों के सामने थे। मैंने ब्रा का हुक खोला और उसके स्तन आजाद कर दिए।
गार्गी के स्तन बड़े और गोले थे। उनके निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन को मुंह में लिया और चूसने लगा।
“आह… मानव…” गार्गी कराह उठी।
मेरी जीभ उसके निप्पल पर घूम रही थी। मैं दूसरे स्तन को हाथ से दबा रहा था। गार्गी के हाथ मेरे बालों में उलझ गए।
मैंने गार्गी की जींस का बटन खोला। जींस को नीचे उतारते ही उसकी काली पैंटी दिखाई दी। पैंटी के बीच में एक गीला धब्बा बन चुका था।
“तुम बहुत गीली हो चुकी हो,” मैंने कहा।
“तुम्हारी वजह से,” गार्गी ने शरारत भरी मुस्कान के साथ जवाब दिया।
मैंने गार्गी की पैंटी भी उतार दी। अब वह पूरी तरह नंगी मेरे सामने खड़ी थी। उसकी चिकनी गोरी त्वचा, गोल नितंब और चिकनी चूत देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया।
गार्गी ने मेरी पैंट का जिप खोला। मेरे अंडरवियर के अंदर मेरा लंड तना हुआ था। गार्गी ने अंडरवियर भी उतार दिया।
“वाह, कितना बड़ा है,” गार्गी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर कहा।
गार्गी घुटनों के बल बैठ गई। उसने मेरे लंड को मुंह में लिया। उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी।
“हम्म…” मैं कराह उठा।
गार्गी मेरे लंड को चूस रही थी। उसका मुंह ऊपर-नीचे हो रहा था। मेरे हाथ उसके बालों में थे।
“गार्गी, अब रुक जा,” मैंने कहा।
मैंने गार्गी को उठाया और लैब की टेबल पर लिटा दिया। गार्गी की टांगें फैल गईं। उसकी गुलाबी चूत मेरी आँखों के सामने थी।
मैंने गार्गी की चूत चाटनी शुरू कर दी। मेरी जीभ उसके क्लिटोरिस पर घूम रही थी। गार्गी के शरीर में झटके लग रहे थे।
“मानव… और… और…” गार्गी चीख रही थी।
गार्गी का रस मेरी जीभ पर आ रहा था। मैं उसका स्वाद ले रहा था।
“अब डालो,” गार्गी ने कहा।
मैंने अपना लंड गार्गी की चूत पर रखा। एक जोर का धक्का मारा और मेरा लंड गार्गी की चूत में घुस गया।
“आह…” दोनों एक साथ चीख उठे।
मैं गार्गी को जोर-जोर से चोदने लगा। लैब की टेबल हिल रही थी। गार्गी के स्तन उछल रहे थे।
“हाँ… और जोर से…” गार्गी चीख रही थी।
मैं गार्गी की टांगें अपने कंधों पर रखकर और गहराई से चोद रहा था। गार्गी का शरीर पसीने से तर हो गया था।
“मैं झड़ने वाली हूँ,” गार्गी ने कहा।
गार्गी का शरीर काँपने लगा। उसकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी। गार्गी जोर से चीखी और झड़ गई।
मैंने भी अपना बीज गार्गी की चूत में छोड़ दिया।
हम दोनों थककर लैब की टेबल पर लेट गए।
“ये बहुत अच्छा था,” गार्गी ने कहा।
“हाँ, बहुत,” मैंने जवाब दिया।
हम दोनों ने कपड़े पहने और कॉलेज से निकल गए।