मजदूर ने सेक्सी चुत की चुदाई

(Laborer Ne Ki Sexy Chut Ki Chudai)

मैं मुंबई में अपने माता-पिता के साथ रहने वाली एक सेक्सी लड़की हूं। मेरा नाम रिया है, और मैं हमेशा से ही एक निम्फोमेनियक रही हूं। मेरी उम्र 22 साल है, और मैं कॉलेज में पढ़ाई कर रही हूं।

अब तक मैंने चार बॉयफ्रेंड्स के साथ सेक्स किया है, लेकिन हर बार मुझे निराशा ही मिली। उनके लंड छोटे-छोटे थे, जैसे कोई उंगली हो। वे मेरी चूत को कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाते थे।

मैं हमेशा सोचती रहती हूं कि एक ऐसा लंड चाहिए जो मेरी चूत को फाड़ दे, जो मुझे चीखने पर मजबूर कर दे।

एक दिन, मैंने ऑनलाइन एक बड़ा रबर का डिल्डो ऑर्डर किया। वह आया तो मैंने उसे देखा – लंबा, मोटा, जैसे कोई असली घोड़े का लंड हो। रात को कमरे में अकेली, मैंने अपनी साड़ी उतारी, बेड पर लेट गई और उसे अपनी चूत पर रगड़ने लगी।

पानी बहने लगा, लेकिन जब मैंने उसे अंदर डालने की कोशिश की, तो लगा जैसे चूत फट जाएगी। दर्द हुआ, लेकिन मजा भी आया। मैंने उसे बाहर निकाल लिया और उंगली से अपनी चूत को सहलाया, कल्पना करते हुए कि कोई मजबूत आदमी मुझे चोद रहा है।

अगस्त का महीना था। त्योहारों से पहले घर को पेंटिंग करवानी थी। माता-पिता रिश्तेदार की शादी में जा रहे थे, लेकिन मैं परीक्षा की तैयारी के कारण घर पर ही रुक गई। रविवार था। सुबह वे निकल गए। घर खाली था।

मैंने कमरे में जाकर एक ब्लू फिल्म चालू कर दी। स्क्रीन पर एक लड़की को एक आदमी चोदते हुए दिखाया जा रहा था। मैंने डिल्डो निकाला और अपनी चूत पर रगड़ने लगी। मेरी सांसें तेज हो गईं। चूत गीली हो गई, लेकिन फिर वही समस्या – अंदर नहीं जा रहा था।

दो घंटे बाद डोरबेल बजी। मैंने जल्दी से डिल्डो छिपाया, अपनी कुर्ती ठीक की – ब्रा नहीं पहनी थी, तो चूचियां हिल रही थीं। दरवाजा खोला तो बाहर एक पेंटर खड़ा था। वह लंबा, चौड़ा, गंदा दिखने वाला 38 साल का आदमी था।

उसकी कमीज पर पेंट के दाग थे, पैंट गंदी। वह मुझे देखकर ठहर गया। मेरी चूचियां कुर्ती के नीचे से झलक रही थीं। मैंने कहा, ‘क्या है? पापा-मम्मी घर पर नहीं हैं। कल आना।’

वह बोला, ‘मैडम, कल तो मेरा दूसरा काम है। आज ही खत्म कर दूंगा। बाहर का कमरा पेंट करना है।’

मैंने सोचा, घर अकेला है, क्या फर्क पड़ता है। फिर उसकी क्रॉच की तरफ नजर गई। वहां कुछ उभार दिखा। मन में गंदी बातें घूमने लगीं। मैंने कहा, ‘ठीक है, अंदर आ जाओ।’ वह अंदर आया।

मैं कमरे में चली गई और फिर से फिल्म चालू कर दी। वॉल्यूम हाई कर दिया। वह बाहर पेंटिंग करने लगा।

फिल्म में कंडोम का ऐड आया, सनी लियोन की। आवाज बाहर तक जा रही थी। अचानक ब्रश गिरने की आवाज आई। वह कमरे में घुस आया। टीवी पर देखा तो फिल्म फिर शुरू हो गई – किसिंग, चुदाई के सीन।

उसका लंड खड़ा हो गया। पैंट में साफ दिख रहा था – बड़ा, मोटा। मेरी क्रेविंग पूरी हो गई। लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा। बस देखती रही।

मेरा मन उत्तेजित हो गया। चूत में खुजली होने लगी। मैंने चैट शुरू की। ‘भैया, पेंटिंग का रेट क्या है?’

वह बोला, ‘दस रुपये प्रति फुट, मैडम।’

‘अन्य काम भी करते हो?’

वह मुस्कुराया, अपना लंड सहलाने लगा। ‘हां, कोई भी हार्ड लेबर। सब कर सकता हूं।’

मैं उसके खड़े लंड को घूरने लगी। ‘हार्ड वर्क लगता है।’

‘हां, लेकिन मजा आता है।’

मैं सीधे बोली, ‘मेरी चूत चोदोगे?’

वह पागल हो गया। ब्रश गिरा दिया। मेरे पास आया और भूखे भेड़िए की तरह किस करने लगा। उसके होंठ मेरे होंठों पर चिपक गए। जीभ अंदर डाल दी। मैं भी जवाब में किस करने लगी। मेरी चूत भीग गई।

मैंने उसकी टी-शर्ट उतारी। वह मस्कुलर था। फिर उसने मेरी कुर्ती खींच ली। ब्रा नहीं थी, चूचियां बाहर आ गईं। वह उन्हें पकड़ लिया, जोर से निचोड़ने लगा, जैसे उखाड़ना चाहता हो। दर्द हुआ, लेकिन उत्तेजना भी।

मैंने रोका, ‘अरे, चूचियां सहलाओ, चूसो। हलवा मत बनाओ।’

वह हंस पड़ा। ‘तुम्हारी माल जैसी चीजें पहली बार चोद रहा हूं। बटर जैसी हैं।’

मैंने कहा, ‘बाथरूम चलो। तुम्हें धोती हूं, लंड चूसूंगी। गंदा लग रहा है।’

हम बाथरूम गए। शावर ऑन किया। पानी के नीचे किस करने लगे।

वह घुटनों पर बैठा, मेरी चूचियां चूसने लगा। जोर-जोर से। मैंने उसके पैंट में हाथ डाला। लंड पकड़ा – enormous, गधे जैसा। मोटा, लंबा। ‘तुम्हारी मां को तो अफ्रीकी ने बोया होगा।’

वह हंसा। मैंने पैंट उतारी उसे पीछे धकेला। घुटनों पर बैठी, पानी से लंड धोया। फिर मुंह में लिया। डीप थ्रोट जोर से चूसा। उसके बॉल्स सहलाए। लग रहा था जैसे गर्म भुट्टा चूस रही हूं।

वह मेरे सिर को पकड़कर मुंह चोदने लगा। ‘कमाल की रंडी हो। मुंह तो चूत जैसा लग रहा। तेरी चूत फाड़ दूंगा।’

मैंने चिढ़ाया, ‘मुझे अपनी रंडी बना दो।’

वह मुझे उठाया – वह 6 फुट का, मैं 5’1″ की डॉल जैसी। मेरी चूत उसके मुंह पर रखी। चाटने लगा। जोर-जोर से स्लर्पिंग साउंड। मैं झूमने लगी। ऑर्गेज्म आ गया। वह सारा रस पी गया।

मैं फिर उत्तेजित हो गई। चेहरे पर घिसने लगी।

‘लंड डालो, प्लीज।’

वह मुझे बाहर के कमरे में ले गया। सोफे पर लिटाया। एक झटके में लंड चूत में घुसेड़ दिया। चूत फट गई। सांस रुक गई दर्द और मजा वह जोर-जोर से चोदने लगा। ‘पसंद आया?’

‘हां, रोज आना पेंटिंग के बहाने।’

‘तीन दिन तो माता-पिता गए हैं, रोज चोदूंगा।’

फिर 69 पोजिशन। मैं उसका लंड चूस रही, वह चूत चाट रहा। फिर डॉगी स्टाइल। पीछे से चोदा। दोनों साथ झड़े। गले लगे मैंने लंड साफ किया चूसकर वह चूत चाटी फिर चूचियां चूसीं, बंदर की तरह निचोड़ी ‘रसीली संतरे हैं।’

‘और जोर से निचोड़ो।’

फिर एक बार और चोदा। सो गए। जागे तो वह पेंटिंग करने लगा। जाने से पहले एक बार और चोदा।

अगले तीन दिन वही रोज चुदाई कहानी खत्म – कैसी लगी यह गंदी चुदाई?