मैं मुकेश हूं, गुजरात का रहने वाला एक 26 साल का युवक। मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं। हमारा परिवार मध्यमवर्गीय है। पिता की मृत्यु के बाद घर की जिम्मेदारी मां पर आ गई।
मेरी बड़ी बहन की शादी को एक साल हो चुका था, लेकिन अब वह घर लौट आई है। उसकी जिंदगी में एक बड़ा संकट आ गया है। वह बहुत परेशान लग रही थी। उसकी शादीशुदा जिंदगी अब बर्बाद हो चुकी थी।
हमारा घर छोटा सा है, लेकिन प्यार से भरा हुआ। मां विधवा हैं, उनकी उम्र करीब 48 साल है, लेकिन वह अभी भी आकर्षक लगती हैं। उनकी त्वचा गोरी है, और शरीर में मोटापा थोड़ा सा है जो उन्हें और भी कामुक बनाता है।
बहन का नाम रीता है, उम्र 28 साल। वह बेहद हॉट और सेक्सी है। उसकी ब्रा का साइज 34 है, और उसके स्तन इतने बड़े और फर्म हैं कि कोई भी देखकर मदहोश हो जाए। वह हमेशा टाइट कपड़े पहनती है जो उसके कर्व्स को हाइलाइट करते हैं।
रीता जब घर लौटी, तो उसके चेहरे पर उदासी छाई हुई थी। शाम को खाना खाने के बाद हम सब बैठे थे। मां ने पूछा, ‘बेटी, क्या हुआ? तेरी आंखें लाल क्यों हैं?’
रीता ने सिर झुका लिया और बोली, ‘मां, ससुराल वाले मुझे घर से निकाल दिया। एक साल हो गया शादी को, लेकिन मैं गर्भवती नहीं हुई। वे कहते हैं कि मैं ही दोषी हूं। लेकिन सच तो यह है कि मेरे पति की समस्या है। उनका लंड छोटा सा है, और जैसे ही डालते हैं, तुरंत झड़ जाते हैं। न तो संतुष्टि मिलती है, न ही बच्चा हो सकता है।’
मां ने सहानुभूति से उसका हाथ थामा और कहा, ‘बेटी, चिंता मत कर। सब ठीक हो जाएगा। हम तेरी मदद करेंगे।’
मैं चुपचाप सुन रहा था। रीता की बातें सुनकर मेरे मन में अजीब सी उत्तेजना हो रही थी। रात को सोते समय मैंने मां और रीता की बातें सुन लीं। वे कमरे में फुसफुसा रही थीं। मां बोली, ‘रीता, तू मुकेश से सो ले। वह तेरा भाई है, लेकिन यह परिवार का राज रहेगा।
उसके लंड का साइज बड़ा है, मोटा है। तेरे पिता से भी ज्यादा। मैंने एक बार बाथरूम की दीवार में छेद से देखा था जब वह हस्तमैथुन कर रहा था। वह तुझे गर्भवती कर देगा।’
रीता ने हिचकिचाते हुए कहा, ‘मां, यह कैसे संभव है? वह मेरा भाई है।’
मां ने समझाया, ‘बेटी, यह तो परिवार के लिए है। तेरी जिंदगी बचानी है। सोच ले।’
रीता ने कुछ देर सोचा और फिर सहमति दे दी। ‘ठीक है मां, लेकिन मुकेश को कैसे मनाऊंगी?’
मां बोली, ‘मैं खुद बता दूंगी। कल सुबह मैं दो दिन के लिए चली जाऊंगी। तुम दोनों को अकेला समय मिलेगा।’
अगली सुबह मां ने मुझे बुलाया। ‘बेटा, सुन। तेरी बहन को बच्चा चाहिए। तेरे जीजा की समस्या है। तू उसकी मदद कर। उसके साथ सो जा।’
मैं हैरान हो गया, लेकिन मन में खुशी की लहर दौड़ गई। ‘मां, सच में?’
मां ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘हां बेटा। यह हमारा राज रहेगा। मैं जा रही हूं। घर संभाल लेना।’
मां चली गईं। घर में सिर्फ मैं और रीता थे। रीता ने टाइट जींस और टी-शर्ट पहनी हुई थी। टी-शर्ट इतनी पतली थी कि उसकी ब्रा साफ दिख रही थी। उसके बड़े स्तन उभरे हुए थे। मैं उसे देखकर उत्तेजित हो गया। लंड खड़ा होने लगा।
दोपहर को खाना बनाते समय रीता ने मुझसे बात की। ‘भाई, तू गर्लफ्रेंड रखता है क्या?’
मैंने हंसते हुए कहा, ‘नहीं दीदी। तू बता, तेरी शादी से पहले कोई बॉयफ्रेंड था?’
रीता ने शरमाते हुए कहा, ‘हां भाई, एक था। लेकिन शादी के बाद सब भूल गई। लेकिन अब… जीजा का लंड इतना छोटा है। जैसे ही डालते हैं, झड़ जाते हैं। न चुदाई का मजा, न बच्चा।’
वह रोने लगी। मैंने उसे गले लगा लिया। उसके स्तन मेरी छाती से दब गए। मैं महसूस कर रहा था उनकी नरमी। मेरा लंड और सख्त हो गया। रीता ने मेरी कमर में हाथ डाल लिया और बोली, ‘भाई, तू मुझे संतुष्ट कर दे। जो तरीका हो, वैसा कर।’
मैंने उसे उठाया और बेडरूम में ले गया। वहां मैंने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी। मेरा लंड बाहर आ गया, जो 8 इंच लंबा और मोटा था। रीता ने आंखें फाड़ लीं। ‘भाई, इतना बड़ा!’
मैंने कहा, ‘हां दीदी। अब तू भी उतार।’
रीता ने धीरे-धीरे टी-शर्ट उतारी। उसकी काली ब्रा में स्तन उभरे हुए। फिर जींस उतारी, काली पैंटी में उसकी गांड गोल थी। मैंने ब्रा खोली। उसके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने पैंटी भी उतार दी। उसकी चूत साफ शेव्ड थी, गुलाबी होंठ।
मैंने उसके स्तनों को दबाया। वे इतने फर्म थे। मैंने निप्पल चूसे। रीता सिसकारी भरने लगी। ‘आह भाई, कितना अच्छा लग रहा है।’
वह मेरे लंड को पकड़कर सहलाने लगी। फिर मुंह में ले लिया। चूसने लगी। ‘मम्म… इतना स्वादिष्ट। साल भर की भूख मिट रही है।’
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसके पैर फैलाए। चूत पर जीभ फेरी। वह गीली हो गई। फिर धीरे से लंड का सिरा चूत पर रखा। रीता बोली, ‘भाई, धीरे। दर्द होगा।’
मैंने धीरे से दबाया। चूत टाइट थी। खून निकल आया। रीता चीखी, ‘आह! दर्द हो रहा है।’
मैंने उसके स्तन चूसे ताकि वह रिलैक्स हो। चूत गीली हो गई। अब पूरा लंड अंदर चला गया। मैंने धीरे-धीरे ठोकना शुरू किया। रीता ने चादर पकड़ ली। ‘उफ्फ… भाई, कितना मजा आ रहा है।’
20 मिनट तक मैंने लंबे-लंबे धक्के दिए। रीता दो बार झड़ी। आखिर में मैंने चूत में ही झड़ दिया। गर्म वीर्य भर दिया। रीता बोली, ‘भाई, मैं दो बार orgasmed। अब बच्चा होगा।’
उस दिन हमने तीन बार चुदाई की। दोपहर में एक बार, शाम को एक बार। रात को चार बार। हर बार अलग पोजिशन। कभी मिशनरी, कभी डॉगी स्टाइल। रीता की चूत ढीली हो गई थी। वह चिल्ला रही थी, ‘चोद मुझे भाई, जोर से।’
पहली रात: हम बिस्तर पर लेटे थे। रीता ने मेरे लंड को फिर से चूसा। फिर वह ऊपर बैठ गई। काउगर्ल पोजिशन में उछलने लगी। उसके स्तन लहरा रहे थे। मैंने नीचे से ठोके। वह बोली, ‘आह… तेरी चुदाई से जीजा की याद नहीं आती।’
दूसरी बार रात को डॉगी में। मैंने उसकी गांड पकड़ी और जोर-जोर से मारा। चूत से आवाज आ रही थी। ‘पच पच’। रीता चीखी, ‘हां भाई, गांड मार।’
दूसरे दिन सुबह उठते ही चुदाई। मैंने उसे किचन में झुकाया और पीछे से डाला। रीता रोटी बेल रही थी, लेकिन अब सिसकार रही थी। ‘भाई, यहां?’
मैंने कहा, ‘हां दीदी, कहीं भी।’
दोपहर में बाथरूम में। नहाते हुए मैंने उसके बाल पकड़े और मुंह में लंड डाला। फिर चूत में। पानी गिर रहा था, हम भीग चुके थे। रीता बोली, ‘भाई, तू जानवर है। इतनी ताकत।’
शाम को लिविंग रूम में सोफे पर। रीता ने मेरी गोद में बैठकर चुदाई की। उसके होंठ चूसे। जीभ लड़ाई।
दोनों दिन हमने खूब चुदाई की। रीता की चूत हमेशा गीली रहती। वह मेरे वीर्य को अंदर रखती।
मां लौटीं। शाम को खाना खाया। रीता थकी हुई लग रही थी। मैंने कहा, ‘दीदी, आज रात फिर?’
रीता बोली, ‘नहीं भाई, अब बस।’
रात को मैंने सुना मां रीता से बात कर रही थी। मां बोली, ‘बेटी, काम हो गया? मुकेश ने अच्छा किया न?’
रीता ने कहा, ‘हां मां, वह तो जानवर है। दो दिन में सात बार चोदा। चूत दुख रही है।’
मां बोली, ‘अच्छा। अब मेरी बारी। पापा के बाद किसी ने नहीं छुआ। तू बेटा, मुकेश को बोल।’
रीता बोली, ‘ठीक है मां।’
रीता ने मुझे जगाया। ‘भाई, उठ। मां भी चाहती हैं।’
मैंने नाटक किया, ‘क्या?’
रीता बोली, ‘हां। चल।’
मां के कमरे में गए। मां बिस्तर पर बैठी थीं। साड़ी में। मैंने रीता को गले लगाया। उसके स्तनों को दबाया। मां देख रही थीं। उनकी सांस तेज हो गई।
मैंने रीता की साड़ी उतारी। ब्रा-पैंटी में। फिर मां की। मां की चूत बालों वाली थी, लेकिन गीली। मैंने मां के स्तनों को दबाया। वे थोड़े लटकते थे, लेकिन बड़े। निप्पल चूसे। मां बोली, ‘बेटा, आह… कितने साल बाद।’
रीता ने मेरा लंड चूसा। मां भी झुककर चूसीं। दोनों की जीभ लंड पर फिर मैंने मां को लिटाया। चूत में लंड डाला। मां चीखीं, ‘आह! मोटा है।’
मैंने जोर-जोर से ठोके। पाउंडिंग स्टाइल। मां की गांड ताली बजा रही थी। रीता स्तन चूस रही थी। मां झड़ीं। ‘बेटा, झड़ रहा हूं मैं।’
नहीं, मां बोलीं, ‘झड़ गई मैं।’
फिर मैंने रीता को भी चोदा। तीनों साथ। मां ऊपर, रीता नीचे।
उसके बाद घर में आजादी। एक महीने तक मैं रीता को रोज चोदता। डॉगी में, मिशनरी में। आखिरकार वह गर्भवती हो गई। ससुराल चली गई।
अब मां को रोज चोदता हूं।