पड़ोसी आंटी की नशे में चुदाई

(Padosi Aunty Ki Nashe Main Chudai)

राज एक 25 साल का जवान लड़का था जो अपने छोटे से अपार्टमेंट में अकेला रहता था। उसके पड़ोस में सुनीता आंटी रहती थीं जो 38 साल की एक हसीन औरत थीं। सुनीता आंटी का पति बाहर नौकरी करता था और महीनों से घर नहीं आया था।

वह अकेली रहतीं और अपना जन्मदिन मनाने की कोई योजना नहीं थी। राज को सुनीता आंटी की खूबसूरती हमेशा से लुभाती थी। उनकी गोरी त्वचा लंबे काले बाल और भरी हुई चूचियां उन्हें किसी फिल्म स्टार जैसी बनाती थीं।

राज ने सोचा कि आज सुनीता आंटी का जन्मदिन है तो क्यों न कुछ खास किया जाए।

राज ने फ्रिज से दो ठंडी बीयर की बोतलें निकालीं और अपनी अलमारी से कुछ नीली गोलियां लीं जो उसे दोस्त से मिली थीं। ये गोलियां कामोत्तेजक थीं जो किसी को भी उत्तेजित कर सकती थीं। वह मुस्कुराया और सोचा आज रात मजा आएगा। शाम को वह सुनीता आंटी के दरवाजे पर गया और दस्तक दी।

सुनीता आंटी ने दरवाजा खोला। वह एक साड़ी में थी जो उनके कर्व्स को हाइलाइट कर रही थी। “क्या बात है राज बेटा?” उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा।

“आंटी आज आपका जन्मदिन है ना? मैंने सोचा बीयर लेकर आऊं। साथ में कुछ स्नैक्स भी हैं। अकेले मत मनाइएगा।” राज ने बोतलें दिखाते हुए कहा।

सुनीता आंटी थोड़ा हिचकिचाईं लेकिन फिर मुस्कुराईं। “अच्छा बेटा आ जाओ। सच में कोई नहीं आया आज।” वे अंदर चली गईं और राज को सोफे पर बिठाया।

राज ने बीयर की बोतलें खोलीं। उसने चुपके से गोलियां पीसकर एक बोतल में मिला दीं। “आंटी पहले आप पिएं। जन्मदिन मुबारक हो।” वह बोतल आगे बढ़ाया।

सुनीता आंटी ने घूंट लिया। “वाह ठंडी है। ताजगी आ गई।” वे बोलीं और फिर दूसरा घूंट लिया। राज भी पीने लगा लेकिन उसकी बोतल में कुछ नहीं था।

दोनों बातें करने लगे। सुनीता आंटी ने बताया कि उनका पति कब का आया है। “बेटा अकेलेपन से तंग आ गई हूं।” वे उदास हो गईं।

राज ने कंधा झुकाकर कहा “आंटी आप इतनी खूबसूरत हो। कोई भी आपको अकेला नहीं छोड़ेगा।”

सुनीता आंटी शरमा गईं। “ऐसी बातें मत करो राज।” लेकिन उनकी आंखों में चमक आ गई। गोलियों का असर शुरू हो रहा था। उनका शरीर गर्म होने लगा।

राज ने नजदीक बैठते हुए कहा “आंटी सच कह रहा हूं। आपकी साड़ी में कमर कितनी पतली है।” उसने हाथ बढ़ाकर उनकी कमर पर रख दिया।

सुनीता आंटी चौंकीं लेकिन हटाईं नहीं। “राज क्या कर रहे हो?” उनकी आवाज कांप रही थी।

“आंटी बस आपको खुश करना चाहता हूं। जन्मदिन पर।” राज ने धीरे से साड़ी का आंचल सरकाया। सुनीता आंटी की गोरी चूचियां ब्लाउज में उभरी हुई दिखीं।

सुनीता आंटी की सांसें तेज हो गईं। “नहीं राज यह गलत है।” लेकिन उनका शरीर राज की ओर झुक रहा था।

राज ने बीयर का एक और घूंट पिलाया। “आराम से आंटी।” फिर उसने उनके होंठों पर चुंबन कर दिया। सुनीता आंटी पहले तो रुकीं लेकिन फिर जवाब देने लगीं। उनका मुंह खुल गया और राज की जीभ अंदर चली गई।

चुंबन लंबा चला। राज ने उनके ब्लाउज के हुक खोले और चूचियां बाहर निकाल लीं। वे गोल और भरी हुई थीं। निप्पल्स सख्त हो चुके थे। राज ने एक निप्पल मुंह में लेकर चूसा। “आह राज…” सुनीता आंटी कराहीं।

राज ने दूसरी चूची को हाथ से मसला। सुनीता आंटी की साड़ी खिसक गई। उनकी पेटीकोट नीचे था। राज ने हाथ नीचे सरकाया और चूत पर रख दिया। वह गीली हो चुकी थी। “आंटी आप कितनी गर्म हो।” वह बोला।

“राज मुझे रोक लो।” सुनीता आंटी बोलीं लेकिन पैर फैला रही थीं। राज ने पेटीकोट ऊपर किया और चूत में उंगली डाल दी। “ओह… क्या कर रहे हो।” वे चीखीं।

राज ने उंगली अंदर बाहर की। सुनीता आंटी का रस बहने लगा। “आंटी आप तैयार हो।” वह खड़ा हुआ और अपना पैंट उतार दिया। उसका लंड सीधा खड़ा था। मोटा और लंबा।

सुनीता आंटी ने देखा और आंखें फाड़ लीं। “इतना बड़ा?” वे बोलीं।

“हां आंटी। आज आपका जन्मदिन है। इसे लो।” राज ने लंड उनके मुंह के पास किया। सुनीता आंटी ने हिचकिचाते हुए मुंह खोला और लंड चूसने लगीं। उनका मुंह गर्म था। राज ने सिर पकड़कर अंदर धकेला। “चूसो आंटी। अच्छे से।”

सुनीता आंटी ने जीभ घुमाई। लंड पर लार लग गई। राज मजे से कराहा। “वाह आंटी। आप तो एक्सपर्ट हो।” कुछ मिनट बाद वह पीछे हटा। “अब चूत में डालूं?”

सुनीता आंटी ने सिर हिलाया। राज ने उन्हें सोफे पर लिटाया और पैर फैलाए। चूत गीली चमक रही थी। वह लंड सिरा चूत पर रगड़ा। “डालो राज।” सुनीता आंटी बोलीं।

राज ने जोर से धक्का दिया। लंड पूरा अंदर चला गया। “आह… दर्द हो रहा है।” सुनीता आंटी चीखीं। लेकिन राज रुका नहीं। वह चोदने लगा। तेज तेज धक्के।

“आंटी आपकी चूत कितनी टाइट है।” राज बोला। सुनीता आंटी के चूचियां उछल रही थीं। “हां चोदो मुझे। तेज।” वे कराहीं।

राज ने स्पीड बढ़ाई। चूत में चाप चाप की आवाज आने लगी। सुनीता आंटी का शरीर कांपने लगा। “आ रहा है… ऑर्गेज्म।” वे चिल्लाईं और रस छोड़ दिया। राज भी झड़ने वाला था। “आंटी अंदर झड़ूं?”

“हां बेटा। भर दो।” सुनीता आंटी बोलीं। राज ने आखिरी धक्का दिया और स्पर्म चूत में डाल दिया। दोनों हांफ रहे थे।

लेकिन यह तो शुरुआत थी। राज ने उन्हें उठाया और बेडरूम ले गया। “आंटी अभी रात बाकी है।” वह बोला। सुनीता आंटी मुस्कुराईं। “हां बेटा। और चोदो मुझे।”

बेड पर राज ने उन्हें नंगा कर दिया। सुनीता आंटी की बॉडी परफेक्ट थी। गोरी त्वचा पर पसीना चमक रहा था। राज ने उनके पैर चाटे। फिर जांघों पर किस किया। चूत तक पहुंचा और जीभ डाल दी। “ओह राज… क्या कर रहे हो।” सुनीता आंटी मचलने लगीं।

राज ने चूत चाटी। क्लिटोरिस को चूसा। सुनीता आंटी फिर गीली हो गईं। “अब गांड मारूं?” राज ने पूछा।

सुनीता आंटी शर्मा गईं। “नहीं वहां दर्द होगा।”

“ट्राई करो आंटी। मजा आएगा।” राज ने लंड पर थूक लगाया और गांड के छेद पर रखा। धीरे से दबाया। सिरा अंदर गया। “आह… धीरे।” सुनीता आंटी बोलीं।

राज ने पूरा लंड गांड में डाल दिया। फिर चोदना शुरू किया। गांड टाइट थी। “वाह आंटी। कितना मजा।” वह बोला। सुनीता आंटी दर्द से कराहीं लेकिन फिर आनंद आने लगा। “हां चोदो गांड।”

राज ने तेज धक्के दिए। सुनीता आंटी की चूचियां हिल रही थीं। वह हाथ से चूत मसल रही थीं। “दोनों जगह मजा।” वे बोलीं। राज झड़ गया गांड में। स्पर्म बाहर बहने लगा।

फिर दोनों नहाने गए। बाथरूम में राज ने फिर चोदा। दीवार से सटाकर। पानी के नीचे। “आंटी आपकी बॉडी कमाल है।” वह बोला। सुनीता आंटी ने लंड पकड़कर चूसा। “तुम्हारा भी तो बड़ा है।”

रात भर वे चुदाई करते रहे। किचन में टेबल पर। बालकनी में। हर जगह। सुबह तक सुनीता आंटी थक गईं लेकिन खुश थीं। “राज धन्यवाद”

राज मुस्कुराया। “आंटी कल फिर आऊंगा।”